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Sushil Sarna
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Sushil Sarna posted blog posts
12 hours ago
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post आसमाँ .....
"'आँखों की नमीं का'--'नमीं'--"नमी"?"
14 hours ago
Sushil Sarna commented on Samar kabeer's blog post "ओबीओ की सालगिरह का तुहफ़ा"
"वाह आदरणीय समर कबीर साहिब वाह। ... ओ बी ओ की सालगिरह पर इससे अच्छा तुहफ़ा और क्या होगा। इस बेहतरीन ग़ज़ल के लिए दिल से मुबारकबाद कबूल फरमाएं सर।"
15 hours ago
Dayaram Methani commented on Sushil Sarna's blog post कोरोना पर कुछ दोहे :
"सुंदर एवं सामयिक दोहे। बधाई स्वीकार करें आदरणीय सुशील सरना जी।"
16 hours ago
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post कोरोना पर कुछ दोहे :
"जनाब सुशील सरना जी आदाब,अच्छे दोहे लिखे आपने,बधाई स्वीकार करें ।"
16 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

आसमाँ .....

आसमाँ ..... बहुत ढूँढा आसमाँ तुझे दर्द की लकीरों में मोहब्बत के फ़कीरों में ख़ामोश जज़ीरों में मगर तू छुपा रहा धड़कन की तड़पन में यादों के दर्पण में कलाई के कंगन में वक्त सरकता रहा सागर छलकता रहा अब्र बरसता रहा मगर तू न समझा मैं किसे ढूँढता हूँ पागल आसमाँ मैं तो इस दिल की ज़मी का आँखों की नमीं का अपनी ज़बीं का आसमाँ ढूँढता हूँ सुशील सरना मौलिक एवं अप्रकाशितSee More
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post आसमाँ .....
"आदरणीय समर कबीर साहिब, आदाब .... कम्प्यूटर में तकनीकी व्यवधान के कारण एक अरसे के बाद आपसे मिलना हुआ है। विलम्ब के लिए क्षमा। सृजन के भावों को मान देने का दिल से शुक्रिया। सर मैं असल में भीड़ जैसी कुछ बात कहने का प्रयास कर रहा था। मैं इस शब्द का…"
yesterday
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post आसमाँ .....
"जनाब सुशील सरना जी आदाब, अच्छी कविता लिखी आपने,बधाई सवीकार करें । 'ख़ामोश ज़खीरों में' इस पंक्ति में 'ज़खीरों'  का क्या अर्थ लिया है आपने? 'आँखों की नमीं का' इस पंक्ति में 'नमीं' को "नमी" कर लें ।"
Tuesday
Sushil Sarna posted a blog post

आसमाँ .....

आसमाँ ..... बहुत ढूँढा आसमाँ तुझे दर्द की लकीरों में मोहब्बत के फ़कीरों में ख़ामोश जज़ीरों में मगर तू छुपा रहा धड़कन की तड़पन में यादों के दर्पण में कलाई के कंगन में वक्त सरकता रहा सागर छलकता रहा अब्र बरसता रहा मगर तू न समझा मैं किसे ढूँढता हूँ पागल आसमाँ मैं तो इस दिल की ज़मी का आँखों की नमीं का अपनी ज़बीं का आसमाँ ढूँढता हूँ सुशील सरना मौलिक एवं अप्रकाशितSee More
Monday
vijay nikore commented on Sushil Sarna's blog post होली के दोहे :
"दोहे अच्छे लगे। बधाई मित्र सुशील जी"
Mar 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post होली के दोहे :
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन एवं होली की हार्दिक शुभकामनाएं ।  होली के संदर्भ में सुन्दर दोहे हुए हैं , हार्दिक बधाई ।"
Mar 10
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post होली के दोहे :
"जनाब सुशील सरना जी आदाब,होली विषय पर आपने बहुत अच्छे दोहे लिखे हैं,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । भाई जवाहर लाल सिंह जी की बात का संज्ञान लें ।"
Mar 8
JAWAHAR LAL SINGH commented on Sushil Sarna's blog post होली के दोहे :
"आदरणीय सुशील सरना जी, सादर अभिवादन! फागुन के उमंग में सभी दोहे सराबोर हैं.  एक बार हर अपने को दीजिए, अपनेपन का रंग।मिटे न मिलने की कभी, जीवन में उमंग।।११ में चतुर्थ चरण को एक बार पुन: देख लें  ... सादर "
Mar 7
Sushil Sarna posted a blog post

होली के दोहे :

होली के दोहे :नटखट नैनों ने किया, कुछ ऐसा हुड़दंग। नार नशा हावी हुआ, फीकी लगती भंग।।१साजन लेकर हाथ में, आये आज गुलाल। बाहुबंध में शर्म से, लाल हो गए गाल।। २अधरों पर है खेलती, एक मधुर मुस्कान। तन पर रंगों ने रची, रिश्तों की पहचान।। ३होली के त्योहार पर ,इतना रखना ध्यान। नारी का अक्षत रहे ,रंगों में सम्मान।।४गौर वर्ण पर रंग ने, ऐसा किया धमाल। नैनों नें की मसखरी, गाल हो गए लाल।। ५प्रेम प्यार का राग है, होली का त्योहार । देह -देह पर सज रही, रंगों की बौछार ।।६होली का त्योहार है, रिश्तों की मनुहार। मन…See More
Mar 6
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post ज़बान :
"जनाब सुशील सरना जी आदाब,अच्छी रचना हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Mar 5
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post ज़बान :
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन । अच्छी कविता हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Mar 5

