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Kalipad Prasad Mandal
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Mohammed Arif commented on Kalipad Prasad Mandal's blog post ग़ज़ल -मोहनी शक्ति है’ उसमे जरा’ पर हूर नहीं- कालीपद 'प्रसाद'
"आदरणीय कालीपद प्रसाद जी आदाब,                                  शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल करें । बाक़ी गुणीजन अपनी अमूल्य राय साझा करेंगे ।"
6 hours ago
Kalipad Prasad Mandal commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post तलाक की मोहर (लघुकथा)
"बहुत सुन्दर ,अंधेरे में नई रौशनी दिखाती सुन्दर लघु कथा | बधाई कल्पना जी "
16 hours ago
Kalipad Prasad Mandal posted blog posts
16 hours ago
Kalipad Prasad Mandal commented on santosh khirwadkar's blog post धोखे ने मुझको इश्क़ में ......संतोष
"बहुत सुन्दर एहसास की बेहतरीन अभिव्यक्ति आ संतोष जी "
16 hours ago
Kalipad Prasad Mandal commented on Sushil Sarna's blog post आग ..
"आदरणीय सुशील सरना जी ,नमन , हयाते सफ़र का  बहुत सुंदर , सटीक  चित्रण किया आपने " अपने अंजाम पे पहुँच जायगा दुनियावी आग से शायद जीत भी जाए बशर मगर मरघट की आग से हार जाएगा आग से मिलकर अंज़ाम-ए-आग हो…"
16 hours ago
Kalipad Prasad Mandal commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post वैध बूचड़खाना (लघुकथा)
"आ चंद्रेश छत्लानी जी , मैं आ  मोहम्मद आरिफ  जी से पूरी तरह सहमत हूँ | गौरक्षा एक ढोंग है , स्वार्थ से प्रेरित  है | करारा तंज "
16 hours ago
Kalipad Prasad Mandal commented on Naveen Mani Tripathi's blog post है बड़ा अच्छा तरीका ज़ुल्म ढाने के लिए
"आदरणीय नवीनमणि जी  इस बेहतरीन ग़ज़ल के लिए दिली मुबारकबाद कुबूल कीजिये | बहु उम्दा "
yesterday
Kalipad Prasad Mandal commented on सतविन्द्र कुमार's blog post मोम नहीं जो दिल पत्थर है-ग़ज़ल
"आदरणीय सतविंद्र कुमार जी आदाब, बहुत उम्दा ग़ज़ल , बधाई स्वीकार करें |"
yesterday
Kalipad Prasad Mandal commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (मिलाओ किसी से नज़र धीरे धीरे )
"आदरणीय तस्दीक अहमद खान साहिब ,आदाब , बहुत उम्दा ग़ज़ल , मुबारकबाद कुबूल करे |"
yesterday
Kalipad Prasad Mandal commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़ज़ल- सर पे मेरे तभी ईनाम न था।
"आ राम अवध् जी ,नमन , बेहतरीन ग़ज़ल कहीं आपने, मुझे पसंद आया ,शिल्प के बारे में गुणी जन बताएँगे "
yesterday
Kalipad Prasad Mandal commented on Kalipad Prasad Mandal's blog post ग़ज़ल -राह सब दुर्गम, लिखाई में है’ आसानी मुझे-कालीपद 'प्रसाद'
"आदरणीय समर कबीर साहिब आदाब , वास्तव में ग़ालिब की जमीन में जो ज्यादा कठिन महसूस होती है मैं उसीपर लिखने की कोशिश करता हूँ ,ये सोचकर कि  इसपर अगर लिख लिया ,बाकी आसानी से लिख सकेंगे |यह भी भरोसा है की गलती होगी तो आप हमें उचित मार्ग दर्शन करेंगे…"
yesterday
Samar kabeer commented on Kalipad Prasad Mandal's blog post ग़ज़ल -राह सब दुर्गम, लिखाई में है’ आसानी मुझे-कालीपद 'प्रसाद'
"मतले के सानी मिसरे में 'सुख़नवारों' कोई शब्द नहीं होता,इस मिसरे को यूँ कर सकते हैं :- 'यार दुनिया-ए-सुख़न ही अब है अपनानी मुझे' 'राज़ की सब बात परदे में छुपी थी राज़दाँ थी छुपी सब किन्तु की दुशनाम उरियानी मुझे' इस शैर के…"
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Kalipad Prasad Mandal commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post असलियत (लघुकथा)
"डिजिटल पर सुन्दर कटाक्ष आ शेख उस्मानी जी "
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Kalipad Prasad Mandal commented on Manoj kumar shrivastava's blog post निःशब्द देशभक्त
"बहुत सुन्दर प्रस्तुति आ मनोज कुमार जी "
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Kalipad Prasad Mandal commented on रामबली गुप्ता's blog post कुंडलियाँ-रामबली गुप्ता
"बहुत सुन्दर कुण्डलिया , बधाई आ रामबली जी "
Saturday
Kalipad Prasad Mandal posted a blog post

