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सतविन्द्र कुमार
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  • karnal,haryana
  • India
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Mohammed Arif commented on सतविन्द्र कुमार's blog post तरही गजल
"आदरणीय सतविंद्र कुमार जी आदाब, बहुत ही अच्छी ग़ज़ल । हर शे'र उम्दा । शे'र दर शे'र शे'र दाद के साथ मुबारकबाद । आपने ऊपर ग़ज़ल के अर्कान रहीं लिखेंं हैं । बिक़ी गुणीजन अपनी राय देंगे ।"
3 hours ago
सतविन्द्र कुमार posted a blog post

तरही गजल

न तकरार समझी न समझा गिला हैबुरी आदतों का यही फाइदा हैगलत ही तलाशा था मय में नशे कोनिगाहों में जबके नशा ही नशा हैन अल्फाज कुछ भी बयां कर सकेंगेजो दिल में बसा आँखों से दिख रहा हैये चेहरे पे रौनक न जाने है कैसीजिगर जख्म से पूरा छलनी हुआ हैकिसी तिफ्ल के रूठ जाने से सीखेंभुलाना किसी को अगर सीखना हैधँसा पेट जिसका हुआ पसलियों मेंसड़क पर दिखा वह खुशी बेचता हैबनादो मुहब्बत को औजार मेरी*मुझे नफरतों का शज़र काटना है*कमर पे चढ़ी जा रही है ख़ुमारीकहीं दूर सूरज लगे ढल रहा है,करे जिंदगी यूँ ही बातें वफ़ा कीकजा के…See More
12 hours ago
Dr Ashutosh Mishra commented on सतविन्द्र कुमार's blog post तरही गजल
"इस रचना पर हार्दिक बधाई आदरणीय सतविंदर जी"
17 hours ago
vandana commented on सतविन्द्र कुमार's blog post तरही गजल
"नहीं अनबन, नहीं शिकवा ही कोई*बस इतना है कि अब वो मन नहीं है* बहुत बढ़िया आदरणीय "
yesterday
सतविन्द्र कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-84
"सादर आभार आदरणीय"
Saturday
सतविन्द्र कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-84
"छट पूजा को चित्रित करती सुंदर रचना के लिए हार्दिक बधाई आदरणीय"
Saturday
सतविन्द्र कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-84
"परदत्त विषयानुरूप गीत रचना पर हार्दिक बधाई आदरणीय"
Saturday
सतविन्द्र कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-84
"हाइकू रचे कल्पना मिली नई चमका सूरज। शब्द चित्र-सा कहन कथा सम बने हाइकू। सतत खेल खुले मैदान पर अभ्यास सिद्धि। सुंदर शब्द शिल्प पर अभ्यास रखना जारी। लीजे बधाई चोखा प्रयास यह कल्पना दीदी।"
Saturday
सतविन्द्र कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-84
"आडरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी,सादर नमन। माहिया पर मेरे इस प्रथम प्रयास पर समीक्षात्मक टिप्पणी कर उत्साहवर्धन व मार्गदर्शन करने के लिए सादर हार्दिक आभार। साची बात कही है चन्दा तारों पर रवि की धाक रही है"
Saturday
सतविन्द्र कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-84
"आदरणीया प्रतिभा दीदी,सादर नमन! प्रयास को समय देकर उत्साहवर्धन करने के लिए बहुतबहुत आभार।"
Saturday
सतविन्द्र कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-84
"आदरणीय उस्मानी साहब उत्साहवर्धन के लिए बहुत बहुत हार्दिक आभार!"
Saturday
सतविन्द्र कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-84
"आदरनय समर कबीर जी,सादर वन्दन! प्रयास आपको पसंद आया,यह सार्थक हुआ। सादर हार्दिक आभार"
Saturday
सतविन्द्र कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-84
"आदरणीय तस्दीक अहमद साहब,सादर नमन। हौंसलाफ़ज़ाई के लिए बहुत बहुत आभार । विषय वाला शब्द लेना अनिवार्य है? मैं ऐसा न समझ पाया। हो सकता है यह मेरी भूल ही हो।सादर"
Saturday
सतविन्द्र कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-84
"आदरणीय सुरेन्द्र भाई जी,सादर हार्दिक आभार उत्साहवर्धन के लिए।"
Saturday
सतविन्द्र कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-84
"आदरणीय गोपाल नारायण सर,अनुमोदन एवं प्रोत्साहन के लये सादर हार्दिक आभार,नमन"
Saturday
सतविन्द्र कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-84
"रख सूरज को ध्यान में,अपनाया शुभ ढंग कुण्डलिया ये तीन हैं,तीन हुए हैं रंग तीन हुए हैं ढंग,लगे हैं हमको प्यारे जो लाए हैं ख़ूब,यहाँ अशोक हमारे मन गदगद है आज,नयन खुश हैं इनको लख रच दिए लाज़वाब, ध्यान में सूरज को रख"
Saturday

Profile Information

Gender
Male
City State
करनाल हरियाणा
Native Place
गाँव व डाक बालराजपूतान
Profession
अध्यापक
About me
I am a simple person living simply.I have interests in reading,movies and enjoy these timely.try to write somthings when there is time to do so.Believe in nationalism as an ideology.

