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गंगा सूख गयी - लघुकथा –

गंगा सूख गयी - लघुकथा –

प्यारी "माँ"

तुम्हारी ऊँच नीच की तमाम नसीहतों को दरकिनार करते हुए, मैंने अपने परिवार से बड़े और धनवान खानदान के रवि से प्रेम विवाह किया था। हालांकि हम सब बहुत खुश थे। मेरे प्रति सब का व्यवहार बेहद आत्मीय था।

एक साल बाद  गुड़िया ने जन्म लिया। अचानक से परिवार के लोगों का नज़रिया बदल गया। शायद सब को पुत्र की चाहत थी। गुड़िया को तो कोई भी गोद लेना तो दूर, छूता तक नहीं था। यहाँ तक कि रवि,  उसका पिता होने के बावज़ूद , उसे प्यार नहीं करता था। मुझे यह सब बहुत…

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Added by TEJ VEER SINGH on June 21, 2018 at 8:47am — No Comments

कविता--कश्मीर अभी ज़िंदा है भाग-2

कश्मीर अभी ज़िंदा है आँसू गैस में

डल झील की बर्फ में फैले ख़ून में

जवान बेटे की मौत पर दहाड़े मारती माँ में

ईद की खुशियों में शामिल होते मातम में

जवान बेटों के अगवा होने में

आतंकियों के दुष्कर्म में

कश्मीर अभी ज़िंदा है सीज़फायर उल्लंघन में

बर्फ की वादियों में ख़ून के कोहरे में

डरी सहमी , सिसकती रंगीन कालीनों में

गलियों , चौराहों से रोज़ गुज़रते जनाज़ों में

बंद खिड़की , दरवाज़ों से झाँकते मासूमों में

देश विरोधी तकरीरों में

कश्मीर अभी ज़िंदा है जलती…

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Added by Mohammed Arif on June 21, 2018 at 12:58am — No Comments

बलि (लघुकथा)

“तुम चिन्ता मत करो। मैं तुम्हें कल ही उस नर्क से दूर ले जाऊँगा।”

आज से कई दिन पहले। “ये आदमी नहीं जानवर है।” पाखी ने अपने पिता से एक बार फिर कहा। “मुझसे रोज शराब पी के मारपीट करता है। वो भी बिना किसी बात के। बस आप मुझे यहाँ से ले जाइए।”

“शादी के बाद ससुराल ही लड़की का असली घर होता है बेटी। थोड़ा सहन करो। समय सब ठीक कर देगा।” और पिता ने एक बार फिर वही जवाब दिया।

“माँ, तुम तो मुझे समझो। या तुम भी पिता जी की तरह?” पर माँ भी समझने से ज़्यादा समझाने पर…

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Added by Mahendra Kumar on June 20, 2018 at 6:14pm — 1 Comment

लट जाते हैं पेड़- एक गीत

राह किसी की कहाँ रोकते,

हट जाते हैं पेड़

इसकी, उसकी, सबकी खातिर,

कट जाते हैं पेड़

 

तपन धूप की खुद सह लेते

देते सबको शीतल छाया.

पत्ते, छाल, तना, जड़, सब कुछ,…

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Added by बसंत कुमार शर्मा on June 20, 2018 at 4:00pm — 1 Comment

हाइकू

अंबर अटा

रेगिस्तानी धूल से

जीना मुहाल

 

 

चढ़ती धूप

सुस्ताने भर ढूँढे

टुकड़ा छांव

 

 

खड़ी है धूप

छांव से सटकर

प्रतीक्षा सांझ

 

कटते पेड़

मौन रोता जंगल

सुनता कौन

 

 

… मौलिक एवं अप्रकाशित

Added by Neelam Upadhyaya on June 20, 2018 at 3:30pm — 1 Comment

हवाओं से रूबरू (लघुकथा)

धोबन ढेर सारे कपड़़े धोकर छत पर बंधे तार पर क्लिप लगा कर सूखने डाल गई थी। कुछ ही देर में तेज़ हवायें आंधी का रूप ले चुकीं थीं। घर में कोई कपड़ों की सुध नहीं ले रहा था। वे असहाय से कपड़़े अब हवा के रुख़ के संग फड़फड़ाने लगे थे।



