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Chetan Prakash
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Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"बहुत धन्यवाद ,  भाई नीलेश !"
2 hours ago
Chetan Prakash posted blog posts
4 hours ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"गिरहः बारहा हम से ही सौगात दिखाई न गई क्या हुआ उनसे अगर बात बनाई न गई"
4 hours ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"तरही ग़जलः 2122 1122 1122 22 ( 112 ) फिर मिलेंगे कई मौके ये सुझाई न गई । राहे उल्फत है कठिन बात बताई न गई । एक दूजे के लिये कब बने थे हम या रब, दिल्लगी ही सही वो बात जताई न गई । शबे ग़म तनहा रहे थे भीड़ भी दुनिया में टूटे दिल तो उन्हें औक़ात बताई न…"
5 hours ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 118 in the group चित्र से काव्य तक
" पहले मतले  के ऊला से, कृपया 'हैं निकाल कर पढ़ने की ज़हमत फरमा हो, आभार !"
Saturday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 118 in the group चित्र से काव्य तक
"ग़ज़ल 1222.    1222.   1222.   1222 कि फूटा ज्वार बासंती हिलोरें मन हैं अहा  राधा | वो ज्वाला सुप्त बहती मन रही सावन कहा राधा | प्रिया उसकी रही है भेज पाती कान्हा राधा | असर  मुझ पर हुआ बिल्कुल नहीं …"
Saturday
Chetan Prakash joined Admin's group
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चित्र से काव्य तक

"ओ बी ओ चित्र से काव्य तक छंदोंत्सव" में भाग लेने हेतु सदस्य इस समूह को ज्वाइन कर ले |See More
Saturday
Rachna Bhatia commented on Chetan Prakash's blog post नज़्म
"आदरणीय समर कबीर सर् सादर नमस्कार। सर् संज्ञान के लिए आभार।"
Feb 14
Rachna Bhatia commented on Chetan Prakash's blog post नज़्म
"आदरणीय चेतन प्रकाश जी, संवेदनशील विषय पर अच्छी नज़्म हुई। बधाई।"
Feb 14
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-124
"आदरणीय भाई, लक्ष्मण सिंह मुसाफ़िर, नमस्कार, ग़ज़ल को आपकी अनुशंसा प्राप्त हुई, प्रोत्साहन मिला ! साधुवाद स्वीकार करें , इति !"
Feb 13
Chetan Prakash commented on Chetan Prakash's blog post नज़्म
"आदाब, आदरणीय समर कबीर साहब, नवाजिश , आपने नज्म तक आने की ज़हमत की और रचना को आप का आशीर्वाद मिला | मोहरम, आपने सही फरमाया, मैं ने आपके निर्देश को आत्मसात कर लिया है| साभार !"
Feb 13
Samar kabeer commented on Chetan Prakash's blog post नज़्म
"जनाब चेतन प्रकाश जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें । 'आजकल पेशोपेश में हूँ' इस पंक्ति में सहीह शब्द "पस-ओ-पेश" है, देखियेगा ।"
Feb 13
Chetan Prakash posted a blog post

नज़्म

यह दुनिया है, या जंगलआजकल पेशोपेश में हूँ,इन्सान और जानवर काभेद मिटता जा रहा है मौका पाते ही इन्सानहैवान बन जाता हैअकेले किसी अबला को कही बेसहारा पाकर कुत्तों सा टूट पड़ता है, नोच डालता है अस्मत किसी बेवा की, किसी कुंवारी की परम्परा की बेड़िया काटकर शैतान उजालों के अन्तर्ध्यान होने पर बोतल से जिन्न निकलकर विराट राक्षस होकर सड़क पर आ जाता है, मानवों का भक्षण करने सड़क पर आ जाता है,पर मुखौटा......... अभी इन्सान का लगाए हुए है। मौलिक एवं अप्रकाशित 12-02- 2021See More
Feb 13
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-124
"           ग़ज़ल है प्रेम गर दवा भली वो अच्छी तनहाई भी दुआ खुदा या तेरी आशिक़ी भी तनहाई भी तराशे जो भी बुत कभी मैंने रुलाया ही मगर ये तय रहा मज़ा रिहाई तनहाई भी हुआ करे कोई राजा हमें मज़ा वो जीस्त…"
Feb 13
Chetan Prakash commented on Chetan Prakash's blog post कविता
"भाई, कृष 'जान गोरखपुरी मिश्रा, आदाब, यह जानकर अच्छा लगा, कई और लोग भी मेरी तरह निर्विवाद रूप अपने राष्ट्र को समर्पित हैं| आपका अशेष आभार, बंधु !"
Feb 12
Krish mishra 'jaan' gorakhpuri commented on Chetan Prakash's blog post कविता
"झंडा हो या उसमें डंङादेश का होना चाहिय़े,क्षम्य नहीं हैं किसी तरह भीमाँ का चीर-हरण हो देशप्रेम के भाव से ओत-प्रोत इस रचना पर आपको हृदयतल से अभिनन्दन आ. चेतन प्रकाश जी।"
Feb 12

