For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
Share

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s Friends

  • Om Prakash Agrawal
  • सालिक गणवीर
  • रवि भसीन 'शाहिद'
  • Pratibha Pandey
  • babita garg
  • Ajay Tiwari
  • amod shrivastav (bindouri)
  • TEJ VEER SINGH
  • Samar kabeer
  • Rahul Dangi Panchal
  • harivallabh sharma
  • Manoj Chhapariya
  • Dr.Vijay Prakash Sharma
  • भुवन निस्तेज
  • gumnaam pithoragarhi
 

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s Page

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

शूल सम यूँ खुरदरे ही रह गये जीवन में सच-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२१२२/२१२२/२१२२/२१२ आँख से काजल चुराने का न कौशल हम में था दूर जा कर  याद आने  का न कौशल हम में था।१। ** पेड़ पत्थर पर लिखे  थे  हम ने यूँ कुछ नाम पर पुस्तकों में खत छिपाने का न कौशल हम में था।२। ** दोस्ती  सूरज  सितारों  से  गहन  करली  बहुत चाँद को लेकिन रिझाने का न कौशल हम में था।३। ** पा गये विस्तार  तो  थे  सिन्धु  सा  जग में बहुत प्यास पर नद सा बुझाने का न कौशल हम में था।४। ** शूल सम यूँ  खुरदरे  ही  रह  गये  जीवन में सच फूल सा खुद को बनाने का न कौशल हम में था।५।मौलिक-अप्रकाशित लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'See More
4 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (मैं जो कारवाँ से बिछड़ गया)
"आ. भाई अमीरुद्दीन जी, सादर अभिवादन ।उम्दा गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।  जानकारी के लिए पूछना चाहूँगा कि क्या अढ़ व अड़ की तुकान्तता ली जा सकती है ? सादर। "
7 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-113 in the group चित्र से काव्य तक
"आ.वन्दना जी, सुन्दर छन्द हुए हैं । हार्दिक बधाई ।"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-113 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई अजय जी, सादर अभिवादन । उत्तम छंद हुए है । हार्दिक बधाई ।"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-113 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई अखिलेश जी, सादर अभिवादन । प्रदत्त चित्रानुरूप सुन्दर छन्द हुए हैं । हार्दिक बधाई ।"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-113 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. प्रतिभा बहन, सादर अभिवादन । सुंदर छन्द हुए हैं । हार्दिक बधाई ।"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on विनय कुमार's blog post पिता--लघुकथा
"आ. भाई विनय कुमार जी, अच्छी कथा हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Thursday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on सालिक गणवीर's blog post कल कहा था आज भी कल भी कहो..( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आ. भाई सालिक गणवीर जी, सादर अभिवादन । अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Thursday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Neeta Tayal's blog post वो बीता हुआ बचपन
"आ. नीता जी, अभिवादन। अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Sep 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on सुरेश कुमार 'कल्याण''s blog post मातृभाषा हिंदी
"आ. भाई सुरेश कल्याण जी, सादर अभिवादन । हिन्दी दिवस पर सुन्दर रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Sep 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post हिन्दी दिवस पर कुछ दोहे :
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन । हिन्दी दिवस पर सुंदर दोहे हुए हैं । हार्दिक बधाई । ७ वें दोहे में दास्ता की जगह दासता कर लीजिएगा । सादर ..."
Sep 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

बैठी हैं घर किये वहाँ अब तो रुदालियाँ -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२कहने को जिसमें यार हैं अच्छाइयाँ बहुतपर उसके साथ रहती हैं बरबादियाँ बहुत।१।**सजती हैं जिसके नाम से चौपाल हर तरफसुनते हैं उस  को  भाती  हैं तन्हाइयाँ बहुत।२।**कैसे कहें कि गाँव को दीपक है मिल गयाउससे ही लम्बी  रात  की परछाइयाँ बहुत।३।**पाँवों तले समाज को करके बहुत यहाँ चढ़ता गया है आदमी ऊँचाइयाँ बहुत।४।**बैठी हैं  घर  किये  वहाँ  अब  तो रुदालियाँबजती थी जिस भी गाँव में शहनाइयाँ बहुत।५।मौलिक-अप्रकाशितलक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'See More
Sep 16
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की -वो कहता है मेरे दिल का कोना कोना देख लिया
"आ. भाई नीलेश जी, सादर अभिवादन । इस बेहतरीन गजल के लिए हार्दिक बधाई स्वीकारें ।"
Sep 15
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post बैठी हैं घर किये वहाँ अब तो रुदालियाँ -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई समर कबीर जी, सादर अभिवादन ।गजल पर उपस्थिति स्नेह व मार्गदर्शन के लिए आभार ।"
Sep 15
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post बैठी हैं घर किये वहाँ अब तो रुदालियाँ -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई हर्ष महाजन की , सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति और सराहना के लिए हार्दिक धन्यवाद ।"
Sep 15
Samar kabeer commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post बैठी हैं घर किये वहाँ अब तो रुदालियाँ -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें । 'रहती हैं साथ उसके पर बरबादियाँ बहुत' ये मिसरा बह्र में नहीं है, यूँ कर सकते हैं:- 'पर उसके साथ रहती हैं बरबादियाँ बहुत'"
Sep 15
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Saurabh Pandey's blog post हिंदी-दिवस : चार दोहे // सौरभ
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन । हिन्दी दिवस की सच्चाई उजागर करते उत्तम दोहे हुए हैं । हार्दिक बधाई । हिन्दी का गुणगान कर, बढ़चढ़ कर सब आजकल से फिर नियमित करो, अंग्रेजी में काज।।**बच्चे सब कन्वेन्ट में, बढ़चढ़ पढ़ने भेजहिन्दी के सम्मान में, इक दिन चीखो…"
Sep 14
Harash Mahajan commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post बैठी हैं घर किये वहाँ अब तो रुदालियाँ -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आदरनीय भाई  लक्ष्मण धामी जी आदाब । बहुत सुंदर सृजन । "सजती हैं जिसके नाम से चौपाल हर तरफ सुनते हैं उस  को बेहतरीन । भाती  हैं तन्हाइयाँ बहुत" सादर"
Sep 14
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

