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Sushil Sarna
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Sushil Sarna commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post दीप कोई तो जलाये शाम के (गजल) - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"वाह आदरणीय लक्ष्मण धामी जी बहुत सुंदर और सार्थक प्रस्तुति सर"
Nov 30
Sushil Sarna commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post गजल-लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"वाह आदरणीय लक्ष्मण धामी जी बहुत सुंदर प्रस्तुति है सर जी ।हार्दिक बधाई सर"
Nov 30
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा त्रयी. . . मैं क्या जानूं

दोहा त्रयी :मैं क्या जानूं मैं क्या जानूं आज का, कल क्या होगा रूप । सुख की होगी छाँव या , दुख की  होगी  धूप ।।मैं क्या जानूं भोर का, होगा  क्या  अंजाम। दिन बीतेगा किस तरह , कैसी होगी शाम ।।मैं  क्या  जानूं  जिन्दगी, क्या  खेलेगी  खेल । उड़ जाए कब तोड़ कर , पंछी तन की जेल ।। सुशील सरना / 17-11-22मौलिक एवं अप्रकाशित See More
Nov 29
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा त्रयी. . . मैं क्या जानूं
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन आपकी स्नेहिल प्रशंसा का दिल से आभारी है सर"
Nov 29
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा त्रयी. . . मैं क्या जानूं
"आदरणीय समर कबीर जी आदाब, सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय जी ।सहमत एवं संशोधित । हार्दिक आभार सर"
Nov 29
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा त्रयी. . . मैं क्या जानूं
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। अच्छे दोहे हुए हैं । हार्दिक बधाई। आ. भाई समर जी की बात से सहमत हूँ देखिएगा। "
Nov 28
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post दोहा त्रयी. . . मैं क्या जानूं
"जनाब सुशील सरना जी आदाब, अच्छे दोहे हुए हैं, बधाई स्वीकार करें I  'मैं क्या जानूं भोर की, होगा  क्या  अंजाम' इस पंक्ति में 'की' की जगह "का" होना चाहिए ,क्यों कि 'अंजाम' शब्द पुल्लिंग है…"
Nov 27
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा त्रयी. . . मैं क्या जानूं
"आदरणीया डा. प्राची सिंह जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार"
Nov 24

सदस्य टीम प्रबंधन
Dr.Prachi Singh commented on Sushil Sarna's blog post दोहा त्रयी. . . मैं क्या जानूं
"मैं क्या जानूं आज का, कल क्या होगा रूप ।सुख की होगी छाँव या , दुख की  होगी  धूप ।। "गत आगत में प्रेम का, है अद्भुत सम्बन्ध मन में रोंपे पुष्प जो, होगी वह ही गंध" मैं क्या जानूं भोर की, होगा  क्या  अंजाम।दिन…"
Nov 21
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा त्रयी. . . मैं क्या जानूं

दोहा त्रयी :मैं क्या जानूं मैं क्या जानूं आज का, कल क्या होगा रूप । सुख की होगी छाँव या , दुख की  होगी  धूप ।।मैं क्या जानूं भोर का, होगा  क्या  अंजाम। दिन बीतेगा किस तरह , कैसी होगी शाम ।।मैं  क्या  जानूं  जिन्दगी, क्या  खेलेगी  खेल । उड़ जाए कब तोड़ कर , पंछी तन की जेल ।। सुशील सरना / 17-11-22मौलिक एवं अप्रकाशित See More
Nov 18
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post भिखारी छंद
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय"
Nov 17
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post बालदिवस पर चन्द दोहे ......
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभारी है सर"
Nov 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post भिखारी छंद
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। अच्छी रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
Nov 16
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post बालदिवस पर चन्द दोहे ......
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। बाल दिवस पर अच्छे दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
Nov 16
Sushil Sarna posted a blog post

बालदिवस पर चन्द दोहे ......

बालदिवस पर चन्द दोहे :. . . .बाल दिवस का बचपना, क्या जाने अब अर्थ ।अर्थ चक्र में पीसते, बचपन चन्द समर्थ ।।बाल दिवस से बेखबर, भोलेपन से दूर ।बना रहे कुछ भेड़िये , बच्चों को मजदूर ।।भाषण में शिक्षा मिले, भाषण ही दे प्यार ।बालदिवस पर बाँटते, नेता प्यार -दुलार ।।फुटपाथों पर देखिए, बच्चों का संसार ।दो रोटी की चाह में , झोली रहे पसार ।।गाली की लोरी मिले, लातों के उपहार ।इनका बचपन खा गया,  अर्थ लिप्त संसार ।।बाल दिवस पर दीजिए, बच्चों को उपहार ।शिक्षा से धनवान हों, उचित मिलें संस्कार ।।बच्चे मिट्टी के…See More
Nov 16
डॉ छोटेलाल सिंह commented on Sushil Sarna's blog post तो रो दिया .......
"आदरणीय सुशील सरना जी सादर अभिवादन एक बहुत ही उत्कृष्ट रचना पढ़कर मुझे खुशी मिली सादर शुभकामनाएं"
Nov 15

Profile Information

Gender
Male
City State
Jaipur-Rajasthan
Native Place
New Delhi
Profession
Retired from Central Govt.Service as Superintending Officer
About me
I am a simple,sentimental and transparent person.Poetry is my hobby and passion

