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विनय कुमार
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  • Varanasi , U P
  • India
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विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post मातृत्व- लघुकथा
"इस हौसलाअफजाई के लिए बहुत बहुत आभार आ मुहतरम समर कबीर साहब"
Feb 11
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post मातृत्व- लघुकथा
"इस हौसलाअफजाई के लिए बहुत बहुत आभार आ तेज वीर सिंह जी"
Feb 11
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post मातृत्व- लघुकथा
"इस हौसलाअफजाई के लिए बहुत बहुत आभार आ नाथ सोनांचली जी"
Feb 11
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post मातृत्व- लघुकथा
"इस हौसलाअफजाई के लिए बहुत बहुत आभार आ लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर जी"
Feb 11
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post मातृत्व- लघुकथा
"इस हौसलाअफजाई के लिए बहुत बहुत आभार आ कृष मिश्रा जान गोरखपुरी जी"
Feb 11
TEJ VEER SINGH commented on विनय कुमार's blog post मातृत्व- लघुकथा
"बहुत खूबसूरत रचना | आद0 विनय कुमार जी हार्दिक बधाई।"
Feb 11
नाथ सोनांचली commented on विनय कुमार's blog post मातृत्व- लघुकथा
"आद0 विनय कुमार जी सादर अभिवादन। अच्छी लघुकथा हुई है, बधाई स्वीकार कीजिये"
Feb 9
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on विनय कुमार's blog post मातृत्व- लघुकथा
"आ. भाई विनय कुमार जी, अच्छी कथा हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Feb 9
Samar kabeer commented on विनय कुमार's blog post मातृत्व- लघुकथा
"जनाब विनय कुमार जी आदाब, अच्छी लघुकथा हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
Feb 9
Krish mishra 'jaan' gorakhpuri commented on विनय कुमार's blog post मातृत्व- लघुकथा
"बहुत खूबसूरत रचना हुई है भाई विनय कुमार जी हार्दिक बधाई।"
Feb 9
विनय कुमार posted a blog post

मातृत्व- लघुकथा

पूरी रात वह सो नहीं पाया था, आँखों आँखों में ही बीती थी पिछली रात. लेकिन कमाल यह था कि न तो कोई थकान थी और न ही कोई झल्लाहट. उसे अच्छी तरह से याद था कि इसके पहले जब भी रात को जागना पड़ जाए या किसी वजह से रात को देर तक नींद नहीं आये तो अगला पूरा दिन उबासी लेते और थकान महसूस करते ही बीतता था. उसे हमेश यही लगता रहा कि कहीं वह छोटा सा बच्चा उससे दब न जाए और उसी चक्कर में वह हर आधे घंटे पर उठ उठकर उसे देखता रहा. और वह बच्चा भी पूरी रात उसके बिस्तर पर घूमता रहा, कभी सिरहाने तो कभी पैरों की तरफ.पूरी…See More
Feb 9
विनय कुमार replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"बेहद दुखद खबर है, विनम्र श्रद्धांजलि"
Jan 16
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post पिता--लघुकथा
"इस सारगर्भित टिप्पणी के लिए बहुत बहुत आभार आ शेख शहजाद उस्मानी जी. शीर्षक के लिए आपका सुझाव उचित है"
Sep 30, 2020
Sheikh Shahzad Usmani commented on विनय कुमार's blog post पिता--लघुकथा
"आदाब। /चिंतित/ और /सारा देश परेशान/  में छिपे गहरे संदेशों के साथ, रचना की आरंभिक और अंतिम पंक्तियां रचना को विचारोत्तेजक बना रही हैं। पिता, पिता है। बेटी दिवस के अवसर पर बढ़िया समसामयिक रचना हेतु हार्दिक बधाई जनाब विनय कुमार साहिब। शीर्षक यदि…"
Sep 30, 2020
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post पिता--लघुकथा
"इस प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत आभार आ मुहतरम समर कबीर साहब"
Sep 18, 2020
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post पिता--लघुकथा
"इस प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत आभार आ लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' साहब"
Sep 18, 2020

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Male
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Johannesburg
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Varanasi
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पिछले कई सालों से लगातार पढ़ते रहने के बाद कुछ लिखने की प्रेरणा मिली तो लिखना प्रारम्भ किया |

