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surender insan
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surender insan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-148
"आदरणीय समर साहब ग़ज़ल एक नाज़ुक विधा है। इसी को जेहन में रखते हुन सिन्फ़-नाज़ुक ग़ज़ल का इस्तेमाल किया बाकी इसे देखूंगा और। सादर जी।"
Oct 29
surender insan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-148
"आदरणीय रवि जी बेहद दिली शुक्रिया आपका हौसला अफ़जाई के लिए, सादर नमन।"
Oct 29
surender insan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-148
"जी बेहद शुक्रिया आपका आदरणीय अमीरुद्दीन जी। सादर नमन संग आभार जी। "
Oct 29
surender insan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-148
"आदरणीय दंडपाणी नाहक जी  ग़ज़ल पर हौसलाअफजाई के लिए बहुत बहुत आभार आपका। सादर नमन जी।"
Oct 29
surender insan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-148
"आदरणीय समर कबीर साहब। बेहद दिली शुक्रिया आपका। दिए गए सुझाव पे पूरा गौर किया जाएगा।  सुधार करूँगा जी। सादर नमन जी।"
Oct 29
surender insan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-148
"आदरणीय जैफ जी नमस्कार। ग़ज़ल का शानदार प्रयास किया है आपने । बहुत बहुत बधाई हो। अन्य साथियों की सलाह ले कर इस मिसरे को यूँ कर सकते है। *खुशी की जगह आज ग़म देखते हैं* सादर जी।"
Oct 29
surender insan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-148
"बहुत बहुत शुक्रिया आपका आदरणीय अशोक जी। सादर नमन।"
Oct 29
surender insan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-148
"आदरणीय संजय शुक्ला जी नमस्कार। दिए गए मिसरे पर फ़ज़ल का बेहतरीन प्रयास हुआ है। बधाई स्वीकार करें। तुम्हारा फ़साना वाला शेर अच्छा लगा।"
Oct 29
surender insan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-148
"122 122 122 122 कभी तेरे चेहरे पे ग़म देखते हैं।न पूछो कि कैसे ये हम देखते हैं।। तेरे मुख पे मुस्कान कम देखते हैं।परेशां तुझे जब भी हम देखते हैं।। तड़पता है उस वक़्त दिल तो हमारा।कभी जो तेरी आँख नम देखते हैं।। बिना गर्ज़ करते सभी की मदद जो।कुछ ऐसे…"
Oct 29
surender insan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-148
"वाह वाह वाह। सुधार के बाद बहुत शानदार ग़ज़ल हुई है आदरणीय। बधाई स्वीकार करें।"
Oct 29
surender insan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-148
"आदरणीय अमीरुद्दीन 'अमीर' साहब आदाब। ग़ज़ल का प्रयास बहुत अच्छा है। दाद के साथ हार्दिक बधाई स्वीकार करें। कभी उनकी जुल्फों के ख़म देखते है वाला शेर में अधुरापन लगा। सादर।"
Oct 28
surender insan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-148
"आदरणीय दिनेश जी सादर नमन।दैर ओ हरमवाला शेर अच्छा निकल आया। मोहतरम समर साहब के सुझावों पे गौर करे। इसी तरह मश्क़ करते रहे धीरे धीरे खुद ब खुद निखार आयेग।हार्दिक शुभकामनाएं।"
Oct 28
surender insan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-148
"आदरणीय रवि भसीन जी सादर नमन। बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है। नुक़्ते वाला शेर खास पसन्द आया।मक़ता भी अच्छा हुआ है। मुबारकबाद कुबुल करें ।"
Oct 28
surender insan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-148
"adarneey mahender Partap ji sadar naman. Bahut badhiya ghazal hui hai badhai swikar Karen ji."
Oct 28
surender insan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-132
"जनाब अजेय जी आदाब, तरही मिसरे पर ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है, बधाई स्वीकार करें जी।"
Jun 26, 2021
surender insan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-132
"जनाब दिनेश कुमार जी आदाब, दिए गए तरही मिसरे पर अच्छी ग़ज़ल कही आपने। दाद के साथ  दिली मुबारकबाद पेश करता हूँ ।"
Jun 26, 2021

Profile Information

Gender
Male
City State
sirsa (haryana)
Native Place
india
Profession
self work
About me
a simple parson. give respect take respect .always be happy & let others be happy.

