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Dr. Vijai Shanker
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Dr. Vijai Shanker commented on Dr. Vijai Shanker's blog post सब सही पर कुछ भी सही नहीं है - डॉo विजय शंकर
"आदरणीय सुरेंद्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप जी , आपकी सुखद अभिव्यक्ति के लिए आभार एवं धन्यवाद , सादर।"
19 hours ago
Dr. Vijai Shanker commented on Dr. Vijai Shanker's blog post सब सही पर कुछ भी सही नहीं है - डॉo विजय शंकर
"आदरणीय सुरेंद्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप जी , आपकी सुखद अभिव्यक्ति के लिए आभार एवं धन्यवाद , सादर।"
19 hours ago
Dr. Vijai Shanker commented on Dr. Vijai Shanker's blog post सब सही पर कुछ भी सही नहीं है - डॉo विजय शंकर
"आदरणीय सुश्री रक्षिता जी , आपके सुझाव के लिए आभार , आपने कविता को पूर्ण मनोयोग से पढ़ा इसके लिए भी मैं आपका आभारी हूँ।निवेदन है कि मैं यह संकेत देना चाहता हूँ कि ऊँट सामने है पर आप उसे दिखावे के लिए हंडिया में ढूंढते हैं , यह आपकी त्रुटि या भ्रम…"
yesterday
Rakshita Singh commented on Dr. Vijai Shanker's blog post सब सही पर कुछ भी सही नहीं है - डॉo विजय शंकर
"आदरणीय विजय जी नमस्कार बहुत सुन्दर रचना, परन्तु  अन्तिम पंक्ति में " यह भी सही है, के स्थान पर यह भी सही नही है, ज्यादा बेहतर है। हार्दिक बधाई स्वीकार करें।"
yesterday
Dr. Vijai Shanker commented on Dr. Vijai Shanker's blog post सब सही पर कुछ भी सही नहीं है - डॉo विजय शंकर
"आदरणीय तस्दीक अहमद खान साहब , आपका ह्रदय से आभार एवं धन्यवाद , सादर।"
Thursday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Dr. Vijai Shanker's blog post सब सही पर कुछ भी सही नहीं है - डॉo विजय शंकर
"आद0 विजय जी सादर अभिवादन। विचारोत्तेजक रचना के लिए दिल से बधाई देता हूँ। सादर"
Thursday
Tasdiq Ahmed Khan commented on Dr. Vijai Shanker's blog post सब सही पर कुछ भी सही नहीं है - डॉo विजय शंकर
"मुहतरम जनाब विजय साहिब , ज़हन में सवाल उठाती सुन्दर रचना हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं।"
Thursday
Dr. Vijai Shanker commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post मिज़ाज (लघुकथा)
"आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी , बधाई, सादर।"
Thursday
Dr. Vijai Shanker commented on Dr. Vijai Shanker's blog post सब सही पर कुछ भी सही नहीं है - डॉo विजय शंकर
"आदरणीय समर कबीर साहब , नमस्कार , आप पुनः स्वस्थ होकर मंच पर आये , बहुत खुशी हुयी। आप स्वस्थ रहें और आते रहें , मंच और हम सब लाभान्वित होते रहें। आपसे रोज ही कुछ न कुछ सीखने को मिलता है , मिलता रहे। आपको कविता पसंद आई , आभार , ह्रदय से। प्रश्न सोचने…"
Thursday
Dr. Vijai Shanker commented on Dr. Vijai Shanker's blog post सब सही पर कुछ भी सही नहीं है - डॉo विजय शंकर
"आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी , आपकी शुभकामनाओं के लिए आभार एवं धन्यवाद , सादर।"
Thursday
Dr. Vijai Shanker commented on Dr. Vijai Shanker's blog post सब सही पर कुछ भी सही नहीं है - डॉo विजय शंकर
"आदरणीय मोहम्मद आरिफ जी , आपकी विचार वान टिप्पणी के लिए आभार एवं बधाई के लिए धन्यवाद। सच किंचित कुछ नहीं माँगता है। सच सच होता है और नहीं होता है फिर भी मान लिया जाता है की है वह मिथ्या या झूठ होता है जो स्वयं में होता ही नहीं। वह क्या न मांग ले ?…"
Thursday
Samar kabeer commented on Dr. Vijai Shanker's blog post सब सही पर कुछ भी सही नहीं है - डॉo विजय शंकर
"आली जनाब डॉ.विजय शंकर जी आदाब,सोचने पर मजबूर करती उलझे सवालों की इस बहतरीन कविता के लिए दिल से बधाई स्वीकार करें ।"
Wednesday
Shyam Narain Verma commented on Dr. Vijai Shanker's blog post सब सही पर कुछ भी सही नहीं है - डॉo विजय शंकर
"बहुत ही अच्छी प्रस्तुति आदरणीय, हार्दिक बधाई l सादर"
Wednesday
Mohammed Arif commented on Dr. Vijai Shanker's blog post सब सही पर कुछ भी सही नहीं है - डॉo विजय शंकर
"आदरणीय विजय शंकर जी आदाब,                            सबकुछ सही नहीं है । अगर सही है तो वह है सच । लेकिन सच क़ुर्बानी माँगता है । हार्दिक बधाई सवीकार करें ।"
Wednesday
Dr. Vijai Shanker posted a blog post

