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अजय गुप्ता
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अजय गुप्ता's Discussions

कैलेंडर

नौ तारीख तक कैलेंडर न आने से असुविधा होती है। यदि पहले से निर्धारित हो और 1-2 तारीख तक कैलेंडर आ जाए तो आसानी हो जाये।उम्मीद है आयोजक इस और ध्यान देंगेContinue

Started Apr 9, 2018

 

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Latest Activity

अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 97 in the group चित्र से काव्य तक
"मची हुई है हबड़ा-दबड़ी, कैसी आपा धापी, इसको जल्दी उसको देरी, कैसी दुविधा व्यापी। पैदल हो या चढ़ा पालकी, मार्ग एक है समझो, मोड़ मिलेंगें राह कटेंगीं, सुख-दुःख मिलने सबको। देता है निर्देश हमेशा, बोल आत्मा का तो, सुने नहीं जब कोई उसकी, किसकी गलती…"
Sunday
अजय गुप्ता commented on Samar kabeer's blog post एक ग़ज़ल रुबाइ की बह्र में
"प्रियतम, तू मेरी हाला है, मैं तेरा प्यासा प्याला,अपने को मुझमें भरकर तू बनता है पीनेवाला,मैं तुझको छक छलका करता, मस्त मुझे पी तू होता,एक दूसरे की हम दोनों आज परस्पर मधुशाला"
Apr 28
अजय गुप्ता commented on Samar kabeer's blog post एक ग़ज़ल रुबाइ की बह्र में
"// क्या रुबाई को 2222 2222 22 के मीटर पर लिया जा सकता है// रुबाइ को इस मीटर पर नहीं ले सकते,इसका अपना मीटर होता है  इस जानकारी के लिए शुक्रिया समर साहब। लेकिन जो रुबाइयाँ हरिवंश जी ने मधुशाला में रची हैं वो अलग हैं क्या!!"
Apr 28
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-106
"ग़ज़ल पलट कर देखना तेरा और उसपे मुस्कुराना भीक़यामत पर क़यामत है लटों को फिर झुलाना भी तेरी ये हुस्न की दौलत, अदाओं की अमीरी है,इज़ाफ़ा करता है उसमें लियाक़त का खज़ाना भी कहाँ इक-दो झलक काफी, कहाँ पल भर में चैन आएमेरा मक़सद नहीं सोहबत, है ख़्वाहिश घर बसाना…"
Apr 27
अजय गुप्ता commented on Samar kabeer's blog post एक ग़ज़ल रुबाइ की बह्र में
"इस बेमिसाल ग़ज़ल को पढ़कर मन प्रसन्न हो गया। इस प्रस्तुति के लिए आभार समर साहब। एक शंका का निवारण कीजिये। क्या रुबाई को 2222 2222 22 के मीटर पर लिया जा सकता है। "
Apr 23
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 96 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय समर साहब आप और सौरभ जी दोनों अपने अपने क्षेत्र के विशेषज्ञ हैं तथा आप दोनों के बीच मे कुछ कहना धृष्टता है। मुआफी की आशा रखते हुए कुछ कहना चाहूँगा। शायद सौरभ जी इस तरह के प्रयोग के प्रति सचेत करना चाहते हैं: //हम सोच कर के आये थे।// //उठा कर…"
Apr 21
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 96 in the group चित्र से काव्य तक
"वाह। बहुत सुंदर छंद। लोकतंत्र जितवाना- गागर में सागर"
Apr 21
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 96 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय गणेश जी, छंद बहुत ही सुंदर बन पड़े हैं। पर लय बहुत बाधित हो रही है। शायद आपने बहुत जल्दी में लिखी।"
Apr 21
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 96 in the group चित्र से काव्य तक
"वाह। हरिओम जी एक से बढ़कर एक छंद। अंतिम बन्द तो जैसे अंगूठी में नगीना जड़ा गया।"
Apr 21
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 96 in the group चित्र से काव्य तक
"बढ़िया। चित्रानुरूप व भावगर्भित"
Apr 21
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 96 in the group चित्र से काव्य तक
"हा हा। आँचलिक खुशबू लिए बढ़िया। बधाई।  जनतन्त्र पनपाता में मात्रा कम है"
Apr 21
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 96 in the group चित्र से काव्य तक
"शुक्रिया गणेश जी। "
Apr 21
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 96 in the group चित्र से काव्य तक
"शुक्रिया लक्ष्मण जी"
Apr 21
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 96 in the group चित्र से काव्य तक
"आभार प्रतिभा जी"
Apr 21
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 96 in the group चित्र से काव्य तक
"शुक्रिया समर साहब"
Apr 21
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 96 in the group चित्र से काव्य तक
"आभार हरिओम जी। रहे न दास न दासी। और चुकताएँ को बदलने का प्रयास करूंगा"
Apr 21

