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Dayaram Methani
  • Male
  • Bhilwara - rajsthan
  • India
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Dayaram Methani's Page

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Dayaram Methani commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post दोहा सप्तक -६( लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' )
"आदरणीय लक्ष्मण धामीजी, दोहा सप्तक पढ़ा। बहुत अच्छे दोहे लिखे आपने इस हेतु बधाई स्वीकार करें। मैं इस लायक तो नहीं हूं कि आपको सुझाव दूं किंतु मन में आया है इसलिये यहाँ लिख रहा हूं। यदि कुछ गलत हो तो क्षमा करें। 1. सीख सिन्धु से सीख ये ..... सीख…"
Jan 6
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय डॉ. छोटेलाल सिंह जी, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है। बधाई स्वीकार करें!"
Dec 29, 2021
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय अमित कुमार 'अमित' जी, अच्छी गजल के लिए बधाई स्वीकार करें।"
Dec 29, 2021
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"अदरणीय दंडपाणि नाहक जी, तरही मिसरे पर बहुत ही अच्छी ग़ज़ल के लिए बधाई स्वीकार कीजिए।"
Dec 29, 2021
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय रवि शुक्ला जी, बहुत ही अच्छी ग़ज़ल के लिए बधाई स्वीकार कीजिए।"
Dec 29, 2021
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय रवि शुक्ला जी, प्रोत्साहन के लिए हार्दिक आभार।"
Dec 29, 2021
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय लक्ष्मण धामी मुसाफिर जी, प्रोत्साहन के लिए हार्दिक आभार।"
Dec 29, 2021
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय डॉ. छोटे सिंह जी, प्रोत्साहन के लिए हार्दिक आभार।"
Dec 29, 2021
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय अमित कुमार अमित जी, प्रोत्साहन के लिए हार्दिक आभार।"
Dec 29, 2021
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय दण्डपाणि नाहक जी, प्रोत्साहन के लिए हार्दिक आभार।"
Dec 29, 2021
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय समर कबीर जी, जीवदानी हिन्दी भाषा का शब्द है। जीवन दायनी औषधियों को जीवदानी कहा जाता है। पृथ्वी को भी जीवदानी कहा जाता है क्योकि वह सभी जीवों के लिए जीवन दायिनी है।"
Dec 28, 2021
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय दीपांजलि दुबे जी जी, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है। बधाई स्वीकार करें।"
Dec 28, 2021
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी, सुंदर ग़ज़ल के लिए बधाई स्वीकार करें। गिरह भी अच्छी है।"
Dec 28, 2021
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय रिचा जी, सुंदर ग़ज़ल के लिए बधाई स्वीकार करें।"
Dec 28, 2021
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय शिजु शकूर जी, अति संदर ग़ज़ल के लिए बधाई स्वीकार करें।"
Dec 28, 2021
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय समर कबीर जी, सबसे पहले तो हार्दिक आभार आपका कि आपने मेरी रचना पर टिप्पणी की और सलाह भी दी है। आपने जीवेदानी का अर्थ पूछा है। दरअसल सही शब्द जीवदानी है जिसका अर्थ जीवन देने वाला होता है। टंकण त्रुटि से जीवदानी के बजाया जीवेदानी हो गया है।अब…"
Dec 28, 2021

Profile Information

Gender
Male
City State
BHILWARA
Native Place
BHILWARA
Profession
journlist and writer
About me
I like to read and write kavita, gazal, short stories and artical.

Dayaram Methani's Blog

ग़ज़ल

2122 2122 2122 2



ज़िन्दगी में हर कदम तेरा सहारा हूँ

नाव हो मझधार तो तेरा किनारा हूँ

तुम भटक जाओ अगर अनजान राहों में

पथ दिखाने को तुम्हें रौशन सितारा हूँ

ज़िन्दगी का खेल खेलो तुम निडरता से

हर सफलता के लिए मैं ही इशारा हूँ

राह जीने की सही तुमको दिखाऊंगा

ज़िन्दगी के सब अनुभवों का पिटारा हूँ

साथ क्यों दूं मैं तुम्हारा सोच मत ऐसा

अंश तुम मेरे पिता मैं ही तुम्हारा हूँ

- दयाराम मेठानी…

Continue

Posted on November 6, 2021 at 10:00pm — 6 Comments

ग़ज़ल

 2122 2122 2122 212

नाव है मझधार में नाविक नशे में चूर है

सांझ है होने लगी मंजिल नज़र से दूर है

संकटों से आदमी क्या देव भी बचते नहीं

वक्त के आगे सभी होते यहां मजबूर है

जिन्दगी की कशमकश में जीना’ जिसको आ गया

यों समझ लो हौसलों से वो बहुत भरपूर है

दोष है अपना समय के साथ चल पाये नहीं

बंद मुट्ठी से फिसलना वक्त का दस्तूर है

हाल ‘‘मेठानी’’ बतायंे क्या किसी को अब यहां

आदमी सुनता नहीं अब हो गया मगरूर…

Continue

Posted on August 27, 2019 at 10:00pm — 2 Comments

गज़ल सीख लो

2122 2122 212

दर्द को दिल में दबाना सीख लो

ज़िन्दगी में मुस्कराना सीख लो

आंख से आंसू बहाना छोड़िये

हर मुसीबत को भगाना सीख लो

ज़िन्दगी है खेल, खेलो शान से

खेल में खुद को जिताना सीख लो

फूल को दुनिया मसल कर फैंकती

खुद को कांटों सा दिखाना सीख लो

छोड़ दें अब गिड़गिड़ाना आप भी

कुछ तो कद अपना बढ़ाना सीख लो

थी जवानी जोश भी था स्वप्न भी

दिन पुराने अब भुलाना सीख लो

कौन…

Continue

Posted on July 4, 2019 at 9:30pm — 8 Comments

झूठ का व्यापार - ग़ज़ल

मापनी: 2122 2122 2122 212

झूठ का व्यापार बढ़ता जा रहा है आजकल,

और हर इक पर नशा ये छा रहा है आजकल

है लड़ाई का नजारा हर तरफ देखें जिधर,

आदमी ही आदमी को खा रहा है आजकल

इस प्रगति के नाम पर ही मिट रहे संस्कार सब

झूठ को हर आदमी अपना रहा है आजकल

बाँटकर भगवान को नेता खुशी से झूमकर

काबा’ तेरा काशी’ मेरी गा रहा है आजकल

जाग ‘मेठानी’ बचायें आग से अपना चमन

नित नया जालिम जलाने आ रहा है…

Continue

Posted on April 8, 2019 at 2:01pm — 7 Comments

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At 10:09pm on May 24, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय दयाराम मेथानि जी आदाब बहुत बहुत शुक्रिया जनाब
 
 
 

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