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Samar kabeer
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Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post कड़वाहट ....
"जनाब सुशील सरना जी आदाब,बढ़िया कविता,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । 'उल्फ़त जे ढलानों पर'---"उल्फ़त की ढलानों पर""
8 hours ago
Samar kabeer commented on Manan Kumar singh's blog post नकल (लघु कथा)
"जनाब मनन कुमार सिंह जी आदाब,अपनी ही लघुकथा को आधार बनाकर एक और लघुकथा लिख दी वाह बहुत ख़ूब, इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
8 hours ago
Samar kabeer commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post वैध बूचड़खाना (लघुकथा)
"जनाब डॉ.चन्द्रेश छतलानी जी आदाब,बहुत ख़ूब वाह, बहतरीन कटाक्ष पूर्ण लघुकथा,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
8 hours ago
Samar kabeer commented on vijay nikore's blog post विकल विदा के क्षण
"जनाब भाई विजय निकोर जी आदाब,हमेशा की तरह एक उत्तम और प्रभावशाली प्रस्तुति पर दिल से बधाई स्वीकार करें ।"
8 hours ago
Samar kabeer commented on Mohammed Arif's blog post पर्यावरणीय कविता --"हिंसक"
"जनाब मोहम्मद आरिफ़ साहिब आदाब,अच्चबी और सच्ची कविता लिखी,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । 'शेरों और नील गायों की खरीद ली उनकी खाल' इन पंक्तियों को यूँ लिखें:- "शेरों और नील गायों की ख़रीद ली हमने खाल" 'अब आदम ख़ोर शेरों…"
8 hours ago
Samar kabeer commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post गऊ ठीक-ठाक नहीं (लघुकथा)
"जनाब शैख़ शहज़ाद उस्मानी नई आदाब,बढ़िया लघुकथा,बधाई स्वीकार करें ।"
8 hours ago
Samar kabeer commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़ज़ल- सर पे मेरे तभी ईनाम न था।
"'सर पे मेरे तभी इनआम न था' यूँ किया जा सकता है ।"
11 hours ago
Samar kabeer commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़ज़ल- सर पे मेरे तभी ईनाम न था।
"जनाब राम अवध जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । गुणीजनों की बातों का संज्ञान लें ।"
11 hours ago
Samar kabeer commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (मिलाओ किसी से नज़र धीरे धीरे )
"जनाब तस्दीक़ अहमद साहिब आदाब,अच्छी ग़ज़ल है, मुबारकबाद ।"
11 hours ago
Samar kabeer commented on सतविन्द्र कुमार's blog post मोम नहीं जो दिल पत्थर है-ग़ज़ल
"जनाब सतविन्द्र कुमार जी आदाब,अच्छी ग़ज़ल है, बधाई स्वीकार करें ।"
11 hours ago
Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post है बड़ा अच्छा तरीका ज़ुल्म ढाने के लिए
"जनाब नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है,बधाई स्वीकार करें । दूसरे शैर के सानी में 'शायद'शब्द भर्ती का है, इसकी जगह 'मुझको' कर सकते हैं । 'चैन से मैं सो रहा था क़ब्र में अपनी तो क्यों तुम यहाँ भी आ गए मुझको सताने…"
11 hours ago
Samar kabeer commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post पार्षद वाली गली (लघुकथा)
"बहना कल्पना भट्ट जी आदाब,बढ़िया लघुकथा,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
11 hours ago
Samar kabeer commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post तलाक की मोहर (लघुकथा)
"बहना कल्पना भट्ट जी आदाब,बढ़िया लघुकथा,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
11 hours ago
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post आग ..
"जनाब सुशील सरना जी आदाब,बहुत उम्दा कविता लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
11 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 80 in the group चित्र से काव्य तक
"'काम' और 'नाकाम' की तुकान्तता सही है क्या अशोक जी?"
Saturday
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 80 in the group चित्र से काव्य तक
"जनाब सतविन्द्र कुमार जी आदाब,प्रदत्त चित्र पर सरसी छन्द आधारित गीत का प्रयास अच्छा लगा,बधाई स्वीकार करें । 'पा पानी की धार'  इस चरण को इस तरह लिखें तो:- 'पाकर जल की धार' बाक़ी गुणीजन बता ही चुके हैं,उनका संज्ञान लें ।"
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'आपके पास है जवाब कोई'

