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शिज्जु "शकूर"
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शिज्जु "शकूर" commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post दबी हर बात जिंदा क्यूँ करें हम (ग़ज़ल)
"अच्छी गज़ल हुई है आ. सुरेन्द्रनाथ जी बहुत बहुत बधाई आपको"
Sep 18

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शिज्जु "शकूर" commented on SALIM RAZA REWA's blog post जिसे ख़यालों में रखता हूँ - सलीम रज़ा रीवा
"मोहतरम सलीम रज़ा साहब बेहतरीन ग़ज़ल हुई है, बहुत-बहुत बधाई आपको,"
Sep 18

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शिज्जु "शकूर" commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post अधकटा पेड़(लघुकथा)
"लघुकथा के शिल्प के बारे में तो गुणीजन कहेंगे, आप मेरी तरफ से बधाई स्वीकार करें"
Sep 16

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शिज्जु "शकूर" commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post अरमान और बिदाई (लघुकथा) /शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"हृदयस्पर्शी रचना हुई है मोहतरम जनाब उस्मानी साहब"
Sep 16

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शिज्जु "शकूर" commented on अलका 'कृष्णांशी''s blog post हिंदी क्यूँ ऐसे लगती ज्यूँ वृदाश्रम की माई है ;अलका 'कृष्णांशी'
"आ. अलका जी हिन्दी दिवस पर गीत के भाव अच्छे बन पड़े हैं बहुत बहुत बधाई आपको"
Sep 16

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शिज्जु "शकूर" commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (अपनी तक़दीर फिर आज़माएँगे हम )
"अच्छी ग़ज़ल हुई है मोहतरम तस्दीक अहमद खान साहब, बहुत बहुत बधाई आपको"
Sep 16

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शिज्जु "शकूर" commented on Arpana Sharma's blog post "हिन्दी-दिवस" -अर्पणा शर्मा भोपाल
"हिन्दी दिवस के औचित्य और  इतिहास को कविता का रूप देने की अच्छी कोशिश हुई है"
Sep 16

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शिज्जु "शकूर" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post खुद से मुझ को अलग करो----- ग़ज़ल पंकज मिश्र द्वारा
"अच्छी ग़ज़ल है आ. पंकज भाई, कोल का क्या खूब प्रयोग किया है आपने"
Sep 16

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शिज्जु "शकूर" commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की -जैसे धुल कर आईना फ़िर चमकीला हो जाता है,
"आ. निलेश भाई बेहतरीन ग़ज़ल हुई है बहुत बहुत बधाई आपको"
Sep 16

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शिज्जु "शकूर" commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post वादों की बरसात न कर
"अच्छी ग़ज़ल हुई है आ. बसन्त जी बधाई"
Sep 16

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शिज्जु "शकूर" commented on Kalipad Prasad Mandal's blog post तरही ग़ज़ल
"आ. कालिपद मंडल सर आपकी ग़ज़ल और थोड़ी मेहनत और समय माँग रही है। मैं निलेश भाई से सहमत हूँ यदि ये रचना आयोजन में आती तो विस्तृत चर्चा हो जाती "
Sep 16

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शिज्जु "शकूर" commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post मुद्दों में मुद्रायें (लघुकथा) /शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"लघुकथा के शिल्प पर तो गुणीजन प्रकाश ़डालेंगे मेरी तरफ से इस प्रस्तुति के लिए बधाई"
Sep 16

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शिज्जु "शकूर" commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल - मैं उसकी ताब से खो कर हवास बैठा था ( गिरिराज भंडारी )
"आ. गिरिराज जी ग़ज़ल पर आए सुझाव काबिल ए गौर है"
Sep 16

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शिज्जु "शकूर" commented on Er Kumar Nusrat's blog post गज़ल - बेटों से कहीं ज्यादा मैं बेटी की तरफ हूं
"आ. कुमार जी आपकी ग़ज़ल पर समर कबीर साहब, आ. गिरिराज जी और आ. निलेश शेवगाँकर जी अपनी बात कह ही चुके हैं गौर कीजिएगा। मेरी तरफ से आपको बधाई"
Sep 16

Profile Information

Gender
Male
City State
Raipur
Native Place
Raipur
Profession
Creative writer in Konsole group
About me
I emotional and introvert person usually like to spend time alone, it is selfish nature because sometimes our beloved one wishing to spend time with us

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ख़्वाब तूने कोई बुना होगा

2122 1212 22/112

ख़्वाब तूने कोई बुना होगा

तब तेरा रतजगा हुआ होगा

 

सर यक़ीनन मेरा झुकेगा जनाब

आपसे जब भी सामना होगा

 

मुद्दतों बाद मेरी याद आई

मुश्किलों से कहीं घिरा होगा

 

मुझको मेहनत लगी थी लिखने में

उसको एहसास इसका क्या होगा

 

शहर में होना आरज़ी है मगर

तज़्किरा मेरा बारहा होगा

 

आरज़ी – थोड़े समय के लिए, तज़्किरा – जिक्र

 

