For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

santosh khirwadkar
Share

Santosh khirwadkar's Friends

  • सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप'
  • Gurpreet Singh
  • KALPANA BHATT ('रौनक़')
  • बसंत कुमार शर्मा
  • Samar kabeer
  • Gajendra shrotriya
  • मिथिलेश वामनकर
 

santosh khirwadkar's Page

Latest Activity

santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post उसने बिखरे काग़ज़ों को .....संतोष
"हृदय से आभार आ. नीलम जी "
Jul 3
Neelam Upadhyaya commented on santosh khirwadkar's blog post उसने बिखरे काग़ज़ों को .....संतोष
"आदरणीय संतोष जी, बहुत ही सुन्दर गजल के लिए मुबारकबाद स्वीकार करें । "
Jul 2
santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post उसने बिखरे काग़ज़ों को .....संतोष
"शुक्रिया आ. राज जी "
Jul 1
राज़ नवादवी commented on santosh khirwadkar's blog post उसने बिखरे काग़ज़ों को .....संतोष
"बहुत खूब जनाब संतोष जी. सुन्दर ग़ज़ल की प्रस्तुति के लिए बधाई स्वीकार करें.  मैं बहुत उलझा हुआ था ज़िन्दगी के फेर में तूने मेरी जान लेकर मसअला हल कर दिया क्या कहने, वाह…"
Jul 1
santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post उसने बिखरे काग़ज़ों को .....संतोष
"धन्यवाद आ.तेजवीर साहब "
Jul 1
santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post उसने बिखरे काग़ज़ों को .....संतोष
"नमस्कार गुरप्रीत जी, आप का तहेदिल से शुक्रिया"
Jul 1
TEJ VEER SINGH commented on santosh khirwadkar's blog post उसने बिखरे काग़ज़ों को .....संतोष
"हार्दिक बधाई आदरणीय संतोष जी। लाज़वाब गज़ल। मैं बहुत उलझा हुआ था ज़िन्दगी के फेर में तूने मेरी जान लेकर मसअला हल कर दिया"
Jul 1
Gurpreet Singh commented on santosh khirwadkar's blog post उसने बिखरे काग़ज़ों को .....संतोष
"जनाब संतोष जी ..नमस्कार ..आज आपकी ये ग़ज़ल पढ़ी ...ग़ज़ल बेहद पसंद आई ..बहुत ही शानदार अशआर कहे हैं आपने सभी के सभी ..इस ग़ज़ल के लिए आपको बहुत बहुत बधाई "
Jul 1
santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post उसने बिखरे काग़ज़ों को .....संतोष
"हृदय से आभार आ. गुमनाम जी .."
Jul 1
santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post उसने बिखरे काग़ज़ों को .....संतोष
"सलाम आ.आरिफ़ साहब...तहेदिल से शुक्रिया"
Jul 1
santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post उसने बिखरे काग़ज़ों को .....संतोष
"घन्यवाद आ.बृजेश जी ...."
Jul 1
santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post उसने बिखरे काग़ज़ों को .....संतोष
"आभार आ.श्याम जी .."
Jul 1
gumnaam pithoragarhi commented on santosh khirwadkar's blog post उसने बिखरे काग़ज़ों को .....संतोष
"खूबसूरत ग़ज़ल के लिए बधाई,"
Jul 1
Mohammed Arif commented on santosh khirwadkar's blog post उसने बिखरे काग़ज़ों को .....संतोष
"आदरणीय संतोष जी आदाब,                     बहुत ही बेहतरीन इश्क़ के रंग में डूबी ग़ज़ल । दिली मुबारकबाद क़ुबूल करें ।"
Jun 30
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on santosh khirwadkar's blog post उसने बिखरे काग़ज़ों को .....संतोष
"वाह बड़ी अच्छी ग़ज़ल कही है..."
Jun 30
Shyam Narain Verma commented on santosh khirwadkar's blog post उसने बिखरे काग़ज़ों को .....संतोष
"बहुत बहुत बधाई आपको इस खूबसूरत ग़ज़ल के लिए सादर ।"
Jun 30

Profile Information

Gender
Male
City State
Bhopal
Native Place
Indore
Profession
Govt service
About me
National table-tennis player/coach

Santosh khirwadkar's Blog

उसने बिखरे काग़ज़ों को .....संतोष

फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फाइलुन

उसने बिखरे काग़ज़ों को छू के संदल कर दिया

इक अधूरी सी ग़ज़ल को यूँ मुकम्मल कर दिया

कुछ तो दीवाना…

Continue

Posted on June 30, 2018 at 8:30am — 18 Comments

क्या सबब था...संतोष

अरकान फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलुन

क्या सबब था,किसलिये दुनिया से मैं डरता रहा

सर झुका कर जिसने जो भी कह दिया करता रहा



सी दिया था मेरे होटों को ज़माने ने मगर

ज़िक्र सुब्ह-ओ-शाम तेरा फिर भी मैं करता रहा



ज़िन्दगी के रास्ते में ज़ख़्म जो मुझको मिले

चुपके चुपके प्यार के मरहम से वो भरता रहा



जाते जाते वो मुझे कह कर गये थे इसलिये

लम्हा लम्हा ज़िन्दगी जीता रहा मरता रहा



सादगी की मैंने ये क़ीमत चुकाई उम्र…

Continue

Posted on June 3, 2018 at 4:34pm — 12 Comments

यारों ख़ुदा ये देख के हैरान हो गया....संतोष!!

