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Dr. Vijai Shanker
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Dr. Vijai Shanker commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post न्याय की जब से हुई हैं कच्ची सारी डोरियाँ - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"न्याय की जब से हुई हैं कच्ची सारी डोरियाँतब से जुर्मोंं के महावत और ऊपर हो गये।३।आदरणीय लक्ष्मण धामी मुसाफिर जी , हार्दिक बधाई , बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति हुयी। सादर।"
Jul 22
Dr. Vijai Shanker commented on Dr. Vijai Shanker's blog post नसीब — डॉo विजय शंकर
"आदरणीय लक्षमण धामी मुसाफिर जी , रचना को स्वीकार करने के लिए आभार एवं बधाई के लिए धन्यवाद। सादर।"
Jul 22
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Dr. Vijai Shanker's blog post नसीब — डॉo विजय शंकर
"आ. भाई विजय शंकर जी, सादर अभिवादन । अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Jul 21
Dr. Vijai Shanker commented on Neeta Tayal's blog post ससुराल और मायका
"रोचक प्रस्तुति , बधाई आदरणीय सुश्री नीता तायल जी , सादर।"
Jul 21
Dr. Vijai Shanker posted a blog post

नसीब — डॉo विजय शंकर

एक उम्र भर हम लोगों को समझते रहे। हालातों को समझते रहे , दोनों से समझौता करते रहे , दुनिया में समझदार माने गए। बस अफ़सोस यह ही रहा , हमें कोई ऐसा मिला ही नहीं , या नसीब में था ही नहीं , जिसे हम भी समझदार मानते और हम भी समझदार कहते।मौलिक एवं अप्रकाशित See More
Jul 20
Dr. Vijai Shanker commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post पनघट के दोहे- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"सब मिल पनघट थीं कभी, बतियाती चित खोलघर- घर नल से छिन गये, सुख के पल अनमोल।६।पनघट के दोहे , बहुत सुन्दर प्रस्तुति , बधाई , आदरणीय लक्षमण धामी मुसाफिर जी , सादर।"
Jul 17
Dr. Vijai Shanker commented on Dr. Vijai Shanker's blog post दो लघु-कवितायें — डॉo विजय शंकर
"आदरणीय लक्ष्मण धामी मुसाफिर जी ,लघु-कविताओं को स्वीकार करने के लिए आभार एवं धन्यवाद , सादर।"
Jul 13
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Dr. Vijai Shanker's blog post दो लघु-कवितायें — डॉo विजय शंकर
"आ. भाई विजय शंकर जी, सादर अभिवादन । अच्छी कवितायें हुई हैं।हार्दिक बधाई ।"
Jul 13
Dr. Vijai Shanker posted a blog post

दो लघु-कवितायें — डॉo विजय शंकर

सच्चे मन से ईश्वरमंदिर से अधिकअस्पतालों मेंयाद किया जाता है l जो दृश्य सिनेमा हाल मेंमन को दुखी , द्रवित करअँधेरे में,आँखे नाम कर जाता हैवही दृश्य हमें दिन कीरौशनी में आस पासदिखाई नहीं दे पाता है ,आँखें नम कहाँ  से होंबाहर की दौड़ भाग मेंपसीना तक सूख जाता है। .....1.आज हर आदमी ज्ञानी है ,हर ज्ञानी ज्ञान बाँट रहा है ,मतलब  , हर कोईअपना अपना पक्षप्रस्तुत कर रहा है ,पक्ष भी क्या , अपनाअपना स्वार्थ बाँट रहा है।.....2.मौलिक एवं अप्रकाशितSee More
Jul 12
Dr. Vijai Shanker commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post चीन के नाम (नज़्म - शाहिद फ़िरोज़पुरी)
"शानदार प्रस्तुति , बहुत बहुत बधाई , आदरणीय रवि भसीन शाहिद जी , सादर।"
Jul 6
Dr. Vijai Shanker commented on Manan Kumar singh's blog post केंचुआ(लघुकथा)
"बहुत गहरी और सामयिक गंभीर लघु - कथा , बहुत बहुत बधाई , आदरणीय मनन कुमार सिंह जी , सादर।"
Jul 4
Dr. Vijai Shanker commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post पीड़ा के दोहे - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आँसू अपने डाल दो, उस आँचल में औरहर दुख पर जो नित करे, माँ के जैसा गौर।६।आदरणीय लक्ष्मण धामी मुसाफिर जी , बहुत सुन्दर , सभी दोहे , हार्दिक बधाई , सादर"
Jul 4
Dr. Vijai Shanker commented on Dr. Vijai Shanker's blog post हिसाब-किताब— डॉO विजय शंकर।
"आदरणीय लक्ष्मण धामी मुसाफिर जी , रचना पर आपकी उपस्थिति के लिए आभार , बधाई के लिए धन्यवाद , सादर।"
Jul 4
Dr. Vijai Shanker commented on Dr. Vijai Shanker's blog post हिसाब-किताब— डॉO विजय शंकर।
"आदरणीय रवि भसीन शाहिद जी , रचना को स्वीकृति प्रदान करने के लिए आभार , मुबारकबाद के लिए धन्यवाद , सादर। "
Jul 4
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Dr. Vijai Shanker's blog post हिसाब-किताब— डॉO विजय शंकर।
"आ. भाई विजय शंकर जी सादर अभिवादन। उत्तम रचना हुई है। हार्दिक बधाई ।"
Jul 3
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Dr. Vijai Shanker's blog post हिसाब-किताब— डॉO विजय शंकर।
"आदरणीय Dr. Vijai Shanker साहिब, इस सुन्दर रचना पर दाद और मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएँ।"
Jul 3