Surender insan's Blog

"जब तुम्हारें शह्र में आना हुआ"

2122 2122 212

इस कदर था इश्क़ में डूबा हुआ।

चढ़ गया सूली पे वो हँसता हुआ।।

अब कहूँ क्या इश्क़ में क्या क्या हुआ।

हर कदम पर इक नया धोखा हुआ।।

जब किसी को इश्क़ में धोखा हुआ।

फिर उसे देखा नहीं हँसता हुआ।।

क्या बताऊँ मैं तुझे क्या क्या हुआ।

है मेरा जीवन बहुत उलझा हुआ।।

और कुछ तेरे सिवा दिखता नहीं।

इस कदर मैं तेरा दीवाना हुआ।।

मानता कब है किसी की बात वो।

वक़्त जिसका हो बुरा आया…

Continue

Posted on September 20, 2019 at 1:00pm — 2 Comments

दोहे

रक्षा करते देश की,दे कर अपनी जान।

वीर जवानों का करो,दिल से तुम सम्मान।।

बाहर से उजले दिखें, मन में भरे विकार।

ऐसे लोगों पर कभी,करना न ऐतबार।।

ये माना मैं जी रहा,तेरे जाने बाद।

लेकिन मुझको हर समय,तेरी आती याद।।

जीवन के पथ पर तुम्हें,छाँव मिले या धूप।

हर पल आगे ही बढ़ो,सुख दुख में सम रूप।।

मदिरा बहुत बुरी बला,किसने की ईजाद।

इसके कारण हो रहे,कितने घर बरबाद।।

थोड़े से भी हो…

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Posted on April 4, 2019 at 2:30pm — 6 Comments

"किसी के साथ भी धोखा नहीं करतें"

 1222 1222 1222


सुकूँ वो उम्र भर पाया नहीं करतें।
बड़ों की बात जो माना नहीं करतें।।

बुजुर्गों की नसीहत ये पुरानी है।
बिना सोचे कभी बोला नहीं करतें।।

सफल होते हमेशा लोग वो ही जो।
किसी की बात सुन बहका नहीं करतें।।

जिन्हें आदत हमेशा जीतने की हो।
वो मैदां छोड़ कर भागा नहीं करतें।।

हमेशा से रहा इक ही उसूल अपना।
किसी के साथ भी धोखा नहीं करतें।।

मौलिक व अप्रकाशित

Posted on December 11, 2018 at 4:30pm — 14 Comments

"गर अदब में नाम की दरकार है"

2122 2122 212

गर अदब में नाम की दरकार है।

तो ग़ज़ल कोई नयी दरकार है।।

तू किसी को देख ले ग़मगीन तो।

आँख में तेरी नमी दरकार है।।

प्यार करते हो मुझे तुम भी अगर

इक नज़र चाहत भरी दरकार है।।



एक दूजे पे हमेशा हो यकीं।

दोस्ती में बस यही दरकार है।।

ये अँधेरा दूर होगा एक दिन।

इल्म की बस रौशनी दरकार है।।

बात सच्ची ही कहें हर शेर में।

शाइरी में ये रही दरकार है।।

तुम बढ़ा…

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Posted on October 1, 2018 at 12:00pm — 6 Comments

Comment Wall (2 comments)

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At 7:46am on June 29, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय सुरेंदर इंसान जी आदाब , बहुत बहुत शुक्रिया हौसला बढ़ाने के लिए
At 11:48pm on July 7, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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