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Sushil Sarna
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post चाँदनी
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन । अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई।"
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post चाँदनी
"आदरणीय समर कबीर साहिब, आदाब सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार।"
Thursday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा त्रयी : वृद्ध
"आदरणीय समर कबीर साहिब, आदाब सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार। जी, अवगत हुआ। हार्दिक आभार।"
Thursday
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post चाँदनी
"जनाब सुशील सरना जी आदाब, अच्छी रचना हुई, बधाई स्वीकार करें ।"
Wednesday
Sushil Sarna posted a blog post

चाँदनी

चाँदनी ,,,,,,,चमकने लगे हैंकेशों में चाँदी के तारशायदउम्र के सफर का है येआखिरी पड़ावथोड़ा जलताथोड़ा बुझतासाँसों का अलावक्षितिज पर साँझ की लालीथक गया शायदसफर में सफर का मालीपर आज भीअरमानों की छोटी सी खिड़की मेंवोआज भी वैसी हैजैसी वो पहले थीचाहत केपहले पड़ाव पर चमकतीपूनम के चाँद कीहसीन चाँदनीसुशील सरना मौलिक एवं अप्रकाशितSee More
Wednesday
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post दोहा त्रयी : वृद्ध
"जनाब सुशील सरना जी आदाब, अच्छे दोहे लिखे,बधाई स्वीकार करें । 'चुटकी भर सम्मान को, तरस गए हैं वृद्ध । धन-दौलत को लालची, नोचें बन कर गिद्ध  इस दोहे में 'वृद्ध' और 'गिद्ध' की तुकांतता पर विचार करें ।"
Tuesday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा त्रयी : वृद्ध
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार।"
Feb 25
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा त्रयी : वृद्ध
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन । उत्तम दोहे हुए हैं हार्दिक बधाई ।"
Feb 24
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा त्रयी : वृद्ध

दोहा त्रयी : वृद्धचुटकी भर सम्मान को, तरस गए हैं वृद्ध । धन-दौलत को लालची, नोचें बन कर गिद्ध । ।लकड़ी की लाठी बनी, वृद्धों की सन्तान ।धू-धू कर सब जल गए, जीवन के अरमान ।।वृक्षहीन आँगन हुए, वृद्धहीन आवास ।आशीषों की अब नहीं, रही किसी में प्यास ।।सुशील सरनामौलिक एवं अप्रकाशितSee More
Feb 23
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post नारी
""आदरणीय   vijay nikoreजी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार।""
Feb 19
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post नारी
""आदरणीय   लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार।""
Feb 19
vijay nikore commented on Sushil Sarna's blog post नारी
"बहुत ही सुन्दर रचना। हार्दिक बधाई।"
Feb 16
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post नारी
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन । सुन्दर रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Feb 15
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post नारी
"आदरणीय  Aazi Tamaamजी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार।"
Feb 15
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post नारी
"आदरणीय समर कबीर साहिब, आदाब , सृजन आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभारी है।"
Feb 15
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post नारी
"जनाब सुशील सरना जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
Feb 15

Profile Information

Gender
Male
City State
Jaipur-Rajasthan
Native Place
New Delhi
Profession
Retired from Central Govt.Service as Superintending Officer
About me
I am a simple,sentimental and transparent person.Poetry is my hobby and passion

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Sushil Sarna's Blog

चाँदनी

चाँदनी ,,,,,,,
चमकने लगे हैं
केशों में चाँदी के तार
शायद
उम्र के सफर का है ये
आखिरी पड़ाव
थोड़ा जलता
थोड़ा बुझता
साँसों का अलाव…
Continue

Posted on March 2, 2021 at 7:30pm — 3 Comments

दोहा त्रयी : वृद्ध

दोहा त्रयी : वृद्ध


चुटकी भर सम्मान को, तरस गए हैं वृद्ध ।
धन-दौलत को लालची, नोचें बन कर गिद्ध । ।


लकड़ी की लाठी बनी, वृद्धों की सन्तान ।
धू-धू कर सब जल गए, जीवन के अरमान ।।


वृक्षहीन आँगन हुए, वृद्धहीन आवास ।
आशीषों की अब नहीं, रही किसी में प्यास ।।


सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on February 23, 2021 at 8:24pm — 4 Comments

नारी

हृदय की अनन्त गहराईयों में
प्रतिबिंबित करती है
प्रेम में बुद्ध हो जाने वाले
उस आदि पुरुष को
जो उसे पूर्णता प्रदान करे
नर
अपने हृदय लोक में
रेखांकित करता…
Continue

Posted on February 13, 2021 at 8:30pm — 8 Comments

अर्थ

कहाँ इतना आसान होता है
किसी बात का अर्थ निकालना
हर भाव की व्याकरण अलग होती है
हर कोई अपने हिसाब से
हर भाव के अर्थ साधने का प्रयास करता है
किसी के लिए जिन्दगी का अर्थ
साँसों का चलायमान होना है
किसी के लिए साँसों के बाद है जिन्दगी
अधरों की…
Continue

Posted on February 7, 2021 at 2:30pm — 3 Comments

Comment Wall (34 comments)

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At 11:15pm on September 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय सुशील सरना जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी "कविता : कितना अच्छा होता" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 1:35am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका मेल बॉक्स ब्लॉक होने के कारण मेल सेंड नहीं हो रहा है. 

At 1:29am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय सुशील सरना सर, विलम्ब से प्रत्युत्तर हेतु क्षमा. आपको मेल कर दिया है. सादर 

At 10:17pm on April 7, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ० सरना भाई जी, सादर  प्रणाम!

आपका हार्दिक स्वागत है.  मित्रता से भाग्योदय होता है ,  मैं धन्य हुआ. सादर

At 9:46am on April 1, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय सुशील जी ..महीने का सक्रिय सदस्य चुने जाने पर मेरी तरफ से हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर 

At 6:02am on March 20, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ०  सुशील सरना भाई जी, सादर प्रणाम!  आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" चुने जाने पर बहुत-बहुत बधाई. सादर

At 4:22pm on March 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

सुशील सरना जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 9:00pm on February 17, 2016, Tasdiq Ahmed Khan said…

मोहतरम जनाब सुशील सरना  साहिब ,  यह  आप सब की हौसला अफ़ज़ाई का नतीजा है  , जिसके लिए   आप का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी

At 8:47pm on January 11, 2016, सतविन्द्र कुमार राणा said…
धन्यवाद आदरणीय sushil Sarna जी।आपको भी सपरिवार सादर हार्दिक शुभकामनाएं!
At 2:33pm on January 5, 2016, अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव said…

तन स्वस्थ रहे मन में उमंग...सुशील भाईजी आपको भी सपरिवार नव वर्ष की ढेरों  शुभकामनायें

 
 
 

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