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pratibha pande
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pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-106 in the group चित्र से काव्य तक
"हार्दिक आभार आदरणीय समर कबीर जी"
Feb 16
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"हार्दिक आभार आदरणीय अशोक जी इस मार्गदर्शन के लिये। कुछ प्रयोग बोलचाल में इतने प्रयुक्त होने लगते हैं कि त्रुटी नजरअंदाज हो जाती है।"
Feb 16
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"चित्र को परिभाषित करता सुन्दर सार्थक सृजन। हार्दिक बधाई आदरणीय लक्ष्मण धामी जी"
Feb 16
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"हार्दिक आभार आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी"
Feb 16
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"हार्दिक आभार आदरणीया सुनन्दा जी"
Feb 16
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"भूख जीव को ज्ञान की,देती दीक्षा रोज कुछभूखे ही करते रहे,नई-नई-सी खोज कुछ शिशु, बालक या हो बड़ा,स्वयं बुद्धि को कूकता।// वाह  शानदार पंक्तियाँ। हार्दिक बधाई  इस सृजन पर आदरणीय सतविन्दर भाई"
Feb 16
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"आपने मध्यान्ह भोजन के लालच और उससे प्रेरित शिक्षा के आलोक में छंद रचना की है जो बहुत प्रभावी है। हार्दिक बधाई आदरणीया सुनन्दा झा जी"
Feb 16
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"अन्न कभी ना फेकिए, भूखे बच्चे देखिए। प्रेम दया दिखलाइये, बांट रोटियाँ खाइये॥// इस चित्र का मर्म है ये छंद। हार्दिक बधाई आदरणीय अखिलेश जी चित्र को जीवंत करते छंदों के लिये  "
Feb 16
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"यहाँ तुकान्तता छंद नियम अनुसार ही है।  //क) दोहा छन्द के विषम चरण की तरह ही चारों चरणों का विन्यास होता है.ख) अर्थात, सभी चरणों में 4-4-3-2 या 3-3-2-3-2 का विन्यास मान्य है.  अधिक विस्तार के लिए दोहा छन्द में…"
Feb 16
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"हार्दिक आभार आदरणीय अखिलेश जी।"
Feb 16
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"सुन्दर छांदसिक टिप्पणी के लिये हार्दिक आभार आदरणीय सतविन्दर भाई"
Feb 16
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"छंदो पर आपकी उपस्थिति, उत्साहवर्धन और मार्गदर्शन छंद लेखन के प्रयासों को सार्थक कर देता है। हार्दिक आभार आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी।"
Feb 16
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-106 in the group चित्र से काव्य तक
"उल्लाला छंद***********जबरन आँखें मूँद लीं,  मैडम देखी पास में।ध्यान टिका है जेब में, छुट्टी की है आस में।।****झाँक रही जो जेब से, ऊँची इसकी शान है।राम खुदा सब बाद में, पहले इसका ध्यान है।।****गोल गोल कुछ चाँद सा, इस रोटी का रूप है।भरे पेट कीमत…"
Feb 15
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"नमस्कार आदरणीय सौरभ जी।"
Feb 15
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-112
"बाग अब लग रहा घोर जंगल कोई,लोभ से फूल सब जानवर हो गए।// वाह तोड़ने के सबक सीखते हैं जहाँवो मकातिब सभी को नज़र हो गए।// बहुत खूब सामयिक माहौल पर सटीक तंज करती रचना। बहुत बधाई आदरणीय भाई सतविन्दर जी"
Feb 9
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-112
"हार्दिक आभार आपका"
Feb 9

Profile Information

Gender
Female
City State
Ratlam Madhya Pradesh
Native Place
Almora Uttarakhand
Profession
was a teacher , currently house wife and a social worker
About me
I am from a sahitya premi family ,love to read and write

Pratibha pande's Blog

एहतियातन( लघुकथा)

मेमना और भेड़िया फिर उसी नाले के पास टकरा गये। भेड़िये को देखकर मेमना मिमियाने लगा।

"  देखिये आपका पानी बिल्कुल जूठा नहीं कर रहा हूँ। मैं तो ... मैं तो...पानी पी ही नहीं रहा हूँ। घर से पीकर आया हूँ।" 
" और क्या क्या करता है तू घर में?" भेड़िया उसके पास आ गया।
"जी..जी पढ़ाई करता हूँ। बारवीं कर ली।"मेमना पीछे हटने लगा।
"अच्छाss और अब काॅलेज जायगा?" 
 "जी..जी.. जी हाँ।"…
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Posted on January 7, 2020 at 7:30pm — 8 Comments

राज़ [ लघुकथा प्रतिभा पाण्डे ]

“ कब से इंतज़ार कर रहा हूँ तेरा I एक राज़ की बात बतानी है I’’ राधा के बाहर आते ही अब्दुल ड्राईवर झट उसके पास आ गया I

“जल्दी बता, बहुत काम पड़ा है I” झटके का कपड़ा कमर में खोंसती राधा बोली I

“ कल तू बता रही थी ना कि मेमसाब आजकल बदली बदली हैं, बहुत मीठा बोलती हैं , टूट फूट में चिल्लाती  भी नहीं हैं I’’

“ हाँ तो ?’’

