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Ravi Shukla
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Ravi Shukla commented on Afroz 'sahr''s blog post ग़ज़ल,,,,भीगी पलकों पे कई ख़्वाब,,
"आदरणीय अफरोज साहब बहुत खूबसूरत गजल हुई । फूल में खुशबू के कई बाब हुआ करते हैं यह शेर खास तौर पर पसंद आया शेर दर शेर दिली मुबारकबाद कुबूल करें"
Nov 7
Ravi Shukla commented on Balram Dhakar's blog post अब भी क़ायम है(ग़ज़ल)- बलराम धाकड़
"आदरणीय बलराम जी बहुत ही बढ़िया गजल कही एक रवानी है पूरी ग़ज़ल में। पढ़ कर बहुत अच्छा लगा शेर दर शेर दिली मुबारकबाद कुबूल करें"
Nov 3
Ravi Shukla commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ख़त हमारे अगर जलाता है ; ग़ज़ल नूर की
"आदरणीय नीलेश जी उम्दा गजल कही आपने शम्स मुझ सा शराबी है, और मक्का खासतौर से पसंद आया इसके लिए अलग से मुबारकबाद कुबूल कीजिए पूरी ग़ज़ल के लिए दिली मुबारकबाद"
Nov 3
Ravi Shukla commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (सबसे छोटा क़ाफ़िया और सबसे लंबी रदीफ़ )
"आदरणीय तस्दीक साहब बहुत अच्छी ग़ज़ल कही आपने और यह प्रयोग भी बड़ा शानदार रहा कामयाब हुआ है जितना छोटा काफिया उतना ही लंबा रदीफ़ इस उम्दा ग़ज़ल के लिए दिली मुबारकबाद कुबूल करें"
Nov 3
Ravi Shukla commented on Samar kabeer's blog post 'ग़ालिब'की ज़मीन में एक ग़ज़ल
"आदरणीय समर साहब ग़ालिब की जमीन पर कही गई ग़ज़ल का बहुत-बहुत स्वागत है हर शेर कमाल का मुझ को खुद से सर गिरानी और है कमाल का शेर हुआ है यह दास्तान-ए-इश्क़ तो तुम सुन चुके ज़िन्दगानी की कहानी और है यह शेर भी कमाल का है इस ग़ज़ल की जितनी तारीफ की जाए कम…"
Nov 3
Ravi Shukla commented on Samar kabeer's blog post "अभी इक आदमी बाक़ी है जो इंकार कर देगा"
"आदरणीय समर साहब कमाल के अशआर कहे आपने मतले से ही ग़ज़ल ने अपनी ओर आकर्षित कर लिया मतले से मकते तक कमाल की गजल कही आपने हर शेर उम्दा है दिली मुबारकबाद कुबूल करिए"
Nov 3
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-88
"आदरणीय नदी खान साहब बहुत खूब ग़ज़ल कही अच्छे शेर निकाले शेर दर शेर मुबारकबाद कुबूल करें"
Oct 28
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-88
"आदरणीय नीलेश जी जुगनू वाले मिसरे पर आपके नजरिए से मैंने भी गौर किया मेरा विनम्र मत है उला मिसरा जुगनू के बारे में अपने आप स्पष्ट है सानी मिसरा में नाम बदल ले हम अपना हम के साथ काफिया मिलाएं जब कि जुगनू के लिए मिलाए है । काफिया के हिसाब से मिसरा सही…"
Oct 28
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-88
"आदरणीय राजेश दीदी उम्दा ग़ज़ल कही आपने और इस बार मुशायरे का फीता काटने की भी बहुत-बहुत बधाई"
Oct 28
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-88
"मेरे जीवन की उलझन को आकर वो सुलझाए तो, ढूँढ़ रहा हूँ जिसको दर दर ख़ुद ही घर आ जाए तो। उससे अपने रंजो-ग़म का उस दिन कारण पूछूँगा, दावरे महशर मुझको यारो अपने पास बुलाए तो। बात असर भी तब करती है अमल करे जब खुद पहले, मुझसे कुछ कहने से पहले ख़ुद को वो…"
Oct 28
Ravi Shukla commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...हर कदम पर जह्न मेरा आजमाता कौन है-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"आदरणीय बृजेश जी हमारे कहे को मान देने के लिये आभार"
Aug 14
Ravi Shukla commented on santosh khirwadkar's blog post कैसे कहूँ अब तुझसे कुछ कहा भी नहीं जाता,
"आदरणीय संतोष जी आपने जो रचना प्रस्‍तुत की है उसका फार्मेट तो गजल जैसा लग रहा है पर आपने इसकी बहर क्‍या ली है ये नहीं लिखा मंच पर गजल से पहले उसका अरकान लिखने का अनुशासन है जिससे सीखने में आसानी हो  । आ का काफिया हो कर भी मतले के बाद…"
Aug 14
Ravi Shukla commented on Sushil Sarna's blog post नज़र की हदों से .....
"आदरणीय सुशील जी बहुत ही अच्‍छी अतुकांत रचना हालांकि इस विधा अधिकार नहीं है इसलिये विशेष तो नहीं कह पाएंगे पर आपकी बात संप्रेषित हो रही है यही इसकी सार्थकता है"
Aug 14
Ravi Shukla commented on MOHD. RIZWAN (रिज़वान खैराबादी)'s blog post जश्न मिल जुल कर मनाओ यौमे आज़ादी है आज - ग़ज़ल
"आदरणीय रिजवान जी बहुत अच्‍छी और प्रासंगिक गजल कही आपने इस सुंदर गजल के लिये बधाई पेश है ।"
Aug 14
Ravi Shukla commented on C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi"'s blog post आएँगे जी आएँगे, अच्छे दिन यूँ आएँगे ...गीत / शून्य आकांक्षी
"आदरणीय चंद्र मोहन जी बहुत बहुत बधाई इस सुंदर गीत के लिये । अतुकांत के आगे गीतो में भी आपकी कलम चलते देख कर खुशी हुई जितना भी साथ रहा आपके अतुकांत से ही परिचय हो पाया था । सादर"
Aug 14
Ravi Shukla commented on कंवर करतार's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय कंवर करतार जी  आपकी गजल पढ़ी  बहुत बहुत बधाई आपको  दूसरा शेर देखिये  बहर खारिज हो रही है लफ्ज का उच्‍चारण कर के देखिये उसी के अनुरूप उसका वज्‍न तय होगा नकावें पहन कर जिन पर हैं बरसाते कोई पत्थर , प हन 12  तो…"
Aug 14

