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Hari Prakash Dubey
  • Male
  • Haridwar,Uttarakhand
  • India
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Mohammed Arif commented on Hari Prakash Dubey's blog post लाल सलाम: लघुकथा : हरि प्रकाश दुबे
"आदरणीय हरिप्रकाश दुबे जी आदाब, लाजवाब , विचारोत्तेजक लघुकथा । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
Aug 7
Sheikh Shahzad Usmani commented on Hari Prakash Dubey's blog post लाल सलाम: लघुकथा : हरि प्रकाश दुबे
""लाल सलाम" और कल्याणी द्वारा "कल्याणकारी" त्याग/बलिदान। बहुत बढ़िया अनुपम भावपूर्ण सृजन के लिए सादर हार्दिक बधाई आदरणीय हरि प्रकाश दुबे जी। प्रवाहमय विचारोत्तेजक रचना शुरू से अंत तक बांधे रखती है। सादर।"
Aug 6
Samar kabeer commented on Hari Prakash Dubey's blog post लाल सलाम: लघुकथा : हरि प्रकाश दुबे
"जनाब हरि प्रकाश दुबे जी आदाब,अच्छी लगी आपकी लघुकथा,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । कृपया पटल पर अपनी सक्रियता बनाएं ।"
Aug 5
Hari Prakash Dubey posted a blog post

लाल सलाम: लघुकथा : हरि प्रकाश दुबे

घने जंगलों के बीच जगह जगह लाल झंडे लगे हुए थे. सैनिकों की जैसी वर्दी में कुछ लोग आदिवासियों को समझा रहे थे, “सुनो इस जंगल, जमीन और सारे संसाधनों पर सिर्फ तुम्हारा और तुम्हारा ही हक़ है, इन पूंजीपतियों के और इनकी रखैल सरकार के खिलाफ, हम तुम्हारे लिए ही लड़ रहें है, इनको तो हम नेस्तनाबूद कर देंगें !”“पर कामरेड अब तो सरकार हम पर ध्यान दे रही है, सड़क पानी उद्योग की व्यवस्था भी कर रही है, क्यों न इस लड़ाई को छोड़ दिया जाए, वैसे भी सालों से कितना खून बह रहा है?”“चुप हरामजादी, तेरे मुहँ से बगावत की बू आ…See More
Aug 5
Samar kabeer commented on Hari Prakash Dubey's blog post फिर भी :कविता :हरि प्रकाश दुबे
"जनाब हरि प्रकाश दुबे जी आदाब,अच्छी लगी कविता,बधाई स्वीकार करें ।"
Aug 4
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Hari Prakash Dubey's blog post रूंधी हुई आवाज़ : लघुकथा : हरि प्रकाश दुबे
"आदरणीय हरिप्रकाश दुबे जी सादर प्रणाम, बहुत ही अच्छे कथानक को चुना आपने । माँ आखिर माँ होती है । वह कभी नहीं चाहती की घर टूटे । वह हर परिस्थिति में परिवार को बचाने का प्रयास करती है ।अच्छी लघु कथा ।बधाई स्वीकार कीजिये"
Aug 4
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Hari Prakash Dubey's blog post फिर भी :कविता :हरि प्रकाश दुबे
"आद0 हरि प्रसाद दुबे जी सादर अभिवादन, बढ़िया सृजन्, बधाई आपको"
Aug 4
Hari Prakash Dubey posted a blog post

