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KALPANA BHATT ('रौनक़')
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Neelam Upadhyaya commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post बारूद का असर( लघुकथा)
"आदरणीय कल्पना भट्ट जी, नमस्कार । अच्छी लघुकथा की प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें।     "
18 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post बारूद का असर( लघुकथा)
"मुह तरमा कल्पना साहिबा  , अच्छी लघुकथा हुई है मुबारकबाद क़ुबुल फरमाएं |"
yesterday
Samar kabeer commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post बारूद का असर( लघुकथा)
"बहना कल्पना भट्ट जी आदाब, लघुकथा का प्रयास अच्छा है,लेकिन अभी और समय चाहिए,कथानक भी कमज़ोर है,  संवाद में भी कसावट नहीं है,पंच लाइन भी कमज़ोर है, बहरहाल इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
yesterday
Rakshita Singh commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post बारूद का असर( लघुकथा)
"आदरणीया कल्पना जी , नमस्कार ! बहुत ही सुन्दर लघुकथा ... हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।।"
Tuesday
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on Sushil Sarna's blog post स्वप्न ....
"चूजे से सपनो में देखा है जिनको उनको पंख लग गए, और वे सब.... जीवन का यथार्थ है| बहुत सुंदर लिखा है आपने आदरणीय सुशिल सरना जी| बधाई स्वीकारें|"
Monday
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post सूर्य उगाने जैसा हो- गीत
"सुंदर गीत लिखा है आपने आदर्निया बसंत कुमार जी, बधाई स्वीकारें|"
Monday
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on Mohammed Arif's blog post कविता--कश्मीर अभी ज़िंदा है भाग-1
"नमस्ते आदरणीय मोहम्मद आरिफ साहब, बहुत प्रभावशाली कविता लिखी है आपने, हार्दिक बधाई आपको|"
Monday
KALPANA BHATT ('रौनक़') posted a blog post

बारूद का असर( लघुकथा)

कलम को चुप-चाप और उदास बैठे देख बारूद ने पूछा," क्या बात है बहन?" "कुछ नहीँ! तुम फिर आ गए? चले क्यों नहीं जाते... कह तो दिया तुमसे अब मैं तुम्हे स्वीकार नहीं करूंगी।" गुस्से से कलम बड़बड़ाई। " मेरे बिना तुम्हारा कोई अस्तित्व ही नहीं हैं, समझीं ! तुम्हें मेरा स्वीकार करना ही होगा।" अट्टहास लेते हुए बारूद ने अपनी अहमियत जतायी। " नहीं कभी नहीँ ! तुम बदल गए हो अब वो बात नहीं रही, याद करो एक समय वो था जब बिस्मिल की कलम से तुमने यह लिखवाया था : सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है देखना है ज़ोर कितना…See More
Monday
KALPANA BHATT ('रौनक़') added a discussion to the group आंचलिक साहित्य
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અતીત અને વર્તમાન (લઘુકથા)

"અરે વીરુ ! આ બેન આવ્યા છે, આમનું પેકેટ પેલાં કબાટ માં રાખેલ છે, જરા કાઢીને લયી આઓ." શેઠજી બોલ્યા."જી શેઠજી! " વીરુ આટલું કહીને શેઠજીએ બતાવેલ કબાટ તરફ રૂખ કર્યું. ત્યાં જવા પેહલા એનું ધ્યાન દુકાન માં આવેલ એ બેન પાર ગયું જે એના શેઠજી પાસે બૈઠી હતી. એને જોઈને વીરુ ને લાગ્યું કે આ બેન ને તો ક્યાંક જોયા છે. પણ ક્યાં? વિચાર કરતા કરતા એ પેલાં કબાટ પાસે પહુંચી ગયો,એણે કબાટ ખોલ્યો lસામે એક લાલ ચૂંદડી ને ભરત વાળી સાડી જોઈ એ ચોંકી ગયો. "અલ્યા વીરુ! ક્યાં રહી ગયો? ઝટ આઓ, બીજા ગ્રાહક પણ આવી રહ્યા છે.વીરુ…See More
Monday
KALPANA BHATT ('रौनक़') added a discussion to the group आंचलिक साहित्य
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અતીત અને વર્તમાન (લઘુકથા)

