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सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Sushil Sarna's blog post ख़्वाबों के रेशमी धागों से .......
"आद सुशील सरना जी सादर अभिवादन। बढ़िया रचना सृजित किया है आपने बधाई स्वीकार कीजिये"
20 seconds ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल: मनोज अहसास
"मिल ले तू इक बार अगर मिल सकता हो// मेरे समझ से यह ऐसे होना चाहिए "मिल ले तू इक बार अगर मिल…"
1 minute ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Usha Awasthi's blog post क्यों ना जड़ पर चोट ?
"आद उषा अवस्थी जी सादर अभिवादन। बढ़िया रचना हुई है। बधाई स्वीकार कीजिये।"
5 minutes ago
सालिक गणवीर posted a blog post

ग़ज़ल ( उकता गया हूँ इनसे मेरे यार कम करो....)

(221 2121 1221 212)उकता गया हूँ इनसे मेरे यार कम करो अब कामयाबियों का इश्तहार कम करोआगे बहुत है…See More
25 minutes ago
Neeta Tayal posted a blog post

रोटी

जीवित रहने के लिए जीव,रहता है जिस पर निर्भर।आटे से बनती है जो औरगोल गोल जिसकी सूरत।।सही पहचाने नाम…See More
27 minutes ago
Naveen Mani Tripathi posted a blog post

ग़ज़ल

2122 2122 2122 अपनी  रानाई  पे  तू  मग़रूर  है  क्या । बेवफ़ाई  के  लिए  मज़बूर  है  क्या ।।कम…See More
28 minutes ago
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-117
"आभार आदरणीय लक्ष्मण भाई जी।"
1 hour ago
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-117
"रोटियाँबहर :- 122*3+ 12 (शक्ति छंद आधारित) लगे ऐंठने आँत जब भूख से,क्षुधा शांत तब ये करें…"
1 hour ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-117
"आ. भाई मनन जी, विषयानुरूप उत्तम गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
2 hours ago
सालिक गणवीर commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post तेरे ख्वाहिशों के शह्र में- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'(गजल)
"भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर ' जी सादर अभिवादन एक और उम्दा ग़ज़ल के लिए हार्दिक शुभकामनाएँँ."
2 hours ago
सालिक गणवीर commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post छत पे आने की कहो- ग़ज़ल
"भाई बसंत कुमार शर्मा जी बेहद खूबसूरत ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाइयाँँ स्वीकार करें."
2 hours ago
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-117
"22 22 22 22क्या क्या होता रोटी खातिरदौड़े भूखा रोटी खातिर।1 लट्ठ लिए जो पहरा देता,वह भी जगता रोटी…"
2 hours ago

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