फिर भी :कविता :हरि प्रकाश दुबे

कितनी  सहज हो तुम कोई रिश्ता नही मेरा ओर तुम्हारा फिर भी अनगिनत पढ़ी जा रही हो,मुझे बिन कुछ कहे बस मुस्कुरा कर अनवरत सुनी जा रही हो ,मुझे बस यही अहसास काफी हैसंपूर्ण होने का,मेरे लिए !!"मौलिक व अप्रकाशित"© हरि प्रकाश दुबेSee More
Aug 3
Hari Prakash Dubey commented on Hari Prakash Dubey's blog post रूंधी हुई आवाज़ : लघुकथा : हरि प्रकाश दुबे
"आप तो  स्वंय बहुत अच्छा लिखते  है आदरणीय  Sheikh Shahzad Usmani  साहब , रचना पर आपके समर्थन के लिए आपका कोटिश: धन्यवाद ! सादर "
Aug 3
Hari Prakash Dubey commented on Hari Prakash Dubey's blog post रूंधी हुई आवाज़ : लघुकथा : हरि प्रकाश दुबे
"आदरणीय  Samar kabeer साहब, रचना पर आपके समर्थन से उत्साहवर्धन होता है ,हालांकि आजकल कार्य क्षेत्र में स्थानांतरण की वजह से   वक्त पर प्रत्युत्तर नहीं दे पा रहा हूँ ,जल्द ही चीजें सामान्य  हो  जायेंगी , अपना स्नेह बनाए…"
Aug 3
Hari Prakash Dubey commented on Hari Prakash Dubey's blog post रूंधी हुई आवाज़ : लघुकथा : हरि प्रकाश दुबे
"आदरणीय  Mohammed Arif  साहब दिल से शुक्रिया आपका ! सादर "
Aug 3
Hari Prakash Dubey commented on Hari Prakash Dubey's blog post रूंधी हुई आवाज़ : लघुकथा : हरि प्रकाश दुबे
"आदरणीया pratibha pande जी, आपका हार्दिक धन्यवाद , सच है माँ का संवाद कुछ अधिक लंबा हो गया है, पर यह कथा भी बस भावना में ही लिखी गयी, छोटा हो सकता था पर कुछ अधूरी सी बात हो जाती ,एक बिगडैल लड़के क लिए जरूरी भी लग रहा था ,इसीलिए !…"
Aug 3
Sheikh Shahzad Usmani commented on Hari Prakash Dubey's blog post रूंधी हुई आवाज़ : लघुकथा : हरि प्रकाश दुबे
"बहुत बढ़िया अनुपम भावपूर्ण रचना के लिए सादर हार्दिक बधाई आदरणीय हरि प्रकाश दुबे जी।"
Aug 2
Samar kabeer commented on Hari Prakash Dubey's blog post रूंधी हुई आवाज़ : लघुकथा : हरि प्रकाश दुबे
"जनाब हरि प्रकाश दुबे जी आदाब,अच्छी लगी आपकी लघुकथा,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Aug 2
Mohammed Arif commented on Hari Prakash Dubey's blog post रूंधी हुई आवाज़ : लघुकथा : हरि प्रकाश दुबे
"आदरणीय हरिप्रकाश दुबे जी आदाब, बहुत ही अच्छे कथानक को चुना आपने । माँ आखिर माँ होती है । वह कभी नहीं चाहती की घर टूटे । वह हर हाल में परिवार को बचाने का प्रयास करती है । संदेशपरक कथा ।बधाई स्वीकार करें ।"
Aug 2
pratibha pande commented on Hari Prakash Dubey's blog post रूंधी हुई आवाज़ : लघुकथा : हरि प्रकाश दुबे
"रिश्तों की संवेदनशीलता पर बुनी भावपूर्ण रचना, हार्दिक बधाई आदरणीय हरि प्रकाश दुबे जी। लघुकथा शिल्प के अनुसार माँ का संवाद कुछ अधिक लंबा हो गया है।"
Aug 2

Profile Information

Gender
Male
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Haridwar Uttarakhand
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Haridwar
Profession
Service
About me
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लाल सलाम: लघुकथा : हरि प्रकाश दुबे

घने जंगलों के बीच जगह जगह लाल झंडे लगे हुए थे. सैनिकों की जैसी वर्दी में कुछ लोग आदिवासियों को समझा रहे थे, “सुनो इस जंगल, जमीन और सारे संसाधनों पर सिर्फ तुम्हारा और तुम्हारा ही हक़ है, इन पूंजीपतियों के और इनकी रखैल सरकार के खिलाफ, हम तुम्हारे लिए ही लड़ रहें है, इनको तो हम नेस्तनाबूद कर देंगें !”

“पर कामरेड अब तो सरकार हम पर ध्यान दे रही है, सड़क पानी उद्योग की व्यवस्था भी कर रही है, क्यों न इस लड़ाई को छोड़ दिया जाए, वैसे भी सालों से कितना खून बह रहा…

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Posted on August 4, 2017 at 11:43pm — 3 Comments

फिर भी :कविता :हरि प्रकाश दुबे

कितनी  सहज हो तुम

कोई रिश्ता नही

मेरा ओर तुम्हारा

फिर भी

अनगिनत पढ़ी जा रही हो,मुझे

बिन कुछ कहे

बस मुस्कुरा कर

अनवरत सुनी जा रही हो ,मुझे

बस यही अहसास काफी है

संपूर्ण होने का,मेरे लिए !!

