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Sushil Sarna
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Sushil Sarna posted a blog post

नमक सी जलन...

नमक सी जलन  ..... मत समेटो हृदय में शूल सी स्मृतियों को ये जब तक रहेंगी अपने लावे से विगत पलों को सुलगाती रहेंगी इसलिए रोको मत बह जाने दो इन नमक सी जलन देती स्मृतियों की खारी ढेरियों को आंसूओं के प्रपात मेंसुशील सरना मौलिक एवं अप्रकाशितSee More
Friday
Sushil Sarna commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post छोटा वकील (लघुकथा)
"वाह वर्तमान हालात पर सुंदर लघु कथा आदरणीय ... हार्दिक बधाई।"
Friday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post क्षणिकाएं :
"आदरणीया नीलम उपाध्याय जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार।"
Friday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post क्षणिकाएं :
"आदरणीया बबिता गुप्ता जी सृजन आपकी स्नेहिल प्रशंसा का आभारी है।"
Friday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post क्षणिकाएं :
"आदरणीय शेख उस्मानी साहिब, आदाब। ... सर सृजन के भावों को आत्मीय स्नेह देने का दिल से आभार।"
Friday
Neelam Upadhyaya commented on Sushil Sarna's blog post क्षणिकाएं :
"आदरणीय सुशिल सरना जी, नमस्कार।  जीवन की सत्यता को दर्शाती सूंदर क्षणिकाएं।  रचना की प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई।"
Thursday
babitagupta commented on Sushil Sarna's blog post क्षणिकाएं :
"विचारोत्तेजक पंक्तियाँ सत्यता को उजागर करती,बधाई व्विकार कीजिये आदरणीय सर जी."
Thursday
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sushil Sarna's blog post क्षणिकाएं :
"बहुआयामी मार्गदर्शक/विचारोत्तेजक क्षणिकाओं के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद मुहतरम जनाब सुशील सरना  साहिब।"
Wednesday
Sushil Sarna posted a blog post

क्षणिकाएं :

क्षणिकाएं :१. तूफ़ान का अट्टहास विनाश का आभास काँपती रही लौ दिए की झील की लहरों पर देर तक आंधी के साथ हुए जीवन मृत्यु के संघर्ष को याद करके२. श्वास नितांत अकेली देह चिता की सहेली जीवन अनबुझ पहेलीसुशील सरना मौलिक एवं अप्रकाशितSee More
Wednesday
Sushil Sarna posted a blog post

स्मृति ...

स्मृति ...ज़िंदगीजबढलान पर होती हैउसके अंतस मेंबुझे अलाव होते हैंएक शाश्वत डर की आहट होती हैकुछ अनसुलझे सवाल होते हैंकुछ अधूरे जवाब होते हैंज़िंदगीधीरे -धीरेबिना पड़ाव के पथ परअग्रसर होती हैआँखों में ओस होती हैप्रभात और साँझ एक हो जाते हैंआहट यथार्थ हो जाती हैऔर एक श्वासअंतिम हो जाती हैज़िंदगीस्मृति हो जाती हैसुशील सरनामौलिक एवं अप्रकाशितSee More
May 21
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post हरजाई ....
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन पर आपकी आत्मीय प्रशंसा का दिल से शुक्रिया।"
May 17
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post निष्कलंक कृति ...
"आदरणीया बबिता गुप्ता जी सृजन पर आपकी मुक्त कंठ द्वारा की गयी प्रशंसा का दिल से आभार।"
May 17
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post नहीं जानती ...(350 वीं कृति )
"आदणीय लक्ष्मण धामी जी प्रस्तुति पर आपकी मुक्तकंठ प्रशंसा का दिल से आभार।"
May 17
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post नहीं जानती ...(350 वीं कृति )
"आदरणीय समर कबीर साहिब, आदाब ... सृजन पर आपकी मधुर प्रतिक्रिया का दिल से शुक्रिया। संशोधन एवं सुझाव के लिए शुक्रिया। संशोधित किया।"
May 17
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post यौवन रुत ...
"आदरणीय डॉ आशुतोष जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार।"
May 17
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post यौवन रुत ...
"आदरणीय विजय निकोर जी, सादर प्रणाम। ... सृजन आपकी स्नेहाशीष का दिल से आभारी है।"
May 17

Profile Information

Gender
Male
City State
Jaipur-Rajasthan
Native Place
New Delhi
Profession
Retired from Central Govt.Service as Superintending Officer
About me
I am a simple,sentimental and transparent person.Poetry is my hobby and passion

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Sushil Sarna's Blog

नमक सी जलन...