सतविन्द्र कुमार's Blog

तरही गजल

न तकरार समझी न समझा गिला है

बुरी आदतों का यही फाइदा है



गलत ही तलाशा था मय में नशे को

निगाहों में जबके नशा ही नशा है



न अल्फाज कुछ भी बयां कर सकेंगे

जो दिल में बसा आँखों से दिख रहा है



ये चेहरे पे रौनक न जाने है कैसी

जिगर जख्म से पूरा छलनी हुआ है



किसी तिफ्ल के रूठ जाने से सीखें

भुलाना किसी को अगर सीखना है



धँसा पेट जिसका हुआ पसलियों में

सड़क पर दिखा वह खुशी बेचता है



बनादो मुहब्बत को औजार मेरी

*मुझे… Continue

Posted on October 16, 2017 at 10:36pm — 1 Comment

तरही गजल

1222 1222 122

कभी जिसमें कहीं अड़चन नहीं है
हो कुछ भी वो मग़र जीवन नहीं है

तराशा जाए तो पत्थर भी चमके
तपाए बिन कोई कुंदन नहीं है

बिना उलझे नहीं आता सुलझना
मज़ा ही क्या अगर उलझन नहीं है

अगर हैं जीतने की ख़्वाहिशें तो
न सोचो हारने का मन नहीं है

बहारें हर तरफ़ आने लगी हैं
खिला इक बस मेरा गुलशन नहीं है

नहीं अनबन, नहीं शिकवा ही कोई
*बस इतना है कि अब वो मन नहीं है*

मौलिक एवम अप्रकाशित

Posted on October 11, 2017 at 11:30pm — 5 Comments

बचपन

*बचपन*



न समंदर-सा गहरा,न पर्वत-सा ऊँचा



न ही लताओं-सा उलझा



जटिल तो हो ही नहीं सकता है



बचपन



क्योंकि बड़ा सादा-सा होता है



बचपन



बड़ा सीधा-सा होता है



बचपन



खुली उन्मक्त हवा-सा बहता है



करता है अठखेलियां



विभिन्न पत्तियों से



टहनियों से



कभी-कभी हिला देता है



वृक्ष को भी जड़ तक



क्योंकि बहती हवा-से



बचपन का विवेक इतना ही



होता… Continue

Posted on October 8, 2017 at 10:37pm — 3 Comments

तरही ग़ज़ल

122 122 122 12

उन्हें देखकर ये बदलने लगा
नहीं टिक सका दिल फिसलने लगा

नदी से मिलन की घड़ी आ गयी
*समन्दर खुशी से मचलने लगा*

जमाने से मिलती रही ठोकरें
उन्हीं की बदौलत सँभलने लगा

लगा संग दिल ही था जो अब तलक
वो किलकारियों से पिघलने लगा

पड़ोसी लगाता रहा आग जो
वही आज खुद देखो जलने लगा

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on September 24, 2017 at 6:46am — 4 Comments

Comment Wall (7 comments)

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At 7:34am on June 20, 2016, सुरेश कुमार 'कल्याण' said…
आदरणीय सतविंदर भाई ये मार्गदर्शन आपके द्वारा ही दिया गया है। हार्दिक आभार ।
At 7:41am on January 27, 2016, Omprakash Kshatriya said…
बहुतबहुत शुक्रिया आप का आदरणीय सतविंदर कुमार जी . आप ने मेरा जन्म दिन याद रख कर मुझे अमूल्य/अतुल्य शुभकामनाएं दी. इस हेतु मैं आप का आजीवन ऋणी रहूंगा .
At 8:46pm on January 11, 2016, सतविन्द्र कुमार said…
धन्यवाद आदरणीय sushil Sarna जी।आपको भी सपरिवार सादर शुभकामनाएं!
At 6:59pm on January 3, 2016, Sushil Sarna said…

नूतन वर्ष 2016 आपको सपरिवार मंगलमय हो। मैं प्रभु से आपकी हर मनोकामना पूर्ण करने की कामना करता हूँ।

सुशील सरना

At 7:16pm on December 18, 2015, सतविन्द्र कुमार said…
बहुत बहुत आभार आदरणीयEr Ganesh Jee Bagi सर।
At 7:54pm on December 17, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

सतविंदर कुमार जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 11:59am on October 2, 2015,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…

भाई सतविंदरजी, 

आपका हार्दिक धन्यवाद कि आपको मेरी विवेचना तोषकारी लगी है.

आप किसी आयोजन या इवेण्ट पर अपनी भावनाएँ उसी थ्रेड में पोस्ट किया करें. यदि आपने अपना धन्यवाद ज्ञापन संकलित लघुकथाओं के पोस्ट में ही किया होता या अब भी कर दें तो यह अधिक उचित होगा.

पुनः धन्यवाद, भाईजी

 
 
 

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