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Samar kabeer
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Samar kabeer commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post पराजित हिन्द (लघुकथा)
"जनाब चन्द्रेश कुमार जी आदाब,बहुत उम्दा लघुकथा लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
13 hours ago
Samar kabeer commented on munish tanha's blog post ग़ज़ल: जिन्दगी में न वन्दगी आई
"जनाब मुनीष तन्हा जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । मतले के ऊला मिसरे में 'वन्दगी' को "बन्दगी" कर लें । 'अब भरोसा करें बात किस पर' इस मिसरे में टंकण त्रुटि के कारण 'बता'की जगह…"
13 hours ago
Samar kabeer commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(आग जलने...)
"जनाब मनन कुमार सिंह जी आदाब,अपने ख़ास अंदाज़ में अच्छी ग़ज़ल कही आपने,बधाई स्वीकार करें ।"
14 hours ago
Samar kabeer commented on SALIM RAZA REWA's blog post दिल का मुआमला है कोई दिल लगी नहीं - सलीम रज़ा रीवा : ग़ज़ल
"जनाब सलीम रज़ा साहिब आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । मतले के दोनों मिसरों में रब्त नहीं है । 'इससे जहाँ में कोई भी शय क़ीमती नहीं' 'क़ीमती शय'से मुराद यहाँ 'दिल का मुआमला'है तो मशकूक है । दूसरे शैर के सानी…"
14 hours ago
Samar kabeer commented on rajesh kumari's blog post वक़्त ऐसी किताब माँगेगा (ग़ज़ल 'राज')
"जनाब रज़ा साहिब बहना राजेश कुमारी जी पटल से कुछ दिनों की छुट्टी पर हैं,और उनके बच्चों ने सख़्ती से ताकीद की है कि वो अपना पूरा समय उनके साथ गुज़ारें,इसी कारण से वो अपनी इस ग़ज़ल पर आई टिप्पणियों का उत्तर भी छुट्टी के बाद दे सकेंगी ।"
14 hours ago
Samar kabeer commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - किसी साधू के गहरे ध्यान से हम
"जनाब निलेश'नूर'साहिब आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ । मतले के सानी मिसरे में 'इत्मिनान'ग़लत शब्द है,सही शब्द है "इत्मीनान",देखियेगा । 'बात जो कुछ है साफ़ साफ़ कहें ऊँचा सुनने लगे हैं कान से…"
14 hours ago
Samar kabeer commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- इस्लाह हेतु / ज़िन्दगी भर सलीब ढ़ोने को / दिनेश कुमार
"जनाब दिनेश कुमार जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,लेकिन ग़ज़ल कुछ जल्दी में कही हुई लगती है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ । 'दिल को पत्थर बना लिया मैंने ख़्वाब आँखों में फिर पिरोने को' इस शैर के सानी मिसरे में 'फिर'शब्द भर्ती का…"
16 hours ago
Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post उसी का तसव्वुर पढ़ा जा रहा है
"'यूँ रुख़ को पलट कर चले जाने वाले बता दीजिये क्या मुहब्बत ख़ता है' इस शैर में शुतरगुर्बा का दोष है,सानी मिसरा यूँ कर सकते हैं:- 'बता दे हमें,क्या महब्बत ख़ता है' चौथे शैर के ऊला में 'समझे' को "समझें" कर लें…"
17 hours ago
Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post उसी का तसव्वुर पढ़ा जा रहा है
"भाई जब तक कोई ख़ुद ओबीओ से जुड़ना न चाहे हम उसे कैसे जोड़ सकते हैं,सिर्फ़ प्रयास कर सकते हैं जो हम बराबर ओबीओ का प्रचार करते नहीं थकते । रही मुशायरों की बात तो ये इसी तरह हो रहे हैं कि तुम हमें बुलाओ हम तुम्हें बुला लेंगे,इस कारण से अच्छे शायरों को कोई…"
yesterday
Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post उसी का तसव्वुर पढ़ा जा रहा है
"मैंने तो पढ़ ली,सारे पाठकों के पास आप जैसा धैर्य तो नहीं ।"
yesterday
Samar kabeer commented on vandana's blog post दीप दान की थाती
"'गणित की पुस्तक'में 'की'ही बोला जायेगा,क्योंकि 'किताब'शब्द स्त्रीलिंग है,और 'जग की अंकगणित में 'जग'और 'गणित'दोनों पुल्लिंग हैं,इसलिये 'की'नहीं हो सकता । 'गठबंधन कर संबंधों…"
yesterday
Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post उसी का तसव्वुर पढ़ा जा रहा है
"जनाब नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,30अशआर पर मुश्तमिल ग़ज़ल,क्या कहूँ इसके बारे में,आप पाठकों की इतनी कड़ी परिक्षा क्यों लेते हैं ?इस प्रयास पर बधाई स्वीकार करें । अगर आप आवश्यक सुधार करना पसंद करें तो कुछ सुझाव दूँ आपको ?"
yesterday
Samar kabeer commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post तू गांधी की लाठी ले ले (लघुकथा)/शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"शैर आप ही की नज़्र है जनाब,जैसे चाहें इस्तेमाल करें,शैर पसन्द करने के लिए शुक्रिया ।"
yesterday
Samar kabeer commented on vandana's blog post दीप दान की थाती
"मोहतरमा वंदना जी आदाब,दीपावली के अवसर पर गीत का अच्छा प्रयास हुआ है,इसके लिये बधाई स्वीकार करें । गीत में शिल्प और प्रवाह का बहुत महत्व होता है जिसका ध्यान रखना आवश्यक है,इसके अलावा व्याकरण दोष का भी ध्यान जरुरी है :- 'जग की अंकगणित में…"
yesterday
Samar kabeer commented on surender insan's blog post ग़ज़ल "हाल-ए-दिल अपना कभी मैं कह न पाया"
"जनाब सुरेन्द्र इंसान जी आदाब,ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ । पहले मतले का सानी मिसरा अगर यूँ कर लें तो कथ्य और रवानी बढ़ जायेगी:- 'मुफ़लिसी ने पाठ ये अच्छा पढ़ाया'"
yesterday
Samar kabeer commented on Mohammed Arif's blog post बीमार कविता
"जनाब मोहम्मद आरिफ़ साहिब आदाब,हक़ीक़त बयान करती बहुत उम्दा कविता लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर दिल से बधाई स्वीकार करें ।"
yesterday

