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KALPANA BHATT ('रौनक़')
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KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-55 (विषय: घर संसार)
"आदरणीय शहजाद उस्मानी जी ! नमस्ते| इस रचना में मुझे एक चीज खटक रही है और वो है विराम चिह्नों का प्रयोग| कुछ जगहों पर अधूरे वाक्यों के बाद ही आपने पूर्ण विराम का चिह्न लगाया है |  इस पर गुणी जन ही बता पाएंगे| सादर| "
Oct 31
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-55 (विषय: घर संसार)
"क्षेत्रीय भाषा शैली में आपकी यह लघुकथा मुझे पसंद आई आदरणीय मनन सिंह जी | इस सद्प्रयास के लिए हार्दिक बधाई|  खेस्त्रियाभाषा का प्रयोग कितना किया जा साकता है इस पर गुणी जन ही मार्गदर्शन दे पायेंगे | सादर |"
Oct 31
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-55 (विषय: घर संसार)
"सादर आभार आदरणीय आसिफ ज़ैदी जी | "
Oct 31
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-55 (विषय: घर संसार)
"नमस्ते आदरणीय शेख शहजाद उस्मानी जी | आपको इस लघुकथा की शैली बढ़िया लगी, धन्यवाद आपका| जी अवश्य आ छात्लानी जी और आ. विनय कुमार सिंह जी की बातों पर गौर करुँगी | सादर| "
Oct 31
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-55 (विषय: घर संसार)
"सादर धन्यवाद आदरणीय विनय कुमार जी | आपका सुझाव सर आँखों पर| इस रचना पर पुनः विचार करुँगी | सादर| "
Oct 31
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-55 (विषय: घर संसार)
"सादर धन्यवाद आदरणीय तेज वीर सिंह जी | "
Oct 31
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-55 (विषय: घर संसार)
"हार्दिक धन्यवाद आदरणीय चंद्रेश भैया | आपको रचना पसंद आई सार्थक हुआ यह प्रयास, जो कमियाँ रह गयी हैं उसपर पुनः काम काम करुँगी | सादर| "
Oct 31
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-55 (विषय: घर संसार)
"नया प्रयोग करने हेतु हार्दिक बधाई आदरणीय शेख शहजाद उस्मानी जी | मैं आदरणीय चंद्रेश जी की बातों से सहमत हूँ | इस सृजन हेतु हार्दिक बधाई आपको| "
Oct 31
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on प्रशांत दीक्षित 'सागर''s blog post लघुकथा-दीवाली के पटाखे
"http://www.openbooksonline.com/m/discussion?id=5170231%3ATopic%3A637805 आप लघुकथा की पाठशाला ज्वाइन कर सकते हैं जो ओबीओ में ही है वहां से भी आप सीख सकते हैं। सादर।"
Oct 31
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-55 (विषय: घर संसार)
"अब पछताए होत क्या जब चिड़ियाँ चुग गयी खेत (लघुकथा)   “तुम फिर पीकर आ गया मेन? तुम्हारी बीवी तो घर में नहीं है...” मिसेस गोंसोल्विस कह रही थी| “ओह! कि...ध...र ... ग...ई... व...ह... सा...ली...?” गोविन्द ने पूछा| “…"
Oct 30
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-55 (विषय: घर संसार)
"कुछ दिन भी एक आप्शन हो सकता है, मेरे ख्याल से| आगे गुणी जन मार्गदर्शन करेंगे ऐसा मुझको लगता है| सादर| "
Oct 30
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on प्रशांत दीक्षित 'सागर''s blog post लघुकथा-दीवाली के पटाखे
"अच्छा प्रयास हुआ है आदरणीय प्रशांत दीक्षित 'सागर' जी पर अभी लघुकथा नहीं बन पायी है | सादर| "
Oct 30
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on Sushil Sarna's blog post चंद क्षणिकाएँ :
"भावपूर्ण क्षणिकाएँ! हार्दिक बधाई आदरणीय सुनील सरना जी|"
Oct 30
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on Hariom Shrivastava's blog post कुण्डलिया छंद-
"सुंदर कुण्डलिया छंद के लिए हार्दिक बधाई आदरणीय हरिओम श्रीवस्तव जी |  //जीवनभर फरियाद, नहीं करती यह नारी।किंतु वृद्ध असहाय, वही अपनों से हारी।।//  बहुत खूब| भावपूर्ण रचना हुई है जिसके लिए पुनः बधाई \"
Oct 30
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-55 (विषय: घर संसार)
"विषय जरूर पुराना है, पर अंत में आकर एक गंभीर विसंगति पर आपने कलम चलाई है आदरणीय तेज वीर सिंह जी जिसके लिए आपको हार्दिक बधाई| "
Oct 30
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-55 (विषय: घर संसार)
"हार्दिक बधाई इस बढ़िया रचना के लिए आदरणीय अजय गुप्ता जी| आपकी शुरुवात की पंक्तियाँ /फत्ता और नफे दोनों रिक्शा चलाते हैं। अभी 10 दिन से दोनों की जान पहचान हुई है। और दोनों की ऐसी पटी कि रोज़ शाम को पव्वे का कार्यक्रम साथ ही होता है। कल शाम की मुलाकात/…"
Oct 30

