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Chetan Prakash
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Latest Activity

Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143
"आ. क्षमा करके, प्रस्तुति के साथ आपने न्याय नहीं किया! अथवा कहूँ कि आपने रचना- कर्म को गम्भीरता से नहीं लिया! (1) मतले का सानी दोष पूर्ण है, और वाक्य- विन्यास अशुद्ध है! (2) शे'र ( 3 ) दो मुंहा ही नहीं, पूरी तरह अस्पष्ट है, देखिएगा! ( 4 ) चौथा…"
23 hours ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143
"आ. दयाराम मेठानी, मुआफ करे, गज़ल का मतला दोष पूर्ण है, आप इसे एकाधिक बार दोहराएंगे, स्वयं दोष पकड़ लेंगे, देखिएगा! और, जनाब 'मकता' गज़ल का अभीष्ट होता है, जो आपने, आ. जिसकी आपने कोशिश ही नहीं की!"
23 hours ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143
"आ. रिचा यादव,  आपका  बहुत-बहुत शुक्रिया, गज़ल  को पसंद करने हेतु  !  जहाँ  तक बेहतर  होने का प्रश्न  है, प्रक्रिया पूर्णता प्राप्त  होने तक चल सकती  है ! फिर  भी ,  ज गज़ल  केसे…"
yesterday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143
"आदाब,  आदरणीय भाई लक्ष्मण सिंह मुसाफिर धामी, ग़ज़ल आपकी संस्तुति  पा सकी, अच्छा  लगा ! और ,हाँ कृतार्थ  महसूस कर रहा  हूँ !"
yesterday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143
"आदाब,  भाई अमित स्वप्निल , आपने पढ़कर गज़ल  को संस्तुत  किया, आपका  बहुत बहुत धन्यवाद  ! आपका आशीर्वाद  मिल ता रहेगा, ऐसी आशा है !"
yesterday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143
"आ. संजय शुक्ला जी, "गज़ल कुछ और वक्त माँग रही है", जैसे अस्पष्ट वक्तव्य के अपेक्षाकृत यदि आप अशुद्ध तकनीक / भाव सम्प्रेषण अथवा विशिष्ट शब्द के औचित्य अथवा अभाव पर कुछ बताते तो बेहतर होता, आशा है आप कृतार्थ करेंगे! "
yesterday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143
"आ. दयाराम मे मे पानी, गज़ल, आपको अच्छी लगी, इस हेतु आपका आभारी हूँ ! "
yesterday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143
"आ. गज़ल समय चाहती है, विस्तार से अशुद्ध अथवा कमजोर स्थलों पर दृष्टि पात कर कृतार्थ करें, उस्ताद अनिल कुमार सिंह  ! "
yesterday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143
"आ. सूबे सिंह सुजान साहब, गज़ल, आपको अच्छी लगी, एतद्वारा धन्यवाद ज्ञापन करता हूँ, श्री ! "
yesterday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143
"आ. नवीन मनी त्रिपाठी जी आप गज़ल तक पहुँचे, गज़ल को आपने सराहा, मैं आपका ऋणी हूँ! और, गज़ल की संस्तुति हेतु कोटिशः धन्यवाद ! "
yesterday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143
"दुश्मनों ने आज मेरा मुँह जो काला कर दिया हो गई फुरसत हबीबों को तो चुकता कर दिया तीरगी से है मुहब्बत ज़िन्दगी रोती रही मज़हबी लोगों ने देखो कैसा खेला कर दिया रोशनी से चौंधियाती आँख वो बीमार की इक अरस्तू ज़हर देकर ग्रीस हलका कर दिया ना जाने कितने…"
Friday
Chetan Prakash commented on amita tiwari's blog post बरगद गोद ले लिया
"आ.अमिता तिवारी जी, समीक्षक की दृष्टि  से जो औचित्य पूर्ण लगा, मैं कह चुका हूँ। आप उसे  सकारात्मक  ढंग  से लें तो कृपा  होगी, अन्यथा  क्षमा प्रार्थी हूँ । रहा वर्तनी दोष  देखिएगा ,    त्रुटियाँ 1 …"
May 13
Chetan Prakash commented on amita tiwari's blog post बरगद गोद ले लिया
"पुनश्च  : वर्तनी  के दोष भी कमोबेश  दिखाई  देते हैं !"
May 12
Chetan Prakash commented on amita tiwari's blog post बरगद गोद ले लिया
"नमन,  आ. अमिता  तिवारी  जी, और, हाँ शुभ प्रभात  !  माननीया,  अतुकांत  ( छंद मुक्त ) कविता  में भी आपने क्षमा करें, अनावश्यक  तुकांतता  पर आश्रय , भाव के अपेक्षाकृत  अधिक  लेकर …"
May 12
Chetan Prakash commented on Sushil Sarna's blog post बुझते नहीं अलाव. . . . (दोहा गज़ल )
"कोमल भावों को कवि की बहु-श्रुत संवेदना  से सहेजते  मार्मिक  दोहा--गज़ल  हुई  है, बधाई आपको  आ. सुशील सरना जी  !"
May 11
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-85 (विषय: अहसास)
"आदाब, Sheikh Shahzad Usmani जी, प्रथमत: रचना को संस्तुत  करने हेतु आपका अशेष  आभार  । पात्रों के नाम और संदर्भ गत  परिवेश में उनकी  स्थिति  के बिना लघुकथा का उठ  खड़े होना  संभव  ही नहीं था । सादर "
Apr 30

