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Sushil Sarna
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सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Sushil Sarna's blog post ३००वीं कृति .... श्रृंगार दोहे ...
"आद0 सुशील सरना जी स्आदर अभिवादन। 300वी कृति पर बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएं। आप सृजन पथ पर नित नए आयाम गढ़ते रहें, ऐसी शुभकामना प्रेषित है। सादर"
18 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post मधुर दोहे :
"आदरणीय समर कबीर साहिब, आदाब मधुर दोहों पर आपकी मधुर प्रतिक्रिया ने उनकी मधुरता में चार चाँद लगा दिए  ... तहे दिल से शुक्रिया।  विशवास रखिये अब जब भी हम आएंगे  ५ दोहों से कम तो कभी न आएंगे।  सादर। ... "
Thursday
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post मधुर दोहे :
"जनाब सुशील सरना जी आदाब,बहुत सुंदर दोहे रचे आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । एक प्रस्तुति में कम से कम पांच दोहे तो होना चाहिए ।"
Thursday
Sushil Sarna commented on Mohammed Arif's blog post हाइकु
"आदरणीय मो. आरिफ साहिब, बहुत की सुंदर और सार्थक हाईकू हुए हैं।  हार्दिक बधाई सर। "
Thursday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post मधुर दोहे :
"आदरणीय मो. आरिफ साहिब, आदाब , सृजन को अपनी मनोहारी प्रतिक्रिया से मान देने का दिल से आभार।"
Thursday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post मधुर दोहे :
"आदरणीय सलीम साहिब आदाब , प्रस्तुति के भावों को अपनी मधुर प्रशंसा से अलंकृत करने का दिल से आभार।"
Thursday
Mohammed Arif commented on Sushil Sarna's blog post मधुर दोहे :
"प्रेम की सार्थक अभिव्यक्ति करते बेहतरीन दोहे । हार्दिक बधाई आदरणीय सुशील सरना जी ।"
Thursday
SALIM RAZA REWA commented on Sushil Sarna's blog post मधुर दोहे :
"आदरणीय सुशील जी, ख़ूबसूरत दोहों के लिए मुबारक़बाद. बाहुपाश से देह के, टूटे सब अनुबंध। स्वप्न सेज महका गयी ,मधुर बंध की गंध।। वाह"
Wednesday
Sushil Sarna posted blog posts
Wednesday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post ३००वीं कृति .... श्रृंगार दोहे ...
"आदरणीय समर कबीर साहिब, आदाब। ... सृजन के भावों को आत्मीय सम्मान देने का दिल से आभार।  आपका कहन  बिलकुल सही है।  मैं इसे अभी एडिट कर सुधार  हूँ। इस हेतु आपका हार्दिक आभार। "
Wednesday
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post ३००वीं कृति .... श्रृंगार दोहे ...
"जनाब सुशील सरना जी आदाब,बहुत उम्दा दोहे लिखे आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । 'दे दे देह को मेरी' इसके विषम चरण में 212 होना चाहिए यहां 222हो रहा है,इसे यूँ कर सकते हैं:- 'देदे मेरी देह को'"
Wednesday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post पीला माहताब ...
"आदरणीय सुरेन्दर नाथ सिंह जी प्रस्तुति आपकी आत्मीय प्रशंसा का दिल से आभारी है।"
Wednesday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post पीला माहताब ...
"आदरणीय विजय निकोर साहिब, सादर प्रणाम ... प्रस्तुति के भावों को अपनी मनोहारी प्रतिक्रिया से मान देने का दिल से आभार।"
Wednesday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post ३००वीं कृति .... श्रृंगार दोहे ...
"आदरणीय बृजेश कुमार जी सृजन आपकी स्नेहिल अभिव्यक्ति का आभारी है।"
Wednesday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post ३००वीं कृति .... श्रृंगार दोहे ...
"आदरणीय मो.आरिफ साहिब, आदाब, सृजन के भावों को अपनी अमूल्य प्रशंसा से शोभित करने का दिल से आभार।"
Wednesday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post ३००वीं कृति .... श्रृंगार दोहे ...
"आदरणीय सलीम रज़ा साहिब, आदाब , सृजन आपकी मनोहारी प्रशंसा का आभारी है।"
Wednesday

Profile Information

Gender
Male
City State
Jaipur-Rajasthan
Native Place
New Delhi
Profession
Retired from Central Govt.Service as Superintending Officer
About me
I am a simple,sentimental and transparent person.Poetry is my hobby and passion