"અરે વીરુ ! આ બેન આવ્યા છે, આમનું પેકેટ પેલાં કબાટ માં રાખેલ છે, જરા કાઢીને લયી આઓ." શેઠજી બોલ્યા."જી શેઠજી! " વીરુ આટલું કહીને શેઠજીએ બતાવેલ કબાટ તરફ રૂખ કર્યું. ત્યાં જવા પેહલા એનું ધ્યાન દુકાન માં આવેલ એ બેન પાર ગયું જે એના શેઠજી પાસે બૈઠી હતી. એને જોઈને વીરુ ને લાગ્યું કે આ બેન ને તો ક્યાંક જોયા છે. પણ ક્યાં? વિચાર કરતા કરતા એ પેલાં કબાટ પાસે પહુંચી ગયો,એણે કબાટ ખોલ્યો lસામે એક લાલ ચૂંદડી ને ભરત વાળી સાડી જોઈ એ ચોંકી ગયો. "અલ્યા વીરુ! ક્યાં રહી ગયો? ઝટ આઓ, બીજા ગ્રાહક પણ આવી રહ્યા છે.વીરુ…See More
Jun 12
Nita Kasar commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post पश्चाताप (लघुकथा)
"पति धर्म से बडा राजधर्म होता है।गांधारी को प्रतीक बना उम्दा कथा लिखी है।बधाई कल्पना  जी।बच्चों के संपूर्ण विकास,संस्कारों पर माँ की है परछाईं पड़ती है ।"
May 25

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post पश्चाताप (लघुकथा)
"वाह्ह्ह्ह कथा  का दूसरा पहलू ये भी हो सकता है आपने शत प्रतिशत सही कल्पना की है कल्पना जी पूर्णतः सहमत हूँ  बहुत बहुत बधाई आपको बच्चे बिगड़ने की बहुत कुछ जिम्मेदारी माँ पर आती है ."
May 22
Neelam Upadhyaya commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post पश्चाताप (लघुकथा)
"आदरणीया कल्पना भट्ट जी , नमस्कार।  बहुत ही अच्छी प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई। "
May 22
Sheikh Shahzad Usmani commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post पश्चाताप (लघुकथा)
"//अतीत के अँधेरों में खोये हुए ...// ... आरंभिक फ्लैैशबैैक का बहुत बढ़िया मार्गदर्शक प्रयोग!  पौराणिक पात्रों को लेकर एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम को बढ़िया तरीके से लेकर बहुत बढ़िया उम्दा प्रस्तुति के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद और आभार…"
May 21
Mohammed Arif commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post पश्चाताप (लघुकथा)
"आदरणीया कल्पना भट्ट जी आदाब,                                    पौराणिक प्रसंग को आधार बनाकर स्त्री की मनोदशा मेंं झाँकने का अच्छा प्रयास किया आपने । यह लघुकथा…"
May 21
KALPANA BHATT ('रौनक़') posted a blog post

पश्चाताप (लघुकथा)

"अपने पुत्र को समझाओ गांधारी। वासुदेव कृष्ण की माँग सर्वथा उचित है। 'पांडवो के लिये पाँच गाँव!' भला इससे कम और क्या हो सकता है?’’"नहीं आर्यपुत्र, अब वह समझाने की सीमा में नहीं रहा। पानी सिर से ऊपर बहने लगा है।" गांधारी की आवाज सदैव की भांति स्थिर थी। 'मैंने आप से अनगिनित बार उसे समझाने के लिये कहा लेकिन आप के 'पुत्र-मोह' ने उसे कभी समझाना ही नहीं चाहा। परिणामतः हम जहां आ चुके है, वहां से लौटना संभव नहीँ।" ........... युद्ध की कालिमा छंट चुकी थी लेकिन सभी पुत्रों को खो चुके धृतराष्ट्र आज अतीत…See More
May 21

Profile Information

Gender
Female
City State
BHOPAL
Native Place
MUMBAI
Profession
house wife
About me
was a teacher for about 20 Years. Recently resigned. I am M.A in English,B.Ed ,LLB.. . interested in literature

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बारूद का असर( लघुकथा)

कलम को चुप-चाप और उदास बैठे देख बारूद ने पूछा," क्या बात है बहन?"

"कुछ नहीँ! तुम फिर आ गए? चले क्यों नहीं जाते... कह तो दिया तुमसे अब मैं तुम्हे स्वीकार नहीं करूंगी।" गुस्से से कलम बड़बड़ाई।

" मेरे बिना तुम्हारा कोई अस्तित्व ही नहीं हैं, समझीं ! तुम्हें मेरा स्वीकार करना ही होगा।" अट्टहास लेते हुए बारूद ने अपनी अहमियत जतायी।

" नहीं कभी नहीँ ! तुम बदल गए हो अब वो बात नहीं रही, याद करो एक समय वो था जब बिस्मिल की कलम से तुमने यह लिखवाया था : सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है…

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Posted on June 18, 2018 at 1:30pm — 4 Comments

पश्चाताप (लघुकथा)



"अपने पुत्र को समझाओ गांधारी। वासुदेव कृष्ण की माँग सर्वथा उचित है। 'पांडवो के लिये पाँच गाँव!' भला इससे कम और क्या हो सकता है?’’