"बड़ा मज़ा आ रहा है! अब मैं ज़ल्दी से सूख कर राहत पाऊंंगी।" तार में लगे क्लिप और आंधी के साथ अपना संतुलन बनाते हुए एक पोषाक ने कहा।



"मुझे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा कि कैसे संभालूं अपने आप को!" एक छोटी सी आधुनिक फैशनेबल पोषाक ने क्लिप संग सब तरफ़ झूमते हुए…

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Added by Sheikh Shahzad Usmani on June 19, 2018 at 10:46pm — 4 Comments

जाहिल हैं कुछ लोग, तुम्हें काफ़िर लिखते हैं।

जाहिल हैं कुछ लोग,

तुम्हें काफ़िर लिखते हैं।

अहले दीन की सुनो, तुम्हें ज़ाकिर लिखते हैं॥

 

वो जो इल्म के जानिब,

शमशीर ले कर निकला।

बाक़ी हैं कुछ लोग, उसे माहिर लिखते हैं॥

 

तड़पती प्यास लेकर आए

थे तुम जो सहरा से।

प्यार…

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Added by SudhenduOjha on June 19, 2018 at 6:42pm — 3 Comments

चुनावी घोषणायें  - लघुकथा –

चुनावी घोषणायें  - लघुकथा –

 मंच से नेताजी अपने चुनावी भाषण में आम जनता के लिये लंबी लंबी घोषणायें राशन की तरह बाँट रहे थे।

"अरे साहब यह सब घोषणायें तो घिसी पिटी हैं। हर चुनाव में दोहराई जाती हैं"। नीचे से एक गाँव का आदमी चिल्लाया।

नेताजी ने मुस्कुराते हुए अपनी दाढ़ी पर हाथ फ़िराते हुए कहा,"अब मैं ऐसी घोषणा करने जा रहा हूँ जो इस देश के इतिहास में पहली बार होगा"।

सारे श्रोता गण एकाग्र होकर साँस  रोक कर नेताजी की अगली घोषणा का इंतज़ार करने लगे।

"हमारी सरकार एक…

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Added by TEJ VEER SINGH on June 19, 2018 at 1:00pm — 12 Comments

ग़ज़ल (हो गई उनकी महरबानी है)

(फाइलातुन _मफाइलुन_फेलुन)

कोई मुश्किल ज़रूर आनी है |

हो गई उनकी महरबानी है |

तिशनगी जो बुझाए लोगों की

तुझ में सागर कहाँ वो पानी है |

और मुझ से वो हो गए बद ज़न

बात यारों की जब से मानी है |

खा गई घर का चैन मँहगाई

उनकी जिस दिन से हुक्म रानी है |

ज़ख्म तुम ने दिए हैं ले कर दिल

जाने मन यह तो बे इमानी है |

इंक़लाब आए क्यूँ न बस्ती में

उन पे आई गज़ब जवानी है…

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Added by Tasdiq Ahmed Khan on June 19, 2018 at 9:30am — 12 Comments

ग़ज़ल(212)

उम्रभर।
मोतबर।।

मुश्किलें।
तू न डर।।

ताकती।
इक नज़र।।

धूप में।
है शज़र।।

वो तेरा।
फिक्र कर।।

रात थी।
अब सहर।।

इश्क़ ही।
शै अमर।।

मौलिक/अप्रकाशित

राम शिरोमणि पाठक

Added by ram shiromani pathak on June 19, 2018 at 8:29am — 8 Comments

बेबसी...

तपती धूप,

जर्जर शरीर,

फुटपाथ का किनारा,

बदन पर पसीना,

किसी के आने का इन्तजार में...

पथराई सी आँखें,

घुटनों पर मुँह रखे-

एक टक, एक ही दिशा में देख रही थीं...



- ना जाने कब से?



यूँ तो सामने दो छतरी पड़ी थीं, पर

कड़ी धूप में जल-जल के,

बदन काला पड़ गया था ....



रंग बिरंगे रूमाल -

सजे तो बहुत थे, पर

जिस्म पसीने में लथपथ था....



सफेद बाल,

तजुर्बों की गबाही दे रहे थे....

