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डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव
  • Male
  • Lucknow Uttar Pradesh
  • India
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डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's Discussions

ओबीओ लखनऊ चैप्टर की साहित्य संध्या माह सितम्बर 2019 – एक प्रतिवेदन :: डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

हिंदी दिवस दिनांक 14 सितम्बर 2019  को सायं 3 बजे ओबीओ लखनऊ चैप्टर की साहित्य संध्या का आयोजन  37, रोहतास एन्क्लेव, फैजाबाद रोड (डॉ. शरदिंदु जी के आवास) पर आदरणीय डॉ . अशोक शर्मा  के सौजन्य से हुआ  I…Continue

Started Sep 19

ओबीओ लखनऊ चैप्टर की साहित्य संध्या माह अगस्त 2019 – एक प्रतिवेदन   :: डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

 24 अगस्त 2019,भाद्रपद अष्टमी दिन शनिवार,बहुत से लोगों ने इस दिन कृष्ण जन्मोत्सव मनाया और उसी औत्स्विक माहौल में सायं 3 बजे ओबीओ लखनऊ चैप्टर की साहित्य संध्या का साज 37, रोहतास एन्क्लेव, फैजाबाद रोड…Continue

Started Sep 16

ओबीओ लखनऊ चैप्टर की साहित्य संध्या माह जुलाई 2019 – एक प्रतिवेदन       :: डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

सावन का महीना I ग्रामीण अंचल में इन दिनों मल्हार गाया जाता है I कृष्ण पक्ष की एकादशी अर्थात 28 जुलाई 2019 के सायं 4 बजे ओबीओ लखनऊ चैप्टर की साहित्य संध्या 37, रोहतास एन्क्लेव, फैजाबाद रोड (डॉ.…Continue

Started Aug 14

मलिक मुहम्मद जायसी  के जीवन वृत्त पर लिखे गए ऐतिहासिक उपन्यास 'पंडितन केर पछलगा' के लोकार्पण पर संदीप कुमार सिंह की रिपोर्ट    प्रस्तुति- डॉ. गोपाल नारायण श्रीवास्तव

कैफी आज़मी एकेडमी., लखनऊ में  दिनांक 21-7-2019 दिन रविवार को सम्पन्न हुए समारोह में लोकार्पण के पश्चात लेखकीय वक्तव्य देते हुए डॉ. गोपाल नारायण श्रीवास्तव ने अपने उपन्यास की सृजन प्रक्रिया पर प्रकाश…Continue

Started Jul 23

 

डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's Page

Latest Activity

डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post नेता (लघुकथा )
"ब्रज जी आभार "
Oct 13
Shyam Narain Verma commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post प्यार
"आदरणीय, प्रणाम, बहुत ही सुंदर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर"
Oct 12
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव replied to डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's discussion फर्क है ग़ज़ल  और छंद के मात्रिक विधान में     :: डॉ. गोपाल नारायण श्रीवास्तव in the group भारतीय छंद विधान
"आ० गहलौत जी, आपका सदर आभार I "
Oct 12
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' replied to डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's discussion फर्क है ग़ज़ल  और छंद के मात्रिक विधान में     :: डॉ. गोपाल नारायण श्रीवास्तव in the group भारतीय छंद विधान
"बहुत सुन्दर आलेख के लिए आपको बधाई | निश्चय ही हिंदी छंदों को उनके मूल रूप में ही रहने देना चाहिए | लेकिन समस्या यही है कि परिश्रम कौन करे | आजकल वाचिक एक नया नाम रख दिया गया है ,जब कि छंद तो केवल दो प्रकार के ही रहे हैं वर्णिक और मात्रिक | लेकिन…"
Oct 12
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव added a discussion to the group भारतीय छंद विधान
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फर्क है ग़ज़ल  और छंद के मात्रिक विधान में     :: डॉ. गोपाल नारायण श्रीवास्तव

 \जब से हिन्दी में ‘ग़ज़ल ’ लिखना शरू हुआ तब से हिन्दी के वर्णिक गण ‘नगण’ को हिन्दी के कवियों ने भी लगभग नकार दिया है I इससे हिन्दी की छंद रचना कुछ आसान तो हुई है,  पर यह छंदों  की वैज्ञानिकता पर एक बड़ा संकट है I हिन्दी छंदों में तमाम संस्कृत से ग्रहीत छंद है और संस्कृत का छान्दसिक  व्याकरण कितना वैज्ञानिक और पुराना है,  यह बताने की आवश्यकता नहीं है I आज हिन्दी छंद के वैयाकरण, जिनकी साहित्य जगत में प्रतिष्ठा भी है, वे भी कमल को ‘नगण’ नहीं मानते , क्योंकि उर्दू में  कमल को क+म+ल (111   ) न मानकर …See More
Oct 12
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post नेता (लघुकथा )
"बहुत ही शानदार आदरणीय डा साहब...बहुत उम्दा तंज"
Oct 12
Samar kabeer commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post प्यार
"जनाब डॉ. गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी आदाब,अच्छी रचना हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Oct 11
Sushil Sarna commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post प्यार
"वादियों से गुजरते हुए चीख उठती है मेरी आत्मा- “तुम मेरे हो “ और स्तब्ध हो उठता है वह अदना सा फूल .... वाह आदरणीय अंतर्मन के भावों का एक अदना सा फूल के साथ सम्बन्ध चित्रित किया है , अद्भुत,और अनुपम है। इस भावात्मक सृजन के लिए दिल से बधाई…"
Oct 11
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a blog post