"मौलिक व अप्रकाशित"

© हरि प्रकाश दुबे

Posted on August 2, 2017 at 11:30pm — 2 Comments

रूंधी हुई आवाज़ : लघुकथा : हरि प्रकाश दुबे

 

“बेटा एक बात कहूं क्या?”

 

“हाँ बोल न माँ, पर अपनी बहू के बारे में नहीं।“   

 

माँ चुप हो गयी, फिर बोली “बेटा, अपने से जुड़े हुए लोगों का महत्व समझना चाहिये, हमे देखना चाहिये की वो हमसे कितना प्यार करते हैं, हमे भी उनको उतना ही स्नेह और महत्व देना चाहिये, कभी-कभी हम अपने से स्नेह करने वालों से, चाहे वो कोई भी क्यों न हों, इस तरह का व्यवहार करने लग जाते हैं, जैसे ‘घर की मुर्गी दाल बराबर’ ।“

बेटा हो सकता है वो आपको, आपके इस तरह के उपेक्षापूर्ण…

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Posted on August 1, 2017 at 9:02pm — 9 Comments

कालिख: लघुकथा :हरि प्रकाश दुबे

“सुन कमला, सारा काम निपट गया या अभी भी कुछ बाकी है!”

नहीं ‘मेमसाहब’ सब काम पूरा कर दिया है, दाल और सब्जी भी बना के फ्रिज मैं रख दी है, आटा भी गूंथ दिया है, साहब आयेंगे तो आप बना कर दे दीजियेगा !

“अरे बस जरा सा ही काम तो बचा है, कमला,ऐसा कर रोटी भी बना कर हॉट केस मैं रख जा !”

“मेमसाहब मुझे देर हो रही है, घर पर बच्चे भूखे होंगे !”

अरे चल पगली १५ मिनट में मर थोड़ी ही जायेंगे, चल जल्दी से बना दे !

गरीबी चाहे जो न…

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Posted on July 25, 2017 at 2:49am — 6 Comments

Comment Wall (11 comments)

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At 7:01pm on January 3, 2016, Sushil Sarna said…

नूतन वर्ष 2016 आपको सपरिवार मंगलमय हो। मैं प्रभु से आपकी हर मनोकामना पूर्ण करने की कामना करता हूँ।

सुशील सरना

At 10:39am on January 23, 2015, Dr. Vijai Shanker said…
स्वागत है आपका आदरणीय हरी प्रकाश दुबे जी. आपकी मित्रता एक सम्मान है मेरे लिए।
सादर।
At 4:56pm on January 9, 2015, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय हरिप्रकाश जी ..आपका मित्र होना मेरे लिए सुखद है ..आपकी रचना को माह की श्रेष्ठ  रचना का सम्मान मिला इस सफलता के लिए आपको ढेर सारी बधाई सादर 

At 7:52pm on January 7, 2015, harivallabh sharma said…

आदरणीय Hari Prakash Dubey साहब स्वागत आपका, एवं माह की श्रेष्ठ आपकी रचना हेतु चयनित होने पर हार्दिक बधाई स्वीकारें..सादर.

At 5:11pm on January 3, 2015, vikram singh saini said…

आपकी मित्रता का ह्रदय से स्वागत है आदरणीय हरि प्रकाश जी

At 9:55pm on December 29, 2014,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय  हरी प्रकाश दुबे  जी .... नमस्कार .... क्षमा चाहता हूँ लाइव चैट पर आपका मेसेज देख नहीं पाया तब मैं राहुल दांगी जी की ग़ज़ल पढ़ कर उस पर टीप लिख रहा था ... सादर 

At 11:51pm on December 15, 2014,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय  हरी प्रकाश दुबे  जी,
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी रचना " कविता : तुम्हारा घोंसला" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है, तथा आप की छाया चित्र को ओ बी ओ मुख्य पृष्ठ पर स्थान दिया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 5:34pm on November 20, 2014, Rita Gupta said…

धन्यवाद ,आभार आपका। 

At 5:57pm on November 10, 2014, vijay nikore said…

मित्रता का हाथ बढ़ाने के लिए आभार।

सादर,

विजय निकोर

At 10:16am on November 7, 2014, जितेन्द्र पस्टारिया said…

आपकी मित्रता का ह्रदय से स्वागत है आदरणीय हरिप्रकाश जी

 
 
 

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