नमक सी जलन  ..... 

मत समेटो
हृदय में
शूल सी स्मृतियों को
ये
जब तक रहेंगी
अपने लावे से
विगत पलों को
सुलगाती रहेंगी
इसलिए
रोको मत
बह जाने दो
इन
नमक सी जलन देती
स्मृतियों की खारी ढेरियों को
आंसूओं के
प्रपात में

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on May 25, 2018 at 8:37pm

क्षणिकाएं :

क्षणिकाएं :

१.
तूफ़ान का अट्टहास
विनाश का आभास
काँपती रही
लौ दिए की
झील की लहरों पर
देर तक
आंधी के साथ हुए
जीवन मृत्यु के संघर्ष को
याद करके

२.
श्वास
नितांत अकेली
देह
चिता की सहेली
जीवन
अनबुझ पहेली

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on May 23, 2018 at 6:37pm — 6 Comments

स्मृति ...

स्मृति ...

ज़िंदगी
जब
ढलान पर होती है
उसके अंतस में
बुझे अलाव होते हैं
एक शाश्वत डर की आहट होती है
कुछ अनसुलझे सवाल होते हैं
कुछ अधूरे जवाब होते हैं

ज़िंदगी
धीरे -धीरे
बिना पड़ाव के पथ पर
अग्रसर होती है
आँखों में ओस होती है
प्रभात और साँझ एक हो जाते हैं
आहट यथार्थ हो जाती है
और एक श्वास
अंतिम हो जाती है
ज़िंदगी
स्मृति हो जाती है

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on May 21, 2018 at 5:45pm

ज़रा से रूठ जाने पर ...

ज़रा से रूठ जाने पर ...





अजब

मिज़ाज है

नादाँ दिल का

तोड़ देता है

हर रस्म

उनके

ज़रा से रूठ जाने पर



जो लम्हे

मेरी हयात

बन कर आये थे

तारीकियों में

रूठ गए

हयात-ए-शरर के

ज़रा से रूठ जाने पर



क्या ख़बर

बाद मेरे फ़ना होने के

क्या गुजरी होगी

ख्वाब-ए-माहताब पर

यक़ीनन

मैंने ही नहीं

उनके लम्हों ने भी

पायी होगी सज़ा

ज़ार ज़ार रोने की

तन्हाईयों में

ख़ुद के ही

ज़रा से रूठ… Continue

Posted on May 17, 2018 at 1:01pm

Comment Wall (34 comments)

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At 11:15pm on September 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय सुशील सरना जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी "कविता : कितना अच्छा होता" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 1:35am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका मेल बॉक्स ब्लॉक होने के कारण मेल सेंड नहीं हो रहा है. 

At 1:29am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय सुशील सरना सर, विलम्ब से प्रत्युत्तर हेतु क्षमा. आपको मेल कर दिया है. सादर 

At 10:17pm on April 7, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ० सरना भाई जी, सादर  प्रणाम!

आपका हार्दिक स्वागत है.  मित्रता से भाग्योदय होता है ,  मैं धन्य हुआ. सादर

At 9:46am on April 1, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय सुशील जी ..महीने का सक्रिय सदस्य चुने जाने पर मेरी तरफ से हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर 

At 6:02am on March 20, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ०  सुशील सरना भाई जी, सादर प्रणाम!  आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" चुने जाने पर बहुत-बहुत बधाई. सादर

At 4:22pm on March 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

सुशील सरना जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 9:00pm on February 17, 2016, Tasdiq Ahmed Khan said…

मोहतरम जनाब सुशील सरना  साहिब ,  यह  आप सब की हौसला अफ़ज़ाई का नतीजा है  , जिसके लिए   आप का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी

At 8:47pm on January 11, 2016, सतविन्द्र कुमार राणा said…
धन्यवाद आदरणीय sushil Sarna जी।आपको भी सपरिवार सादर हार्दिक शुभकामनाएं!
At 2:33pm on January 5, 2016, अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव said…

तन स्वस्थ रहे मन में उमंग...सुशील भाईजी आपको भी सपरिवार नव वर्ष की ढेरों  शुभकामनायें

 
 
 

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