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Nilesh Shevgaonkar
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Tasdiq Ahmed Khan commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की--ये अजब क़िस्सा रहा है ज़िन्दगी में
"जनाब नीलेश साहिब , अच्छी ग़ज़ल हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएँ"
Thursday
बसंत कुमार शर्मा commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की--ये अजब क़िस्सा रहा है ज़िन्दगी में
"वाह शानदार"
Thursday
Nilesh Shevgaonkar commented on सतविन्द्र कुमार's blog post बहाने पर ज़माना चल रहा है-ग़ज़ल
"वाह वा.. आ. सतविंदर जी..अच्छी ग़ज़ल और उम्दा इशारों के लिए बधाई "
Jan 17
Mahendra Kumar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की--ये अजब क़िस्सा रहा है ज़िन्दगी में
"बहुत ख़ूबसूरत ग़ज़ल है आ. निलेश सर. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर."
Jan 17
Nilesh Shevgaonkar posted a blog post

ग़ज़ल नूर की--ये अजब क़िस्सा रहा है ज़िन्दगी में

२१२२/ २१२२/२१२२  . ये अजब क़िस्सा रहा है ज़िन्दगी में याद आता है मुझे वो बेख़ुदी में. . काश उन के लब मेरे होंठों को चूमें मूँद कर आँखें.. पडा हूँ चाँदनी में. . जब रिहाई की कोई सूरत नहीं है लुत्फ़ लेना सीख ही लूँ बेबसी में. . एक जुगनू जो लड़ा था तीरगी…See More
Jan 17
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की--ये अजब क़िस्सा रहा है ज़िन्दगी में
"शुक्रिया आ. मण्डल जी "
Jan 17
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की--ये अजब क़िस्सा रहा है ज़िन्दगी में
"शुक्रिया आ. समर सर "
Jan 17
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की--ये अजब क़िस्सा रहा है ज़िन्दगी में
"शुक्रिया आ. सलीम साहब "
Jan 17
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की--ये अजब क़िस्सा रहा है ज़िन्दगी में
"शुक्रिया आ. अजय तिवारी जी ..दरअसल दो तरह के मिसरे दिमाग में थे,,पढ़ा कुछ, गुनगुनाया कुछ और उँगलियों ने टाइप किया कुछ..अभी   ठीक कर लेता हूँ..सादर "
Jan 17
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की--ये अजब क़िस्सा रहा है ज़िन्दगी में
"शुक्रिया आ. मोहम्मद आरिफ साहब"
Jan 17
Kalipad Prasad Mandal commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की--ये अजब क़िस्सा रहा है ज़िन्दगी में
"सोचने के वक़्त तुम को सोचता हूँ और बाक़ी कट रही है नौकरी में.  .लुत्फ़ मिलता है बहुत ग़मगीन रहकरजैसे कुछ बाक़ी नहीं हो ज़िन्दगी में   , ऐसे सभी शेर अच्छे है , ये दोनों अभूत अछे लगे  मुबारक बाद कुबूल कीजिये  निलेश…"
Jan 17
Samar kabeer commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की--ये अजब क़िस्सा रहा है ज़िन्दगी में
"जनाब निलेश 'नूर' साहिब आदाब,उम्दा ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।"
Jan 17
SALIM RAZA REWA commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की--ये अजब क़िस्सा रहा है ज़िन्दगी में
"भाई नीलेश जी ख़ूबसूरत ग़ज़ल के लिए बधाई,"
Jan 16
Ajay Tiwari commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की--ये अजब क़िस्सा रहा है ज़िन्दगी में
"आदरणीय निलेश जी, उम्दा ग़ज़ल हुई है. हार्दिक बधाई. ' काश दो लब मेरे होंठों को चूमें'  इस मिसरे में 'वो' छूट गया लगता है. . यूं तो सारे शेर खूबसूरत हैं लेकिन एक शेर अलग से चमक रहा है : सोचने के वक़्त तुम को सोचता…"
Jan 16
Mohammed Arif commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की--ये अजब क़िस्सा रहा है ज़िन्दगी में
"लुत्फ़ मिलता है बहुत ग़मगीन रहकरजैसे कुछ बाक़ी नहीं हो ज़िन्दगी में. वाह! वाह!! बहुत ही सच्चा शे'र लगा । हर शे'र माक़ूल । शे'र दर शे'र दाद के साथ दिली मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए आदरणीय नीलेश जी । बाक़ी गुणीजन अपनी राय देंगे ।"
Jan 16
Nilesh Shevgaonkar posted a blog post