Profile Information

Gender
Male
City State
UP
Native Place
Allahabad
Profession
Retired
About me
Educationist

.जिंदगी तुझे ही पढ़ लेते हैं ---डा० विजय शंकर

चलो किताबों को बंद कर देते हैंजिंदगी तुझे ही सीधे-सीधे पढ़ लेते हैं .किताबों में सबकुझ तेरे बारे में ही तो हैलो , तुझसे ही सीधे-सीधे बात कर लेते हैं.किताबें तो बहुत सी हैं , मिल भी जायेंगींउन को पढ़ लूँ तो क्या तू मिल जायेगी .मौत को कितने और कौन-कौन पढ़ते हैंपर उसका वादा है , सबको मिलती है .भरोसा नहीं , तू किसको मिले , कितनी मिलेतेरे लिये , तेरे चाहने वाले दिन रात लगे रहते हैं .अरे सब कुछ तो तेरे लिए ही है जिंदगी मेंतू है तो सब है , तू नहीं तो क्या है जिंदगी में .इसलिए चलो किताबों को बंद कर देते हैं .तू है , तुझसे सीधे-सीधे बात कर लेते हैं ...डा० विजय शंकर---------------( मौलिक और अप्रकाशित )

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At 7:54pm on August 31, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय डॉ. विजय शंकर जी प्रणाम! बहुत बहुत शुक्रिया आपको मेरी प्रथम लघुकथा अच्छी लगी आपने अपना अमूल्य समय निकाला और जो हौसला बढ़ाया उसका ह्रदय से आभार आपका स्नेहभाव सदा यूँ ही बना रहे!
At 5:38pm on January 1, 2017, Mohammed Arif said…
आदरणीय डॉ.विजय शंकर मेहताजी सकारात्मक सोच को उद्घरित करती रचना के लिए बधाई । नव वर्ष मंगलमय हो !
At 4:58pm on November 5, 2015, Abid ali mansoori said…

देर से ही सही.. हर्दिक आभार आपका आदरणीय विजय शंकर जी!

At 10:23pm on November 4, 2015, Abid ali mansoori said…

Haardik abhaar aapka!

At 3:46pm on July 1, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय डॉ विजय शंकर सर,

आपको जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनायें 

At 7:50pm on June 3, 2015, Tanuja Upreti said…
आभार आदरणीय
At 7:28pm on May 4, 2015, Seema Singh said…
आभार सर मार्गदर्शन के लिए
At 8:35am on April 17, 2015, Mohan Sethi 'इंतज़ार' said…

आदरणीय Dr. Vijai Shanker जी आप का हार्दिक आभार ....मंगलकामनाएँ...सादर  

At 6:57am on January 18, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय डॉ विजय शंकर सर, निवेदन स्वीकार करने के लिए आभार...

विद्यार्थी की मुक्त कंठ प्रशंसा आपका बड़प्पन और आपके हृदय की विशालता का प्रमाण है.

आपका  स्नेह और आशीर्वाद  सदैव मिलता रहे, इसके लिए सदैव प्रयास करता रहूँगा. नमन 

At 10:51pm on January 15, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय डॉ विजय शंकर सर, आभार, धन्यवाद.... आप लोगो के स्नेह और आशीर्वाद से ही मंच पर सक्रिय हो पाता हूँ. आपका आभार हार्दिक धन्यवाद 

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नसीब — डॉo विजय शंकर

एक उम्र भर हम
लोगों को समझते रहे।
हालातों को समझते रहे ,
दोनों से समझौता करते रहे ,
दुनिया में समझदार माने गए।
बस अफ़सोस यह ही रहा ,
हमें कोई ऐसा मिला ही नहीं ,
या नसीब में था ही नहीं ,
जिसे हम भी समझदार मानते
और हम भी समझदार कहते।

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on July 20, 2020 at 10:31pm — 2 Comments

दो लघु-कवितायें — डॉo विजय शंकर

सच्चे मन से ईश्वर

मंदिर से अधिक

अस्पतालों में

याद किया जाता है l 

जो…

Continue

Posted on July 12, 2020 at 8:30am — 2 Comments

हिसाब-किताब— डॉO विजय शंकर।



उम्र साठ-सत्तर तक की ,

आदमी पांच पीढ़ियों से रूबरू हो लेता है।

देखता है , समझ लेता है कि

कौन कहाँ से चला , कहाँ तक पहुंचा ,

कैसे-कैसे चला , कहाँ ठोकर लगी , ,

कहाँ लुढ़का , गिरा तो उठा या नहीं उठा ,

और उठा तो कितना सम्भला।

कर्म , कर्म का फल , स्वर्ग - नर्क ,

कितना ज्ञान , विश्वास , सब अपनी जगह हैं।

हिसाब -किताब सब यहीं होता दिखाई देता है।

बस रेस में दौड़ने वालों को सिर्फ

लाल फीता ही दिखाई देता है।

मौलिक एवं अप्रकाशित…

Continue

Posted on July 2, 2020 at 9:36am — 4 Comments

दुनिया में दुनिया - डॉo विजय शंकर

इस दुनिया में
हर आदमी की
अपनी एक दुनिया होती है।
वह इस दुनिया में
रहते हुए भी अपनी
उस दुनिया में रहता है।
उसी में रह कर रहता है ,
उसी में सोचता है ,
उसी में जीता है।
**************************
वो बेहद खुशनसीब हैं
जो रिश्तों को जी लेते हैं ,
वफ़ा के लिए जी लेते हैं ,
वफ़ा के लिए मर जाते हैं ,
बाकी तो सिर्फ ,इन्हें
निभाते-निभाते मर जाते हैं।

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on June 15, 2020 at 9:30am — 9 Comments

 
 
 

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