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Sushil Sarna
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Sushil Sarna posted a blog post

रोला छंद. . . . .

रोला छंद. . . .विगत पलों की याद, हृदय  को  लगे  सुहानी।छलक-छलक ये नैन, गाल पर लिखें कहानी । मौन छुअन  संवाद, देह  पर  विचरण  करते ।सुधियों  के  सब  रंग, रिक्त अम्बर  में भरते ।                    *=*=*=*तड़प- तड़प  के  रात, गुजारे  प्रेम  दिवानी ।विरहन की ये पीर, जगत ने  कब  है  जानी ।मौसम  गुजरे   साथ, प्यार  के  गये  जमाने । रह - रह  आते  याद, रात  के  वो अफसाने ।सुशील सरना / 28-5-22मौलिक एवं अप्रकाशित See More
9 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Sushil Sarna's blog post आँधियों से क्या गिला. . . . .
"आदरणीय सुशील सरना जी आदाब, क्या बहतरीन अंदाज़ के साथ ख़ूबसूरत अहसासात से लबरेज़ ग़ज़ल कही है, वाह! मुबारकबाद क़ुबूल फ़रमाएं। 'टूट जाए घर किसी का ग़र हवाओं से कहीं वक्त ही ग़र हो बुरा तो आँधियों से क्या गिला ... इस शे'र को यूँ कहना उचित…"
16 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

आँधियों से क्या गिला. . . . .

आँधियों से क्या गिला .....2122  2122  2122  212रूठ जाएँ मंजिलें  तो  रहबरों  से  क्या गिला हो समन्दर बेवफ़ा तो कश्तियों से क्या गिलाटूट जाए घर किसी का ग़र  हवाओं  से  कहीं वक्त ही ग़र हो बुरा तो आँधियों से क्या गिलायाद आया वो शज़र जिस पर गिरी थी बारिशें आज भीगे हम अकेले  बारिशों से क्या  गिलाज़ख्म  यादों के  न जाने आज क्यूँ रिसने  लगे दर्द के हों  जलजले  तो आँसुओं से क्या गिलाज़िन्दगी के रास्ते हैं  आज क्यूँ ख़ामोश से दे गये अपने दगा तो दुश्मनों से क्या गिलासुशील सरना / 25-5-22मौलिक एवं…See More
Friday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा मुक्तक .....
"आदरणीय नाथ जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय"
Thursday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post बुझते नहीं अलाव. . . . (दोहा गज़ल )
"आदरणीया रचना जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार।"
Thursday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post गज़ल - ज़ुल्फ की जंजीर से ......
"आदरणीय गुमनाम जी सृजन के भावों को मान देने और सुझाव का दिल से आभार"
Thursday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post फिर किसी के वास्ते .......
"आदरणीय अरुण जी सृजन आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभारी है सर"
Thursday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post सिन्दूर -(क्षणिकाएँ )
"आदरणीय जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार"
Thursday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post आँधियों से क्या गिला. . . . .
"आदरणीया जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार"
Thursday
Rakshita Singh commented on Sushil Sarna's blog post आँधियों से क्या गिला. . . . .
"आदरणीय सुशील जी, सादर प्रणाम । बहुत ही खूबसूरत पंक्तियाँ हार्दिक बधाई स्वीकार करें। "
Wednesday
Sushil Sarna posted blog posts
Wednesday
नाथ सोनांचली commented on Sushil Sarna's blog post दोहा मुक्तक .....
"आद0 सुशील सरना जी सादर अभिवादन। बढ़िया दोहा मुक्तक हुआ है। बधाई स्वीकार कीजिये"
Wednesday
नाथ सोनांचली commented on Sushil Sarna's blog post सिन्दूर -(क्षणिकाएँ )
"आद 0 सुशील सरना जी सादर अभिवादन। बेहतरीन सृजन,, भाव परक।बधाई स्वीकार कीजिये"
Wednesday
gumnaam pithoragarhi commented on Sushil Sarna's blog post गज़ल - ज़ुल्फ की जंजीर से ......
"मंजिलों के पास आ के दूर मंजिल हो गई .. मंजिलों के बजाय  // मंजिल ॥  किया जा सकता है क्या  शानदार गजल हुई है वाह .. "
Wednesday
Rachna Bhatia commented on Sushil Sarna's blog post बुझते नहीं अलाव. . . . (दोहा गज़ल )
"आदरणीय सुशील सरना जी बेहतरीन ग़ज़ल हुई है।बधाई स्वीकार करें।"
Tuesday
DR ARUN KUMAR SHASTRI commented on Sushil Sarna's blog post फिर किसी के वास्ते .......
" Sushil Sarna  साहिब किस कदर नजाकत से आपने अपनी रचना को पेश किया है साहिब आपकी लेखनी को सलाम **क्यूँ दिलाएं हम यकीं दिल को किसी  के वास्ते ।हो गया दिल आज गमगीं फिर किसी के वास्ते ।**गज़ब के अल्फ़ाज है सहिब "
Monday

Profile Information

Gender
Male
City State
Jaipur-Rajasthan
Native Place
New Delhi
Profession
Retired from Central Govt.Service as Superintending Officer
About me
I am a simple,sentimental and transparent person.Poetry is my hobby and passion

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रोला छंद. . . . .

