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विनय कुमार
  • Male
  • Varanasi , U P
  • India
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Samar kabeer commented on विनय कुमार's blog post संस्कार- लघुकथा
"जनाब विनय कुमार जी आदाब,अच्छी लघुकथा लिखी आपने,बधाई स्वीकार करें ।"
Apr 14
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on विनय कुमार's blog post संस्कार- लघुकथा
"बहुत ही खूबसूरत कथा है आदरणीय..."
Apr 13
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post संस्कार- लघुकथा
"इस उत्साहवर्धक टिप्पणी के लिए बहुत बहुत आभार आ सुशील सरना जी"
Apr 11
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post संस्कार- लघुकथा
"इस उत्साहवर्धक टिप्पणी के लिए बहुत बहुत आभार आ नीलम उपाध्याय जी"
Apr 11
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post संस्कार- लघुकथा
"इस उत्साहवर्धक टिप्पणी के लिए बहुत बहुत आभार आ तेज वीर सिंह जी"
Apr 11
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post संस्कार- लघुकथा
"इस उत्साहवर्धक टिप्पणी के लिए बहुत बहुत आभार आ बबिता गुप्ता जी"
Apr 11
Sushil Sarna commented on विनय कुमार's blog post संस्कार- लघुकथा
"आदरणीय विनय जी .... कल और आज के बीच उभरती विचारों की खाई को पाटती इस भावपूर्ण लघुकथा के लिए हार्दिक बधाई।"
Apr 10
Neelam Upadhyaya commented on विनय कुमार's blog post संस्कार- लघुकथा
"आदरणीय विनय कुमार जी, सकारात्मक सन्देश देती हुए बहुत ही सूंदर रचना। प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
Apr 10
TEJ VEER SINGH commented on विनय कुमार's blog post संस्कार- लघुकथा
"हार्दिक बधाई आदरणीय विनय कुमार जी।लाज़वाब लघुकथा।एक सामाजिक और घरेलू समस्या को उठाना और उसका उतना ही सुंदर निराकरण करना, वह भी कितने सरल और सादगी भरे अंदाज़ से।वाह,क्या खूबसूरती है। मजा आगया।यही होती है लघुकथा की विशेषता।"
Apr 10
babitagupta commented on विनय कुमार's blog post संस्कार- लघुकथा
"बेहतरीन रचना, सकारात्मक सोच के साथ संदेशात्मक व प्रेरणात्मक बेहतरीन रचना के लिए बधाई स्वीकार कीजिएगा आदरणीय विनय  सरजी ।"
Apr 9
विनय कुमार posted a blog post

संस्कार- लघुकथा

"हम तो आज भी पल्लू सरक जाए तो तुरंत ठीक कर लेते हैं. लेकिन ये आजकल की बहुरिया, मजाल है कि पल्लू सर पर टिके", रुक्मणि को नई बहू का कपड़ा पहनना बिलकुल नहीं भा रहा था और वह रवि के सामने भी कहने से नहीं चूकीं. रवि ने पलटकर उनकी तरफ देखा और मुस्कुरा दिए. वह भी नई बहू को पिछले दो दिन से बमुश्किल साड़ी सँभालते देख रहे थे. "अब हर आदमी तुम्हारी तरह तो नहीं बन सकता ना राजेश की अम्मा, तुमको पता तो है कि बहू शहर में नौकरी करती है और इसके नीचे कई लोग काम भी करते हैं", रवि ने बात सँभालने की कोशिश की."तो, इसका…See More
Apr 9
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post वह निगाहें- लघुकथा
"आपने बिलकुल सही कहा, इस विस्तृत और उत्साह बढ़ाने वाली टिप्पणी के लिए बहुत बहुत आभार आ तेजवीर सिंह साहब"
Apr 4
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post वह निगाहें- लघुकथा
"इस टिप्पणी के लिए बहुत बहुत आभार आ मुहतरम जनाब शेख शहजाद उस्मानी साहब"
Apr 4
TEJ VEER SINGH commented on विनय कुमार's blog post वह निगाहें- लघुकथा
"हार्दिक बधाई आदरणीय विनय कुमार जी।बहुत सार्थक संदेश देती लघुकथा।यह एक कटु सत्य है कि हमारे देश में इस तरह की कुत्सित राजनीति आजकल अपने चरम पर है। सबसे दुखद पहलू यह है कि जिन लोगों को इसे मिटाने का जिम्मा है वही इसे और अधिक बढ़ावा देते हैं।पुनः…"
Apr 4
Sheikh Shahzad Usmani commented on विनय कुमार's blog post वह निगाहें- लघुकथा
"आदाब। बेहतरीन सृजन। हार्दिक बधाई आदरणीय विनय कुमार साहिब।"
Apr 3
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post वह निगाहें- लघुकथा
"इस विस्तृत टिपण्णी के लिए बहुत बहुत आभार आ नीलम उपाध्याय जी"
Apr 3