बैठी हैं घर किये वहाँ अब तो रुदालियाँ -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२कहने को जिसमें यार हैं अच्छाइयाँ बहुतपर उसके साथ रहती हैं बरबादियाँ बहुत।१।**सजती हैं जिसके नाम से चौपाल हर तरफसुनते हैं उस  को  भाती  हैं तन्हाइयाँ बहुत।२।**कैसे कहें कि गाँव को दीपक है मिल गयाउससे ही लम्बी  रात  की परछाइयाँ बहुत।३।**पाँवों तले समाज को करके बहुत यहाँ चढ़ता गया है आदमी ऊँचाइयाँ बहुत।४।**बैठी हैं  घर  किये  वहाँ  अब  तो रुदालियाँबजती थी जिस भी गाँव में शहनाइयाँ बहुत।५।मौलिक-अप्रकाशितलक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'See More
Sep 14
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Er. Ganesh Jee "Bagi"'s blog post अतुकांत : अमावस की कविता (गणेश बाग़ी)
"आ. भाई गणेष जी, सादर अभिवादन ।सुन्दर अभिव्यक्ति हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Sep 14

Profile Information

Gender
Male
City State
Delhi
Native Place
Dharchaula,uttarakhand
Profession
teaching

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s Blog

शूल सम यूँ खुरदरे ही रह गये जीवन में सच-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२१२२/२१२२/२१२२/२१२



आँख से काजल चुराने का न कौशल हम में था

दूर जा कर  याद आने  का न कौशल हम में था।१।

**

पेड़ पत्थर पर लिखे  थे  हम ने यूँ कुछ नाम पर

पुस्तकों में खत छिपाने का न कौशल हम में था।२।

**

दोस्ती  सूरज  सितारों  से  गहन  करली  बहुत

चाँद को लेकिन रिझाने का न कौशल हम में था।३।

**

पा गये विस्तार  तो  थे  सिन्धु  सा  जग में बहुत

प्यास पर नद सा बुझाने का…

Continue

Posted on September 23, 2020 at 7:14am

बैठी हैं घर किये वहाँ अब तो रुदालियाँ -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२

कहने को जिसमें यार हैं अच्छाइयाँ बहुत

पर उसके साथ रहती हैं बरबादियाँ बहुत।१।

**

सजती हैं जिसके नाम से चौपाल हर तरफ

सुनते हैं उस  को  भाती  हैं तन्हाइयाँ बहुत।२।

**

कैसे कहें कि गाँव को दीपक है मिल गया

उससे ही लम्बी  रात  की परछाइयाँ बहुत।३।

**

पाँवों तले समाज को करके बहुत यहाँ 

चढ़ता गया है आदमी ऊँचाइयाँ बहुत।४।

**

बैठी हैं  घर  किये  वहाँ  अब  तो…

Continue

Posted on September 14, 2020 at 7:30am — 4 Comments

कब धरती का दुख समझे - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२२२/२२२२/२२२२/२२२