रोला छंद. . . .

विगत पलों की याद, हृदय  को  लगे  सुहानी।
छलक-छलक ये नैन, गाल पर लिखें कहानी ।
मौन छुअन  संवाद, देह  पर  विचरण  करते ।
सुधियों  के  सब  रंग, रिक्त अम्बर  में भरते ।
                    *=*=*=*
तड़प- तड़प  के  रात, गुजारे  प्रेम  दिवानी ।
विरहन की ये पीर, जगत ने  कब  है  जानी ।
मौसम  गुजरे   साथ, प्यार  के  गये  जमाने ।
रह - रह  आते  याद, रात  के  वो अफसाने ।

सुशील सरना / 28-5-22

मौलिक एवं अप्रकाशित 

Posted on May 28, 2022 at 2:23pm

आँधियों से क्या गिला. . . . .

आँधियों से क्या गिला .....

2122  2122  2122  212

रूठ जाएँ मंजिलें  तो  रहबरों  से  क्या गिला

हो समन्दर बेवफ़ा तो कश्तियों से क्या गिला

टूट जाए घर किसी का ग़र  हवाओं  से  कहीं

वक्त ही ग़र हो बुरा तो आँधियों से क्या गिला

याद आया वो शज़र जिस पर गिरी थी बारिशें

आज भीगे हम अकेले  बारिशों से क्या  गिला

ज़ख्म  यादों के  न जाने आज क्यूँ रिसने  लगे

दर्द के हों  जलजले  तो आँसुओं से क्या…

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Posted on May 24, 2022 at 4:00pm — 3 Comments

सिन्दूर -(क्षणिकाएँ )

सिन्दूर  (क्षणिकाएँ ).....

सजावट की

नहीं

निभाने की चीज है

सिन्दूर

******

निभाने की नहीं

आजकल

सजावट की चीज है

सिन्दूर

******

छीन लिया है

अर्थ

सिन्दूर का

वर्तमान के

बदले परिवेश ने

******

प्रतीक है

दो साँसों के समर्पण की

अभिव्यक्ति का

सिन्दूर

******

आरम्भ है

एक विश्वास के

उदय होने का

माथे पर अलंकृत

चुटकी भर

सिन्दूर

सुशील सरना /…

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Posted on May 23, 2022 at 10:53am — 2 Comments

फिर किसी के वास्ते .......

फिर किसी के वास्ते ......

क्यूँ दिलाएं हम यकीं दिल को किसी  के वास्ते ।

हो गया दिल आज गमगीं फिर किसी के वास्ते ।

था बसाया घर कभी हमने किसी के ख़्वाब में ,

छोड़ दी हमने ज़मीं वो फिर किसी के वास्ते ।

मर मिटा था दिल कभी जो इक हसीं के नूर पर ,

तोड़ आए  दिल वहीं  वो फिर  किसी के वास्ते ।

दे गया महबूब मेरा  मुझ को  जीने की सज़ा ,

आज क्यूँ जाने हज़ीं है दिल किसी के वास्ते ।

वो तसव्वुर में हमारे बस गई कुछ इस तरह…

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Posted on May 19, 2022 at 2:12pm — 2 Comments

Comment Wall (35 comments)

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At 9:12pm on August 13, 2021, Om Parkash Sharma said…

आदरणीय सुशील सरना जी ,

सादर अभिवादन , आपके नाम और सावन पर लिखे सभी दोहे मन मोह गए । दोनों कविताएं 'मौसम को' व प्रश्न गंभीर भावों को लिए हुए है। साधुवाद । 

At 11:15pm on September 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय सुशील सरना जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी "कविता : कितना अच्छा होता" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 1:35am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका मेल बॉक्स ब्लॉक होने के कारण मेल सेंड नहीं हो रहा है. 

At 1:29am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय सुशील सरना सर, विलम्ब से प्रत्युत्तर हेतु क्षमा. आपको मेल कर दिया है. सादर 

At 10:17pm on April 7, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ० सरना भाई जी, सादर  प्रणाम!

आपका हार्दिक स्वागत है.  मित्रता से भाग्योदय होता है ,  मैं धन्य हुआ. सादर

At 9:46am on April 1, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय सुशील जी ..महीने का सक्रिय सदस्य चुने जाने पर मेरी तरफ से हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर 

At 6:02am on March 20, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ०  सुशील सरना भाई जी, सादर प्रणाम!  आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" चुने जाने पर बहुत-बहुत बधाई. सादर

At 4:22pm on March 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

सुशील सरना जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 9:00pm on February 17, 2016, Tasdiq Ahmed Khan said…

मोहतरम जनाब सुशील सरना  साहिब ,  यह  आप सब की हौसला अफ़ज़ाई का नतीजा है  , जिसके लिए   आप का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी

At 8:47pm on January 11, 2016, सतविन्द्र कुमार राणा said…
धन्यवाद आदरणीय sushil Sarna जी।आपको भी सपरिवार सादर हार्दिक शुभकामनाएं!
 
 
 

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