ग़ज़ल नूर की--ये अजब क़िस्सा रहा है ज़िन्दगी में

२१२२/ २१२२/२१२२  . ये अजब क़िस्सा रहा है ज़िन्दगी में याद आता है मुझे वो बेख़ुदी में. . काश उन के लब मेरे होंठों को चूमें मूँद कर आँखें.. पडा हूँ चाँदनी में. . जब रिहाई की कोई सूरत नहीं है लुत्फ़ लेना सीख ही लूँ बेबसी में. . एक जुगनू जो लड़ा था तीरगी…See More
Jan 16
Nilesh Shevgaonkar commented on SALIM RAZA REWA's blog post तू अगर बा - वफ़ा नहीं होता - सलीम रज़ा रीवा
"आ. सलीम साहब,तीसरे शेर में ..हँसी को हसीं कर लें ..सबको दुनिया बुरी बनाती है ..बुरा बनाती है ...देखिएगा सादर "
Jan 14
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की-हँसता चेहरा यूँ तो रुख्सत उसे कर आएगा
"आ. भाई नीलेश जी, बेहतरीन गजल के लिए हार्दिक बधाई ।"
Dec 28, 2017
Mahendra Kumar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की-हँसता चेहरा यूँ तो रुख्सत उसे कर आएगा
"बहुत ख़ूब ग़ज़ल हुई है आ. निलेश सर. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर."
Dec 27, 2017
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की-हँसता चेहरा यूँ तो रुख्सत उसे कर आएगा
"आद0 नीलेश भाई जी सादर अभिवादन। खूबसूरत ग़ज़ल कही आपने। बहुत खूब। शैर दर शैर मुबारकबाद कुबूल फरमायें। सादर"
Dec 26, 2017

Profile Information

Gender
Male
City State
Indore-MP
Native Place
Indore-MP
Profession
Civil Engineer

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ग़ज़ल नूर की--ये अजब क़िस्सा रहा है ज़िन्दगी में

२१२२/ २१२२/२१२२ 

.

ये अजब क़िस्सा रहा है ज़िन्दगी में

याद आता है मुझे वो बेख़ुदी में.

.

काश उन के लब मेरे होंठों को चूमें

मूँद कर आँखें.. पडा हूँ चाँदनी में.

.

जब रिहाई की कोई सूरत नहीं है

लुत्फ़ लेना सीख ही लूँ बेबसी में.

.

एक जुगनू जो लड़ा था तीरगी से    

याद कर लेना उसे भी रौशनी में.

.

याद कर के अपने माज़ी के पलों को

बहते हैं आँखों से आँसू हर ख़ुशी में.

.

आपका अहसान मुझ पर यह बहुत है

आप ने है दर्द घोला…

Continue

Posted on January 15, 2018 at 9:00pm — 13 Comments

ग़ज़ल नूर की-हँसता चेहरा यूँ तो रुख्सत उसे कर आएगा

2122 /1122 /1122 /22 (112)

.

हँसता चेहरा यूँ तो रुख्सत उसे कर आएगा 

दिल पे टूटेंगे सितम..... दर्द से भर आएगा.

.

एक दूजे को जो देखेंगे अगर हम यूँ ही 

किसी चेहरे का किसी पर तो असर आएगा.

.

अपनी आँखों से हटा ले ये अना की पट्टी

तुझ को हर शख्स तेरा अक्स नज़र आएगा.