जिस्म पर लटकती खाल…

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Added by Rakshita Singh on June 19, 2018 at 6:45am — 10 Comments

दे गया दर्द कोई साथ निभाने वाला

2122 1122 1122 22

दे गया दर्द कोई साथ निभाने वाला ।

याद आएगा बहुत रूठ के जाने वाला ।।

जाने कैसा है हुनर ज़ख्म नया देता है ।

खूब शातिर है कोई तीर चलाने वाला ।।

उम्र पे ढल ही गयी मैकशी की बेताबी ।

अब तो मिलता ही नहीं पीने पिलाने वाला ।।

अब मुहब्बत पे यकीं कौन करेग़ा साहब ।

यार मिलता है यहां भूँख मिटाने वाला ।।

उसके चेहरे की ये खामोश अदा कहती है ।

कोई तूफ़ान बहुत जोर से आने वाला ।।

गम भी…

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Added by Naveen Mani Tripathi on June 19, 2018 at 3:56am — 8 Comments

परदेशी-बाबू

थाहों में टटोलती कुछ, कहती थी 

जाकर वहाँ फूलों की सुगन्ध में

नकली-कागज़ी मुस्कानों की उमंग में

क्या याद भी करोगे मुझको

बताओ  न 

स्मरण में सहज दोड़ती आऊँगी क्या ?

या, जाते ही वहाँ बन जाओगे वहाँ के

पराय-से अजीब अस्पष्ट परदेशी-बाबू तुम

नई मुख-आकृतियों के बीच देखोगे भी क्या

मुढ़कर, मद्धम हो रही इस पुरानी पहचान को

या सरका दोगे इसे स्मृतिपटल से

तुम मात्र मिथ्या कहला कर इसे

माना कि टूटा है हमारा वह…

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Added by vijay nikore on June 18, 2018 at 9:00pm — 3 Comments

हिमगिरी की आँखे नम हैं(कविता)

हिमगिरि की ऑंखें नम हैं|

पुनः कुठाराघात सह रहीं,

माँ भारती कुछ वर्षों से ।

पीड़ादायी दंश दे रहे ,

नवल विषधर कुछ अरसे से।

फण पर फणधर के नर्तन को,

हलधर के भाई कम हैं।

हिमगिरि की ऑंखें नम हैं|

संस्कृतियों की प्राचीन धरा पर,

देख राजनीति का अंधपतन।

सोच दुर्दशा आम जन-जन की ,

ब्याकुल-ब्यथित-द्रवित है मन।

मोहित अर्जुन को समझाने को ,

गीता की वाणी कम है।

हिमगिरि की ऑंखें नम है।

सूर्य भारत भू के…

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Added by Mohit mishra (mukt) on June 18, 2018 at 6:00pm — 5 Comments

कुछ क्षणिकाएं(6) :

कुछ क्षणिकाएं(6) :

1

नैनों का मौन

आमंत्रण

परिणाम

अभ्यंतर में

हुआ आभूषित

मौन

समर्पण

...................

2

पलकों के घरौंदों में

स्वप्न बोलते हैं

नैन

प्रभात में

यथार्थ

तौलते हैं

........................

3

चलो

हो गई मुलाकात

स्पर्शों की आंधी में

बीत गयी रात

हो गई प्रभात

............................

4

प्रेम

मौन अभिव्यक्ति…

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Added by Sushil Sarna on June 18, 2018 at 4:30pm — 4 Comments

स्वप्न ....

स्वप्न ....
 
कल तक
चूजे से मेरे स्वप्न
रोशनी से डरते थे
हर वक्त
पलकों से…
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Added by Sushil Sarna on June 18, 2018 at 3:30pm — 4 Comments

बारूद का असर( लघुकथा)

कलम को चुप-चाप और उदास बैठे देख बारूद ने पूछा," क्या बात है बहन?"

"कुछ नहीँ! तुम फिर आ गए? चले क्यों नहीं जाते... कह तो दिया तुमसे अब मैं तुम्हे स्वीकार नहीं करूंगी।" गुस्से से कलम बड़बड़ाई।

" मेरे बिना तुम्हारा कोई अस्तित्व ही नहीं हैं, समझीं ! तुम्हें मेरा स्वीकार करना ही होगा।" अट्टहास लेते हुए बारूद ने अपनी अहमियत जतायी।

" नहीं कभी नहीँ ! तुम बदल गए हो अब वो बात नहीं रही, याद करो एक समय वो था जब बिस्मिल की कलम से तुमने यह लिखवाया था : सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है…

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Added by KALPANA BHATT ('रौनक़') on June 18, 2018 at 1:30pm — 4 Comments