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Ravi Shukla's Blog

गीत : एक भारत श्रेष्ठ भारत

एक भारत श्रेष्ठ भारत आइये मिलकर बनाएं

देश का  सम्मान गौरव लक्ष्य हासिल कर बढ़ाएं

 

शांति के हम पथ प्रदर्शक ध्वज अहिंसा ले चलेंगे

विश्‍व गुरु बन कर पुन: संस्थापना सच की करेंगे

दें नहीं उपदेश अपने आचरण से  कर दिखाएं

 

धर्म पूजा, जाति भाषा, वेश भूषा, बोलियाँ सब

एकता के सूत्र में बंध कर चली है टोलियाँ सब

संगठन में शक्ति है, ऐसी लिखें फिर से कथाएं

 

रेल का हमको दिखाई दे रहा है पथ समांतर

मूल में इसके छिपा है साथ…

Continue

Posted on July 25, 2017 at 11:00am — 9 Comments

तरही ग़ज़ल

221 2121 1221 212



आए वो बज़्म ए शौक में आ कर चले गए,

फ़ित्ना सा एक दिल में उठा कर चले गए।



महफ़िल में आये जलवः दिखा कर चले गए,

जादू सा एक पल में जगा कर चले गए।



आने का और जाने का होता नहीं यकीन,

कुछ लोग इस तरह से भी आकर चले गए।



आँचल सरक के दोश से पहलू में क्या गिरा,

बैठे भी वो नहीं थे लजा कर चले गए।



पुरसान-ए-हाल के लिये यूँ आये मेरे पास

गोया कि एक रस्म निभा कर चले गए



आये वो दर्द बाँटने लेकिन… Continue

Posted on July 18, 2017 at 1:53pm — 18 Comments

तरही गजल : फूल जंगल में खिले किन के लिये

2122 2122 212

कार्ड काफी था न लॉगिन के लिए

वो हमे भी ले गए पिन के लिए



चाँद पर जाकर शहद वो खा रहे

आप अब भी रो रहे जिन के लिए



शेर को आता है बस करना शिकार

फूल जंगल में खिले किन के लिए



गुठलियों के दाम भी वो ले गया

उसने शीरीं आम जब गिन के लिये



आ गई अब ब्रेड में बीमारियाँ

जी रहे थे क्या इसी दिन के लिए



आये थे जापान से कल लौट कर

फिर उड़े वो रूस बर्लिन के लिए



पास पप्पू एक दिन हो…

Continue

Posted on May 9, 2017 at 11:46am — 27 Comments

तरही गजल : दिन सुहाने हो गये राते सुहीनी हा गईं

2122   2122   2122   212

दिन सुहाने हो गए राते सुहानी हो गईं,

उनके आते ही बहारें जाफ़रानी हो गईं।



रंग और खुशबू की बातें अब कहानी हो गईं,

मुश्किलें लगता है जैसे जाविदानी हो गईं।



आसमाँ ने जब उफ़क पर चूम धरती को लिया,

कमसिनी को छोड़कर ऋतुएं सुहानी हो गईं।



बेकरारी आज जितनी है कभी पहले न थी,

आदतें भी सब्र की जैसे कहानी हो गईं।



मिहनतों को जब मिला तेरा सहारा ए ख़ुदा,

मुश्किलें भी मेरी घट कर दरमियानी हो गईं।



रेत का इक सैल…

Continue

Posted on March 31, 2017 at 11:06am — 17 Comments

Comment Wall (9 comments)

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At 3:39pm on April 5, 2017, Gurpreet Singh said…

आदरणीय रवि शुक्ला जी आपसे बहुत अच्छी चैटिंग हो रही थी... लेकिन ऐन वक़्त पर मेरे नेट ने धोखा दे दिया ( ये अक्सर मेरे साथ ऐसा ही करता है ) और आप से  बात चीत बीच में ही कट गई ,,, खैर फिर मौका मिला तो बात आगे बढ़ांएंगे,,, संपर्क करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद 