प्यार

 फूलो कीवादियों से गुजरते हुएतमाम खिली रौनकों के बीच  हठात वहमन को खींच लेता हैएक अदना सा फूल जिसके आगेहो जाते हैआसमान  के सितारे फीकेनीरस लगते हैप्रकृति  के सारे उपादान  बेचैन मन कोतब निखिल ब्रह्मांड मेंयदि  कुछ भाता हैतो सिर्फ वहीअदना सा फूल बन जाता है जबअपनी सहजता और सादगी मेंसाधारण सा वहअपने  ही अस्तित्व को  तलाशती  किसी  एकाकी निगाहका लक्ष्य         होने  लगता है तबहवा की लहरों पर नर्तन  मन हो उठता हैमहक भरा  बादलनही मानते प्राणफिर कोई अनुशासन वादियों से गुजरते हुएचीख उठती हैमेरी…See More
Oct 11
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted an event

ओ बी ओ लखनऊ चैप्टर at 37 , रोहतास एन्क्लेव ( दादा श्री शरदिंदु मुकर्जी का आवास )

October 20, 2019 from 3pm to 6pm
साहित्य संध्या माह अक्टूबर 2019 See More
Oct 10
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post नेता (लघुकथा )
"आ० सरना जी . बहुत अनुग्रहीत हुआ "
Oct 8
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post नेता (लघुकथा )
"आ० समर कबीर जी  बहुत बहुत आभार "
Oct 8
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post नेता (लघुकथा )
"आ० तेजवीर जी आभार "
Oct 8
Sushil Sarna commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post नेता (लघुकथा )
"वाह आदरणीय डॉ गोपाल जी बहुत ही सुंदर एक कटु कटाक्ष को दर्शाती लघु कथा। लघु कथा क्या होती है ये कोई आप से सीखे। कम शब्दों में अधिकतम भावों की अभियक्ति जो दिल को छू ले। नमन आपकी लेखनी को सर।"
Oct 8
Samar kabeer commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post नेता (लघुकथा )
"जनाब डॉ. गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी आदाब,बहुत उम्दा और सटीक तंज़, कम शब्दों में शानदार लघुकथा,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Oct 7
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"दादा शरदिंदु जी , इस सूचना में एक लिपिकीय त्रुटि है  I  मैंने 'मेघनाद' का नही अपितु 'मेघदूत' का काव्यानुवाद किया है I यदि एडिट हो सके तो सुधार करना चाहें I  सादर I "
Oct 5

Profile Information

Gender
Male
City State
LUCKNOW (UTTAR PRADESH)
Native Place
LUCKNOW
Profession
RETD. GOVT. SERVANT
About me
Ph.D. in Hindi Lit. AND ACTIVE IN CREATIVE HINDI LITERATURE

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डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's Blog

प्यार

 फूलो की

वादियों से गुजरते हुए

तमाम खिली रौनकों के बीच  

हठात वह

मन को खींच लेता है

एक अदना सा फूल

 

जिसके आगे

हो जाते है

आसमान  के सितारे फीके

नीरस लगते है

प्रकृति  के सारे उपादान

  

बेचैन मन को

तब निखिल ब्रह्मांड में

यदि  कुछ भाता है

तो सिर्फ वही

अदना सा फूल

 

बन जाता है जब

अपनी सहजता और सादगी में

साधारण सा वह

अपने  ही…

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Posted on October 11, 2019 at 2:05pm — 3 Comments

नेता (लघुकथा )

 आपने कभी आत्मा की आवाज सुनी  है ?’‘- बाबा ने पूछा I

‘कौन आत्मा  ? ‘

‘वही जो हर मनुष्य के अंतर में रहती है  I ‘

‘बाबा मैं  नेता हूँ , मुझे आत्मा-अंतरात्मा से क्या ?