ग़ज़ल

2122 1212 22

नाम दिल से तेरा हटा क्या है ।

पूछते लोग माजरा क्या है ।।

नफ़रतें और बेसबब दंगे ।

आपने मुल्क को दिया क्या है ।।

अब तो कुर्सी का जिक्र मत करिए ।

आपकी बात में रखा क्या है ।।

सब उमीदें उड़ीं हवाओं में ।

अब तलक आप से मिला क्या है ।।

है गुजारिश कि आज कहिये तो ।

आपके दिल में और क्या क्या है ।।

दिल की बस्ती तबाह कर डाली ।

क्या बताऊँ तेरी ख़ता क्या…

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Added by Naveen Mani Tripathi on June 18, 2018 at 12:22pm — 12 Comments

सूर्य उगाने जैसा हो- गीत

जीवन की सूनी राहों में,

मधु बरसाने जैसा हो.

अबकी बार तुम्हारा आना

सचमुच आने जैसा हो.

 

धूप कुनकुनी खिले माघ में,

भीगा-भीगा हो सावन.

बादल गरजें जिसकी छत पर,…

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Added by बसंत कुमार शर्मा on June 18, 2018 at 10:00am — 18 Comments

जिसकी चाहत है उसे हूर औ जन्नत देदे।

जिसकी चाहत है

उसे हूर औ जन्नत देदे।

मेरे मौला मुझे बस अपनी अक़ीदत देदे॥

उतार फेंकें पैरहने -

शहंशाही दिल से।

हो सके तो हमें, तू ऐसी तबीयत देदे॥

 

रुक, मेरे किस्से में

तू क्योंकर नहीं शामिल।

तेरे किस्से में रहूँ मैं, ऐसी नीयत देदे॥

 

रात मेरी वस्ल की हो,

और साथ तेरा हो।

मेरे मौला इस रात को क़यामत देदे॥

 

वो मजबूरन जो सजदे पे

ईमान लेके आता है।

ऐसे मुसलमानों को भी अपनी नसीहत…

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Added by SudhenduOjha on June 18, 2018 at 6:30am — 4 Comments

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gumnaam pithoragarhi commented on gumnaam pithoragarhi's blog post ग़ज़ल .....
"शुक्रिया एक नई जानकारी के लिए,,,,,,"
9 hours ago
SudhenduOjha left a comment for Rakshita Singh
"आदरणीया सुश्री रक्षिता सिंह जी, नमस्कार। रचना आपको पसंद आई, धन्यवाद...."
11 hours ago
SudhenduOjha left a comment for Neelam Upadhyaya
"आदरणीया सुश्री नीलम उपाध्याय जी, नमस्कार। रचना आपको पसंद आई, धन्यवाद.... सुधेन्दु ओझा"
11 hours ago
SudhenduOjha commented on SudhenduOjha's blog post जिसकी चाहत है उसे हूर औ जन्नत देदे।
"आदरणीया सुश्री नीलम उपाध्याय जी, नमस्कार। रचना आपको पसंद आई, धन्यवाद...."
11 hours ago
Samar kabeer commented on Mahendra Kumar's blog post बलि (लघुकथा)
"जनाब महेन्द्र कुमार जी आदाब, आपकी लघुकथाएँ हमेशा मुझे पसन्द आती हैं,ये लघुकथा भी उसी श्रेणी की है,…"
11 hours ago
Samar kabeer commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post लट जाते हैं पेड़- एक गीत
"जनाब बसंत कुमार शर्मा जी आदाब,बहुत ख़ूब वाह, कितना सुंदर गीत लिखा आपने, मज़ा आ गया,इस प्रस्तुति पर…"
11 hours ago
Samar kabeer commented on Neelam Upadhyaya's blog post हाइकू
"मुहतरमा नीलम उपाध्याय जी आदाब,बहुत उम्दा हाइकू लिखे आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
11 hours ago
Samar kabeer commented on SudhenduOjha's blog post जाहिल हैं कुछ लोग, तुम्हें काफ़िर लिखते हैं।
"कृपा कर इस ग़ज़ल के अरकान लिखने का कष्ट करें ।"
11 hours ago
Samar kabeer commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post हवाओं से रूबरू (लघुकथा)
"जनाब शैख़ शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,उम्दा लघुकथा हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
11 hours ago

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