.

सोच के गहरे समुन्दर में लगा ले गोते,   

उथले पानी में कहाँ हाथ गुहर आएगा?  

.

रूह को अश्क-ए-नदामत से कभी धो कर देख,   

हुस्न हस्ती का तेरी और निखर आएगा.…

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Posted on December 24, 2017 at 8:30am — 17 Comments

ख़त हमारे अगर जलाता है ; ग़ज़ल नूर की

२१२२/ १२१२/ २२ (११२)

ख़त हमारे अगर जलाता है

राख दुनिया को क्यूँ दिखाता है.

.

हम को उम्मीद है तो ग़ैरों से,

कौन अपनों के काम आता है?

.

सुन रखी होगी आग जंगल की

क्यूँ शरर को हवा दिखाता है.

.

शम्स मुझ सा शराबी है शायद 

शाम ढलते ही डूब जाता है.

.

ज़र्द चेहरा है बाल बिखरे हैं

इस तरह कौन दिल लगाता है.

.

देख! दुनिया का कुछ नहीं होगा

ख्वाहमखाह इस में सर खपाता है.

.

इस पे चलता है रब्त का धंधा

कौन क्या…

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Posted on October 24, 2017 at 1:00pm — 34 Comments

ग़ज़ल नूर की - किसी साधू के गहरे ध्यान से हम

२१२२, १२१२, २२ (११२) +१ 

.

किसी साधू के गहरे ध्यान से हम

बैठे रहते है इत्मिनान से हम.

.

तुम हो इक टूटती हुई दीवार

एक ढहते हुए मकान से हम.

.

गर ख़ुदा को वहाँ नहीं पाया,   

लौट आयेंगे आसमान से हम.   

.

बात जो कुछ है साफ़ साफ़ कहें

ऊँचा सुनने लगे हैं कान से हम.

.

बुतकदे में जलाने को दीपक

जाग जाते हैं इक अज़ान से हम.   

.

एक एल्बम में तुम हसीं थी बहुत 

साथ में थे बड़े जवान से हम. 

.

वस्ल का पल, ये…

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Posted on October 16, 2017 at 8:18am — 18 Comments

Comment Wall (7 comments)

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At 2:21pm on September 16, 2017, Afroz 'sahr' said…
आदरणीय निलेश जी आपने ख़ाकसार की बात की ताईद की बहुत आभार प्रकट करता हूँ !सादर
At 9:50pm on March 3, 2017, Hemant kumar said…
आदरणीय सर प्रणम ! मै ओ बी ओ मे काफीया पढ़ रहा हूं पर पल्ले कुछ भी नही पड़ रहा है ।
सर आपसे विनम्र आग्रह है काफीया निर्धारण पर पुनः प्रकाश डालने की अनुकंपा करें ।सादर..
At 2:37am on June 29, 2014, Adesh Tyagi said…
जनाबे-मोहतरम निलेश शेव्गाँवकर साहब, अल्फ़ाज़े-तहसीन का तहे-दिल से शुक्रगुज़ार हूँ।
At 4:47am on November 11, 2013, Abhinav Arun said…

महीने का सक्रिय सदस्य (Active Member of the Month)चुने जाने पर आ. नीलेश जी आपको दिली मुबारकबाद !

At 1:45pm on November 7, 2013, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ0 नीलेश भाई जी, आपको महीने का सकिय सदस्य चुने जाने पर आपको हार्दिक बधाई।  सादर,

At 1:14pm on November 6, 2013,
सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी
said…

आदरणीय नीलेश भाई , सक्रिय सदस्य चुने जाने के लिये आपको हार्दिक बधाईयाँ  !!!!!!

At 12:32pm on November 6, 2013,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय Nilesh Shevgaonkar जी
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करे | कृपया अपना पता और नाम (जिस नाम से ड्राफ्ट/चेक निर्गत होगा), बैंक खता विवरणी एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |

सादर । 


आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

 
 
 

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