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pratibha pande
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pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 77 in the group चित्र से काव्य तक
"बहुत खूब आदरणीया सुनन्दा जी,आल्हा छंद पर आपकी ये प्रस्तुति मुग्ध कर रही है हार्दिक बधाई प्रेषित है"
Sep 16
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"हार्दिक  आभार आदरणीय मोहम्मद आरिफ जी "
Sep 16
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") सीखो जंगी खेल लड़कियों ,करता समय पुकार |      करो हिफ़ाज़त अपनी करके ,रंगीलों पर वार |.... चित्र को लड़कियों की हिफाज़त से जोड़ कर अद्भुत सृजन किया है आपने ...दोनों ही छंद शानदार हैं ...हार्दिक बधाई प्रेषित है आपको आदरणीय तस्दीक…"
Sep 16
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"जोश भरती हुई शानदार आल्हा प्रस्तुति ,   बधाई प्रेषित है आदरणीय सतीश मापत पुरी जी "
Sep 16
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"चमक रही तलवार हवा में, जैसे हो अंगार |काँप रहे हैं हिय बैरी के, देख रौद्र अवतार ||...... वाह ..बहुत सुन्दर ..बधाई प्रेषित है इस सुन्दर सरसी छंद प्रस्तुति पर आपको आदरणीय सुरेन्द्र जी "
Sep 16
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"परम्परागत यह विद्या भी, लगता है अब होगी लुप्त जानकार भी नहीं बाँटते, जाने क्यों रखते हैं गुप्त. साथ नहीं जायेगी विद्या, अब सुयोग्य झट ढूँढो शिष्य परम्परागत विद्याओं का, होगा तब ही सुखद भविष्य..... वाह ...बहुत गहन और विचारणीय बात कही है आपने इस बंद…"
Sep 16
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"प्रदत्त चित्र को सटीक परिभाषित करती शानदार आल्हा छंद प्रस्तुति ...हार्दिक बधाई प्रेषित है आदरणीय  सत्यनारायण सिंह जी "
Sep 16
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"जोश देखकर इन वीरों का, आती है मुख पर मुस्कान | ऐसे वीरों के ही कारण , है यह भारत देश महान || नहीं हिन्द का कोई सानी, सुनले दुश्मन यह ललकार | सकल विश्व में होती है अब, भारत की ही जय-जयकार ||  ...  वाह ..वाह .बहुत सुन्दर अप्रतिम  …"
Sep 16
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"भारत का ये खेल पुराना, दोनों बढ़ा रहे तौक़ीर ।क़ैद कर लिया इस मंज़र को,देखो तुम भी ये तस्वीर ।।दोनों कर्तब दिखलाते हैं,लेकर हाथों में शमशीर ।सूरज डूब रहा है थक कर,लेकिन थके नहीं ये वीर ।।....प्रदत्त चित्र को पूरी तरह परिभाषित करते इस शानदार  आल्हा…"
Sep 16
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"घेर घेरकर घोर गगन ज्यों,बरसे बादल मूसलधार।विद्युत सी तलवार चली हैं,पल में करती सीना पार।लाल वस्त्र की ढाल हाथ में,रोकन को तीखी तलवार।चीते जैसी फुर्ती के संग,इक दूजे पर करते वार।...बहुत खूब .. तलवार के वार को  लाल वस्त्र से रोकना  ..खूब…"
Sep 16
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"हार्दिक आभार आदरणीय अरुण कुमार निगम जी "
Sep 16
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"आल्हा छंद पर किये इस प्रथम प्रयास पर आपकी उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार आदरणीय सौरभ पांडे जी "
Sep 16
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"हार्दिक आभार आदरणीय समर कबीर जी , "
Sep 16
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"आपका कहना सही है कि रचना अप्रदत्त चित्र के साथ पूरा न्याय नहीं कर पाई,  आपसे  मिली सराहना के लिए हार्दिक आभार   प्रेषित करती हूँ आदरणीय अशोक जी ,  नेट और लाइट की समस्या के चलते आपकी प्रतिक्रिया पर देर से आई , क्षमा प्रार्थी…"
Sep 16
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"हार्दिक आभार आदरणीय सतीश मापत पुरी जी "
Sep 16
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"आपको रचना प्रभावित कर पाई , मेरा लिखना सफल हुआ , हार्दिक आभार आदरणीय अखिलेश जी "
Sep 16

Profile Information

Gender
Female
City State
Ratlam Madhya Pradesh
Native Place
Almora Uttarakhand
Profession
was a teacher , currently house wife and a social worker
About me
I am from a sahitya premi family ,love to read and write

Pratibha pande's Blog

राज़ [ लघुकथा प्रतिभा पाण्डे ]

“ कब से इंतज़ार कर रहा हूँ तेरा I एक राज़ की बात बतानी है I’’ राधा के बाहर आते ही अब्दुल ड्राईवर झट उसके पास आ गया I

“जल्दी बता, बहुत काम पड़ा है I” झटके का कपड़ा कमर में खोंसती राधा बोली I

“ कल तू बता रही थी ना कि मेमसाब आजकल बदली बदली हैं, बहुत मीठा बोलती हैं , टूट फूट में चिल्लाती  भी नहीं हैं I’’

“ हाँ तो ?’’