फ़ाइलातुन मफ़ाइलुन फ़इलुन/फेलुन





मेरे ग़म का है सद्दे बाब कोई

आपके पास है जवाब कोई



सुनके मेरी ग़ज़ल कहा उसने

अपने फ़न में है कामयाब कोई



उतनी भड़केगी आतिश-ए-उल्फ़त

जितना बरतेगा इज्तिनाब कोई



सबसे उनको छुपा के रखता हूँ

तोड़ डाले न मेरे ख़्वाब कोई



पास है जिनके दौलत-ए-ईमाँ

उन पर आता नहीं अज़ाब कोई



कोई उस पर यक़ी नहीं करता

अच्छा बन जाए जब ख़राब कोई



आमने सामने हों जब दोनों

उनको देखे कि माहताब… Continue

Posted on November 12, 2017 at 3:06pm — 30 Comments

"अभी इक आदमी बाक़ी है जो इंकार कर देगा"

मफ़ाईलुन मफ़ाईलुन मफ़ाईलुन मफ़ाईलुन



अगर वो मुफ़लिसी को रौनक़-ए-बाज़ार कर देगा

कई महरुमियों को बर सर-ए-पैकार कर देगा



सभी ने कर लिया इक़रार, लेकिन जानता है वो

अभी इक आदमी बाक़ी है जो इंकार कर देगा



किताबों में लिखा है उसको जन्नत की बशारत है

वफ़ा की राह में क़ुर्बान जो घर बार कर देगा



मिलाएगा अगर हर बात में जो हाँ में हाँ उसकी

उसे नीलाम वो इक दिन सर-ए-बाज़ार कर देगा



हमारे इश्क़ का चर्चा अभी सरगोशियों तक है

जो बाक़ी काम है वो सुब्ह का… Continue

Posted on November 1, 2017 at 11:44am — 62 Comments

'ग़ालिब'की ज़मीन में एक ग़ज़ल

फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फाइलुन



दूर कितनी शादमानी और है

कुछ दिनों की जाँ फिशानी और है



मेरे फ़न की दाद सबने दी मुझे

आपकी बस क़द्रदानी और है



हो चुकीं सब मौत की तैयारियाँ

दोस्तों की नोहा ख़्वानी और है



है ख़बर सबको बहादुर वो नहीं

उसकी वज्ह-ए-कामरानी और है



दास्तान-ए-इश्क़ तो तुम सुन चुके

ज़िन्दगानी की कहानी और है



दोस्तों से तो मुआफ़ी मिल गई

मुझको ख़ुद से सरगरानी और है



लग रहा है उनकी बातों से "समर"

उनके… Continue

Posted on October 22, 2017 at 10:56am — 45 Comments

तरही ग़ज़ल नम्बर 2

नोट :-"तरही मुशायरे में जितनी ग़ज़लें शामिल हुईं, इस ग़ज़ल के क़वाफ़ी उन सबसे अलग हैं"



मफ़ऊल फ़ाइलातु मुफ़ाईल फ़ाइलुन



लेकर गई है हमको जिहालत कहाँ कहाँ

मांगी है तेरे वास्ते मन्नत कहाँ कहाँ



ये आज तेरे पास जो दौलत के ढेर हैं

सच बोल तूने की है ख़ियानत कहाँ कहाँ



अब तक भरी हुई थी जो तेरे दिमाग़ में

फैलाई है वो तूने ग़िलाज़त कहाँ कहाँ



तूने वतन को बेचा है अपने मफ़ाद में

होती है देखें तेरी मज़म्मत कहाँ कहाँ



फ़हरिस्त इसकी अब तो बताना… Continue

Posted on August 2, 2017 at 3:00pm — 27 Comments

Comment Wall (12 comments)

