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santosh khirwadkar
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Mahendra Kumar commented on santosh khirwadkar's blog post धोखे ने मुझको इश्क़ में ......संतोष
"//अपनों की ठोकरों ने गिराया था बारहाग़ैरों ने सीधी राह पे चलना सिखा दिया// बहुत ख़ूब! इस बढ़िया ग़ज़ल पर हार्दिक बधाई क़ुबूल कीजिए आ. संतोष जी. सादर."
4 hours ago
santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post धोखे ने मुझको इश्क़ में ......संतोष
"धन्यवाद आदरणीय मंडल साहब...."
15 hours ago
Kalipad Prasad Mandal commented on santosh khirwadkar's blog post धोखे ने मुझको इश्क़ में ......संतोष
"बहुत सुन्दर एहसास की बेहतरीन अभिव्यक्ति आ संतोष जी "
16 hours ago
santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post धोखे ने मुझको इश्क़ में ......संतोष
"शुक्रिया आदरणीय सुशील जी .."
yesterday
Sushil Sarna commented on santosh khirwadkar's blog post धोखे ने मुझको इश्क़ में ......संतोष
"Waaaaaaaah shaaaaàndar ahsaas"
yesterday
santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post धोखे ने मुझको इश्क़ में ......संतोष
"आदरणीय अफ़रोज़ साहब..शुक्रिया!!!!"
Saturday
santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post धोखे ने मुझको इश्क़ में ......संतोष
"आदरणीय विजय जी हृदय से धन्यवाद!!!"
Saturday
santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post धोखे ने मुझको इश्क़ में ......संतोष
"प्रणाम के साथ धन्यवाद आदरणीय समर साहब....!!!"
Saturday
Afroz 'sahr' commented on santosh khirwadkar's blog post धोखे ने मुझको इश्क़ में ......संतोष
"जनाब संतोष जी इस कलाम के लिए बहुत बहुत मुबारकबाद,,,,"
Saturday
vijay nikore commented on santosh khirwadkar's blog post धोखे ने मुझको इश्क़ में ......संतोष
"//अपनों की ठोकरों ने गिराया था बारहाग़ैरों ने सीधी राह पे चलना सिखा दिया//.... वाह ! बहुत ही अच्छा कहा। अच्छी गज़ल  के लिए बधाई, संतोष जी।"
Saturday
Samar kabeer commented on santosh khirwadkar's blog post धोखे ने मुझको इश्क़ में ......संतोष
"जनाब संतोष जी आदाब,उम्दा ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।"
Saturday
santosh khirwadkar posted a blog post

धोखे ने मुझको इश्क़ में ......संतोष

ग़ज़लमफ़्ऊल फ़ाइलात मफ़ाईल फाइलुनधोखे ने मुझको इश्क़ में क्या क्या सिखा दियागिरना सिखा दिया है,सँभलना सिखा दियारोती थीं ज़ार ज़ार ये,वादे ने आपकेआँखों को इन्तिज़ार भी करना सिखा दियासूरज की तेज़ धूप बड़ा काम कर गईख़्वाबों के दायरे से निकलना सिखा दियाअपनों की ठोकरों ने गिराया था बारहाग़ैरों ने सीधी राह पे चलना सिखा दिया"संतोष"दुश्मनों का करूँ शुक्र किस तरहमुझको भी दोस्ती का सलीक़ा सिखा दिया#संतोष(मौलिक एवं अप्रकाशित)See More
Thursday
santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post भुलाने के लिए राज़ी...संतोष
"धन्यवाद आदरणीय सुरेन्द्र जी!!!"
Wednesday
Afroz 'sahr' commented on santosh khirwadkar's blog post भुलाने के लिए राज़ी...संतोष
"आदरणीय संतोष जी अच्छी ग़ज़ल हुई है मेंरी और से बहुत बधाई आपको,,"
Wednesday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on santosh khirwadkar's blog post भुलाने के लिए राज़ी...संतोष
"आद0 सन्तोष जी सादर अभिवादन। बेहतरीन ग़ज़ल पर शैर दर शैर मुबारकबाद कुबूल फरमायें।"
Tuesday
santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post भुलाने के लिए राज़ी...संतोष
"शुक्रिया आदरणीय अजय साहब...!!!"
Dec 12

