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Sushil Sarna
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narendrasinh chauhan commented on Sushil Sarna's blog post चाँद से पूछें...
"सुन्दर रचना ,"
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post चाँद से पूछें...
"आदरणीय बृजेश जी सृजन आपकी प्रशंसा का आभारी है।"
Sunday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Sushil Sarna's blog post चाँद से पूछें...
"बेहतरीन  रचना  आदरणीय सादर बधाई"
Saturday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"आदरणीय राजेश कुमारी जी इस सम्मान के लिए आपको तहे दिल से मुबारकबाद। ऊपरवाले से प्रार्थना है की वो आपको इसी तरह शोहरत दिलाता रहे।"
Thursday
Sushil Sarna commented on vijay nikore's blog post असाधारण आस
"अँधियारे सूने में अब मेरी अनवस्थाएँ गहरी एक दिया आस का फिर भी जलती लो से काँप-काँप है बटोरता रहा मेरे अस्तित्व के अव्यवस्थित कण कि लौट आएँगी तुम्हारी निर्दोश आँखे तुम्हारे स्नेह-स्वरों की अनुगूँज लिए वाह अनुपम , अप्रतिम सृजन सर ... अंतर्मन के भावों…"
Thursday
Sushil Sarna posted a blog post

चाँद से पूछें...

चाँद से पूछें.....आखिर ख़्वाब टूटने का सबब क्या है चलो चाँद से पूछेंकरते हैं जो दिल की मुरादें पूरी उन तारों का पता चलोचाँद से पूछेंमुहब्बत में अश्कों का निज़ाम किसने बनाया चलो चाँद से पूछेंधड़कनों के पैग़ाम क्यूँ हुए रुसवा चलोचाँद से पूछेंक्यूँ पूनम का अंजाम बना अमावस चलोचाँद से पूछेंपेशानी पे मुहब्बत की तड़प लिख दी किसने चलो चाँद से पूछेंकभी तुमने भी सही है चांदनी की जुदाई चलो चाँद से पूछेंसुशील सरना मौलिक एवं अप्रकाशितSee More
Thursday
vijay nikore commented on Sushil Sarna's blog post 3. क्षणिकाएं :.....
"सुन्दर भाव... सुन्दर कथन । आपको हार्दिक बधाई, आदरणीय सुशील जी।"
Thursday
vijay nikore commented on Sushil Sarna's blog post ख़्वाब के साथ ...
"आपकी रचना सदैव खुशी न दे, ऐसा हुआ नही। हार्दिक बधाई, सुशील जी।"
Thursday
Mahendra Kumar commented on Sushil Sarna's blog post 3. क्षणिकाएं :.....
"शानदार क्षणिकाएँ है आ. सुशील सरना जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर."
Jan 17
Mohammed Arif commented on Sushil Sarna's blog post 3. क्षणिकाएं :.....
"आदरणीय सुशील सरना जी आदाब,                               उम्दा क्षणिकाएँ । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
Jan 17
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post 3. क्षणिकाएं :.....
"जनाब सुशील सरना जी आदाब,बहुत उम्दा और वैचारिक क्षणिकाएं लिखीं हैं,मज़ा आ गया,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Jan 17
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post ख़्वाब के साथ ...
"आदरणीय समर कबीर साहिब , आदाब ... सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार।"
Jan 16
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post ख़्वाब के साथ ...
"आदरणीय मो.आरिफ साहिब, आदाब ... सृजन पर आपकी मधुर प्रशंसा का दिल से आभार।"
Jan 16
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post 3. क्षणिकाएं :.....
"आदरणीय  narendrasinh chauhan  जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार।"
Jan 16
narendrasinh chauhan commented on Sushil Sarna's blog post 3. क्षणिकाएं :.....
"बहोत सुन्दर "
Jan 16
Sushil Sarna posted blog posts
Jan 16

Profile Information

Gender
Male
City State
Jaipur-Rajasthan
Native Place
New Delhi
Profession
Retired from Central Govt.Service as Superintending Officer
About me
I am a simple,sentimental and transparent person.Poetry is my hobby and passion

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Sushil Sarna's Blog

चाँद से पूछें...

चाँद से पूछें.....

