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Nilesh Shevgaonkar
  • Male
  • Indore
  • India
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Sushil Sarna commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की -वो कहता है मेरे दिल का कोना कोना देख लिया
"आदरणीय बहुत सुंदर प्रस्तुति हार्दिक बधाई"
14 hours ago
Nilesh Shevgaonkar commented on सालिक गणवीर's blog post कल कहा था आज भी कल भी कहो..( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आ. सालिक गणवीर जी,बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है .. कुछ नए आयाम भी हैं.. बधाई..मतले के सानी में "ही" भर्ती का लग रहा है.. कुछ और कर सकें तो देखें..थोडा बहुत फाइन ट्यून एक दो शेरोन में भी किया जाए तो ग़ज़ल और निखर उठेगी सादर "
Friday
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की -वो कहता है मेरे दिल का कोना कोना देख लिया
"आ. समर सर ,पुन: विचार करता हूँ.. सादर "
Wednesday
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की -वो कहता है मेरे दिल का कोना कोना देख लिया
"शुक्रिया आ. लक्ष्मण जी "
Wednesday
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की -वो कहता है मेरे दिल का कोना कोना देख लिया
"शुक्रिया आ. सालिक गणवीर साहब "
Wednesday
Nilesh Shevgaonkar commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (वो नज़र जो क़यामत की उठने लगी)
"आ. अमीर साहब, अपनी ग़ज़ल के पक्ष में किसी उस्ताद शाइर की दलील दे सकें तो बेहतर होगा.. अन्यथा आप जैसा उचिल मानें.सादर (अंतिम टिप्पणी)जो भी नए रचनाकार इस बहस को पढ़ें,, वो यह ध्यान रखें कि ग़ज़ल ऐसे न कही  जाए.."
Wednesday
Samar kabeer commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की -वो कहता है मेरे दिल का कोना कोना देख लिया
"उचित लगे तो मतले का सानी यूँ कर सकते हैं:- 'तो क्या उसने तेरी यादों का भी कमरा देख लिया'"
Tuesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की -वो कहता है मेरे दिल का कोना कोना देख लिया
"आ. भाई नीलेश जी, सादर अभिवादन । इस बेहतरीन गजल के लिए हार्दिक बधाई स्वीकारें ।"
Tuesday
सालिक गणवीर commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की -वो कहता है मेरे दिल का कोना कोना देख लिया
"आदरणीय निलेश 'नूर' साहिब सादर अभिवादन बह्र-ए-मीर पर इस शानदार ग़ज़ल के लिए दाद और मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए. कबीर साहब की इस्लाह के बाद ये और भी ख़ूबसूरत हो गई है. ला"
Tuesday
Nilesh Shevgaonkar posted blog posts
Tuesday
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की -वो कहता है मेरे दिल का कोना कोना देख लिया
"शुक्रिया आ. हरष जी,आभार "
Tuesday
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की -वो कहता है मेरे दिल का कोना कोना देख लिया
"आ. समर सर,मैं स्वयं मतले से संतुष्ट नहीं था लेकिन यह सोचकर पोस्ट कर दी ग़ज़ल कि यहाँ आपके और अन्य साथियों के मार्गदर्शन से कुछ बेहतर बन जाए..यह कमेंट लिखते हुए एक ख़याल आया है देखिएगा...वो कहता है मेरे दिल का कोना कोना देख लियातो क्या उस ने तेरी यादों…"
Tuesday
Nilesh Shevgaonkar commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (वो नज़र जो क़यामत की उठने लगी)
"आ. अमीरुद्दीन अमीर साहब, "आप किसी पूर्वाग्रह से ग्रस्त हैं तभी तो येन केन प्रकारेण आपका उद्देश्य सिर्फ मुझे नीचा दिखाना प्रतीत होता है," आपकी यह टिप्पणी आपकी ग़ज़ल के मतले की तरह दोषपूर्ण है अत: मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगा. आप को मानना…"
Tuesday
Harash Mahajan commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की -वो कहता है मेरे दिल का कोना कोना देख लिया
"बेहद ख़ूबसूरत अहसासों से भरपूर ग़ज़ल पेश की है आपने आदरणीय नीलेश जी । मेरी ज़ानिब से ढ़ेरों दाद वसूल पाइयेगा । सादर ।"
Tuesday
Samar kabeer commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की -वो कहता है मेरे दिल का कोना कोना देख लिया
"जनाब निलेश 'नूर' जी आदाब, बह्र-ए-मीर पर अच्छी ग़ज़ल कही आपने, दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ । 'यानी तेरी यादों वाला वो भी कमरा देख लिया? इस मिसरे में 'वो भी कमरा' वाक्य विन्यास मुझे ठीक नहीं लगा, सहीह वाक्य होगा…"
Sep 14
Nilesh Shevgaonkar commented on Saurabh Pandey's blog post हिंदी-दिवस : चार दोहे // सौरभ
"आ. सौरभ सर,दिवस मनाने के ढकोसले को बेहतरीन ढ़ंग से उजागर करते हुए दोहों के लिए बधाई सादर "
Sep 14
Nilesh Shevgaonkar commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (वो नज़र जो क़यामत की उठने लगी)
"आ. अमीरुद्दीन "अमीर" साहब,अधिक विस्तार के लिए http://www.openbooksonline.com/group/gazal_ki_bateyn/forum/topics/5170231:Topic:282903 लिंक पढ़ें अथवा होम पेज पर नीचे काफ़िया पढ़ें सादर "
Sep 14
Nilesh Shevgaonkar commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (वो नज़र जो क़यामत की उठने लगी)
"आ. अमीरुद्दीन "अमीर" साहब,ग़ज़ल मतले से शरुअ होती है और अगर मतले में ही दोष नज़र आ जाए तो आगे बढ़ा नहीं जाता.. जिस गाडी का इंजन स्टार्ट न होता हो, उस में लम्बी यात्रा का प्लान कम से कम मैं नहीं करता.. और फिर ऐसी गाड़ी के इंटीरियर, फीचर्स आदि की…"
Sep 14
Nilesh Shevgaonkar commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (वो नज़र जो क़यामत की उठने लगी)
"आ. अमीरुद्दीन साहब, इतनी लंबी बहस से बेहतर होता कि आप क़वाफी दुरुस्त कर लेते। आपके क़वाफी में "ने" स्थायी है अतः वो रदीफ़ का हिस्सा बन गया है। अब इसे हटा कर उठ और गिर में क्या राइमिंग है ये आप स्वयं तय कर सकते हैं। सादर"
Sep 12
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119
"आ. दीदी,उम्दा ग़ज़ल हुई है लेकिन गिरह का शेर चिड़िया घर से भाग गया लगता है ..सादर "
May 23

