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Sheikh Shahzad Usmani
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Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post लाइलाज़ (लघुकथा)
"इस लघुकथा पर समय दे कर प्रोत्साहित करने के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत शुक्रिया मुहतरम जनाब विजय निकोरे साहिब।"
3 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post अशान्तिदूत (लघुकथा)
"मेरी इस लघुकथा पर समय दे कर मेरी हौसला अफ़ज़ाई के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत शुक्रिया मुहतरम जनाब डॉ. आशुतोष मिश्रा जी और आदरणीया नीता कसार जी।"
3 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post अशान्तिदूत (लघुकथा)
"मेरी इस रचना पर समय दे कर प्रोत्साहित करने के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत शुक्रिया मुहतरम जनाब समर कबीर साहिब, जनाब सलीम रज़ा रीवा साहिब, जनाब तेजवीर साहिब, जनाब मोहम्मद आरिफ़ साहिब, और जनाब सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' साहिब।"
3 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप''s blog post मुहब्बत भी निभाना अब सज़ा होने लगा है
"बहुत बढ़िया। हार्दिक बधाई आपको आदरणीय प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप' जी।"
9 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on SALIM RAZA REWA's blog post चांद का टुकड़ा है या कोई परी या हूर है - सलीम रज़ा रीवा
"पते की बात। बढ़िया प्रस्तुति के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद मुहतरम जनाब सलीम रज़ा रीवा साहिब।"
9 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (नाज़ कब वो भी उठा पाते हैं दीवाने का )
"बहुत ख़ूब।‌ बढ़िया प्रस्तुति के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद मुहतरम जनाब तस्दीक़ अहमद ख़ान साहिब।"
9 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on Mohammed Arif's blog post हाइकु
"राष्ट्र को समर्पित बेहतरीन हाइकु सृजन के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद मुहतरम जनाब मोहम्मद आरिफ़ साहिब।"
9 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on Rahila's blog post ***हरी कलम***(लघुकथा)राहिला
"बेहतरीन प्रस्तुति। हार्दिक बधाई आपको आदरणीया राहिला जी।"
9 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"जन्मदिन की सालगिरह पर तहे दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद मुहतरम जनाब योगराज प्रभाकर साहिब और आदरणीया प्रतिभा पाण्डेय जी। ढेर सारी शुभकामनाएं।"
9 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post अशान्तिदूत (लघुकथा)
"आद0सहजाद शेख उस्मानी साहब स्आदर अभिवादन, कटाक्ष करती और एक सन्देश देती इस लघुकथा पर आपको बहुत बहुत बधाई।"
Wednesday
vijay nikore commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post लाइलाज़ (लघुकथा)
"अच्छी लघु कथा के लिए बधाई।"
Tuesday
Dr Ashutosh Mishra commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post अशान्तिदूत (लघुकथा)
"आदरणीय शेख शहजाद उस्मानी जी बहुत ही सटीक लघु कथा है आपकी लघु कथाओं में कुछ नया चिंतन हमेश परिलक्षित होता है इसका शीर्षक भी बहुत अच्छा लगा इस रचना के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर "
Tuesday
TEJ VEER SINGH commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post अशान्तिदूत (लघुकथा)
"हार्दिक बधाई आदरणीय शेख उस्मानी साहब जी।आदाब।बेहतरीन प्रस्तुति।"
Tuesday
Mohammed Arif commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post अशान्तिदूत (लघुकथा)
"आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी आदाब, बहुत ही कसावट लिए कटाक्षपूर्ण कथा । बहुत अच्छा कटाक्ष किया आपने शहरी गिद्दों पर । दिली मुबारकबाद क़ुबूल करें ।"
Monday
Samar kabeer commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post अशान्तिदूत (लघुकथा)
"जनाब शैख़ शहज़ाद उस्मानी जी आदाब, बहुत ही उम्दा लघुकथा,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Monday
Nita Kasar commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post अशान्तिदूत (लघुकथा)
"मूक प्राणियों ने अपनी भाषा के जरिये शांति पाठ पढा दिया,उम्दा कथा के लिये बधाई आद० शेख़ शहज़ाद उस्मानी जी ।"
Monday

Profile Information

Gender
Male
City State
Shivpuri M.P.
Native Place
Shivpuri
Profession
Radio Announcer
About me
A Private School- teacher, Freelancer and a Casual Radio Announcer. Simlple living, high thinking, fond of reading and writing.

Sheikh Shahzad Usmani's Blog

अशान्तिदूत (लघुकथा)

“उफ्फ़... थक गया ऐसे भाषणों, नारों और झांकियों से!” हांफते हुए वह एक सूखे से पेड़ की शाखा पर जा बैठा। स्वाधीनता दिवस समारोह में सरे आम अपने कुछ साथियों के साथ क़ैद रहा ‘शांति का प्रतीक’ वह कबूतर लम्बे इन्तज़ार के बाद साथियों के साथ गगन में मुक्त तो कर दिया गया था, लेकिन उसने एक अलग उड़ान भरी और धोखे से क़ब्रिस्तान जा पहुंचा था।



“परेड मैदान और मंच पर मौजूद लोगों में से कोई तो तोता, शेर, गधा, बंदर, कुत्ता, गिद्ध या गीदड़ नज़र आ रहा था, तो कोई पप्पू जैसा।” यह सोचते हुए अभी भी उसके कानों… Continue

Posted on November 13, 2017 at 12:00am — 9 Comments

लाइलाज़ (लघुकथा)

“भाभी, उस तरफ़ मत देखो; इस तरफ़ देखो! यह देखो कितना सुन्दर बच्चा! बिल्कुल वैसा ही, जैसा बैडरूम में भैया के लगाये पोस्टर में है, है न!”