"नहीं आर्यपुत्र, अब वह समझाने की सीमा में नहीं रहा। पानी सिर से ऊपर बहने लगा है।" गांधारी की आवाज सदैव की भांति स्थिर थी। 'मैंने आप से अनगिनित बार उसे समझाने के लिये कहा लेकिन आप के 'पुत्र-मोह' ने उसे कभी समझाना ही नहीं चाहा। परिणामतः हम जहां आ चुके है, वहां से लौटना संभव नहीँ।"

........... युद्ध की कालिमा छंट चुकी थी लेकिन सभी पुत्रों को खो चुके…

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Posted on May 20, 2018 at 5:17pm — 5 Comments

नारी मन (कविता)



नारी का मन

न जाने कोई

जाने गर तो

न पहचाने कोई

एक पहेली बनती नारी

हास परिहास की शिकार है नारी

नव रसों में डूबी हुई

अनोखी पर सशक्त है नारी

कौन जाने कब हुआ जन्म

श्रुष्टि रचयिता में सहभागी है नारी

हर रिश्ते में बाँधा है इसको

माँ, बहन, चाची औ मासी

पूर्ण होता संसार है इससे

अर्धनारीश्वर का रूप धरा शिव ने

नारी का सम्मान बढ़ाया

युग बदला

बदली है नारी

परम्परा से आधुनिकता की राह पर

आज देखो चल पड़ी है नारी

कदम कदम पर…

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Posted on May 8, 2018 at 11:07am — 6 Comments

राजनीति की औकात (लघुकथा)

लव कुश के मुख से रामायण का गान सुनकर लोग अचंभित थे। लोगों में बातचीत हो रही थी," अयोध्या का और श्री राम चरित का वर्णन बहुत सुन्दर किया है।"

श्री राम दरबार में सीता जी के वनवास जाने के दृष्टान्त में लोगों की आँखों से झर झर आँसू बहने लगे।

इस वृत्तांत को सुनाते हुए लव और कुश के चेहरे पर क्रोध झलक रहा था।

किसीने पूछा,"बेटा तुम क्रोधित क्यों हुए?"

लव ने प्रतिप्रश्न किया ," ये कैसा न्याय कि किसी व्यक्ति के शक करने पर राजा ने रानी को देश से निष्कासित कर दिया.....!"

सब के झुके… Continue

Posted on April 1, 2018 at 8:24am — 13 Comments

Comment Wall (5 comments)

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At 10:51pm on August 8, 2017, श्याम किशोर सिंह 'करीब' said…

संदेशात्मक लघुकथा। सहज चित्रण के लिए बधाई।

KALPANA BHATT

At 1:55pm on May 17, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीया कल्पना जी महीने की सक्रिय सदस्य चुने जाने पर हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर 

At 1:26pm on May 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीया 

श्रीमती कल्पना भट्ट जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 11:34am on May 15, 2016, Rahila said…
बहुत शुक्रिया आदरणीया दी! आपने मुझे दोस्ती के काबिल समझा ।
At 2:10pm on May 1, 2016, pratibha pande said…

आपकी मित्रता मेरे लिए अमूल्य है , धन्यवाद आदरणीया कल्पना जी 

 
 
 

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gumnaam pithoragarhi commented on gumnaam pithoragarhi's blog post ग़ज़ल .....
"शुक्रिया एक नई जानकारी के लिए,,,,,,"
9 hours ago
SudhenduOjha left a comment for Rakshita Singh
"आदरणीया सुश्री रक्षिता सिंह जी, नमस्कार। रचना आपको पसंद आई, धन्यवाद...."
11 hours ago
SudhenduOjha left a comment for Neelam Upadhyaya
"आदरणीया सुश्री नीलम उपाध्याय जी, नमस्कार। रचना आपको पसंद आई, धन्यवाद.... सुधेन्दु ओझा"
11 hours ago
SudhenduOjha commented on SudhenduOjha's blog post जिसकी चाहत है उसे हूर औ जन्नत देदे।
"आदरणीया सुश्री नीलम उपाध्याय जी, नमस्कार। रचना आपको पसंद आई, धन्यवाद...."
11 hours ago
Samar kabeer commented on Mahendra Kumar's blog post बलि (लघुकथा)
"जनाब महेन्द्र कुमार जी आदाब, आपकी लघुकथाएँ हमेशा मुझे पसन्द आती हैं,ये लघुकथा भी उसी श्रेणी की है,…"
11 hours ago
Samar kabeer commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post लट जाते हैं पेड़- एक गीत
"जनाब बसंत कुमार शर्मा जी आदाब,बहुत ख़ूब वाह, कितना सुंदर गीत लिखा आपने, मज़ा आ गया,इस प्रस्तुति पर…"
11 hours ago
Samar kabeer commented on Neelam Upadhyaya's blog post हाइकू
"मुहतरमा नीलम उपाध्याय जी आदाब,बहुत उम्दा हाइकू लिखे आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
11 hours ago
Samar kabeer commented on SudhenduOjha's blog post जाहिल हैं कुछ लोग, तुम्हें काफ़िर लिखते हैं।
"कृपा कर इस ग़ज़ल के अरकान लिखने का कष्ट करें ।"
11 hours ago
Samar kabeer commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post हवाओं से रूबरू (लघुकथा)
"जनाब शैख़ शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,उम्दा लघुकथा हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
11 hours ago

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