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डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव
  • Male
  • Lucknow Uttar Pradesh
  • India
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डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's Discussions

ओ बी ओ लखनऊ चैप्टर की साहित्य संध्या /काव्य गोष्ठी माह अक्टूबर 2015 पर एक संक्षिप्त रिपोर्ट
2 Replies

ओ बी ओ लखनऊ चैप्टर की साहित्य संध्या /काव्य गोष्ठी माह अक्टूबर 2015 पर एक संक्षिप्त रिपोर्ट - डा0 गोपाल नारायण श्रीवास्तव दिनांक 11-10-2015 , रविवार सायं 4 बजे ओ बी ओ , लखनऊ चैप्टर की साहित्य संध्या…Continue

Started this discussion. Last reply by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव Oct 18, 2015.

ब्रह्माण्ड में क्या हम अकेले हैं ? -डा0 गोपाल नारायण श्रीवास्तव
2 Replies

      ( प्रसिद्ध भू-वैज्ञानिक डा0 शर्दिदु मुकर्जी और अंतरजाल से प्राप्त जानकारी के आधार पर )   अमेरिका स्थित सेटी (search for extraterrestrial intelligence (SETI) नामक संस्था  सुदूर ब्रह्माण्ड  में…Continue

Started this discussion. Last reply by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव Oct 13, 2015.

साकेत महाकाव्य का उद्घोष – “सन्देश नहीं मैं यहाँ स्वर्ग का लाया” =डा० गोपाल नारायन श्रीवास्तव

      तुलसी की भांति राष्ट्र कवि मैथिलीशरण गुप्त के इष्टदेव भी राम थे I वे राम को ईश्वर  मानते है और साकेत के राम से पूंछते भी हैं  –राम तुम मानव हो, ईश्वर नहीं हो क्या ?विश्व में रमे हुए नहीं सभी…Continue

Started Sep 5, 2015

विश्व में एक और ‘नन्हा भारत’- मारीशस -- डा0 गोपाल नारायण श्रीवास्तव

           वैज्ञानिक मान्यता है कि पृथ्वी की चलायमान “प्लेट्स” के कारण समुद्रतल से ज्वालामुखी-विस्फोट के फलस्वरूप सैकड़ो द्वीप बने I आज से लगभग 80 लाख वर्ष पहले ऐसी ही एक घटना से यह द्वीप अस्तित्व में…Continue

Started Jun 24, 2015

 

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Latest Activity

डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on अलका ललित's blog post कोमल स्पंदन मन चिर उन्मन, (गीत) :अलका ललित
"आ०  अलका ललित जी , विहग का अर्थ गगनचर होता है  इस लिहाज से  संभव है  किसी ,  कोष में इसका एक अर्थ चंद्रमा भी हो  परन्तु यह अर्थ प्रचलन में नहीं है , अप्रचलित अर्थ  प्रयोग से बचना चाहिए . सादर ."
Aug 12
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on अलका ललित's blog post कोमल स्पंदन मन चिर उन्मन, (गीत) :अलका ललित
"आदरणीया विहग  चाँद  कैसे ? विहग तो पक्षी होता है  और छंद  न तो चौपई है और न चौपाई  किसलय पुंजित ह्रदय हुलसित(15 मात्राएँ उद्विग्न है संध्या तट कुसुमित----लय बाधित रे रीत मुक्त प्रीती बंधन-------- प्रीति -------------रीति…"
Aug 9
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on vijay nikore's blog post गहरी पहचान
"आदरणीय निकोर  जी , आपका सदेश मिला . मैं जरूर अन्य  व्यस्त्तताओं  के कारण ओ बी ओ पर अधिक सक्रिय नहीं रह पाता . इसका अफ़सोस मुझे भी है . पैतालीस वर्ष के बाद चाहत के ऐसी अनुपम  जिजीविषा जो आपके गीत में अभिव्यक्त हुयी…"
Aug 5
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on विनय कुमार's blog post एक गीत--
"आ० विनय जी . हिंदी के लिहाज से यह  गीत नहीं है . आ० समर कबीर साहिब ने ठीक कहा यह गजल की तरह कही गयी  है , उम्मीद है अगली  बार मुकम्मिल गजल से मुलाकात होगी . सादर ."
Aug 5
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-28
"कर्तव्य ‘गुरुवर, ‘सुख’ क्या है ?’ शिष्य ने पूंछा ‘यह एक चिरंतन प्रश्न है ?’ – गुरु ने मुस्कराकर कहा –‘सुख की कोई सर्वमान्य परिभाषा नहीं है, किसी व्यक्ति के लिए जो सुख का उपादान है वही दूसरे के…"
Jul 31
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-85
"आ० अनुज  आपकी  हौसला अफजाई से आप्य्यायित हूँ  सादर ."
Jul 29
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-85
"आदरणीय आभारी हूँ."
Jul 29
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-85
"आ० नीलेश जी , जरूर जरूर  ध्यान दे रहा हूँ ,"
Jul 29
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-85
"आ० लक्ष्मी धामी जी , अनुगृहीत हुआ ."
Jul 29
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-85
" आ० द्वीदी बहुत बहुत आभार ."
Jul 29
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-85
"आ० मशविरे के लिए शुक्र्गुजार हूँ . मफहूम के बारे  और  खुलासा करना चाहें मेरे लिए यह शब्द नया है . सादर ."
Jul 29
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-85
" आभार सादर ."
Jul 29
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-85
"थोड़ा तो कर लिहाज़ तू अपनी जुबान की यू टर्न से चलेगी सियासत कहाँ कहाँ।।-----------------------अच्छी गजल कही आपने"
Jul 28
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-85
"अच्छी गजल हुयी है आदरणीय"
Jul 28
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-85
"इज्जत तो उसने कर दी है झटके में तार तार कोई रफू करे भी तो इज्जत कहाँ कहाँ-----------------------बहुत बढ़िया आ० दीदी ।"
Jul 28
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-85
"आ० नवीन जी , बहुत बढ़िया ."
Jul 28