(मौलिक/अप्रकाशित )

Posted on October 4, 2019 at 11:47am — 8 Comments

दो पल (बह्र-ए-मीर)

22 22 22 22 22 22 22 2   

 -चॉंदी-सोने  से  दो  पल  हैं,  प्रिय देखॅूं या बात करूं  ।

या बांहों  में चाँद खिलाकर  जगमग सारी रात करूं II

                         

आज असंयम को  बहलाऊॅं –‘मेरा पुण्य तुझे मिल जाये ।

जब मैं शांत,  अशांत हृदय का पागल झंझावात करूं I।

 

                         

गजरे का आडंबर तोडूँ , कुंतल शशि -मुख पर छा जाये I   

मैं कर से उलझन सुलझाऊॅ, प्रेम -प्रकंपित गात करूं …

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Posted on September 26, 2019 at 12:30pm — 3 Comments

दु:स्वप्न (लघुकथा )

‘सीते ---- ?’

‘कौन --- स्वामी ?’

‘नही मैं अभाग्य हूँ I’

‘ तो मुझसे क्या चाहती हो ?’

‘मैं कुछ चाहती नहीं , मैं तो तुम्हे सावधान करने आयी हूँ I ‘

‘किस बात के लिए ?’

‘तुम्हारा राम से बिछोह होगा I…

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Posted on September 19, 2019 at 2:00pm — 6 Comments

Comment Wall (53 comments)

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At 7:06pm on October 30, 2017, Alok Rawat said…

आदरणीय डॉक्टर साहेब
आपके द्वारा रचित खंडकाव्य मेघदूत का कथानक पढ़ा .बड़ा साहसिक कदम उठाया है आपने .आपने मेरी जिज्ञासा बहुत बढ़ा दी है .पूरा मेघदूत पढ़ने के लिए मन लालायित हो उठा है . आशा करता हूँ की बहुत जल्दी आपका खंडकाव्य पढ़ने को मिलेगा .महाकवि कालिदास की रचना का हिंदी काव्यानुवाद कितना बड़ा कार्य है और इसके लिए कितनी हिम्मत चाहिए मैं समझ सकता हूँ .किन्तु आपने इस कार्य को पूर्ण करके सामान्य जनमानस को भी मेघदूत की जो सौगात भेंट की है उसके लिए हिंदी साहित्य सदैव आपका ऋणी रहेगा . आप ऐसे ही पुनीत कार्य करते रहें .हमारी शुभकामनाएं सदैव आपके साथ हैं .

At 9:17pm on June 27, 2016, Sulabh Agnihotri said…

स्वागत है आदरणीय !

At 7:02pm on January 3, 2016, Sushil Sarna said…

नूतन वर्ष 2016 आपको सपरिवार मंगलमय हो। मैं प्रभु से आपकी हर मनोकामना पूर्ण करने की कामना करता हूँ।

सुशील सरना

At 12:44pm on September 23, 2015, gaurav bhargava said…

वह अगले साल आएगा - इस वाक्य में कौन सा कारक है?
1)  कर्म कारक
2) अपादान कारक
3) अधिकरण कारक
4) सम्बन्ध कारक

At 6:35pm on August 6, 2015, Harash Mahajan said…

आदरणीय डा. गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी कृतज्ञ हूँ सर !!

At 8:06pm on August 1, 2015, Prashant Priyadarshi said…

आ. गोपाल नारायन सर, ये घटना मेरे सामने की है(मेरे परम मित्र के साथ घटी हुई) इसीलिए मैंने इस पर लिखने का प्रयास किया है. एक प्रयास थी इस संवेदनशील मुद्दे पर लिखने की, काफ़ी कमियाँ रह गई हैं. सुधरा हुआ रूप निकट भविष्य में पुनः आप सभी श्रेष्ठ एवं गुणीजनों के समक्ष प्रस्तुत करूँगा. कहानी पर समय देकर मार्गदर्शन के लिए आपको कोटिशः धन्यवाद. आपके द्वारा इंगित किए गए बिन्दुओं  पर काम करके यह कहानी पुनः पोस्ट करूँगा.

At 12:16am on July 19, 2015, kanta roy said…
नतमस्तक हुई मै पाकर यह सम्मान , आदर में श्री माननीय डा. गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी आपके साथ ही ओबीओ की भी करती हूँ गुणगान ।
At 9:23am on June 5, 2015, Manan Kumar singh said…

'

यही है कविता का मर्म

नियम नहीं, धर्म नहीं

बस केवल कर्म'.....आदरणीय गोपाल भाईजी, बहुत बढ़िया, कविता कर्म प्रधान हो यह लक्ष्य होना चाहिए, सादर। 

At 2:07pm on April 16, 2015, jaan' gorakhpuri said…

बहुत बहुत आभार! आदरणीय डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव सर! स्नेह बनाये रक्खे!

At 5:37pm on February 28, 2015, maharshi tripathi said…

आ. डॉ गोपाल नारायण जी ,,,कविता के इस मंच पर ,,अपना मित्र बनाकर  आपने  मुझे पुरस्कार  दिया ,,आपका हार्दिक आभार और आशा है ,यूँ ही हम छोटों को आशीष देते रहेंगे |

 
 
 

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