अरकान:-

मफ़ऊल फ़ाईलात मफ़ाईल फ़ाइलुन



यारों ख़ुदा ये देख के हैरान हो गया,

इंसा जिसे बनाया था हैवान हो गया।।



भेजा था इसको अम्न की ख़ातिर जहान में,

कैसे ख़िलाफ़ अम्न के इंसान हो गया।।



शैतान का भी शर्म से देखो झुका है सर,

इंसान ख़ुद ही आज तो शैतान हो गया।।



चिंता में बेटियों की हर इक बाप है यहाँ,

अब क्या बताऊँ मैं तो परेशान हो गया।।



ढाये यहाँ पे गंदी सियासत ने वो सितम,

लगता है जैसे मौत का सामान हो गया।।…

Continue

Posted on May 11, 2018 at 8:30pm — 6 Comments

गुज़रे वक़्तों की वो तहरीर.....संतोष

अरकान:-

फ़ाइलातुन फ़इलातुन फ़इलातुन फ़ेलुन

गुज़रे वक़्तों की वो तहरीर सँभाले हुए हैं,

दिल को बहलाने की तदबीर सँभाले हुए हैं।।

बाँध रक्खा है हमें जिसने अभी तक जानाँ,

हम महब्बत की वो ज़ंजीर सँभाले हुए हैं।।

देखते रहते हैं अजदाद के चहरे जिसमें,

हम वफ़ाओं की वो तस्वीर सँभाले हुए हैं।।

जिन लकीरों में नजूमी ने कहा था,तू है,

दोनों हाथों में वो तक़दीर सँभाले हुए हैं।।

वस्ल की शब…

Continue

Posted on April 17, 2018 at 11:21am — 16 Comments

Comment Wall

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

  • No comments yet!
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sheikh Shahzad Usmani commented on SudhenduOjha's blog post तुम जो होते तो हम भी संभल गए होते। ये हालात हैं, कुछ तो बदल गए होते॥
"अनुभवों और अपेक्षाओं को पिरोती बढ़िया रचना के लिए हार्दिक बधाई आदरणीय सुधेन्दु ओझा जी।"
16 minutes ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on TEJ VEER SINGH's blog post सम्मान - लघुकथा –
"बहुत ही प्रेरक व विचारोत्तेजक रचना के लिये हार्दिक बधाई आदरणीय तेजवीर सिंह जी।"
20 minutes ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on विनय कुमार's blog post सीख लिया है- एक ग़ज़ल
"जी,बिल्कुल। .... वक़्त/विज्ञान-तकनीक-विकास/विश्व-विकास/सामाजिक-आर्थिक-व्यावसायिक विकास अर्थात वक़्त…"
26 minutes ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post एक लम्हा ....
"आदरणीय समर कबीर साहिब आदाब सर सृजन आपकी मधुर प्रशंसा का एवं सुझाव का दिल से आभार। मैं इसे अभी एडिट…"
31 minutes ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post एक लम्हा ....
"आदरणीया नीलम उपाध्याय जी सृजन पर आपकी मधुर प्रशंसा का दिल से आभार।"
31 minutes ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on Arpana Sharma's blog post नीरज जी को श्रृद्धाजंली - अर्पणा शर्मा भोपाल
"बहुत बढ़िया सार्थक भावपूर्ण विनम्र श्रद्धांजलि। हार्दिक आभार आदरणीया अपर्णा शर्मा जी। (ड़गमगाई=…"
33 minutes ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post एक लम्हा ....
"आदरणीय तेज तेज वीर सिंह जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार।"
33 minutes ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post एक लम्हा ....
"आदरणीय बसंत कुमार जी सृजन आपकी मधुर प्रशंसा का आभारी है।"
34 minutes ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post एक लम्हा ....
"आदरणीय नरेंद्र चौहान जी सृजन को मान देने का दिल से आभार।"
34 minutes ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post एक लम्हा ....
"आदरणीय मो.आरिफ साहिब आदाब , सृजन आपकी आत्मीय काव्यात्मक प्रशंसा का दिल की असीम गहराईयों से हार्दिक…"
34 minutes ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post क्षणिका - तूफ़ान ....
"आदरणीय   Samar kabeerजी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार।"
43 minutes ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post क्षणिका - तूफ़ान ....
"आदरणीय  Shyam Narain Vermaजी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार।"
43 minutes ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service