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Sushil Sarna's Blog

मधुर दोहे :

मधुर दोहे :

मन के मधुबन में मिले, मन भ्र्मर कई बार।
मूक नयन रचते रहे, स्पंदन का संसार।।

थोड़ा सा इंकार था थोड़ा सा इकरार।
सघन तिमिर में हो गयी , प्रणय सुधा साकार।।

बाहुपाश से देह के, टूटे सब अनुबंध।
स्वप्न सेज महका गयी ,मधुर बंध की गंध।।


सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on November 15, 2017 at 9:22pm — 6 Comments

३००वीं कृति .... श्रृंगार दोहे ...

३००वीं कृति .... श्रृंगार दोहे ...

मन चाहे करती रहूँ , दर्पण में शृंगार।
जब से अधरों को मिला, अधरों का उपहार।1।

अब सावन बैरी लगे, बैरी सब संसार।
जब से कोई रख गया, अधरों पे अंगार।2।

नैंनों की होने लगी , नैनों से ही रार।
नैन द्वन्द में नैन ही, गए नैन से हार।3।

जीत न चाहूँ प्रीत में , मैं बस चाहूँ हार।
'दे दे मेरी देह को', स्पर्शों का शृंगार।4।

सुशील सरना

मौलिक एवं अप्रकाशित 

Posted on November 13, 2017 at 8:00pm — 11 Comments

पीला माहताब ...

पीला माहताब ...

ठहरो न !

बस

इक लम्हा

रुक जाओ

मेरे शानों पे

जरा झुक जाओ

मेरे अहसासों की गठरी को

जरा खोलकर देखो

जज्बातों के ज़जीरों पे

हम दोनों की सांसें

किस क़दर

इक दूसरे में समाई हैं

मेरे नाज़ार जिस्म के

हर मोड़ पर

तुम्हारी पोरों के लम्स

मुझे

तुम्हारे और करीब ले आते हैं

थमती साँसों में भी

मैं तुम्हारी नज़रों की नमी से

नम हुई जाती हूँ

देखो

वो अर्श के माहताब को

हिज़्र…

Continue

Posted on November 11, 2017 at 8:33pm — 10 Comments

गुस्ताखियाँ....

गुस्ताखियाँ....

शानों पे लिख गया कोई इबारत वो रात की। 
...महकती रही हिज़ाब में शरारत वो रात की। 
......करते रहे वो जिस्म से गुस्ताखियाँ रात भर -
..........फिर ढह गयी आगोश में इमारत वो रात की।

सुशील सरना

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on November 7, 2017 at 8:22pm — 10 Comments

Comment Wall (34 comments)

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At 11:15pm on September 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय सुशील सरना जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी "कविता : कितना अच्छा होता" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 1:35am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका मेल बॉक्स ब्लॉक होने के कारण मेल सेंड नहीं हो रहा है. 

At 1:29am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय सुशील सरना सर, विलम्ब से प्रत्युत्तर हेतु क्षमा. आपको मेल कर दिया है. सादर 

At 10:17pm on April 7, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ० सरना भाई जी, सादर  प्रणाम!

आपका हार्दिक स्वागत है.  मित्रता से भाग्योदय होता है ,  मैं धन्य हुआ. सादर

At 9:46am on April 1, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय सुशील जी ..महीने का सक्रिय सदस्य चुने जाने पर मेरी तरफ से हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर 

At 6:02am on March 20, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ०  सुशील सरना भाई जी, सादर प्रणाम!  आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" चुने जाने पर बहुत-बहुत बधाई. सादर

At 4:22pm on March 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

सुशील सरना जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 9:00pm on February 17, 2016, Tasdiq Ahmed Khan said…

मोहतरम जनाब सुशील सरना  साहिब ,  यह  आप सब की हौसला अफ़ज़ाई का नतीजा है  , जिसके लिए   आप का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी

At 8:47pm on January 11, 2016, सतविन्द्र कुमार said…
धन्यवाद आदरणीय sushil Sarna जी।आपको भी सपरिवार सादर हार्दिक शुभकामनाएं!
At 2:33pm on January 5, 2016, अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव said…

तन स्वस्थ रहे मन में उमंग...सुशील भाईजी आपको भी सपरिवार नव वर्ष की ढेरों  शुभकामनायें

 
 
 

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