“दोनों कड़वे करेलों की दरियादिली का राज़ आज खुल गया है I’’ अब्दुल का अंदाज़ भेद भरा था  I

“दोनों मतलब ?’’

“ साहब भी आजकल मीठे हो रहे हैं I…

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Posted on July 6, 2017 at 6:00pm — 9 Comments

मेरी दादी [गीत ] प्रतिभा पांडे

 

 ऊ न   सलाई संग दादी का

बहुत पुराना था याराना

चपल उँगलियों का दादी की  

जाड़े ने भी लोहा माना

 

छत पर जब दादी को पाती

धूप गुनगुनी  मिलने आती

ख़ास सहेली बन दादी की  

वो भी फंदों से बतियाती

 

सीधे पर दो उल्टे फंदे

बुनता जाता ताना बाना

 

कल जो था बाबा का स्वेटर

अब छोटू का टोपा मफलर

नई पुरानी ऊनों के संग

चपल उँगलियाँ चलतीं सर सर

 

इस रिश्ते से उस रिश्ते…

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Posted on December 18, 2016 at 1:00pm — 8 Comments

फिर आओ गोपाल [ दोहा गीत जन्माष्टमी पर ]

 

हे पार्थ के सारथी, हे जसुमति के लाल

हरने जन की पीर अब , फिर आओ  गोपाल

 

ध्वस्त किया था कंस का ,इक दिन तुमने मान

निडर हो गया कंस अब ,और हुआ बलवान

घूम रहा है ओढ़ कर ,सज्जनता की खाल

हरने जन की पीर अब ,  फिर आओ  गोपाल

 

पाँचाली के चीर का ,किया खूब विस्तार   

नयनों में भर नीर फिर ,तुमको रही पुकार

अंध सभा में ठोकता , दुःशासन फिर  ताल

हरने जन की पीर अब  ,फिर आओ गोपाल

 

अर्जुन का रथ थाम कर…

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Posted on August 25, 2016 at 8:00am — 14 Comments

‘बेच रहा है आज तिरंगा’

 

चौराहे नाके पर बालक

बेच रहा है आज तिरंगा

 

झंडे लेकर उससे इक दो

कुछ पैसे उसको दे डालो

फिर गाडी में उन्हें लगा कर

आज़ादी की रस्म निभा लो

 

खाली हाथों घर जो लौटा

बाप करेगा पी कर पंगा

 

शनि लेकर कल घूम रहा था

सरसों तेल व जलती बाती

भूखे बच्चे चौराहे पर

कब बीतेगी साढ़े साती

 

रोजी उसकी ही खा जाता 

खादी  जाली का हर दंगा

 

बीते न बस रस्मी…

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Posted on August 15, 2016 at 11:18am — 4 Comments

Comment Wall (17 comments)

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At 7:55am on June 24, 2016, सुरेश कुमार 'कल्याण' said…
आदरणीया प्रतिभा पांडे जी आपको कविता पर कविता पसंद आई हार्दिक आभार।
At 7:35pm on June 23, 2016, kanta roy said…
इस बीच मैने महसूस किया है कि कई गहरे आत्मीय संबंध मेरी मित्र सूची में शामिल नहीं है तो अचरज से भर गई । वास्तव में हमारा रिश्ता बहुत गहरा है । अपनी सौम्य ,सहज साझीदार को हृदय से अभिनंदन प्रेषित करती हूँ । :)))
At 6:57pm on November 19, 2015, maharshi tripathi said…

धन्यवाद  आ.प्रतिभा जी |

At 3:58pm on November 19, 2015, लक्ष्मण रामानुज लडीवाला said…

जन्म दिवस पर शुभ कामनाएं व्यक्त करने अनुग्रहित करने के  लिए ह्रदयतल से आभारी हूँ आपका  आदरणीया प्रतिभा पाण्डे जी, सादर   -
ईश कृपा से ही हुऐ,सात दशक ये पार,
मित्रों इस सद्भाव का, बहुत बहुत आभार ।

- लक्ष्मण रामानुज लडीवाला,जयपुर

At 6:27pm on November 18, 2015, Sushil Sarna said…

आदरणीया प्रतिभा जी आपको सपरिवार जन्मदिन की ढेरों बधाईयाँ एवं शुभकामनाएं। 

At 5:24pm on November 18, 2015, नादिर ख़ान said…

जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनाएं आदरणीया प्रतिभा जी । 

At 2:55am on November 18, 2015, Sheikh Shahzad Usmani said…
जन्मदिन की सालगिरह पर तहे दिल बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएँ आदरणीया प्रतिभा पाण्डेय जी।
At 12:41am on November 18, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें...

At 12:40am on November 18, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीया प्रतिभा जी , आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें...

At 4:03pm on November 7, 2015, Abid ali mansoori said…

आदरणीया प्रतिभा जी हार्दिक आभार आपका!

 
 
 

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