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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
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TEJ VEER SINGH commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post दीप बुझा करते है जिसके चलने पर - गजल( लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर')
"हार्दिक बधाई आदरणीय  लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर जी। बेहतरीन गज़ल। जख्म दिए  हैं  जब से  हँसकर  फूलों नेकाँटों को भी फूल हैं कहना सीख लिया।२।"
8 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post असबंधा छंद "हिंदी गौरव
"आ. भाई बासुदेव जी, अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post दीप बुझा करते है जिसके चलने पर - गजल( लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर')
"आ. भाई समर जी सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति के लिए हार्दिक धन्यवाद । क़वाफ़ी के संदर्भ में यदि सम्भव हो तो कुछ विस्तार में मार्गदर्शन कीजिएगा, जिससे सुधार में आसानी हो । इसके लिए आभार ।"
yesterday
Samar kabeer commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post दीप बुझा करते है जिसके चलने पर - गजल( लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर')
"जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी आदाब, इस ग़ज़ल के क़वाफ़ी शुद्ध नहीं हैं,देखियेगा ।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post हिंदी...... कुछ क्षणिकाएं :
"आ. भाई सुशील जी, उत्तम रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post नए ख्वाब दिखाने वाला - ग़ज़ल
"आ. भाई बसंत जी, बेहतरीन गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on TEJ VEER SINGH's blog post जलेबी - लघुकथा -
"आ. भाई तेजवीर जी, अच्छी कथा हुई है। हार्दिक बधाई ।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल मनोज अहसास इस्लाह के लिए
"आ. भाई मनोज जी , सुंदर गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post गज़ल _तुम चाहे गुज़र जाओ किसी राह गुज़र से
"आ. भाई तस्दीक अहमद जी, सुंदर गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post ईंटा पत्थर कंकड़ बजरी ले कर आऊँगा---ग़ज़ल
"आ. भाई पंकज जी, सुंदर रचना हुई है। हार्दिक बधाई ।"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on PHOOL SINGH's blog post चंद्रयान- 2 का सफर
"आ. भाई फूल सिंह जी, सुंदर रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

दीप बुझा करते है जिसके चलने पर - गजल( लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर')

२२२२/२२२२/२२२अश्क पलक से भीतर रखना सीख लियागम थे बेढब फिर  भी हँसना सीख लिया।१।जख्म दिए  हैं  जब से  हँसकर  फूलों नेकाँटों को भी फूल हैं कहना सीख लिया।२।कदम- कदम  पर  खंजर  रक्खे  अपनों  नेहम भी शातिर जिन पर चलना सीख लिया।३।दीप बुझा  करते  है  जिसके चलने परउस आँधी से हमने जलना सीख लिया।४।उनकी कोशिश  थी  पत्थर से अटल रहेंनदिया बनकर हम ने बहना सीख लिया।५।मौलिक/अप्रकाशितSee More
Wednesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-107
"आ. भाई छोटेलाल जी, सादर आभार ।"
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"आ. भाई सतविंद्र जी, सादर आभार।"
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"आ. भाई अखिलेश जी, इस उदात्त प्रशंसा के लिए हार्दिक धन्यवाद ।"
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"आ. प्रतिभा बहन, सुंदर रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
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"आ. भाई गणेश जी, प्त्तदत्तत विषय पर रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
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"आ. भाई छोटेलाल जी, इस उत्तम रचना के लिए दिल से बधाई स्वीकारें ।"
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"आ. भाई विजय जी सादर अभिवादन। बेहतरीन रचना हुई है । हार्दिक बधाई।"
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"आ. ऊषा जी, प्रदत्त विषय पर सुंदर रचना हुई है । हार्दिक बधाई।"
Sep 14

Profile Information

Gender
Male
City State
Delhi
Native Place
Dharchaula,uttarakhand
Profession
teaching

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s Blog

दीप बुझा करते है जिसके चलने पर - गजल( लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर')

२२२२/२२२२/२२२


अश्क पलक से भीतर रखना सीख लिया
गम थे बेढब फिर  भी हँसना सीख लिया।१।


जख्म दिए  हैं  जब से  हँसकर  फूलों ने
काँटों को भी फूल हैं कहना सीख लिया।२।


कदम- कदम  पर  खंजर  रक्खे  अपनों  ने
हम भी शातिर जिन पर चलना सीख लिया।३।


दीप बुझा  करते  है  जिसके चलने पर
उस आँधी से हमने जलना सीख लिया।४।


उनकी कोशिश  थी  पत्थर से अटल रहें
नदिया बनकर हम ने बहना सीख लिया।५।


मौलिक/अप्रकाशित

Posted on September 18, 2019 at 7:29pm — 3 Comments

भला करे कश्मीर का, संशोधित सम्विधान - दोहे ( लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर')