Profile Information

Gender
Male
City State
Baraut
Native Place
Hapur
Profession
Teaching
About me
I'm a poet rather born than made or trained since my childhood

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पाँच दोहे

 घटा - घोप   अन्धेर  है, कहीं    न   पहरेदार ।

 तक्षक  बनता काल है, क्या  होगा  घर-बार ।। ( 1 )

+++++++++++++++++++++++++ 

 

नागफनी  वन हो गये, जंगल  ...नम्बरदार  ।

बना कैक्टस मुँहलगा, फुदकता - बार  बार ।।   ( 2 )

++++++++++++++++++++++++++++++

रोशन  जो  दिखती  नहीं, गाँव  सखा  तक़दीर  ।

बुझा- बुझा सा मन हुआ, सोच  रहा ताबीर  ।।  ( 3…

Continue

Posted on March 27, 2022 at 12:30am — 2 Comments

दोहावली.... स्वागत करो बसंत का....

स्वागत करो बसंत का, अब.. अनंग दरवेश। 

बदन..सुलगने ..हैं लगे, खिल उठा परिवेश ।।

रथ सवार सूरज हुआ,  बढ़ती ..आँगन ..धूप। 

मकरंद  बसा प्राण में,  प्रतिपल प्रिया अनूप ।।

अलसाया सी डाल पर, उतर ..पड़ी  है.. धूप। 

कलियाँ  मुस्काने लगीं, जगमग गाँव अनूप ।।

गंधायी ..अब है ..हवा,  खिलने.. लगे.. प्रसून। 

गश्त बढ़ गई भ्रमर की, कली लाल सी खून ।।

मौलिक व अप्रकाशित 

प्रोफ. चेतन प्रकाश…

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Posted on February 8, 2022 at 9:22am

ग़ज़ल......अब आदमी में जोश का ज़ज्बा नहीं रहा !

221     2121     1221     212

अब आदमी में जोश का ज़ज्बा नहीं रहा

मौसम  बहार का  वो सुहाना नहीं रहा 

हमको  तुम्हारा  तो सहारा  नहीं  रहा

वो  दर्द  ज़िन्दगी का अपना नहीं रहा

उम्मीद कब रही हमें इस ज़ीस्त से कभी

मंज़िल का जाँ कभी भी वो चहरा नहीं रहा

कोशिश बहुत की कोई हमदम कहाँ हुआ

इक दोस्त न मिला कभी साया नहीं रहा 

धोका मिला जहाँ हमें वुसअत के नाम पर 

सुन दोस्त ज़िन्दगी  का निशाना नहीं…

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Posted on February 3, 2022 at 7:00pm — 1 Comment