Profile Information

Gender
Male
City State
Indore-MP
Native Place
Indore-MP
Profession
Civil Engineer

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ग़ज़ल नूर की -वो कहता है मेरे दिल का कोना कोना देख लिया

वो कहता है मेरे दिल का कोना कोना देख लिया

तो क्या उस ने तेरी यादों वाला कमरा देख लिया?

.

वैसे उस इक पल में भी हम अपनों ही की भीड़ में थे

जिस पल दिल के आईने में ख़ुद को तन्हा देख लिया.

.

उस के जैसा दिल तो फिर से मिलता हम को और कहाँ

सो हमने इक राह निकाली, मिलता जुलता देख लिया.

.

मैख़ाने में एक शराबी अश्क मिलाकर पीता है

यादों की आँधी ने शायद उसे अकेला देख लिया.

.

महशर पर हम उठ आए उस की महफ़िल से ये कहकर

तेरी दुनिया तुझे मुबारक़!…

Continue

Posted on September 14, 2020 at 5:30pm — 11 Comments

ग़ज़ल नूर की- तू ये कर और वो कर बोलता है.

तू ये कर और वो कर बोलता है.

न जाने कौन अन्दर बोलता है

.

मेरे दुश्मन में कितनी ख़ामियाँ हैं

मगर मुझ से वो बेहतर बोलता है.

.

जुबां दिल की; मेरे दिल से गुज़रकर

मेरे दुश्मन का ख़ंजर बोलता है.

.

मैं कट जाऊं मगर झुकने न देना

मेरे शानों धरा सर बोलता है.

.

मैं हारा हर लड़ाई जीत कर भी

जहां सुन ले! सिकंदर बोलता है.

.