दोहे

***

वो तो बढ़चढ़ बाँटते, नफरत जिसका नाम

जन्नत में  सद्भावना, शेष  वतन  का  काम।१।

****

वैसे तो हम सब रहे, विविध रंग के फूल

किन्तु सूख अब हो गये, जैसे तीखे शूल।२।

****

पड़े जंग आतंक की, निसदिन जिन पर मार

उन्हें जिन्दगी फिर लगे, बोलो क्यों ना भार।३।

****

तन से तो अब देश में, बिलय हुआ कश्मीर

मन से भी जब हो  बिलय, बदलेगी तस्वीर।४।

****

बिस्थापित थे जो हुये, समझो उनकी पीर

जा पायें निज  ठाॅ॑व  वो, कश्मीरी…

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Posted on August 12, 2019 at 6:55am

गाँव के दोहे - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

गाँव के दोहे

संगत में जब से पड़ा, सभ्य नगर की गाँव

अपना घर वो त्याग कर, चला गैर के ठाँव।१।

***

मिलना जुलना बतकही, पनघट पर थी खूब

सब  अपनापन  मर  गया, मोबाइल  में  डूब।२।

***

बिछी सड़क कंक्रीट की, झुलसे जिसमें पाँव

पीपल कटकर गुम हुये, कौन करे फिर छाँव।३।

**

सेज माल  के  वास्ते, कटे  खेत  खलिहान

जिससे लोगों मिट गयी, गाँवों की पहचान।४।

**

सड़क योजना खा गयी, पगडंडी हर ओर

पहले सी होती  नहीं, अब  गाँवों  की…

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Posted on August 5, 2019 at 8:36am — 10 Comments

दोहे दो जून के - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

कभी किसी को ना करे, भूख यहाँ बेहाल

रोटी सब दो जून की, पाकर हों खुशहाल।१।



मुश्किल  से  दो जून की, रोटी  आती हाथ

खाने को यूँ आज तो, मिल बैठो सब साथ।२।



रोटी को दो जून की, अजब गजब से खेल

इसकी खातिर जग करे, दुश्मन से भी मेल।३।



रोटी को  दो  जून  की, क्या  ना  करते लोग

झूठ ठगी दैहिक व्यसन, सब इसके ही योग।४।



रोटी बिन दो जून की, बिलखाती है भूख

रोटी  पा  दो  जून  की, ढूँढें  लोग  रसूख।५।



सदा भाग्य ने है लिखा,…

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Posted on June 11, 2019 at 4:30pm — 6 Comments

Comment Wall (13 comments)

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At 10:47am on August 24, 2019, dandpani nahak said…
बहुत शुक्रिया आदरणीय लक्षमण धामी जी
At 10:03pm on May 24, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी आदाब
बहुत बहुत शुक्रिया हौसला बढ़ने के लिए!
At 4:04pm on August 8, 2018, babita garg said…

शुक्रिया लक्ष्मण जी

At 11:44am on March 3, 2018, Sanjay Kumar said…
बहुत बहुत धन्यवाद और आभार। कोशिश करूंगा कि कुछ योगदान कर सकूं। बस हौसला अफजाई करते रहिएगा और जहां जरूरी हो तो कुछ सिखा दीजियेगा। सादर
At 5:20pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
शुक्रिया लक्ष्मण जी
At 7:27pm on March 10, 2016, TEJ VEER SINGH said…

हार्दिक आभार आदरणीय लक्ष्मण धामी जी!आपने मुझे इस क़ाबिल समझा!

At 4:26pm on April 2, 2015, gumnaam pithoragarhi said…
लक्ष्मण धामी जी नमस्कार शुक्रिया आपने मुझे ये सम्मान दिया क्या मैं आपसे बात कर सकता हूँ यदि आप चाहें तो ................ मेरा नंबर ये है ,,,,,,,,,,7579 100213.........क्या आप अपना नंबर देंगे ?
At 10:37pm on February 17, 2015,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…

भाई लक्ष्मण धामीजी, यदि संभव हो तो 18 फरवरी को भी भेंट हो सकती है. मैं 18 फरवरी को भी प्रगति मैदान के पुस्तक मेले में उपस्थित रहूँगा.
शुभ-शुभ

At 6:34am on July 9, 2014, gumnaam pithoragarhi said…
माह के सक्रिय सदस्य के रूप में चयनित होने पर हार्दिक बधाई और शुभकामना
sir main pithoragarh se hoon achchha laga ki aap bhi dharchula se hain ............................... ek baar fir badhai ,,,,,,,,,
At 2:53pm on July 8, 2014, Sushil Sarna said…

आदरणीय लक्ष्मण धामी जी माह के सक्रिय सदस्य के रूप में चयनित होने पर हार्दिक बधाई और शुभकामना 

 
 
 

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