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Dr Ashutosh Mishra
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रवि भसीन 'शाहिद' and Dr Ashutosh Mishra are now friends
Jun 7
Dr Ashutosh Mishra commented on Dr Ashutosh Mishra's blog post कोरोना का तांडव
"आदरणीय समर सर आपका अनुमोदन मिल जाता हूं तो बड़ी तसल्ली होती है। हार्दिक आभार सादर प्रणाम"
Mar 31
Dr Ashutosh Mishra posted a blog post

पीना न तुम शराब ये आदत ख़राब है

221 2121 1221 212पीना न तुम शराब ये आदत ख़राब है कहती है हर किताब ये आदत ख़राब है बदनाम तुमने कर दिया देखो शराब को पीते हो बेहिसाब ये आदत ख़राब है कोई सवाल पूछे बला से जनाब कीदेते नहीं जवाब ये आदत ख़राब हैइक घूँट जिसने पी कभी कैसे कहे बुरा हरगिज न हो जवाब ये आदत ख़राब हैतकदीर से ये हुस्न मिला है तो क़द्र कर जाए न कर शबाव ये आदत ख़राब हैअब छोडिये गुजार दी शब् मयकशी में यूं कहते हैं सब गुलाब ये आदत ख़राब है वाइज मिला था यार मुझे मैकदे में  कलपीकर कहे शराब ये आदत ख़राब हैपी मय को आशु झूंठ कोई बोलता…See More
Mar 30
Samar kabeer commented on Dr Ashutosh Mishra's blog post कोरोना का तांडव
"जनाब आशुतोष मिश्र जी आदाब,सुंदर प्रस्तुति हेतु बधाई लें ।"
Mar 28
Samar kabeer commented on Dr Ashutosh Mishra's blog post कोरोना का क्या रोना
"अगर ये ग़ज़ल नहीं है,तो ठीक है,बधाई ।"
Mar 28
Dr Ashutosh Mishra commented on Dr Ashutosh Mishra's blog post कोरोना का क्या रोना
"आदरणीय सर सादर प्रणाम । इसमें हर पंक्ति में बस मैंने 23 मात्राओं का आकलन किया है। दूसरी पंक्ति में बात शब्द आना था वह से रह गया है। सादर"
Mar 28
Samar kabeer commented on Dr Ashutosh Mishra's blog post कोरोना का क्या रोना
"इस रचना के अरकान लिखिये ।"
Mar 28
Dr Ashutosh Mishra posted a blog post

मौसम-ए-इश्क दबे पाँब चला जाता है

2122     /1122    /1122        /22मौसम-ए-इश्क हसीं प्यास जगा जाता हैप्रेमी जोड़ों का सुकूँ चैन चुरा जाता है दिल की धड़कन को बढ़ा सीने में तूफ़ान छुपामौसम-ए-इश्क दबे पाँब चला जाता  है सर्द हो  रात  हो बरसात का मादक मंजरमौसम-ए-इश्क  सदा सब को जला जाता है   दर्द  ऐसा  भी है, अहसास सुखद है जिसका  मौसम-ए-इश्क वो अहसास करा जाता  है देख आँखों मे चमक गुल की यूँ  हैराँ मत हो मौसम-ए-इश्क हसी नूर खिला जाता है गैर अपनों से लगें अपने लगें गैरों सेमौसम-ए-इश्क तमाशा यूँ दिखा जाता हैमौलिक व अप्रकाशित See More
Mar 27
Dr Ashutosh Mishra posted a blog post