ग़ज़ल -राह सब दुर्गम, लिखाई में है’ आसानी मुझे-कालीपद 'प्रसाद'- संशोधित

काफिया आनी : रदीफ़ :मुझेबह्र :२१२२ २१२२  २१२२  २१२राह सब दुर्गम, लिखाई में है’ आसानी मुझेयार दुनिया-ए-सुख़न ही अब है अपनानी मुझे' |'राज़ की हर बात पर्दे में छुपी थी राज़दाँफिर भी जाने क्यों लगी दुश्नाम उरियानी मुझे'|'मैं नहीं था जानता, ईमान क्या है देश मेंज़ीस्त ने नक़ली बनाया है बलिदानी मुझे'||अच्छा था वो शाह का शासन, मुकद्दर और थाजीस्त मेरी पलटी खाई, सख्त  हैरानी मुझे |शर्त थी मिलकर ही’ हम दोनो करेंगे काम सबलितलियों सी उड़ती, सौंपी घर की दरबानी मुझे |'प्रेयसी की बात में माना मधुरता है मगरजो भी कहती…See More
Saturday

Profile Information

Gender
Male
City State
Pune
Native Place
Pune
Profession
Retired Principal, Writer, Poet
About me
Writer of "Value Based Education" published in 2000, two kavita sangrah Published ,!. Kavya saurabh" 2. "Andhere se ujaale ki or" writer of Haiku and Tanka (Japaani vidha),Write tukant ,atukant poem , ,dohe,muktak, learning gaza writingt

ओ बी ओ तरही ....-----71

सारी सारी रात जग जिन के लिए 

पूछते वे जागरण किन के लिए |1|

चाँद तारों तो  झुले  हैं  रात में 

एक सूरज को रखा दिन के लिए |२|

आसान नहीं भूलना यूँ भूत को 

आज तक तो मोह है इन के लिए |३|

रात भर आँसू कभी थमती नहीं  

अश्रु जल यूँ लुडकते किन के लिए|४ |

वो सुखी हैं या दुखी किस को पता

फूल जंगल में खिले किन के लिए |५|

जानते थे हम जुदा होंगे कभी 

क्या जतन करते कभी इन के लिए |६|

अब इन्हें संसार में आना नहीं 

कौन रोये इस जहाँ इन के लिए |७|

वो कभी पीड़ा समझना चाहती 

क्लेश हम पीते गए जिनके लिए |८|

मौलिक और अप्रकाशित 

 

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ग़ज़ल -मोहनी शक्ति है’ उसमे जरा’ पर हूर नहीं- कालीपद 'प्रसाद'

मोहनी शक्ति है’ उसमे जरा’ पर हूर नहीं

तारिकाओं में’ वही एक ही’ मशहूर नहीं |

प्यार करता हूँ’ मैं’ पागल की’ तरह पर क्या’ करूँ

हर समय प्यार जताना उसे’ मंज़ूर नहीं |

सांसदों में अभी’ दागी हैं’ बहुत से नेता

दाग धोना बड़ा’ दू:साध्य है’, नासूर नहीं |

चाह ऐसी कि सज़ा सबको’ मिले जो दोषी

पर सज़ा सबको’ मिले ऐसा’ भी’ दस्तूर नहीं |

लोक सरकार अभी, राज है’ जनता का यह

हैं सभी स्वामी’ यहाँ ,कोई’ भी’ मजदूर नहीं…

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Posted on December 18, 2017 at 8:58am — 1 Comment