Profile Information

Gender
Male
City State
Karnal (Haryana)
Native Place
Karnal
Profession
Business
About me
ग़ज़ल, कविता, लघुकथा लेखन में रूचि. 3 ऑनलाइन पुस्तकें प्रकाशित. एक काव्य संग्रह हरियाणा साहित्य अकादमी के सौजन्य से प्रकाशित. parivartaaajkal.com पर 'अजय की कलम' के शीर्षक से नियमित कॉलम

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एक ग़ज़ल (वैलेंटाइन डे स्पेशल)

एक ग़ज़ल।

**********

बँध गई हैं एक दिन से प्रेम की अनुभूतियाँ

बिक रही रैपर लपेटे प्रेम की अनुभूतियाँ

शाश्वत से हो गई नश्वर विदेशी चाल में

भूल बैठी स्वयं को ऐसे प्रेम की अनुभूतियाँ

प्रेम पथ पर अब विकल्पों के बिना जीवन नहीं

आज मुझ से, कल किसी से, प्रेम की अनुभूतियाँ

पाप से और पुण्य से हो कर पृथक ये सोचिए

लज्जा में लिपटी हैं क्यों ये प्रेम की अनुभूतियाँ

परवरिश बंधन में हो तो दोष किसको दीजिये

कैसे पहचानेंगे…

Continue

Posted on February 14, 2019 at 1:54pm — 4 Comments

एक ग़ज़ल (हिलता है तो लगता ज़िंदा है साया)

हिलता है तो लगता ज़िंदा है साया

लेकिन चुप है, शायद गूँगा है साया

कहने में तो है अच्छा हमराही पर

सिर्फ़ उजालों में सँग होता है साया

सूरज सर पर हो तो बिछता पाँवों में

आड़ में मेरी धूप से बचता है साया

असमंजस में हूँ मैं तुमसे ये सुनकर

अँधियारे में तुमने देखा…

Continue

Posted on February 7, 2019 at 12:38pm — 3 Comments

ग़ज़ल (छिपा बैठा चितेरा है)

दिखे हरसूँ अँधेरा है

कहाँ जाने सवेरा है

 

नहीं दिखता कहीं रस्ता

कुहासा है घनेरा है

 

हुनर सीखें नए कैसे

गुरु बिन आज चेरा है

 

चुराता जा रहा साँसें

समय है या लुटेरा है

 

बनाता है जो इंसा को

ये जीवन वो ठठेरा है

 

नहीं शिकवा है साँपों से

डसे जाता सपेरा है

 

नहीं घर रास है मुझको

दिलों में ही बसेरा है

 

तेरा क्या और क्या मेरा

चले माया का फेरा…

Continue

Posted on December 10, 2018 at 7:30pm — 5 Comments

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At 12:18pm on November 23, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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आप अपनी मौलिक व अप्रकाशित रचनाएँ यहाँ पोस्ट (क्लिक करें) कर सकते है.

और अधिक जानकारी के लिए कृपया नियम अवश्य देखें.

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ओबीओ पर प्रतिमाह आयोजित होने वाले लाइव महोत्सवछंदोत्सवतरही मुशायरा व  लघुकथा गोष्ठी में आप सहभागिता निभाएंगे तो हमें ख़ुशी होगी. इस सन्देश को पढने के लिए आपका धन्यवाद.

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

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