Profile Information

Gender
Male
City State
LUCKNOW (UTTAR PRADESH)
Native Place
LUCKNOW
Profession
RETD. GOVT. SERVANT
About me
Ph.D. in Hindi Lit. AND ACTIVE IN CREATIVE HINDI LITERATURE

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मजाक ( लघुकथा )

कहो बिरजू कैसे आये ? वह भी सवेरे-सवेरे’

 बिरजू रैदास हमारे यहाँ हलवाही का कार्य करते थे. खेती के नए उपकरण आ जाने और उम बढ़ जाने से उन्होंने अब यह कार्य छोड़ दिया था.

‘मलकिन, बिटिया की शादी तय कर दी है. अब आप से कुछ मदद होइ जाय ?’

‘अच्छा तो दिविया इतनी बड़ी हो गयी , जरूर-जरूर हमारी भी तो बेटी ही है’ –मैंने सकुचाते हुए उसे तीस ह्जार का चेक दिया.

‘जुग-जुग जियो मलकिन. बिटिया तरक्की करे‘ -वह आशीर्वाद देकर चला…

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Posted on July 1, 2017 at 12:00pm — 8 Comments

ऐडवर्स रिपोर्ट(लघु कथा )

 मैं पहुंचा ही था कि मुझे अपने घर से दो अजनबी लड़के निकलते हुए दिखाई दिए. इससे पहले कि मैं उनकी बाबत कुछ जान पाता. वे बाईक पर बैठकर रफ्फूचक्कर हो गये.

दरवाजे पर बेटा खडा था. मैंने उसकी ओर प्रश्नवाचक दृष्टि से देखा तो उसने बताया कि डोमेस्टिक गैस सर्विस’ से आये थे .यह वही गैस सर्विस थी जहां से मेरे घर एल पी जी सिलिंडर आता है.

‘क्यूँ आये थे ?’- मैंने यूँ ही पूंछ लिया.

‘अपना गैस स्टोव चेक करने आये थे ?’

‘ स्टोव-------मगर क्यों ?’ मैं हैरत में पड़ गया –‘ जब चूल्हा…

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Posted on June 23, 2017 at 7:09pm — 6 Comments

द्वितीय

 ट्रेन के चलते ही एक तरुण दैनिक यात्री  द्वितीय श्रेणी के स्लीपर क्लास में दाखिल  हुआ. आरक्षित श्रेणी के यात्री अधिकांशतः अपनी बर्थ पर अधपसरे हुए थे . एक बर्थ के कोने पर खाली जगह देखकर वह बैठने जा ही रहा था कि उस पर बैठे अधेड़ व्यक्ति ने गुर्राकर कहा –‘आगे बढ़ो,…

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Posted on June 6, 2017 at 8:54pm — 2 Comments