ग़ज़ल -राह सब दुर्गम, लिखाई में है’ आसानी मुझे-कालीपद 'प्रसाद'- संशोधित

काफिया आनी : रदीफ़ :मुझे

बह्र :२१२२ २१२२  २१२२  २१२

राह सब दुर्गम, लिखाई में है’ आसानी मुझे

यार दुनिया-ए-सुख़न ही अब है अपनानी मुझे' |

'राज़ की हर बात पर्दे में छुपी थी राज़दाँ

फिर भी जाने क्यों लगी दुश्नाम उरियानी मुझे'|

'मैं नहीं था जानता, ईमान क्या है देश में

ज़ीस्त ने नक़ली बनाया है बलिदानी मुझे'||

अच्छा था वो शाह का शासन, मुकद्दर और था

जीस्त मेरी पलटी खाई, सख्त  हैरानी मुझे…

Continue

Posted on December 13, 2017 at 10:30am — 4 Comments

ग़ज़ल -दिल को’ जिसने बेकरारी दी वही अहबाब था-कालीपद 'प्रसाद'

काफिया :आब ; रदीफ़ ;था

बह्र :२१२२  २१२२  २१२२  २१२

दिल को’ जिसने बेकरारी दी वही ऐराब था

जिंदगी के वो अँधेरी रात में शबताब था |

मेरे जानम प्यार का ईशान था, महताब था

चिडचिडा मैं किन्तु उसमे तो धरा का ताब था |

स्वाभिमानी मान कर खुद को, गँवाया प्यार को

सच यही, मैं प्यार में उनके सदा बेताब था |

आग को मैं था लगाता, बात छोटी या बड़ी

आग को ठंडा किया करता, निराला आब था |

शब कटी बेदारी’…

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Posted on December 8, 2017 at 3:30pm — 10 Comments

ग़ज़ल-प्रयास में असफल लोग नामुराद नहीं |-कालीपद 'प्रसाद'

काफिया : आद ,रदीफ़ : नहीं

बहर : १२१२  ११२२  १२१२  ११२ (२२)

अभी किसी को’ भी’ नेता पे’ एतिकाद नहीं

प्रयास में असफल लोग नामुराद नहीं |

किये तमाम मनोहर करार, सब गए भूल

चुनाव बाद, वचन रहनुमा को’ याद नहीं |

गरीब सब हुए’ मुहताज़, रहनुमा लखपति

कहा जनाब ने’ सिद्धांत अर्थवाद नहीं |

जिहाद हो या’ को’ई और, कत्ल धर्म के’ नाम

मतान्ध लोग समझते हैं’, उग्रवाद नहीं  |

कृषक सभी है’ दुखी दीन, गाँव…

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Posted on December 6, 2017 at 10:21am — 9 Comments

Comment Wall (8 comments)

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At 10:57pm on September 27, 2016, Samar kabeer said…
जनाब कालीपद प्रसाद जी आदाब,इस बह्र के अरकान होते हैं :-

फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलुन

आप इसलिये अटक रहे हैं कि आपने मात्रा नहीं गिराई है,मात्रा गिराकर देखेंगे तो सही नतीजे पर पहुँच जाऐंगे ।
At 11:32pm on July 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

कालीपद प्रसाद मंडल जी,

सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 7:27pm on July 8, 2016, pratibha pande said…

आपको जन्म दिन की ढेरों शुभकामनाएँ .. 

At 3:45pm on June 22, 2016, सुरेश कुमार 'कल्याण' said…
आदरणीय श्री काली प्रसाद मंडल जी आपको कविता पसंद आई हार्दिक धन्यवाद।
At 8:05pm on June 21, 2016, Sheikh Shahzad Usmani said…
सादर हार्दिक आभार अवसर प्रदान करने के लिए। सभी विधाओं सहित जापानी काव्य विधाओं में मेरे लेखन अभ्यास में आपसे भी कुछ सीखने को मिलता रहेगा।
At 11:46pm on May 21, 2016, Kalipad Prasad Mandal said…

स्वागत के लिए धन्यवाद मिथिलेश जी ! जन्म दिन की बधाई आपने दी उसे भी सधन्यवाद स्वीकार करता हूँ क्योकि जन्मदिन मेरा भाई का है मेरा नहीं | सुबह मैंने दोहा पोस्ट किया था वो मुझे कहां दिखाई देगा ?

At 11:55am on May 16, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें...

At 1:11pm on May 11, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

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