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तरही ग़ज़ल नम्बर 2

नोट :-"तरही मुशायरे में जितनी ग़ज़लें शामिल हुईं, इस ग़ज़ल के क़वाफ़ी उन सबसे अलग हैं"



मफ़ऊल फ़ाइलातु मुफ़ाईल फ़ाइलुन



लेकर गई है हमको जिहालत कहाँ कहाँ

मांगी है तेरे वास्ते मन्नत कहाँ कहाँ



ये आज तेरे पास जो दौलत के ढेर हैं

सच बोल तूने की है ख़ियानत कहाँ कहाँ



अब तक भरी हुई थी जो तेरे दिमाग़ में

फैलाई है वो तूने ग़िलाज़त कहाँ कहाँ



तूने वतन को बेचा है अपने मफ़ाद में

होती है देखें तेरी मज़म्मत कहाँ कहाँ



फ़हरिस्त इसकी अब तो बताना… Continue

Posted on August 2, 2017 at 3:00pm — 27 Comments

'महब्बत कर किसी के संग हो जा'

मफ़ाईलुन मफ़ाईलुन फ़ऊलुन



हिमाक़त छोड़ दे फ़रहंग हो जा

महब्बत कर किसी के संग हो जा



ग़ज़ल मेरी सुना लहजे में अपने

मैं गूँगा हूँ मेरा आहंग हो जा



यहाँ घुट घुट के मरने से है बहतर

निकल मैदाँ में मह्व-ए-जंग हो जा



करे अपना के दुनिया फ़ख़्र जिस पर

वफ़ा का वो निराला ढंग हो जा



चढ़े इक बार जिस पर फिर न उतरे

महब्बत का तू ऐसा रंग हो जा



ये दुनिया सीधे साधों की नहीं है

उदासी छोड़ शौख़्-ओ-शंग हो जा



जुदा ता उम्र कोई कर न… Continue

Posted on July 24, 2017 at 12:00am — 26 Comments

'ये लहू दिल का चूस्ती है बहुत'

फ़ाइलातुन मफ़ाइलुन फ़ेलुन/फ़इलुन/फ़ेलान

ज़ह्न में यूँ तो रौशनी है बहुत
पर जमी इसमें गंदगी है बहुत

इतना आसाँ नहीं ग़ज़ल कहना
ये लहू दिल का चूस्ती है बहुत

एक एक पल हज़ार साल का है
चार दिन की भी ज़िन्दगी है बहुत

चींटियाँ सी बदन पे रेंगती हैं
लम्स में तेरे चाशनी है बहुत

फ़न ग़ज़ल का "समर"सिखाने को
एक 'दरवेश भारती'है बहुत
---
लम्स-स्पर्श
समर कबीर
मौलिक/अप्रकाशित

Posted on July 18, 2017 at 11:03am — 25 Comments

'अदब की मुल्क में मिट्टी पलीद कैसे हो'