Profile Information

Gender
Female
City State
BHOPAL
Native Place
MUMBAI
Profession
house wife
About me
was a teacher for about 20 Years. Recently resigned. I am M.A in English,B.Ed ,LLB.. . interested in literature

KALPANA BHATT ('रौनक़')'s Blog

एल.ओ.सी (लघुकथा)

रविवार सवेरे 7:00 बजे।
चाय की पहली चुस्की ली ही थी कि अखबार में छपे एक चित्र ने ध्यान खींच लिया। एक आँख जिसमें खुली पलकों के नीचे पुतली की बजाय सलाखें थी और उन सलाखों को एक हाथ ने थाम रखा था। कितने ही क्षण मैं हाथ में कप लिए उस चित्र को एकटक देखता रहा। इच्छाओं से जुड़े सपनों को कितनी ही बार सलाखों के पीछे बंद कर दिया जाता है।
सवेरे 9:00 बजे।
नाश्ता नहीं खा पाया, वही चित्र आँखों के सामने घूम रहा है। बचपन से नौकर-चाकरों और केअर टेकर के साथ ही रहा। डैडी  को…
Continue

Posted on April 18, 2019 at 11:22pm — 3 Comments

माँ (कविता)

माँ! तुम हो शक्ति स्वरूपा

न पाया तुमसा कोई दूजा

समय से भी तुमने की लड़ाई

हर बार समय को आँख दिखाई

नन्हीं नन्हीं क्यारियों में तुमने

प्यार-मुहब्बत के बीज जो बोये

अपने प्यार से सींचा है तुमने

घर-आँगन महकाया है तुमने

माँ तुमसा और न कोई देखा

हर दुःख को तुमने हँसते हुए फेंका

हर बार जब भी मैं घबरायी

सामने तुम ही तुम नज़र आई

कैसा डर! यह पूछा जब तुमने

नारी शक्ति से परिचय करवाया तुमने

आज जो भी कुछ है मैंने पाया

संग मेरे रहा तुम्हारा… Continue

Posted on March 12, 2019 at 9:52am — 5 Comments

फ्रोज़न माइंड ( लघुकथा)

अस्पताल में एक रूम में बैठी हुई थी। तभी एक नर्स दौड़ती हुई आई और कहने लगी, " मिस्टर सुदर्शन के साथ कौन है?"

काव्या के कान चौकन्ने हो गए, उसने उस नर्स से कहा," जी मैं हूँ। क्या बात है सिस्टर?"

"आई.सी.यू. में आपको तुरंत बुलाया है...।

नर्स की बात पूरी भी नही हुई और काव्या चीते की गति से उस ओर दौड़ पड़ी।

आई.सी. यू. का दरवाजा खोलते ही उसने कमरे में चारों तरफ नज़र घुमाई, उसके पिताजी पिछले एक माह से कोमा में थे, डॉक्टरों ने फिर भी उम्मीद नही छोड़ी थी। उसने डॉक्टर की तरफ देखते हुए पूछा,"… Continue

Posted on March 1, 2019 at 8:14pm — 6 Comments

ज़हरीली हवा (कविता)

 यह कैसी हवा ज़हरीली,

नफ़रत से भरी

विषकन्या क्या पुनः जीवित हो उठी है

आतंकी गलियारों में

वो वहाँ ख़ूनी होली खेली किसीने

संतुष्ट हुआ होगा  क्या वह

अपने कर्तव्य को पूर्ण कर

घर जाकर क्या सुकूँ से सोया होगा!

ये कैसे धर्म ?

कैसा आचरण ?

कैसी शिक्षा ?कैसा प्रण?

मृत्यु अटल सत्य है

क़त्ल-ए-आम!

यह कैसा कृत्य है?

क्या औलाद ऐसी होती है?

जो माँ की छाती छलनी करती है

और वे माताएँ जिनकी

ऐसी…

Continue

Posted on February 26, 2019 at 10:49pm — 4 Comments

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At 10:51pm on August 8, 2017, श्याम किशोर सिंह 'करीब' said…

संदेशात्मक लघुकथा। सहज चित्रण के लिए बधाई।

KALPANA BHATT

At 1:55pm on May 17, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीया कल्पना जी महीने की सक्रिय सदस्य चुने जाने पर हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर 

At 1:26pm on May 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीया 

श्रीमती कल्पना भट्ट जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 11:34am on May 15, 2016, Rahila said…
बहुत शुक्रिया आदरणीया दी! आपने मुझे दोस्ती के काबिल समझा ।
At 2:10pm on May 1, 2016, pratibha pande said…

आपकी मित्रता मेरे लिए अमूल्य है , धन्यवाद आदरणीया कल्पना जी 

 
 
 

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