सब सही पर कुछ भी सही नहीं है - डॉo विजय शंकर

आप सही हैं, वह भी सही है , हर एक सही है , फिर भी कुछ भी सही नहीं है। कुछ गिने चुने लोग बहुत खुश हैं , यह भी सही नहीं है। सच जो भी है , सब जानते हैं , बस मानते नहीं , यह भी सही नहीं है। ऊँट सामने है , देखते नहीं,हड़िया में ढूँढ़ते है , यह भी सही है।मौलिक एवं अप्रकाशितSee More
Wednesday
Dr. Vijai Shanker replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-88
"सुन्दर प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई, आदरणीय सतविंदर कुमार जी , सादर।"
Feb 10

Profile Information

Gender
Male
City State
UP
Native Place
Allahabad
Profession
Retired
About me
Educationist

.जिंदगी तुझे ही पढ़ लेते हैं ---डा० विजय शंकर

चलो किताबों को बंद कर देते हैंजिंदगी तुझे ही सीधे-सीधे पढ़ लेते हैं .किताबों में सबकुझ तेरे बारे में ही तो हैलो , तुझसे ही सीधे-सीधे बात कर लेते हैं.किताबें तो बहुत सी हैं , मिल भी जायेंगींउन को पढ़ लूँ तो क्या तू मिल जायेगी .मौत को कितने और कौन-कौन पढ़ते हैंपर उसका वादा है , सबको मिलती है .भरोसा नहीं , तू किसको मिले , कितनी मिलेतेरे लिये , तेरे चाहने वाले दिन रात लगे रहते हैं .अरे सब कुछ तो तेरे लिए ही है जिंदगी मेंतू है तो सब है , तू नहीं तो क्या है जिंदगी में .इसलिए चलो किताबों को बंद कर देते हैं .तू है , तुझसे सीधे-सीधे बात कर लेते हैं ...डा० विजय शंकर---------------( मौलिक और अप्रकाशित )

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Comment Wall (18 comments)

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At 5:38pm on January 1, 2017, Mohammed Arif said…
आदरणीय डॉ.विजय शंकर मेहताजी सकारात्मक सोच को उद्घरित करती रचना के लिए बधाई । नव वर्ष मंगलमय हो !
At 4:58pm on November 5, 2015, Abid ali mansoori said…

देर से ही सही.. हर्दिक आभार आपका आदरणीय विजय शंकर जी!

At 10:23pm on November 4, 2015, Abid ali mansoori said…

Haardik abhaar aapka!

At 3:46pm on July 1, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय डॉ विजय शंकर सर,

आपको जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनायें 

At 7:50pm on June 3, 2015, Tanuja Upreti said…
आभार आदरणीय
At 7:28pm on May 4, 2015, Seema Singh said…
आभार सर मार्गदर्शन के लिए
At 8:35am on April 17, 2015, Mohan Sethi 'इंतज़ार' said…

आदरणीय Dr. Vijai Shanker जी आप का हार्दिक आभार ....मंगलकामनाएँ...सादर  

At 6:57am on January 18, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय डॉ विजय शंकर सर, निवेदन स्वीकार करने के लिए आभार...

