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santosh khirwadkar
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राज़ नवादवी commented on santosh khirwadkar's blog post मिट गए नक़्श सभी....संतोष
"मेरे ख्याल से-  मिट गये नक़्श सभी दिल के दिखाऊँ कैसे एक भुला हुआ क़िस्सा मैं सुनाऊँ कैसे में भुला को भूला करना उचित होगा, बह्र भी तभी मुकम्मल होगी. सादर. "
3 hours ago
Ajay Tiwari commented on santosh khirwadkar's blog post मिट गए नक़्श सभी....संतोष
"आदरणीय संतोष जी, अच्छी ग़ज़ल हुई है. हार्दिक बधाई."
21 hours ago
राज़ नवादवी commented on santosh khirwadkar's blog post मिट गए नक़्श सभी....संतोष
"जनाब संतोष जी आदाब,सुन्दर ग़ज़ल के लिए दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ । सादर "
Wednesday
क़मर जौनपुरी commented on santosh khirwadkar's blog post मिट गए नक़्श सभी....संतोष
"तिश्नगी उसकी बुलाती है इशारों से मुझे मैं समन्दर की भला प्यास बुझाऊँ कैसे वाह संतोष साहब, बहुत बेहतरीन शेर हुआ है। पूरी ग़ज़ल बहुत अच्छी है। मुबारकबाद क़बूल करें।"
Wednesday
Samar kabeer commented on santosh khirwadkar's blog post मिट गए नक़्श सभी....संतोष
"जनाब संतोष जी आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।"
Wednesday
santosh khirwadkar posted a blog post

मिट गए नक़्श सभी....संतोष

फ़ाइलातुन फ़इलातुन फ़इलातुन फ़ेलुन/फ़इलुनमिट गये नक़्श सभी दिल के दिखाऊँ कैसेएक भुला हुआ क़िस्सा मैं सुनाऊँ कैसेजा चुका है जो सभी तोड़के रिश्ते मुझसेसोचता हूँ उसे आवाज़ लगाऊँ कैसेअहमियत दिल की यहाँ लोग  समझते ही नहींउनको इस बात का अहसास दिलाऊँ कैसेतिश्नगी उसकी बुलाती है इशारों से मुझेमैं समन्दर की भला प्यास बुझाऊँ कैसेप्यार का कोई तलबगार नहीं दुनिया मेंइस ख़ज़ाने को मैं 'संतोष' लुटाऊँ कैसे#संतोष_खिरवड़कर(मौलिक एवं अप्रकाशित)See More
Tuesday
santosh khirwadkar commented on शिज्जु "शकूर"'s blog post एक ग़ज़ल - शिज्जु शकूर
"आ. श्री शिज्जु शकूर साहिब नमस्कार , बेहतरीन ग़ज़ल हुई...... बधाई!"
Tuesday
santosh khirwadkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- सोचिये फिर डूबने में कितनी आसानी रहे
"आदरणीय भाई श्री नीलेश जी नमस्कार , बेहतरीन ग़ज़ल ! क़त्ल होते वक़्त भी मैं मुस्कुराता ही रहूँ ताकि क़ातिल को मेरे ता-उम्र हैरानी रहे. बेहतरीन शे'र"
Nov 3
santosh khirwadkar commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post गजल- नहीं आती
"आदरणीय बसंत कुमार शर्मा जी नमस्कार , सुन्दर ग़ज़ल की प्रस्तुति ,बधाई ! बाक़ी गुणीजनों ने कह दिया है. सादर."
Nov 3
santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post क़ैद मैं कैसे दायरे में हूँ....संतोष
"बहुत आभार आ.बलराम जी"
Nov 3
Balram Dhakar commented on santosh khirwadkar's blog post क़ैद मैं कैसे दायरे में हूँ....संतोष
"आदरणीय संतोष जी, बहुत ख़ूबसूरत ग़ज़ल हुई है। दिली मुबारक़बाद क़ुबूल फ़रमाएं। सादर।"
Oct 29
Samar kabeer commented on santosh khirwadkar's blog post क़ैद मैं कैसे दायरे में हूँ....संतोष
"// और मैं सदियों से रतजगे में हूँ// जनाब निलेश जी,इस मिसरे को मैंने ऐसे पढ़ा था:- 'उर में सदियों से रतजगे में हूँ' // उनकी यादों को भूलना है मुझे यूँ मैं 'संतोष'मैकदे में हूँ// इस शैर के सानी मिसरे में "यूँ" का अर्थ…"
Oct 28
santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post क़ैद मैं कैसे दायरे में हूँ....संतोष
"आदरणीय भाई श्री नीलेश जी ,स्वागत , बहुत शुक्रिया !! आप के बताये विचारों से ग़ज़ल को और बेहतर करने का प्रयत्न करूँगा ! किन्तु मेरे व्यक्तिगत मतानुसार पटल अथवा इस पवित्र पाठशाला के सभी वरिष्ठ एवं गुरु तुल्य व्यक्तित्व अपने शिक्षा देने का कार्य हम…"
Oct 28
santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post क़ैद मैं कैसे दायरे में हूँ....संतोष
"आदरणीय लक्ष्मण धामी साहब धन्यवाद !!"
Oct 28
santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post क़ैद मैं कैसे दायरे में हूँ....संतोष
"आदरणीय श्री बृज कुमार जी बहुत शुक्रिया !!"
Oct 28
santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post क़ैद मैं कैसे दायरे में हूँ....संतोष
"आदरणीय श्रीआरिफ़ साहिब बहुत बहुत शुक्रिया !!"
Oct 28

Profile Information

Gender
Male
City State
Bhopal
Native Place
Indore
Profession
Govt service
About me
National table-tennis player/coach

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मिट गए नक़्श सभी....संतोष

फ़ाइलातुन फ़इलातुन फ़इलातुन फ़ेलुन/फ़इलुन

मिट गये नक़्श सभी दिल के दिखाऊँ कैसे

एक भुला हुआ क़िस्सा मैं सुनाऊँ कैसे

जा चुका है…

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Posted on November 13, 2018 at 1:06pm — 5 Comments

क़ैद मैं कैसे दायरे में हूँ....संतोष

अरकान:

फ़ाइलातुन मफ़ाइलुन फेलुन

क़ैद मैं, कैसे दायरे में हूँ

कौन है जिसके सिलसिले में हूँ

आप तो मीठी नींद सोते हैं

और…

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Posted on October 26, 2018 at 9:11am — 15 Comments

बीते लम्हों को चलो .....संतोष

अरकान:-

फ़ाइलातुन फ़इलातुन फ़इलातुन फेलुन

बीते लम्हों को चलो फिर से पुकारा जाए

वक़्त इक साथ सनम मिलके गुज़ारा जाए

तोड़कर आज ग़लत…

Continue

Posted on September 26, 2018 at 8:22am — 12 Comments

फिर ज़ख़्मों को ...संतोष

अरकान:-

फेलुन फेलुन फेलुन फेलुन फेलुन फ़ा

फिर ज़ख़्मों को धोने का दिल करता है

चुपके चुपके रोने का दिल करता है

जब जब…

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Posted on August 22, 2018 at 10:09pm — 14 Comments

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"आदरणीय तेज वीर सिंह साहब, आदाब. ग़ज़ल में शिरकत और हौसला अफज़ाई का तहेदिल से शुक्रिया. सादर. "
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