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दोहा त्रयी. . . मैं क्या जानूं

दोहा त्रयी :मैं क्या जानूं 

मैं क्या जानूं आज का, कल क्या होगा रूप ।
सुख की होगी छाँव या , दुख की  होगी  धूप ।।

मैं क्या जानूं भोर का, होगा  क्या  अंजाम।
दिन बीतेगा किस तरह , कैसी होगी शाम ।।

मैं  क्या  जानूं  जिन्दगी, क्या  खेलेगी  खेल ।
उड़ जाए कब तोड़ कर , पंछी तन की जेल ।।


सुशील सरना / 17-11-22

मौलिक एवं अप्रकाशित 

Posted on November 17, 2022 at 12:00pm — 6 Comments

बालदिवस पर चन्द दोहे ......

बालदिवस पर चन्द दोहे :. . . .

बाल दिवस का बचपना, क्या जाने अब अर्थ ।

अर्थ चक्र में पीसते, बचपन चन्द समर्थ ।।

बाल दिवस से बेखबर, भोलेपन से दूर ।

बना रहे कुछ भेड़िये , बच्चों को मजदूर ।।

भाषण में शिक्षा मिले, भाषण ही दे प्यार ।

बालदिवस पर बाँटते, नेता प्यार -दुलार ।।

फुटपाथों पर देखिए, बच्चों का संसार ।

दो रोटी की चाह में , झोली रहे पसार ।।

गाली की लोरी मिले, लातों के उपहार ।

इनका बचपन खा गया,  अर्थ लिप्त संसार ।।

बाल दिवस पर दीजिए,…

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Posted on November 14, 2022 at 3:30pm — 2 Comments

भिखारी छंद

भिखारी छंद -

 24 मात्रिक - 12 पर यति - पदांत-गा ला

साजन    के   दीवाने , दो   नैना   मस्ताने ।

कभी  लगें  ये  अपने ,  कभी  लगें  बेगाने ।।

पागल दिल को भाते, उसके सपन  सुहाने ।

खामोशी  की   बातें, खामोशी   ही   जाने ।।

                   =×=×=×=

रैन काल के सपने , भोर  लगें  अनजाने ।

अवगुंठन में बनते  , प्यार भरे  अफसाने ।।

बिन बोले ही होतीं  , जाने क्या-क्या बातें ।

मन से कभी न जातीं  , आलिंगन की रातें ।।

सुशील सरना…

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Posted on November 8, 2022 at 4:54pm — 4 Comments

दुर्घटना. . . ( लघुकथा )

दुर्घटना ....(लघुकथा)

"निकल लो उस्ताद ।  बहुत भयंकर दुर्घटना हुई है । लगता है वो शायद मर गया है ।" कल्लू हेल्पर ने ड्राइवर रघु से कहा ।

रघु ने व्यू  मिरर से पीछे देखा तो दुर्घटना स्थल पर भीड़ दिखी । रघु ने ट्रक भगाने में भलाई समझी । रघु वहाँ से चला तो घर जा कर रुका।

"कल्लू ये घर पर भीड़ कैसी है ।" रघु ट्रक रोकते हुए बोला ।

भीड़ को चीरते हुए रघु जैसे ही अन्दर पहुंचा, तो देख कर सन्न रह गया । उसका 10 साल का इकलौता   बेटा रक्तरंजित  बीच आँगन में तड़प रहा…

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Posted on November 6, 2022 at 12:52pm — 2 Comments

Comment Wall (35 comments)

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At 9:12pm on August 13, 2021, Om Parkash Sharma said…

आदरणीय सुशील सरना जी ,

सादर अभिवादन , आपके नाम और सावन पर लिखे सभी दोहे मन मोह गए । दोनों कविताएं 'मौसम को' व प्रश्न गंभीर भावों को लिए हुए है। साधुवाद । 

At 11:15pm on September 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय सुशील सरना जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी "कविता : कितना अच्छा होता" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 1:35am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका मेल बॉक्स ब्लॉक होने के कारण मेल सेंड नहीं हो रहा है. 

At 1:29am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय सुशील सरना सर, विलम्ब से प्रत्युत्तर हेतु क्षमा. आपको मेल कर दिया है. सादर 

At 10:17pm on April 7, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ० सरना भाई जी, सादर  प्रणाम!

आपका हार्दिक स्वागत है.  मित्रता से भाग्योदय होता है ,  मैं धन्य हुआ. सादर

At 9:46am on April 1, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय सुशील जी ..महीने का सक्रिय सदस्य चुने जाने पर मेरी तरफ से हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर 

At 6:02am on March 20, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ०  सुशील सरना भाई जी, सादर प्रणाम!  आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" चुने जाने पर बहुत-बहुत बधाई. सादर

At 4:22pm on March 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

सुशील सरना जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 9:00pm on February 17, 2016, Tasdiq Ahmed Khan said…

मोहतरम जनाब सुशील सरना  साहिब ,  यह  आप सब की हौसला अफ़ज़ाई का नतीजा है  , जिसके लिए   आप का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी

At 8:47pm on January 11, 2016, सतविन्द्र कुमार राणा said…
धन्यवाद आदरणीय sushil Sarna जी।आपको भी सपरिवार सादर हार्दिक शुभकामनाएं!
 
 
 

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