आखिर

ख़्वाब टूटने का सबब

क्या है

चलो

चाँद से पूछें

करते हैं

जो दिल की मुरादें पूरी

उन तारों का पता

चलो

चाँद से पूछें

मुहब्बत में

अश्कों का निज़ाम

किसने बनाया

चलो

चाँद से पूछें

धड़कनों के पैग़ाम

क्यूँ हुए रुसवा

चलो

चाँद से पूछें

क्यूँ पूनम का अंजाम

बना अमावस

चलो

चाँद से पूछें

पेशानी पे मुहब्बत की…

Continue

Posted on January 18, 2018 at 1:18pm — 3 Comments

3. क्षणिकाएं :.....

3. क्षणिकाएं :.....

1.

मैं
कभी मरता नहीं
जो मरता है
वो
मैं नहीं
... ... ... ... ... ... ...

2.

ज़िस्म बिना
छाया नहीं
और ]
छाया का कोई
जिस्म नहीं
... ... ... ... ... ... ... ...

3.
क्षितिज
तो आभास है
आभास का
कोई छोर नहीं
छोर
तो यथार्थ है
यथार्थ का कोई
क्षितिज नहीं

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on January 16, 2018 at 5:09pm — 6 Comments

ख़्वाब के साथ ...

ख़्वाब के साथ ...

न जाने कब
मैं किसी
अजनबी गंध में
समाहित हो गयी

न जाने कब
कोई अजनबी
इक गंध सा
मुझ में समाहित हो गया

न जाने
कितनी कबाओं को उतार
मैं + तू = हम
के पैरहन में
गुम हो गए


और गुम हो गए
सारे
अजनबी मोड़
हकीकत की चुभन को भूल
ख़्वाबों की धुंध में
कभी अलग न होने के
ख़्वाब के साथ

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on January 15, 2018 at 6:00pm — 5 Comments

स्वप्न धुंध ...

स्वप्न धुंध... 

असहनीय शीत के बावज़ूद

मैं देर तक

उसे महसूस करती रही

अपने हाथों में बंद

गीले रुमाल को भींचे हुए

धुंध को चीरती हुई

बेरहम ट्रेन आई

मेरे स्वप्न को

साथ लिए

धुंध में खो गई

मैं दूर तक

ट्रेन के साथ साथ

उसका हाथ पकड़े

दौड़ती रही,दौड़ती रही

आंखें

विछोह का भार न सकी

सागर बन छलक पड़ी

बॉय-बॉय करते उसके हाथ से

उसका रुमाल गिर गया

मैं दौड़ी

रुमाल उठाया

चौंकी

उसका…

Continue

Posted on January 8, 2018 at 6:34pm — 10 Comments

Comment Wall (34 comments)

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At 11:15pm on September 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय सुशील सरना जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी "कविता : कितना अच्छा होता" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 1:35am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका मेल बॉक्स ब्लॉक होने के कारण मेल सेंड नहीं हो रहा है. 

At 1:29am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय सुशील सरना सर, विलम्ब से प्रत्युत्तर हेतु क्षमा. आपको मेल कर दिया है. सादर 

At 10:17pm on April 7, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ० सरना भाई जी, सादर  प्रणाम!

आपका हार्दिक स्वागत है.  मित्रता से भाग्योदय होता है ,  मैं धन्य हुआ. सादर

At 9:46am on April 1, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय सुशील जी ..महीने का सक्रिय सदस्य चुने जाने पर मेरी तरफ से हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर 

At 6:02am on March 20, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ०  सुशील सरना भाई जी, सादर प्रणाम!  आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" चुने जाने पर बहुत-बहुत बधाई. सादर

At 4:22pm on March 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

सुशील सरना जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 9:00pm on February 17, 2016, Tasdiq Ahmed Khan said…

मोहतरम जनाब सुशील सरना  साहिब ,  यह  आप सब की हौसला अफ़ज़ाई का नतीजा है  , जिसके लिए   आप का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी

At 8:47pm on January 11, 2016, सतविन्द्र कुमार said…
धन्यवाद आदरणीय sushil Sarna जी।आपको भी सपरिवार सादर हार्दिक शुभकामनाएं!
At 2:33pm on January 5, 2016, अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव said…

तन स्वस्थ रहे मन में उमंग...सुशील भाईजी आपको भी सपरिवार नव वर्ष की ढेरों  शुभकामनायें

 
 
 

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