Profile Information

Gender
Male
City State
Baraut
Native Place
Hapur
Profession
Teaching
About me
I'm a poet rather born than made or trained since my childhood

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तरही ग़जलः

तरही ग़जलः



2122 1122 1122 22 ( 112 )



फिर मिलेंगे कई मौके ये सुझाई न गई ।

राहे उल्फत है कठिन बात बताई न गई ।



एक दूजे के लिये कब बने थे हम या रब,

दिल्लगी ही सही वो बात जताई न गई ।



शबे ग़म तनहा रहे थे भीड़ भी दुनिया में

टूटे दिल तो उन्हें औक़ात बताई न गई ।



आखिरी लमहों में अहसास में वो ही थे दिल

मुख्तसर सी बात ये ही तो सुझाई न गई ।



दिल से दिल की हुई जो बात तो हालात सुधरे

खुश बहुत थे आप चेतन वो…

Posted on February 25, 2021 at 5:14am

तरही ग़जलः

तरही ग़जलः



2122 1122 1122 22 ( 112 )



फिर मिलेंगे कई मौके ये सुझाई न गई ।

राहे उल्फत है कठिन बात बताई न गई ।



एक दूजे के लिये कब बने थे हम या रब,

दिल्लगी ही सही वो बात जताई न गई ।



शबे ग़म तनहा रहे थे भीड़ भी दुनिया में

टूटे दिल तो उन्हें औक़ात बताई न गई ।



आखिरी लमहों में अहसास में वो ही थे दिल

मुख्तसर सी बात ये ही तो सुझाई न गई ।



दिल से दिल की हुई जो बात तो हालात सुधरे

खुश बहुत थे आप चेतन वो…

Posted on February 25, 2021 at 5:13am

नज़्म

यह दुनिया है, या जंगल

आजकल पेशोपेश में हूँ,

इन्सान और जानवर का

भेद मिटता जा रहा है

मौका पाते ही इन्सान

हैवान बन जाता है

अकेले किसी अबला को

कही बेसहारा पाकर

कुत्तों सा टूट पड़ता है,

नोच डालता है अस्मत

किसी बेवा की, किसी कुंवारी की

परम्परा की बेड़िया काटकर शैतान

उजालों के अन्तर्ध्यान होने पर

बोतल से जिन्न निकलकर

विराट राक्षस होकर सड़क पर

आ जाता है,

मानवों का भक्षण करने

सड़क पर आ जाता…

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Posted on February 12, 2021 at 1:30pm — 4 Comments

नवाचार

राधे इस बार गाँव लौटा तो उसने देखा कि उसके दबंग पड़ौसी ने वाकई उसके दरवाजे पर अपना ताला जड़ दिया था ।

दर असल जयसिंह उसे कहता, " काम जब करते ही शहर में हो तो मकान हमें दे दो" कभी कहता, " मान जाओ, नहीं तो तुम्हारे जाते ही अपना ताला डाल दूंगा ।"

राधे को एकाएक कुछ सूझा, बच्चों और पत्नि को वहीं खड़े रहने को कहा, खुद भागा-भागा अपने दोस्त करीमू के पास जा पहुँँचा और बोला, " भाई करीमू, चल, चल जल्दी कर, बच्चे ठंडी रात मे घर से बाहर खड़े है, ताला खोल" ! चाबी मुझ से रास्ते मे खो गयी, इस…

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Posted on February 5, 2021 at 5:00pm — 2 Comments

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At 11:46pm on November 22, 2020, DR ARUN KUMAR SHASTRI said…

भाई चेतन जी
नमन -
इस्लाह का
सलीका आ जायेगा
मैंने आज तलक
मुकम्मल तो कोई देखा नहीं
गलतियां निकालोगे-
तो सीखूंगा ही ।।
मैं तो अधूरा था
अधूरा रहा
और हूँ अब तलक
आज आया हूँ आपकी बज्म में
कुछ सिखा दोगे -
तो सीखूंगा भी ।।

At 11:59am on June 27, 2020, Samar kabeer said…

जनाब चेतन प्रकाश जी,ये टिप्पणी आप मुशाइर: में दें,तो मुझे जवाब देने में आसानी होगी ।

 
 
 

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"आदरणीय चेतन जी नमस्कार खूब ग़ज़ल हुई बधाई स्वीकार कीजिए।"
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"आदरणीय आज़ी जी नमस्कार खूब ग़ज़ल हुई बढ़ी स्वीकार कीजिए।"
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"आदरणीय नाथ जी नमस्कार बहुत खूब ग़ज़ल हुई,बधाई स्वीकार कीजिये। चश्मे वाले शेर पे ख़ास दाद।।"
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"आदरणीय संजय जी नमस्कार बहुत ही खूब ग़ज़ल हुई बधाई स्वीकार कीजिये।"
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