विद्यार्थी की मुक्त कंठ प्रशंसा आपका बड़प्पन और आपके हृदय की विशालता का प्रमाण है.

आपका  स्नेह और आशीर्वाद  सदैव मिलता रहे, इसके लिए सदैव प्रयास करता रहूँगा. नमन 

At 10:51pm on January 15, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय डॉ विजय शंकर सर, आभार, धन्यवाद.... आप लोगो के स्नेह और आशीर्वाद से ही मंच पर सक्रिय हो पाता हूँ. आपका आभार हार्दिक धन्यवाद 

At 4:40pm on October 23, 2014, Sushil Sarna said…

आपको  सपरिवार ज्योति पर्व की हार्दिक एवं मंगलमय शुभकामनाएं...

Dr. Vijai Shanker's Blog

सब सही पर कुछ भी सही नहीं है - डॉo विजय शंकर

आप सही हैं,
वह भी सही है ,
हर एक सही है ,
फिर भी कुछ भी
सही नहीं है।
कुछ गिने चुने
लोग बहुत खुश हैं ,
यह भी सही नहीं है।
सच जो भी है ,
सब जानते हैं ,
बस मानते नहीं ,
यह भी सही नहीं है।
ऊँट सामने है ,
देखते नहीं,
हड़िया में ढूँढ़ते है ,
यह भी सही है।

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on February 21, 2018 at 8:40am — 13 Comments

बंधन की डोरियां - डॉo विजय शंकर

कुछ डोरियां

कच्चे धागों की होती हैं ,

कुछ दृश्य होती हैं ,

कुछ अदृश्य होती हैं ,

कुछ , कुछ - कुछ

कसती , चुभती भी हैं ,

पर बांधे रहती हैं।

कुछ रेशम की डोरियां ,

कुछ साटन के फीते ,

रंगीले-चमकीले ,फिसलते ,

आकर्षित तो बहुत करते हैं ,

उदघाट्न के मौके जो देते हैं ,

पर काटे जाते हैं।

इस रेशम की डोरी

की लुभावनी दौड़ में ,

ज़रा सी चूक ,

बंधन की डोरियां

छूट गईं या टूट गईं ,

रेशम की डोरियां …

Continue

Posted on January 4, 2018 at 9:30am — 11 Comments

क्षणिकाएं - डॉ. विजय शंकर


  • 1.
    सच का कहीं दूर तक
    नहीं कोई पता है।
    हाँ ये सच है
    कि बहुत कुछ
    झूठ पर टिका है।
    2.
    रेत मुठ्ठी से जब
    फिसल जाती है ,
    जिंदगी कुछ कुछ
    समझ में आती है।
    3.
    रोज रोज के तजुर्बे
    यूँ बीच बीच में
    बांटा न करो ,
    ये जिंदगी गर
    एक सबक है तो
    उसे पूरा तो हो लेने दो

  • मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on December 24, 2017 at 7:52pm — 12 Comments

पढ़े-लिखे हैं आप तो - डॉo विजय शंकर

पढ़े-लिखे हैं आप तो आपको

पढ़े-लिखे दिखना चाहिए।

मोटर कार हो सब ,फिर भी अक्ल से ,

आपको , बिलकुल पैदल दिखना चाहिए।

कपड़े अजीब, चाल अजीब , हाव-भाव अजीब ,

बातचीत में अजीब होना और दिखना चाहिये।

रचनात्मक होना तो बहुत कठिन होता है ,

विध्वंस और क्रान्ति की बात करनी आनी चाहिए।

सबसे बड़ी बात आपको

घर फूंक तमाशा देखना आना चाहिए।

अपनी बुनियाद को निरंतर हिलाना और

मौक़ा लगते ही उखाड़ देना चाहिए।

आपको वो तो लपक लेंगे ही

जो उकसा रहे हैं… Continue

Posted on November 13, 2017 at 10:57am — 15 Comments

 
 
 

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