दोहा - छक्का

उम्र  गँवा  दी  लोमड़ी, उछल- कूद  वनवास। 

 ईश  साधना की नहीं, भजन हुआ सन्यास।।

दोहा  कवि को  साध्य है, मूर्ख सदैव असाध्य। 

लंगड़ी  जब  भी  मारता, गिरता ठोकर खाय।।

काव्य - धर्म है साधना, प्राण बसे मम आग ।

साधू - संगति  चाहिए , तुलसी सम अनुराग।।

काव्य - कर्म जागृति जगत, हास्य-व्यंग्य है राग।

कविता  -  गंगा   है    सदा, नवरस का अनुराग।।

काव्यशास्त्र  विलास  कवि, पंडित को ही साध्य। 

तप - काव्य विरल भाव…

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Posted on February 1, 2022 at 6:30pm — 5 Comments

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At 6:35am on July 22, 2021, रणवीर सिंह 'अनुपम' said…
आदरणीय, चेतन जी, "दोहे : कैसे- कैसे  लोग" शीर्षक के तहत लिखे गए दोहे बहुत सुंदर हैं और बहुत अच्छे लगे।

निम्न चरण विधान में न होने से इनमें लय भंग है। जिसे दूर करने की जरूरत है।

जन्म-भूमि स्वर्ग सम हो
(कारण-नवीं मात्रा पर शब्द पूरा हो रहा है जो नहीं होना चाहिए)

कृतघ्न पक्के लोग
(कारण-आरंभ में जगण "कृतघ्न"आ रहा है, जो नहीं होना चाहिए)

कर रहे बस भोग
(कारण-एक मात्राभार कम है, साथ ही पाँचवीं मात्रा पर शब्द पूरा हो रहा है जो नहीं होना चाहिए)

न हों कभी बदनाम
(कारण-पहली मात्रा पर शब्द पूरा हो रहा है जो नहीं होना चाहिए)

विद्या  हमें  सिखाती है,
(कारण-13 मात्राओं की जगह 14 मात्राएँ हैं, जो नहीं होनी चाहिए)

कर अन्याय प्रतिकार
(कारण-11 की जगह 12 मात्राएँ हैं जो नहीं होनी चाहिए)
At 11:46pm on November 22, 2020, DR ARUN KUMAR SHASTRI said…

भाई चेतन जी
नमन -
इस्लाह का
सलीका आ जायेगा
मैंने आज तलक
मुकम्मल तो कोई देखा नहीं
गलतियां निकालोगे-
तो सीखूंगा ही ।।
मैं तो अधूरा था
अधूरा रहा
और हूँ अब तलक
आज आया हूँ आपकी बज्म में
कुछ सिखा दोगे -
तो सीखूंगा भी ।।

At 11:59am on June 27, 2020, Samar kabeer said…

जनाब चेतन प्रकाश जी,ये टिप्पणी आप मुशाइर: में दें,तो मुझे जवाब देने में आसानी होगी ।

 
 
 

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"//आदरणीय मैंने "और" को 2 में लिया है 21 में नहीं// ठीक है। "
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"आ. भाई अमीरूद्दीन जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति, प्रशंसा व स्नेह के लिए आभार।"
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अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143
"आदरणीय दयाराम मेठाणी जी आदाब, तरही मिसरे पर अच्छी ग़ज़ल हुई है, गिरह भी उम्दा लगी है, बधाई स्वीकार…"
18 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143
"आदरणीय दण्डपाणि नाहक़ जी आदाब तरही मिसरे पर अच्छी ग़ज़ल कही है आपने मुबारकबाद पेश करता हूँ। गिरह…"
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"आदरणीय दण्डपाणि नाहक जी, प्रोत्साहन के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
18 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143
"आदरणीय सूबे सिंह जी आदाब, तरही मिसरे पर ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है बधाई स्वीकार करें।"
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Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143
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