कोरोना का तांडव

पंख कटे पंछी हुए ,सीमित हुयी उड़ानसर पे अम्बर था जहाँ, छत है गगन समानसारी दुनिया सिमट कर कमरे में है कैदघर के बाहर है पुलिस, खड़ी हुई मुश्तैदजिनकी शादी ना हुयी , उनकी मानो खैरऔर हुयी जिनकी न लें, घर वाली से बैरघर के कामो में लगें, हर विपदा लें टालसाँप छुछूंदर गति न हो, करफ्यू या भूचालभागवान से लड़ नहीं, बात ये मेरी मानभागवान के केस में, चुप रहते भगवानप्रथम दिवस आखिर कटा, साँसों में थे प्रानमगर रात धरती लगी, जैसे हो श्मशानलक्ष्मण रेखा खिंच गयी,घर में रखना पाँवआस्तीन के सांप सा, कोरोना का दाँवराशन…See More
Mar 26
Dr Ashutosh Mishra commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कोरोनामय दोहे - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"वाह शानदार भाई लक्ष्मणजी हार्दिक बधाई आपको"
Mar 26
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Dr Ashutosh Mishra's blog post नन्ही सी चीटी हाथी कि ले सकती जान है
"आदरणीय डॉ आशुतोष मिश्रा जी, आपको इस ग़ज़ल पर हार्दिक बधाई। आदरणीय उस्ताद-ए-मुहतरम की बातों का संज्ञान लीजिये। अगर आप नज़्म कहें तो उसमें अनेक प्रकार की छूट है, लेकिन ग़ज़ल में नियम बहुत ही कड़े हैं, अलफ़ाज़ के वज़न को लेकर। दूसरी बात ये कहना चाहूँगा आदरणीय,…"
Mar 26
Samar kabeer commented on Dr Ashutosh Mishra's blog post नन्ही सी चीटी हाथी कि ले सकती जान है
"'क़ुरआन' को 'कुरान' नहीं लिख सकते । 'जल्दी चलो हरम में हुयी फिर अजान है' ये मिसरा ठीक है ।"
Mar 25
Dr Ashutosh Mishra posted a blog post

कोरोना का क्या रोना

जितना हो सकता हो दूरियां बनाइयेमुख से न कहके नयन से जताइयेघबराइये न दिल को दिलासा दिलाइयेविपदा की घड़ी में भी बस  मुस्कुराइयेजीभर  के बात अपनी सबको सुनाइयेबस थोड़ा और अपने मुँह को घुमाइयेघर जो आये हाथ  सोप से धुलाइयेपी के नींबू नींद भी गहरी लगाइयेबस प्राणायाम योग  ध्यान आजमाइयेप्रतिरोध की जो क्षमता उसको बढाइयेजो होलिका है भीतर उसको जलाइयेगुटके की पीक यूँ न हवा में  उड़ाइयेहो घूमने का मन  तो जरा भांग खाइयेतन हो न  टस से मस दिमाग को घुमाइयेवो मौज मस्ती सैर सपाटा भुलाइयेबाहर के खाने को न हाथ भी…See More
Mar 25
Dr Ashutosh Mishra commented on Dr Ashutosh Mishra's blog post नन्ही सी चीटी हाथी कि ले सकती जान है
"आदरणीय समर सर ।आपके मश्विरे का ह्रदय से आभारी हूँ। सर कुर आन को कुरान लिख सकते हैं की नहीं। बह्र लिखना भूल गया था ।  221 2121 1221 212 है । लास्ट में कुरआन को कुरान है हो सकता है या नहीं । 1212 कुरान है।मार्गदर्शन कीजियेगा। इस शेर को ठीक करता…"
Mar 25
Samar kabeer commented on Dr Ashutosh Mishra's blog post नन्ही सी चीटी हाथी कि ले सकती जान है
"जनाब डॉ. आशुतोष मिश्रा जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई  स्वीकार करें । ग़ज़ल के साथ अरकान भी लिख दिया करें,इससे नए सीखने वालों को आसानी होती है । 'संदेश कितना दिलकश देती कुरआन है' ये मिसरा बह्र में नहीं है,दूसरी बात…"
Mar 22
Dr Ashutosh Mishra posted blog posts
Mar 21

Profile Information

Gender
Male
City State
Uttar Pradesh
Native Place
Agra
Profession
ACADEMIC
About me
DIRECTOR AT ANDCP BABHNAN GONDA UP

Dr Ashutosh Mishra's Blog

कोरोना का तांडव

पंख कटे पंछी हुए ,सीमित हुयी उड़ान

सर पे अम्बर था जहाँ, छत है गगन समान

सारी दुनिया सिमट कर कमरे में है कैद

घर के बाहर है पुलिस, खड़ी हुई मुश्तैद

जिनकी शादी ना हुयी , उनकी मानो खैर

और हुयी जिनकी न लें, घर वाली से बैर

घर के कामो में लगें, हर विपदा लें टाल

साँप छुछूंदर गति न हो, करफ्यू या भूचाल

भागवान से लड़ नहीं, बात ये मेरी मान

भागवान के केस में, चुप रहते भगवान

प्रथम दिवस आखिर कटा, साँसों में थे…

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Posted on March 26, 2020 at 7:54pm — 2 Comments