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मातृत्व- लघुकथा

पूरी रात वह सो नहीं पाया था, आँखों आँखों में ही बीती थी पिछली रात. लेकिन कमाल यह था कि न तो कोई थकान थी और न ही कोई झल्लाहट. उसे अच्छी तरह से याद था कि इसके पहले जब भी रात को जागना पड़ जाए या किसी वजह से रात को देर तक नींद नहीं आये तो अगला पूरा दिन उबासी लेते और थकान महसूस करते ही बीतता था. उसे हमेश यही लगता रहा कि कहीं वह छोटा सा बच्चा उससे दब न जाए और उसी चक्कर में वह हर आधे घंटे पर उठ उठकर उसे देखता रहा. और वह बच्चा भी पूरी रात उसके बिस्तर पर घूमता रहा, कभी सिरहाने तो कभी पैरों की तरफ.पूरी…

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Posted on February 8, 2021 at 11:11pm — 8 Comments

पिता--लघुकथा

"अरे, कल तक तो आप ठीक लग रहे थे, आज इतना परेशान दिख रहे हैं. रात में फिर से बुखार तो नहीं आया था, दवा तो ले रहे हैं ना. ये कोविड भी जो न कराये, सारा देश परेशान है?, पत्नी ने उसके चिंतित चेहरे को देखते हुए कहना जारी रखा. कोविड के चलते वह दूर से ही खाना, पानी इत्यादि दे रही थी और बीच बीच में आकर हाल भी पूछ जाती थी.

"मैं तो बिलकुल ठीक हूँ लेकिन बेटी का बुखार उतरा कि नहीं, कहीं मेरे चलते उसे भी संक्रमण न हो जाए?, उसने शायद पत्नी की बात पूरी सुनी ही नहीं. 



मौलिक एवं…

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Posted on September 16, 2020 at 10:49am — 6 Comments

दर्द का रिश्ता- लघुकथा

बहुत चहल पहल थी आज, अमूमन सप्ताहांत में थोड़ी भीड़ होती है लेकिन ऐसी भीड़ साल में दो ही दिन देखने को मिलती है, एक आज के दिन और एक मदर्स डे पर. शर्माजी एक कुर्सी पर बैठे हुए कुछ हमउम्र बुजुर्गों को देखते हुए सोच रहे थे, कुछ के चेहरे पर ख़ुशी, कुछ पर उम्मीद तो कुछ चेहरे निराश भी थे. कुछ लोग बाहर भी गए थे, उनके बच्चे ले गए थे आज के दिन को यादगार बनाने के लिए. अब बिना सेल्फी या साथ फोटो लिए भला कैसे सोशल मीडिया पर फादर्स डे मनता।

एक कार बाहर रुकी, मल्होत्रा जी उससे बाहर निकले और खड़े हो गए.…

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Posted on June 22, 2020 at 7:18pm — 4 Comments

गुरूर- लघुकथा

लगभग दो महीने होने को आये थे इस भयानक त्रासदी को और राकेश इस पूरे समय में लोगों की मदद के लिए हर समय तैयार था. दिन हो या रात, सुबह हो या शाम, बस किसी भूखे या परेशान के बारे में पता चलते ही वह अपनी टीम या कभी कभी अकेले ही निकल पड़ता था.

"भाई, तुम तो हर तरफ छा गए हो, समाचार पात्र हो या लोकल टी वी, जिसे देखो वही तुम्हारी बात कर रहा है", दोस्त का फोन आया तो वह मुस्कुरा पड़ा.

"देखो यार, ऐसा मौका जीवन में जब भी आये, अपनी तरफ से सब कुछ झोंक देना चाहिए. आखिर हम कुछ लोगों की तो मदद करने में…

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Posted on May 21, 2020 at 6:08pm — 6 Comments

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At 8:01pm on August 31, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय विनय कुमार जी नमस्कार! बहुत बहुत धन्यवाद् आपने अपना अमूल्य समय निकाला और मेरी कोशिश को सराहा | आपने सही कहा की रचना अधूरी है और शीर्षकवीहीन भी | हड़बड़ी में गड़बड़ी हो गयी है इसीलिए मैं रचना का आखिरी शब्द ' थे' भूल गया और शीर्षक तो ज़ाहिर है पहले ही भूल गया हूँ! कोशिश करता हूँ सुधरने की
At 12:52pm on April 30, 2019, TEJ VEER SINGH said…

आदरणीय विनय कुमार जी को जन्म दिन की हार्दिक बधाई एवम असीमित शुभ कामनांयें।

At 1:14am on July 16, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय विनय जी 

At 4:37am on April 30, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनायें 

 
 
 

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