Profile Information

Gender
Male
City State
Bhopal
Native Place
Indore
Profession
Govt service
About me
National table-tennis player/coach

Santosh khirwadkar's Blog

धोखे ने मुझको इश्क़ में ......संतोष

ग़ज़ल

मफ़्ऊल फ़ाइलात मफ़ाईल फाइलुन

धोखे ने मुझको इश्क़ में क्या क्या सिखा दिया

गिरना सिखा दिया है,सँभलना सिखा दिया

रोती थीं ज़ार ज़ार ये,वादे ने आपके

आँखों को इन्तिज़ार भी करना सिखा दिया

सूरज की तेज़ धूप बड़ा काम कर गई

ख़्वाबों के दायरे से निकलना सिखा दिया

अपनों की ठोकरों ने गिराया था बारहा

ग़ैरों ने सीधी राह पे चलना सिखा दिया

"संतोष"दुश्मनों का करूँ शुक्र किस तरह

मुझको भी दोस्ती का सलीक़ा सिखा…

Continue

Posted on December 14, 2017 at 8:30pm — 11 Comments

भुलाने के लिए राज़ी...संतोष

ग़ज़ल

मफ़ाईलुन मफ़ाईलुन मफ़ाईलुन मफ़ाईलुन

भुलाने के लिए राज़ी तुझे ये दिल नहीं होता

तभी तो याद से तेरी कभी ग़ाफ़िल नहीं होता

महब्बत को अभी तक मैंने अपनी राज़ रक्खा है

तुम्हारा ज़िक्र यूँ मुझसे सरे महफ़िल नहीं होता

तुझे ही ढूँढता रहता मैं अपने आप में हर दम

सनम तू मेरे जीवन में अगर शामिल नहीं होता

दग़ा देना ही आदत बन गई हो जिसकी ऐ यारो

भरोसे के कभी वो आदमी क़ाबिल नहीं होता

हमेशा बीज बोता है जो…

Continue

Posted on December 8, 2017 at 9:30am — 11 Comments

कुछ मिठास पाने को .....संतोष

फ़ाइलुन मफ़ाईलुन फाइलुन मफ़ाईलुन



कुछ मिठास पाने को तल्खियाँ ज़रूरी हैं

क़ुर्ब के लिए जैसे दूरियाँ ज़रूरी हैं



सिर्फ़ रोने धोने से दिल न उनका पिघलेगा

साथ अश्क बारी के सिसकियाँ ज़रूरी हैं



तैर कर तो दरया को पार कर नहीं सकते

इसके वास्ते यारो किश्तियाँ ज़रूरी हैं



देख सूखी धरती में फ़स्ल उग नहीं सकती

बारिशों के मौसम में बदलियाँ ज़रूरी हैं



जब मकां बनाओ तो ध्यान ये भी रख लेना

धूप के लिए कुछ तो खिड़कियाँ ज़रूरी… Continue

Posted on November 18, 2017 at 11:30am — 13 Comments

खेल दिल का अजीब होता है.....संतोष

फ़ाइलातून मफ़ाइलुन फेलुन

खेल दिल का अजीब होता है
कौन किसके क़रीब होता है

प्यार मिलता,किसी को रुसवाई
अपना अपना नसीब होता है

काम आए बुरे समय में जो
वो ही सच्चा हबीब होता है

प्यार है जिसके पास वो इंसां
इस जहाँ में ग़रीब होता है

राज़ जिसको बता दिया दिल का
वो ही मेरा रक़ीब होता है
#संतोष
(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Posted on October 26, 2017 at 4:59pm — 12 Comments

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