जिनके धन्धे  दोहन  वाले  कब  धरती का दुख समझे

सुन्दर तन औ' मन के काले कब धरती का दुख समझे।१।

**

जिसने समझा थाती धरा को वो घावों को भरता नित

केवल शोर  मचाने  वाले  कब  धरती का दुख समझे।२।

**

ताल, तलैया, झरने, नदिया इस के दुख में सूखे नित

और नदी सा बनते नाले  कब धरती का दुख समझे।३।

**

पेड़ कटे तो बादल  रूठा  और  हवाएँ  सब झपटीं

ये सड़कों के बढ़ते जाले कब धरती का दुख समझे।४।

**

नित्य सितारों से गलबहियाँ उनकी तो हो…

Continue

Posted on September 12, 2020 at 5:58am — 6 Comments

सितारे लौंग से कमतर नयन मृग से भी अच्छे हैं -गजल

१२२२/१२२२/१२२२/१२२२



अकेलेपन को भी हमने किया चौपाल के जैसा

बचा लेगा दुखों में  ये  हमें  फिर ढाल के जैसा।१।

**

भले ही दुश्मनी कितनी मगर आशीष हम देते

कभी दुश्मन न देखे बीसवें इस साल के जैसा।२।

**

इसी से है जगतभर में हरापन जो भी दिखता है

हमारे मन का सागर  ये  न  सूखे ताल के जैसा।३।

**

सितारे अपने भी जगमग न कमतर चाँद से होते

अगर ये भाग्य भी  होता  चमकते भाल के…

Continue

Posted on September 10, 2020 at 7:42pm — 2 Comments

Comment Wall (17 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 8:37am on May 14, 2020, Om Prakash Agrawal said…
आदरणीय
सराहना हेतु सहृदय आभार एवं धन्यवाद
At 4:12pm on May 7, 2020, सालिक गणवीर said…
हौसला अफजाई के लिए आपका ममनून हूँ आदरणीय
At 10:58am on October 18, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय लक्ष्मण धामी जी बहुत शुक्रिया
At 2:30pm on September 28, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय लक्ष्मण धामी ' मुसाफिर' जी बहुत बहुत शुक्रिया हौसला अफ़जाई का आपने समय निकाला मैं बहुत शुक्रगुज़ार हूँ
At 10:47am on August 24, 2019, dandpani nahak said…
बहुत शुक्रिया आदरणीय लक्षमण धामी जी
At 10:03pm on May 24, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी आदाब
बहुत बहुत शुक्रिया हौसला बढ़ने के लिए!
At 4:04pm on August 8, 2018, babita garg said…

शुक्रिया लक्ष्मण जी

At 11:44am on March 3, 2018, Sanjay Kumar said…
बहुत बहुत धन्यवाद और आभार। कोशिश करूंगा कि कुछ योगदान कर सकूं। बस हौसला अफजाई करते रहिएगा और जहां जरूरी हो तो कुछ सिखा दीजियेगा। सादर
At 5:20pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
शुक्रिया लक्ष्मण जी
At 7:27pm on March 10, 2016, TEJ VEER SINGH said…

हार्दिक आभार आदरणीय लक्ष्मण धामी जी!आपने मुझे इस क़ाबिल समझा!

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Samar kabeer commented on अजय गुप्ता's blog post ग़ज़ल (और कितनी देर तक सोयेंगें हम)
"जनाब अजय गुप्ता जी, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है, और चर्चा भी अच्छी हुई, बधाई स्वीकार करें। अंतिम शैर…"
2 hours ago
Samar kabeer commented on DR ARUN KUMAR SHASTRI's blog post दिल्लगी
"जनाब डॉ. अरुण कुमार जी आदाब, अच्छी कविता लिखी आपने, बधाई स्वीकार करें । निवेदन है कि रचना के साथ…"
2 hours ago
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post क्षणिकाएं : जिन्दगी पर
"जनाब सुशील सरना जी आदाब, अच्छी क्षणिकाएँ हुई हैं, बधाई स्वीकार करें ।"
2 hours ago
Samar kabeer commented on सालिक गणवीर's blog post कल कहा था आज भी कल भी कहो..( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"जनाब सालिक गणवीर जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है, बधाई स्वीकार करें । 'कल कहा था आज भी कल भी…"
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post
4 hours ago
सालिक गणवीर posted a blog post

धुआँ उठता नहीं कुछ जल रहा है..( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

1222 1222 122धुआँ उठता नहीं कुछ जल रहा है मुझे वो आग बन कर छल रहा हैपिछड़ जाउंँगा मैं ठहरा कहीं गर…See More
4 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (मैं जो कारवाँ से बिछड़ गया)
"आ. भाई अमीरुद्दीन जी, सादर अभिवादन ।उम्दा गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।  जानकारी के लिए पूछना…"
7 hours ago
अजय गुप्ता commented on अजय गुप्ता's blog post ग़ज़ल (और कितनी देर तक सोयेंगें हम)
"आदरणीय नीलेश जी, ग़ज़ल पर आपकी प्रतिक्रिया उत्साह बढ़ाती है। आप का यह कहना कि "यदि पुनर्विचार की…"
yesterday
अजय गुप्ता commented on अजय गुप्ता's blog post ग़ज़ल (और कितनी देर तक सोयेंगें हम)
"बहुत बहुत आभार चेतन जी"
yesterday
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on सालिक गणवीर's blog post धुआँ उठता नहीं कुछ जल रहा है..( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आदरणीय सालिक गणवीर जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ। चन्द अश'आ़र…"
yesterday
Harash Mahajan commented on Harash Mahajan's blog post मुहब्बत की जब इंतिहा कीजियेगा
"आदरनीय समर कबीर सर,मैं खुद भी असमंजस में था कि ग़ज़ल पोस्ट करूँ या नहीं । संतुष्टि नहीं थी लेकिन…"
yesterday
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल ..तालीम-ओ-तरबीयत ने यूँ ख़ुद्दार कर दिया
"आ. Saurabh Pandey सर, २०१४ की इस ग़ज़ल में आप सभी दाद पाकर संतुष्ट हूँ लेकिन इस की एक…"
yesterday

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service