At 11:45pm on July 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय रवि शुक्ल जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी  ग़ज़ल - व्यापार होना चाहिए को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 8:23pm on December 17, 2015, Nirdosh Dixit said…
प्रणाम स्वीकारें आदरणीय शुक्ल जी, सादर आभार आपका।
At 11:19pm on November 7, 2015, जयनित कुमार मेहता said…
आपका हार्दिक आभार आदरणीय रवि जी..
At 7:31pm on November 4, 2015,
सदस्य टीम प्रबंधन
Dr.Prachi Singh
said…

क्षमा कीजियेगा आ० रवि शुक्ल जी आज ही आपका कमेंट देखा...

करवाचौथ पर लिखा गया मेरा गीत मात्रिक गीत नहीं है... इसे फायलुन X 4 की आवृति पर  लिखा गया है..

मात्रिक गीतों में मात्रा को गिराकर पढने का कोई विधान नहीं होता .. 

मात्रिक गीत (गीतिका छंद पर आधारित) के  कुछ  उदाहरण देखिये 

http://www.openbooksonline.com/profiles/blogs/5170231:BlogPost:557225

http://www.openbooksonline.com/profiles/blogs/5170231:BlogPost:518431

मंच पर गीत नवगीत पर एक आलेख देखिये 

http://www.openbooksonline.com/group/chhand/forum/topics/5170231:Topic:358338?commentId=5170231%3AComment%3A359492&xg_source=activity&groupId=5170231%3AGroup%3A156482

At 9:36pm on September 16, 2015, shree suneel said…
आदरणीय रवि शुक्ला जी, हार्दिक बधाई आपको 'महीने का सक्रिय सदस्य' चुने जाने पर, मेरी ओर से. सादर.
At 2:01pm on September 16, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

रवि शुक्ला जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 4:59pm on July 17, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपको दोहा गीत पसंद आया, जानकार मन गद्गद् हो गया. ओबीओ का यह आयोजन "चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" छंदों को ही समर्पित है. यह एक कार्यशाला है जहाँ सभी आपस में एक दुसरे से सीखते है. आप आयोजन में सम्मिलित होंगे तो आपको कुछ नया सीखने मिलेगा और आपके अनुभव का लाभ मंच के अन्य सदस्यों को होगा. आप इस आयोजन में सम्मिलित होंगे तो बहुत ख़ुशी होगी. लिंक साझा कर रहा हूँ - ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव"

At 1:36pm on July 15, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

स्वागत अभिनन्दन 

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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आप अपनी मौलिक व अप्रकाशित रचनाएँ यहाँ पोस्ट कर सकते है.

और अधिक जानकारी के लिए कृपया नियम अवश्य देखें.

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतुयहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

 

ओबीओ पर प्रतिमाह आयोजित होने वाले लाइव महोत्सवछंदोत्सवतरही मुशायरा वलघुकथा गोष्ठी में आप सहभागिता निभाएंगे तो हमें ख़ुशी होगी. इस सन्देश को पढने के लिए आपका धन्यवाद.

 
 
 

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