-मौलिक व अप्रकाशित

Posted on September 21, 2017 at 11:24am — 6 Comments

सच का चोगा पहना दो - शिज्जु शकूर

सच का चोगा पहना दो
झूठ का परचम लहरा दो

इसमें है साख तुम्हारी
कि सियारों को रँगवा दो

सच न ज़मीं तक आ जाए
सबको बाहम उलझा दो

लिखा हुआ है काग़ज़ पर
सच में भी वो दिखला दो

पहले जैसा था मेरा
घर वैसा अब लौटा दो

सबकुछ अच्छा-अच्छा है
अख़बारों में छपवा दो

ये भी आज चलन में है
सारे अहसान भुला दो

-मौलिक व अप्रकाशित

Posted on May 28, 2017 at 4:46pm — 7 Comments

दिल ए नाकाम पर हँसी आई

2122/1122 1212 22/112

दिल ए नाकाम पर हँसी आई

तेरे इलज़ाम पर हँसी आई



जिस मुहब्बत की आरज़ू थी बहुत

उसकेे अंजाम पर हँसी आई



दास्ताँ अपनी लिखने बैठा था

अपने इस काम पर हँसी आई



जिसमें तुमने कभी रखा था मुझे

आज उस दाम पर हँसी आई



मेरे क़ातिल का तज़किरा जो हुआ

तो हर इक नाम पर हँसी आई।



दफ्अतन मेरी जाँ से लिपटे हुए

सभी आलाम पर हँसी आई



सारे असरार जब खुले मुझपर

अपने औहाम पर हँसी… Continue

Posted on April 28, 2017 at 5:26pm — 23 Comments

कितने अच्छे थे मेरा ऐब बताने वाले

2122 1122 1122 22/112

कितने अच्छे थे मेरा ऐब बताने वाले

वो मेरे दोस्त मुझे रस्ता दिखाने वाले



वक्त ने, काश! उन्हें रुकने दिया होता ज़रा

साथ ही छोड़ गए साथ निभाने वाले



मुफ़लिसी मक्र की छाई है सियाही अब भी

पर बताओ हैं कहाँ शम्अ जलाने वाले



अपने क़ातिल से शिकायत नहीं कोई मुझको

कर गए ग़र्क मेरी कश्ती, बचाने वाले



खूब तासीर नज़र आई मुहब्बत की यूँ

रो पड़े जाँ को मेरी फ़ैज़ उठाने वाले



एकता टूटने पाए न कभी, मसनद पर

आके बैठे…

Continue

Posted on April 25, 2017 at 11:30am — 20 Comments

Comment Wall (30 comments)

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At 10:50pm on April 18, 2016, RATNA PRIYA PANDEY said…
धन्यवाद सर
At 7:06pm on January 3, 2016, Sushil Sarna said…

नूतन वर्ष 2016 आपको सपरिवार मंगलमय हो। मैं प्रभु से आपकी हर मनोकामना पूर्ण करने की कामना करता हूँ।

सुशील सरना

At 9:27pm on April 19, 2015, Mala Jha said…
सप्रेम धन्यवाद महोदय मुझे OBO जैसे प्रतिष्ठित मंच पर स्थान देने के लिए।बहुत बहुत आभार आपका।
At 9:48am on December 31, 2014, Rahul Dangi said…
आदरणीय शिज्जू "शकूर" जी आपका स्वागत है ! और धन्यवाद भी कि आपने मुझ कम बुद्धि को भी अपनी दोस्ती के काबिल समझा! सादर!
At 9:42pm on June 18, 2014, Sushil Sarna said…

aadrneey Shijju Shakoor saahib aapke margdarshan ka main aabhaaree hoon....koshish kroonga ki bataaee bahar pr aage badh skoon....tahe dil se shukriya

At 7:39pm on June 17, 2014, Sushil Sarna said…

हा हा हा …… बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय शिज्जु शकूर जी आपने हमारी रचना को कविता का दर्जा तो दिया। .... काश हमें भी ग़ज़ल लिखने का अंदाज़ आ जाए ? सर मेरी कोशिश तो ग़ज़ल लिखने की थी मगर बह्र में उलझता चला गया कभी ११२ कभी ११२१ करता फिर जब उलझन से छुटकारा न मिला तो रचना बना कर डाल दिया। आप की ज़र्रा नवाज़ी होगी अगर मेहरबानी करके इसी की नीचे लिखी चंद पंक्तियों की बह्र बना कर मुझ नौसिखिये को ग़ज़ल का हुनर सिखाएंगे। तकलीफ के लिए मुआफ़ी चाहता हूँ। शुक्रिया

अपनी हर सांस में...तुझे करीब पाता हूँ
तुझे हर ख्याल में अपना हबीब पाता हूँ
बिन तेरे ज़िंदगी की हर मसर्रत है झूठी
राहे वफ़ा में तुझे अपना नसीब पाता हूँ

At 3:39pm on June 3, 2014, Sushil Sarna said…

aadrbeey Shajju jee, namaskaar-kya apko aik takleef de sakta hoon ? aapkee kripa hogee yadi mujhe thoda sa trhee gazal kya hotee hai, btaayenge. gazal to samajh rhaa hoon pr trhee gazal smajh naheen aa rhee.aapke amuly smay men se kuch smay maang rhaa hoon, please dont mind. 

sushil sarna

At 10:59am on June 3, 2014, RACHNA JAIN said…

आपकी सभी रचनाएँ बहुत खूब हैं सर .... फिर भी, आपकी सलाह पर अमल करेंगे ... शुक्रिया !!

At 10:25am on June 3, 2014, RACHNA JAIN said…

बहुत खूब लिखा सर आपने... बधाई ...!!

At 5:30pm on December 13, 2013, Dr Dilip Mittal said…

 क्षणिकाये पसंद आने के लिये  धन्यवाद 

 
 
 

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