बहुत भारी पडूँगा अब कि तुम पर

अकेलों से दिसम्बर बोलता है.

.

नया मज़हब नई दुनिया बनाओ

ये…

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Posted on November 30, 2019 at 11:30pm — 10 Comments

ग़ज़ल नूर की - उन  के बंटे जो  खेत तो  कुनबे बिखर गए

उन  के बंटे जो  खेत तो  कुनबे बिखर गए,

पंछी जो उड़ चले तो घरौंदे बिख़र गए.

.

सरहद पे गोलियों ने किया रक्स रात भर,

कितने घरों के नींद में सपने बिखर गए.

.

यादों की आँधियों ने रँगोली बिगाड़ दी

बरसों जमे हुए थे वो चेहरे बिखर गए.

.

समझा था जिस को चोर गदागर था वो कोई

ली जब तलाशी रोटी के टुकड़े बिखर गए.

.

तुम जो सँवार लेते तो मुमकिन था ये बहुत

उतना नहीं बिखरते कि जितने बिखर गए .

.

मुझ में कहीं छुपे थे अँधेरों के क़ाफ़िले…

Continue

Posted on November 16, 2019 at 8:30pm — 13 Comments

ग़ज़ल नूर की- लगती हैं बेरंग सारी तितलियाँ तेरे बिना

लगती हैं बेरंग सारी तितलियाँ तेरे बिना

जाने अब कैसे कटेंगी सर्दियाँ तेरे बिना.

.

फैलता जाता है तन्हाई का सहरा ज़ह’न में

सूखती जाती हैं दिल की क्यारियाँ तेरे बिना.

.

साथ तेरे जो मुसीबत जब पड़ी, आसाँ लगी

हो गयीं दुश्वार सब आसानियाँ तेरे बिना.

.

तू कहीं तो है जो अक्सर याद करता है मुझे

क्यूँ सताती हैं वगर्ना हिचकियाँ तेरे बिना?

.

वक़्त लेकर जा चुका आँखों से ख़ुशियों के गुहर   

अब भरी हैं ख़ाक से ये सीपियाँ तेरे बिना.…

Continue

Posted on July 2, 2019 at 7:30am — 7 Comments

Comment Wall (12 comments)

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At 7:53pm on September 27, 2019, dandpani nahak said…
परम आदरणीय नीलेश जी आदाब बहुत बहुत शुक्रिया मैं बता नहीं सकता मैं कितना खुश हूँ आपने मेरी ग़ज़ल को सराहा मेरा तो आज का दिन बन गया ! ह्रदय से शुक्रिया
At 8:17pm on July 27, 2019, dandpani nahak said…
मुआफ़ी चाहता हूँ ! बढ़ाने का
At 8:16pm on July 27, 2019, dandpani nahak said…
हौसला बढ़ने का
At 8:15pm on July 27, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय नीलेश जी आदाब . बहुत शुक्रिया हौसला बढ़ने का
At 8:49pm on March 22, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय नीलेश सर प्रणाम
बहुत शुक्रिया
At 2:21pm on September 16, 2017, Afroz 'sahr' said…
आदरणीय निलेश जी आपने ख़ाकसार की बात की ताईद की बहुत आभार प्रकट करता हूँ !सादर
At 9:50pm on March 3, 2017, Hemant kumar said…
आदरणीय सर प्रणम ! मै ओ बी ओ मे काफीया पढ़ रहा हूं पर पल्ले कुछ भी नही पड़ रहा है ।
सर आपसे विनम्र आग्रह है काफीया निर्धारण पर पुनः प्रकाश डालने की अनुकंपा करें ।सादर..
At 2:37am on June 29, 2014, Adesh Tyagi said…
जनाबे-मोहतरम निलेश शेव्गाँवकर साहब, अल्फ़ाज़े-तहसीन का तहे-दिल से शुक्रगुज़ार हूँ।
At 4:47am on November 11, 2013, Abhinav Arun said…

महीने का सक्रिय सदस्य (Active Member of the Month)चुने जाने पर आ. नीलेश जी आपको दिली मुबारकबाद !

At 1:45pm on November 7, 2013, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ0 नीलेश भाई जी, आपको महीने का सकिय सदस्य चुने जाने पर आपको हार्दिक बधाई।  सादर,

 
 
 

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