गजल

221   221   212

वह दौर था जो गुजर गया

था इक नशा जो उतर गया

 

देखा था उसने फरेब से

दिल आशिकाना सिहर गया

 

मुफलिस समझ के जनाब वो 

पहचानने से मुकर गया

 

जिस पर भरोसा किया बहुत

वह यार जाने किधर गया

 

जब साथ था तो कमाल था

अब जिन्दगी का हुनर गया

 

इक ठेस ही थी लगी मुझे  

मैं कांच सा था बिखर गया

 

जिस नाग ने था डसा मुझे

मैंने सुना है कि मर…

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Posted on April 7, 2017 at 9:19pm — 10 Comments

Comment Wall (54 comments)

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At 9:17pm on June 27, 2016, Sulabh Agnihotri said…

स्वागत है आदरणीय !

At 7:02pm on January 3, 2016, Sushil Sarna said…

नूतन वर्ष 2016 आपको सपरिवार मंगलमय हो। मैं प्रभु से आपकी हर मनोकामना पूर्ण करने की कामना करता हूँ।

सुशील सरना

At 12:44pm on September 23, 2015, gaurav bhargava said…

वह अगले साल आएगा - इस वाक्य में कौन सा कारक है?
1)  कर्म कारक
2) अपादान कारक
3) अधिकरण कारक
4) सम्बन्ध कारक

At 6:35pm on August 6, 2015, Harash Mahajan said…

आदरणीय डा. गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी कृतज्ञ हूँ सर !!

At 8:06pm on August 1, 2015, Prashant Priyadarshi said…

आ. गोपाल नारायन सर, ये घटना मेरे सामने की है(मेरे परम मित्र के साथ घटी हुई) इसीलिए मैंने इस पर लिखने का प्रयास किया है. एक प्रयास थी इस संवेदनशील मुद्दे पर लिखने की, काफ़ी कमियाँ रह गई हैं. सुधरा हुआ रूप निकट भविष्य में पुनः आप सभी श्रेष्ठ एवं गुणीजनों के समक्ष प्रस्तुत करूँगा. कहानी पर समय देकर मार्गदर्शन के लिए आपको कोटिशः धन्यवाद. आपके द्वारा इंगित किए गए बिन्दुओं  पर काम करके यह कहानी पुनः पोस्ट करूँगा.

At 12:16am on July 19, 2015, kanta roy said…
नतमस्तक हुई मै पाकर यह सम्मान , आदर में श्री माननीय डा. गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी आपके साथ ही ओबीओ की भी करती हूँ गुणगान ।
At 9:23am on June 5, 2015, Manan Kumar singh said…

'

यही है कविता का मर्म

नियम नहीं, धर्म नहीं

बस केवल कर्म'.....आदरणीय गोपाल भाईजी, बहुत बढ़िया, कविता कर्म प्रधान हो यह लक्ष्य होना चाहिए, सादर। 

At 2:07pm on April 16, 2015, jaan' gorakhpuri said…

बहुत बहुत आभार! आदरणीय डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव सर! स्नेह बनाये रक्खे!

At 5:37pm on February 28, 2015, maharshi tripathi said…

आ. डॉ गोपाल नारायण जी ,,,कविता के इस मंच पर ,,अपना मित्र बनाकर  आपने  मुझे पुरस्कार  दिया ,,आपका हार्दिक आभार और आशा है ,यूँ ही हम छोटों को आशीष देते रहेंगे |

At 10:38pm on February 17, 2015, pratibha tripathi said…

आदरणीय डॉ गोपाल जी मैं आपका हार्दिक आभार प्रस्तुत करती हूँ ,मेरी इस खुशी में आप भी भागीदार हैं आपने आवश्यक निर्देशों द्वारा कविता में जो सुधार कराया वो सराहनिय है ।  मैं आगे भी आपका मार्गदर्शन चाहूंगी ,आप ऐसे ही मुझे सहयोग प्रदान करें । सादर आभार 

 
 
 

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"चित्र को साकार कर दिया आपके सार छन्दों ने हार्दिक बधाई आदरणीय"
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"जी बेहद शुक्रिया आपका आदरणीया प्रतिभा पांडे जी।सादर नमन सँग आभार जी।"
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"छन्न पकैया छन्न पकैया,बातें ख़ास बताई चित्र हुआ यह सार्थक सर जी,ले लो खूब बधाई"
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