“दोनों कड़वे करेलों की दरियादिली का राज़ आज खुल गया है I’’ अब्दुल का अंदाज़ भेद भरा था  I

“दोनों मतलब ?’’

“ साहब भी आजकल मीठे हो रहे हैं I…

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Posted on July 6, 2017 at 6:00pm — 9 Comments

मेरी दादी [गीत ] प्रतिभा पांडे

ऊन सलाई संग दादी का

बहुत पुराना था याराना

चपल उँगलियों का दादी की  

जाड़े ने भी लोहा माना

 

छत पर जब दादी को पाती

धूप गुनगुनी  मिलने आती

ख़ास सहेली बन दादी की  

वो भी फंदों से बतियाती

 

सीधे पर दो उल्टे फंदे

बुनता जाता ताना बाना

 

कल जो था बाबा का स्वेटर

अब छोटू का टोपा मफलर

नई पुरानी ऊनों के संग

चपल उँगलियाँ चलतीं सर सर

 

इस रिश्ते से उस रिश्ते तक

गर्माहट का आना…

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Posted on December 18, 2016 at 1:00pm — 8 Comments

फिर आओ गोपाल [ दोहा गीत जन्माष्टमी पर ]

 

हे पार्थ के सारथी, हे जसुमति के लाल

हरने जन की पीर अब , फिर आओ  गोपाल

 

ध्वस्त किया था कंस का ,इक दिन तुमने मान

निडर हो गया कंस अब ,और हुआ बलवान

घूम रहा है ओढ़ कर ,सज्जनता की खाल

हरने जन की पीर अब ,  फिर आओ  गोपाल

 

पाँचाली के चीर का ,किया खूब विस्तार   

नयनों में भर नीर फिर ,तुमको रही पुकार

अंध सभा में ठोकता , दुःशासन फिर  ताल

हरने जन की पीर अब  ,फिर आओ गोपाल

 

अर्जुन का रथ थाम कर…

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Posted on August 25, 2016 at 8:00am — 14 Comments

Comment Wall (21 comments)

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At 9:54am on November 18, 2019, TEJ VEER SINGH said…

आदरणीय प्रतिभा पांडे भाई जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवम शुभ कामनांयें।

At 3:07pm on November 18, 2018, Sheikh Shahzad Usmani said…

 

आदरणीया प्रतिभा पाण्डेय साहिबा, जन्मदिन की हार्दिक बधाई और  शुभकामनाएँ।

At 1:39pm on November 18, 2018, राज़ नवादवी said…

आदरणीया प्रतिभा पांडे साहिबा, जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ. ईश्वर आपको सदैव स्वस्थ एवं प्रसन्न रखे. सादर 

At 12:19pm on November 18, 2018, TEJ VEER SINGH said…

आदरणीय प्रतिभा पांडे जी को जन्म दिन की हार्दिक बधाई एवम शुभ कामनायें।प्रभु आपकी समस्त मनोकामनायें पूर्ण करें।माता रानी का सदैव आशीर्वाद मिले। जीवन में सुख, शाँति,समृद्धि और सेहत से मालामाल रहें।सदैव उन्नति के पथ पर अग्रसर रहें।

At 7:55am on June 24, 2016, सुरेश कुमार 'कल्याण' said…
आदरणीया प्रतिभा पांडे जी आपको कविता पर कविता पसंद आई हार्दिक आभार।
At 7:35pm on June 23, 2016, kanta roy said…
इस बीच मैने महसूस किया है कि कई गहरे आत्मीय संबंध मेरी मित्र सूची में शामिल नहीं है तो अचरज से भर गई । वास्तव में हमारा रिश्ता बहुत गहरा है । अपनी सौम्य ,सहज साझीदार को हृदय से अभिनंदन प्रेषित करती हूँ । :)))
At 6:57pm on November 19, 2015, maharshi tripathi said…

धन्यवाद  आ.प्रतिभा जी |

At 3:58pm on November 19, 2015, लक्ष्मण रामानुज लडीवाला said…

जन्म दिवस पर शुभ कामनाएं व्यक्त करने अनुग्रहित करने के  लिए ह्रदयतल से आभारी हूँ आपका  आदरणीया प्रतिभा पाण्डे जी, सादर   -
ईश कृपा से ही हुऐ,सात दशक ये पार,
मित्रों इस सद्भाव का, बहुत बहुत आभार ।

- लक्ष्मण रामानुज लडीवाला,जयपुर

At 6:27pm on November 18, 2015, Sushil Sarna said…

आदरणीया प्रतिभा जी आपको सपरिवार जन्मदिन की ढेरों बधाईयाँ एवं शुभकामनाएं। 

At 5:24pm on November 18, 2015, नादिर ख़ान said…

जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनाएं आदरणीया प्रतिभा जी । 

 
 
 

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"गजब की रचना। बहुत-बहुत बधाई इस सृजन हेतु।"
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"आदरणीय समर कबीर साहब, सादर प्रणाम। ग़ज़ल को अपने आशीर्वाद से नवाज़ने के लिए आपका बहुत आभारी हूँ। सर,…"
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"प्रिय भाई विजय निकोर जी आदाब, बहुत अच्छी रचना हुई है, इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
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