“हां, बहू अच्छे चेहरे देखती रहो, अच्छी फिल्में देखो, भगवान ने चाहा तो तू भी मुझे ज़ल्दी ही सुंदर सा पोता देगी!”



सरकारी अस्पताल के महिला वार्ड के आख़री बैड पर अपनी मां के सिरहाने बैठी सम्मो अगले पलंग के पास बैठे किसी परिवार के सदस्यों की बातें सुन कर अपनी मां को और दूध पीती अपनी नन्हीं बहन को बड़ी दया से देखने लगी। मां का उतरा हुआ पीला सा… Continue

Posted on November 10, 2017 at 10:59pm — 13 Comments

एक थी एकता (लघुकथा)

"क्यों नवयुवक, तुम किस के लिए दौड़ रहे हो इस भीड़ में? एकता के लिए, अपने लिए, किसी महापुरुष की प्रतिष्ठा के लिए, सरकार के लिए या किसी को श्रद्धांजलि के लिए?"



एक विशेष अवसर पर आयोजित विशाल दौड़ में एक पत्रकार ने पूछा तो वह नवयुवक अपनी विशेष टी-शर्ट सही करते हुए, मोबाइल से सेल्फ़ी लेते हुए बोला - " ये बढ़िया रहा! लोकप्रिय पत्रकार के साथ यादगार फोटो! .... चलिए आप भी दौड़िए मीडिया कवरेज के लिए, ग्लैमर के लिए, पब्लिसिटी के लिए; 'राष्ट्रीय एकता' के इस बैनर तले!"



सब दौड़ रहे थे।… Continue

Posted on November 1, 2017 at 1:22am — 13 Comments

स्त्री सी मिस्ट्री (लघुकथा)/ शेख़ शहज़ाद उस्मानी

कुछ तो नया मिल जाए, अपना कुछ रूप-रंग बदल जाये, किसी तरह तो पागल-दीवानों को संतुष्ट किया जाये। इसी सोच के साथ वे सब आज फिर इंतज़ार में थीं, किसी नये अवतार में ढलने के लिए। एक-दूसरे के हालात का जायज़ा लेते हुए उनके बीच विचार विमर्श चल रहा था।

"इन लोगों को तो बस भाषण देना या राग अलापना आता है, बस!"

"करते वही हैं, जो फ़ैशन में है और जो विज्ञापनों में दिखाया, सिखाया जाता है!"

समूह में से दो क़लमों के संवाद सुनकर तीसरी ने कहा -"देशी तन में हमें विदेशी तकनीक के चोले पहनने पड़ते हैं। नई…

Continue

Posted on October 27, 2017 at 1:00am

Comment Wall (10 comments)

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At 10:23am on January 8, 2017, Dr Ashutosh Mishra said…
आदरणीय शेख भाई जी आपके मित्रों की सूची में खुद को शामिल पाकर मैं सुखद अनुभूति कर रहा हूँ आपकी लघु कथाएं इस मंच पर मेरे बिशेष आकर्षण का केंद्र है आपकी हर लघु कथा मैं पढता हूँ आपकी कलम सृजन के नए आयाम स्थापित करती रहे ऐसी अपनी शुभकामनाओं के साथ सादर
At 8:23pm on August 5, 2016, pratibha pande said…

आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ  आदरणीय उस्मानी जी  ,आपका रचनाकर्म हर दिन नई बुलंदियां छुएँ ,ये कामना करती हूँ 

At 7:30am on June 20, 2016, सुरेश कुमार 'कल्याण' said…
श्रद्धेय शेख शहजाद उस्मानी साहब ये सब तो आप जैसे मित्रों के सहयोग से ही हुआ है और आशा करता हूं कि भविष्य में भी मेरा मार्गदर्शन करते रहेंगे। हृदय की गहराईयों से धन्यवाद ।
At 8:42am on May 24, 2016, महिमा वर्मा said…

आभार आपका आ.शेख उस्मानी सर जी,अभी जानकारी  पूरी नहीं है ,तो आपको जवाब देने में देर हो गई.पुनः आभार आपका .

At 2:11pm on May 1, 2016, pratibha pande said…

मित्रता के लिए आभार 

At 8:41am on November 18, 2015, pratibha pande said…

हार्दिक आभार आपका आदरणीय 

At 9:27am on November 4, 2015, kanta roy said…

देखी वफ़ा-ए-फ़ुरसत-ए-रंज-ओ-निशात-ए-दहर

ख़मियाज़ा यक दराज़ी-ए-उमर-ए-ख़ुमार था---- 

मिर्ज़ा ग़ालिब साहब का ये शेर आज आपके लिए
असीम शुभकामनाएँ आपको आदरणीय शहजाद जी।

 

At 3:47pm on October 17, 2015, Sheikh Shahzad Usmani said…
आदरणीय Er. Ganesh Jee "Bagi" जी सूचना अनुसार वांछित जानकारी एडमिन की ई-मेल परआज प्रेषित कर दी है ।सादर सधन्यवाद
At 11:17pm on October 15, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय शेख शाहज़ाद उस्मानी जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी लघुकथा "मुखाग्नि" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है, तथा आप की छाया चित्र को ओ बी ओ मुख्य पृष्ठ पर स्थान दिया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 11:22pm on August 23, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

स्वागत अभिनन्दन 

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