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At 10:54am on October 9, 2016, सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' said…
आदरणीय समर कबीर साहिब प्रणाम आपको।

गजल विधा सिखने का इच्छुक हूँ और मैंने दूसरी गजल आज इस पटल पर रखी है।

आपके आने से मेरा घर जग जगमगाया।

आपक नजर कर मुझे कुछ सुझाव देंगे तो आगे से मुझे कुछ सीखने में मदद मिलेगी। सादर
At 11:29am on September 26, 2016, Kalipad Prasad Mandal said…

आदरणीय समीर कबीर साहिब आदाब , आपको थोड़ा कष्ट दे रहा हूँ क्योंकि ग़ज़ल में जितनी जानकारी आपको है शायद मेरी जानकारी में और कोई नहीं है | मैं कुछ शे'र ग़ालिब के पढ़ रहा था और उनके बहर जांच कर रहा था अपनी जानकारी केलिए | दो शेर में अटक गया हूँ ,नीचे लिखा है :-

बेनिया/जी हद से गुज/री , बन्दा पर/वर कब तलक 

२१२/ २२१ २/           1222        / २२१२ 

हम कहें/गे हाले  दिल, और आ/प फरमाएं/गे क्या 

२१२/     २२१    २ /   २१२ /    १  222   /२२(१२)

गर किया /नासेह ने/ हमको कै/द ,अच्छा यूं स/ही 

२१२/      २२१२/      212     /२२ २१/२ 

ये जुनू/ने -इश्क के /अंदाज़ छुट /जायेंगे क्या 

212/   २२१२/        221२/       2212

कृपया आप इस्नके सही बहर बताने का कष्ट करें |

सादर 

At 11:08pm on September 24, 2016, Samar kabeer said…
सरिता जी आप किस विषय में
पूछ रही हैं ?
At 9:14pm on September 24, 2016, sarita panthi said…
आदरणीय सर क्या मैंने अब सही जगह पोस्ट की है ?
At 3:16pm on September 19, 2016, Dipu mandrawal said…
आदरणीय समीर कबीर जी आपने मेरी कविताओं को पढ़ा और पसंद किया इसके लिए मेरा प्रणाम स्वीकार करें । Dipu Mandrawal
At 12:07pm on July 26, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय समर सर मेरे मित्रता के निवेदन को स्वीकार करके आपने मुझे अपना आशीर्वाद दिया है मेरे तकरीबन हर रचना को आपका मार्गदर्शन मिलता  रहा है इससे अगले रचना में एक नयी सोच मिलती है आपका स्नेह और आशीवाद यूं ही सतत मिलता रहे इस कामना के और सदर प्रणाम के साथ सादर 

At 9:46pm on February 1, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय Samar kabeer जी,

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें...

At 11:06am on October 24, 2015, Tasdiq Ahmed Khan said…

janab samar kabeer sahab aadab,    hosla afzayi ke liye shukriya ,  1. ar ka matlab hai agar...aur 2.chhar ka matlab hai  ..khayal.

At 6:40pm on March 18, 2015, pratibha tripathi said…

आदरणीय समर कबीर जी आपको माह कि सर्वश्रेष्ठ रचना के हेतु चुने जाने के लिए बधाई प्रेषित करती हूँ । ये सच है कि ग़ज़ल को लिखना और उसमे खिताब पाना बहुत ही प्रशंशनीय है ,आपको एक बार फिरसे बधाई हो सादर । 

At 7:09pm on March 16, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आ०समर कबीर जी

सर्वश्रेष्ठ लेखन  कोई हंसी खेल नहीं  .आपको यह पुरस्कार प्राप्य हुआ . आपको मेरी भूरि-भूरि  बधायी .

 
 
 

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