Profile Information

Gender
Male
City State
Jaipur-Rajasthan
Native Place
New Delhi
Profession
Retired from Central Govt.Service as Superintending Officer
About me
I am a simple,sentimental and transparent person.Poetry is my hobby and passion

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Sushil Sarna's Blog

क्षणिकाएँ :

क्षणिकाएँ :

क्या ख़बर
हम फिर
मिलें न मिलें
मगर
छोड़ जाऊँगा मैं
समय के भाल पर
हमारे मिलन की गवाह

परछाईयाँ
काँपते चाँद की

.............................

झुलसे हुए होठों पर
रुक गया
फिसल कर
एक अश्क
बेवफ़ाई का

....................

खाली घड़ा
सूखी रोटी
टूटे छप्परों से झाँकती
झूठी आस की
धवल चाँदनी


सुशील सरना /2.4.20
मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on April 2, 2020 at 5:20pm

कोरोना पर कुछ दोहे :

कोरोना पर कुछ  दोहे :
वृत कोरोना का नहीं, इतना भी आसान।
रहना निज आवास में, है मात्र समाधान।।
कोरोना के काल से, हुआ विश्व…
Continue

Posted on April 1, 2020 at 5:30pm — 2 Comments

आसमाँ .....

आसमाँ .....

बहुत ढूँढा
आसमाँ तुझे
दर्द की लकीरों में
मोहब्बत के फ़कीरों में
ख़ामोश जज़ीरों में
मगर
तू छुपा रहा
धड़कन की तड़पन में
यादों के दर्पण में
कलाई के कंगन में
वक्त सरकता रहा
सागर छलकता रहा
अब्र बरसता रहा
मगर
तू न समझा
मैं किसे ढूँढता हूँ
पागल आसमाँ
मैं तो
इस दिल की ज़मी का
आँखों की नमीं का
अपनी ज़बीं का
आसमाँ ढूँढता हूँ

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on March 30, 2020 at 8:30pm — 3 Comments

होली के दोहे :

होली के दोहे :

नटखट नैनों ने किया, कुछ ऐसा हुड़दंग।

नार नशा हावी हुआ, फीकी लगती भंग।।१

साजन लेकर हाथ में, आये आज गुलाल।

बाहुबंध में शर्म से, लाल हो गए गाल।। २

अधरों पर है खेलती, एक मधुर मुस्कान।

तन पर रंगों ने रची, रिश्तों की पहचान।। ३

होली के त्योहार पर ,इतना रखना ध्यान।

नारी का अक्षत रहे ,रंगों में सम्मान।।४

गौर वर्ण पर रंग ने, ऐसा किया धमाल।

नैनों नें की मसखरी, गाल हो गए लाल।।…

Continue

Posted on March 6, 2020 at 5:08pm — 4 Comments

Comment Wall (34 comments)

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At 11:15pm on September 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय सुशील सरना जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी "कविता : कितना अच्छा होता" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 1:35am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका मेल बॉक्स ब्लॉक होने के कारण मेल सेंड नहीं हो रहा है. 

At 1:29am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय सुशील सरना सर, विलम्ब से प्रत्युत्तर हेतु क्षमा. आपको मेल कर दिया है. सादर 

At 10:17pm on April 7, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ० सरना भाई जी, सादर  प्रणाम!

आपका हार्दिक स्वागत है.  मित्रता से भाग्योदय होता है ,  मैं धन्य हुआ. सादर

At 9:46am on April 1, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय सुशील जी ..महीने का सक्रिय सदस्य चुने जाने पर मेरी तरफ से हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर 

At 6:02am on March 20, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ०  सुशील सरना भाई जी, सादर प्रणाम!  आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" चुने जाने पर बहुत-बहुत बधाई. सादर

At 4:22pm on March 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

सुशील सरना जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 9:00pm on February 17, 2016, Tasdiq Ahmed Khan said…

मोहतरम जनाब सुशील सरना  साहिब ,  यह  आप सब की हौसला अफ़ज़ाई का नतीजा है  , जिसके लिए   आप का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी

At 8:47pm on January 11, 2016, सतविन्द्र कुमार राणा said…
धन्यवाद आदरणीय sushil Sarna जी।आपको भी सपरिवार सादर हार्दिक शुभकामनाएं!
At 2:33pm on January 5, 2016, अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव said…

तन स्वस्थ रहे मन में उमंग...सुशील भाईजी आपको भी सपरिवार नव वर्ष की ढेरों  शुभकामनायें

 
 
 

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