मफ़ाइलुन फ़इलातुन मफ़ाइलुन फ़ेलुन/फ़इलुन

१२१२ ११२२ १२१२ २२/११२



ख़ुलूस-ओ-प्यार की उनसे उमीद कैसे हो

जो चाहते हैं कि नफ़रत शदीद कैसे हो



छुपा रखे हैं कई राज़ तुमने सीने में

तुम्हारे क़ल्ब की हासिल कलीद् कैसे हो



बुझे बुझे से दरीचे हैं ख़ुश्क आँखों के

शराब इश्क़ की इनसे कशीद् कैसे हो



हमेशा घेर कर कुछ लोग बैठे रहते हैं

अदब पे आपसे गुफ़्त-ओ-शुनीद कैसे हो



इसी जतन में लगे हैं हज़ारहा शाइर

अदब की मुल्क में मिट्टी पलीद कैसे…

Continue

Posted on July 13, 2017 at 11:30am — 59 Comments

Comment Wall (12 comments)

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At 10:54am on October 9, 2016, सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' said…
आदरणीय समर कबीर साहिब प्रणाम आपको।

गजल विधा सिखने का इच्छुक हूँ और मैंने दूसरी गजल आज इस पटल पर रखी है।

आपके आने से मेरा घर जग जगमगाया।

आपक नजर कर मुझे कुछ सुझाव देंगे तो आगे से मुझे कुछ सीखने में मदद मिलेगी। सादर
At 11:29am on September 26, 2016, Kalipad Prasad Mandal said…

आदरणीय समीर कबीर साहिब आदाब , आपको थोड़ा कष्ट दे रहा हूँ क्योंकि ग़ज़ल में जितनी जानकारी आपको है शायद मेरी जानकारी में और कोई नहीं है | मैं कुछ शे'र ग़ालिब के पढ़ रहा था और उनके बहर जांच कर रहा था अपनी जानकारी केलिए | दो शेर में अटक गया हूँ ,नीचे लिखा है :-

बेनिया/जी हद से गुज/री , बन्दा पर/वर कब तलक 

२१२/ २२१ २/           1222        / २२१२ 

हम कहें/गे हाले  दिल, और आ/प फरमाएं/गे क्या 

२१२/     २२१    २ /   २१२ /    १  222   /२२(१२)

गर किया /नासेह ने/ हमको कै/द ,अच्छा यूं स/ही 

२१२/      २२१२/      212     /२२ २१/२ 

ये जुनू/ने -इश्क के /अंदाज़ छुट /जायेंगे क्या 

212/   २२१२/        221२/       2212

कृपया आप इस्नके सही बहर बताने का कष्ट करें |

सादर 

At 11:08pm on September 24, 2016, Samar kabeer said…
सरिता जी आप किस विषय में
पूछ रही हैं ?
At 9:14pm on September 24, 2016, sarita panthi said…
आदरणीय सर क्या मैंने अब सही जगह पोस्ट की है ?
At 3:16pm on September 19, 2016, Dipu mandrawal said…
आदरणीय समीर कबीर जी आपने मेरी कविताओं को पढ़ा और पसंद किया इसके लिए मेरा प्रणाम स्वीकार करें । Dipu Mandrawal
At 12:07pm on July 26, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय समर सर मेरे मित्रता के निवेदन को स्वीकार करके आपने मुझे अपना आशीर्वाद दिया है मेरे तकरीबन हर रचना को आपका मार्गदर्शन मिलता  रहा है इससे अगले रचना में एक नयी सोच मिलती है आपका स्नेह और आशीवाद यूं ही सतत मिलता रहे इस कामना के और सदर प्रणाम के साथ सादर 

At 9:46pm on February 1, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय Samar kabeer जी,

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें...

At 11:06am on October 24, 2015, Tasdiq Ahmed Khan said…

janab samar kabeer sahab aadab,    hosla afzayi ke liye shukriya ,  1. ar ka matlab hai agar...aur 2.chhar ka matlab hai  ..khayal.

At 6:40pm on March 18, 2015, pratibha tripathi said…

आदरणीय समर कबीर जी आपको माह कि सर्वश्रेष्ठ रचना के हेतु चुने जाने के लिए बधाई प्रेषित करती हूँ । ये सच है कि ग़ज़ल को लिखना और उसमे खिताब पाना बहुत ही प्रशंशनीय है ,आपको एक बार फिरसे बधाई हो सादर । 

At 7:09pm on March 16, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आ०समर कबीर जी

सर्वश्रेष्ठ लेखन  कोई हंसी खेल नहीं  .आपको यह पुरस्कार प्राप्य हुआ . आपको मेरी भूरि-भूरि  बधायी .

 
 
 

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