Profile Information

Gender
Male
City State
Johannesburg
Native Place
Varanasi
Profession
Banker
About me
पिछले कई सालों से लगातार पढ़ते रहने के बाद कुछ लिखने की प्रेरणा मिली तो लिखना प्रारम्भ किया |

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संस्कार- लघुकथा

"हम तो आज भी पल्लू सरक जाए तो तुरंत ठीक कर लेते हैं. लेकिन ये आजकल की बहुरिया, मजाल है कि पल्लू सर पर टिके", रुक्मणि को नई बहू का कपड़ा पहनना बिलकुल नहीं भा रहा था और वह रवि के सामने भी कहने से नहीं चूकीं.

रवि ने पलटकर उनकी तरफ देखा और मुस्कुरा दिए. वह भी नई बहू को पिछले दो दिन से बमुश्किल साड़ी सँभालते देख रहे थे.

"अब हर आदमी तुम्हारी तरह तो नहीं बन सकता ना राजेश की अम्मा, तुमको पता तो है कि बहू शहर में नौकरी करती है और इसके नीचे कई लोग काम भी करते हैं", रवि ने बात सँभालने की कोशिश…

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Posted on April 9, 2019 at 6:18pm — 10 Comments

वह निगाहें- लघुकथा

"अरे पागल हो गए हो क्या, उस ऑटो को क्यों जाने दिया. इतना टेंशन हैं चारोतरफ और हम लोग यहाँ फंसे हुए हैं जहाँ तीन दिन पहले ही दंगे हुए थे", राजेश एकदम बौखला गया.

"चिंता मत करो, अब स्थिति कुछ ठीक हैं, दूसरा आ जायेगा", उसने इत्मीनान से कहा और सामने सड़क पर देखने लगा.

तभी एक दूसरा ऑटो आता दिखाई पड़ा, ऑटो ड्राइवर को देखकर ही राजेश को समझ आ गया कि यह गैर मज़हबी है और वह थोड़ा पीछे हो गया.

"आ जाओ, चलना नहीं हैं क्या", कहते हुए वह राजेश का हाथ खींचते हुए ऑटो में बैठ गया.

कुछ समय बाद…

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Posted on April 2, 2019 at 5:36pm — 10 Comments

चिट्ठियाँ --

चिट्ठियाँ नहीं जानती

वो तो बस चली आती हैं

कभी सही पते पर

तो अक्सर गलत पते पर

लेकिन उन्हें क्या पता

कि वह सालों साल

धूल खाती रहेंगी

दरअसल उनका गंतव्य

बदल चुका होता है

लेकिन लोग अपने पते

इन चिट्ठियों के लिए

अक्सर नहीं बदलते

बस फोन नंबर ही

बदल लेते हैं

सन्देश मिलते रहते हैं

उन बदले हुए नंबरों पर

लेकिन चिट्ठियाँ आती रहती हैं

उन पुराने पतों पर

लोग अक्सर भूल जाते हैं

लोग उन्हें अब नहीं बदलते…

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Posted on March 19, 2019 at 7:13pm — 6 Comments

एक और कसम-व्यंग्य

दोस्त क्यूँ होते हैं, इस सवाल का जवाब जिंदगी के अलग अलग समय में अलग अलग हो सकता है. लेकिन एक जवाब तो कामन है कि जो आपके लिए हमेशा खड़ा रहे, आपकी हर मुसीबत में काम आए, वही असली दोस्त होता है. बहरहाल अधिकांश दोस्त ऐसे होते भी हैं, बस कुछेक अपवाद को छोड़कर.

कुछ लोगों का यह भी मानना है कि अगर सियापा ही न करें तो दोस्त कैसे, ये अलग बात है कि आप माने या न माने. अमूमन ऐसे दोस्त तो जिंदगी के शुरूआती दिनों में ही मिलते हैं जब आपके ऊपर किसी किस्म के सियापे का कोई असर नहीं पड़े. और मुझे तो बिलकुल नहीं…

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Posted on March 19, 2019 at 7:00pm — 2 Comments

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At 1:14am on July 16, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय विनय जी 

At 4:37am on April 30, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनायें 

 
 
 

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"जनाब बासुदेव अग्रवाल 'नमन' जी आदाब,अच्छे छन्द लिखे आपने,बधाई स्वीकार करें ।"
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Samar kabeer commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post आम चुनाव और समसामायिक संवाद (लघुकथाएं) :
"जनाब शैख़ शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,अच्छी लघुकथाएं हुईं,बधाई स्वीकार करें ।"
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"जनाब आमोद बिंदौरी जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । शिल्प और व्याकरण पर क़ाबू पाना…"
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