कोरोना का क्या रोना

जितना हो सकता हो दूरियां बनाइये

मुख से न कहके नयन से जताइये


घबराइये न दिल को दिलासा दिलाइये

विपदा की घड़ी में भी बस  मुस्कुराइये


जीभर  के बात अपनी सबको सुनाइये

बस थोड़ा और अपने मुँह को घुमाइये


घर जो आये हाथ  सोप से धुलाइये

पी के नींबू नींद भी गहरी लगाइये


बस प्राणायाम योग  ध्यान आजमाइये

प्रतिरोध…
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Posted on March 25, 2020 at 1:43am — 3 Comments

नन्ही सी चीटी हाथी कि ले सकती जान है

नन्ही सी चीटी  हाथी की ले सकती जान है

कोरोना ने कराया हमें इसका भान है।

हाथों को जोड़ कहता सफाई की बात वो

पर तुमको गंदगी में दिखी अपनी शान है।

बातें अगर गलत हों तो वाजिव विरोध है

सच का भी जो विरोध करे बदजुबान है।

नक़्शे कदम पे तेरे क्यूँ सारा जहाँ चले

बातों में बस तुम्हारी ही क्या गीता ज्ञान है

कोरोना की ही शक्ल में नफरत है चीन की

जिसके लिए जमीन ही सारी जहान है

मालिक के दर पे सज्दा वजू करके  ही…

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Posted on March 19, 2020 at 12:30pm — 4 Comments

फूलीं में रस था भवरों की चाहत बनी रही

जब तक भरे थे जाम तो महफ़िल सजी रही

फूलों में रस था भँवरों की चाहत बनी रही

वो सूखा फूल फेंकते तो कैसे फेंकते

उसमे किसी की याद की खुशबू बसी रही

उस कोयले की खान में कपड़ें न बच सके

बस था सुकून इतना ही इज्जत बची रही

कुर्सी पे बैठ अम्न की करता था बात जो

उसकी हथेली खून से यारों सनी रही

दौलत बटोर जितनी भी लेकिन ये याद रख

ये बेबफा न साथ किसी के कभी रही

'आशू' फ़कीर बन तू फकीरीं में है मजा

सब छूटा कुछ बचा…

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Posted on January 28, 2020 at 12:00pm — 7 Comments

Comment Wall (22 comments)

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At 9:15am on July 19, 2018, TEJ VEER SINGH said…

जन्मदिन की हार्दिक बधाई आदरणीय डॉ आशुतोष मिश्रा जी।

At 12:24pm on March 27, 2017, नादिर ख़ान said…

 आदरणीय डा आशुतोष मिश्रा जी आदाब,जनाब समर कबीर साहब का मोबाईल नम्बर 09753845522  है किसी करणवश  समर साहब मैसेज नहीं कर पा रहे हैं | आप उनसे इस नंबर पे रास्ता कायम कर सकते है बाकी शुभ शुभ..... 

At 5:30pm on January 1, 2017, Mohammed Arif said…
आदरणीय आशुतोषजी देश भक्ति से ओतपप्रोत रचना के लिए बधाई कुबूल फरमाये । यह देश सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व करता है । यही इस देश की विशेषता है ।नववर्ष की शुभकामनाएँ स्वीकार करें ।
At 5:30pm on April 1, 2016, Sushil Sarna said…

आ. डॉ. आशुतोष मिश्रा  जी आपकी  बधाई का हार्दिक आभार। ये सब आपके स्नेह का प्रतिफल है। 

At 4:28pm on July 20, 2015, kanta roy said…
आभार आपको आदरणीय डा. आशुतोष मिश्रा जी हृदयतल से ।
At 8:29pm on June 17, 2015, Dr. Vijai Shanker said…

बहुत बहुत बधाई , आदरणीय डॉo आशुतोष मिश्रा जी , सादर।  

At 8:22pm on June 17, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आ० आशुतोष जी

आपको सक्रिय सदस्य बनना ही था बस  इन्तजार समय का था . आपको बहुत बहुत बधाई.  

At 4:05pm on June 17, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय
डॉ आशुतोष मिश्रा जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 4:42pm on October 23, 2014, Sushil Sarna said…

आपको  सपरिवार ज्योति पर्व की हार्दिक एवं मंगलमय शुभकामनाएं...

At 11:30am on August 10, 2014, Dr. Vijai Shanker said…
Thank you very much Dr. Ashutosh Misraa ji .
Regards .
Vijai
 
 
 

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