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Usha Awasthi
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Awanish Dhar Dvivedi commented on Usha Awasthi's blog post क्या दबदबा हमारा है!
"बहुत सुन्दर रचना।"
4 hours ago
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5 hours ago
Usha Awasthi posted a blog post

क्या दबदबा हमारा है!

क्या दबदबा हमारा है!लोक तन्त्र का सुख भोगेंगेचुने गए हम राजा हैंदेश हमारा, मार्ग हमारा हम ही इसके आका हैं चाहे जितनी गाड़ी रक्खेंफुटपाथों पर, बीच सड़कहमको भला कौन रोकेगा?जन प्रतिनिधि ,बेधड़क, कड़क आस-पास हैं गार्ड हमारेले बन्दूकें साथ चलेंडर से जन सहमे रहते हैं क्या मजाल जो घात करें? पिए शक्ति-मद हम मतवालेकरते नित्य बवाला हैंसंग चापलूसों का दल-बलक्या दबदबा हमारा है! मौलिक एवं अप्रकाशितSee More
5 hours ago
Usha Awasthi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-142
"आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी , रचना सुन्दर लगी , जानकर हर्ष हुआ। हार्दिक आभार आपका"
Sunday
Usha Awasthi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-142
"आदरणीया प्रतिभा पाण्डे जी, रचना सुन्दर लगने हेतु हार्दिक धन्यवाद"
Sunday
Usha Awasthi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-142
"आदरणीय दयाराम मेथानी जी , सृजन सुन्दर लगा ,जानकर  खुशी हुई।  हार्दिक आभार आपका"
Sunday
Usha Awasthi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-142
"जय हिन्द रवि किरण नूतन, नवल है आज की यह प्रात गूँजता जय हिंद का नारा सुबह से भ्रात जन प्रफुल्लित, उल्लसित हो राष्ट्र-प्रेम विभोर बद्ध लय जय हिन्द का नारा लगे चँहु ओर झूमते, मुसकाते; बालक, वृद्ध औ युव वृन्द मनाते अमृत महोत्सव , हॄद भरे आनन्द ले रहे…"
Sunday
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Saturday
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Saturday
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Saturday
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आशा

झरता रहा सावन, तपता रहा मनआषाढ़ सूखा, कहीं बाढ़, कहीं रूखाकृषक का धैर्य छूटासावन की घड़ियाँ, कुछ बूँदे, कुछ लड़ियाँगिर भी गईं तो क्या?मौसम की मार, जीना दुश्वारकैसी हरियाली, कचरे की क्यारीपर आशा ही तो थाती है, ढर्रे पर लौटेगा जीवनसोच व्यापी हैमौलिक एवं अप्रकाशितSee More
Saturday
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Jul 14
Usha Awasthi posted a blog post

विचारणीय

विचारणीय सत्य है, लोग व्यवहारिक हो गए हैं कल के रिश्ते आज खो गए हैं किसी के बाप किसी की माँ का पता ही नहीं झेलें अवसाद बचपन जिया ही नहीं आख़िर हवा किधर बह रही है? इन्सान भ्रमित है कभी इधर, कभी उधर बह रही है अपनी ही धुन में, निर्बन्ध जवानी जिए जाते हैं आया बुढ़ापा सिर धुन पछताते हैं मौलिक एवं अप्रकाशितSee More
Jul 14
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Jul 11
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post सत्य
"हार्दिक आभार ब्रजेश कुमार 'ब्रज'जी,सादर।"
Jul 10
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Usha Awasthi's blog post सत्य
"बढ़िया धारदार लेखन आदरणीया..."
Jul 10

Profile Information

Gender
Female
City State
Lucknow
Native Place
Uttar Pradesh
Profession
Author

ब्राहम्ण

उषा अवस्थी

मान दिया होता यदि तुमने
ब्राम्हण को , सुविचारों को
सदगुण की तलवार काटती
निर्लज्जी व्यभिचारों को

उसको काया मत समझो ,
ज्ञान विज्ञान समन्वय है
द्वैत भाव से मुक्त, जितेन्द्रिय
सत्यप्रतिज्ञ , समुच्चय है

कर्म , वचन , मन से पावन
वह ब्रम्हपथी , समदर्शी है
नहीं जन्म से , सतत कर्म से
तेजस्वी , ब्रम्हर्षि है

मौलिक एवं अप्रकाशित

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क्या दबदबा हमारा है!

क्या दबदबा हमारा है!

लोक तन्त्र का सुख भोगेंगे

चुने गए हम राजा हैं

देश हमारा, मार्ग हमारा

हम ही इसके आका हैं



चाहे जितनी गाड़ी रक्खें

फुटपाथों पर, बीच सड़क



हमको भला कौन रोकेगा?

जन प्रतिनिधि ,बेधड़क, कड़क



आस-पास हैं गार्ड हमारे

ले बन्दूकें साथ चलें



डर से जन सहमे रहते हैं

क्या मजाल जो घात करें?



पिए शक्ति-मद हम मतवाले

करते नित्य बवाला हैं

संग चापलूसों का…

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Posted on August 16, 2022 at 8:57pm — 1 Comment

आशा

झरता रहा सावन, तपता रहा मन
आषाढ़ सूखा, कहीं बाढ़, कहीं रूखा
कृषक का धैर्य छूटा

सावन की घड़ियाँ, कुछ बूँदे, कुछ लड़ियाँ
गिर भी गईं तो क्या?

मौसम की मार, जीना दुश्वार
कैसी हरियाली, कचरे की क्यारी

पर आशा ही तो थाती है, ढर्रे पर लौटेगा जीवन
सोच व्यापी है

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on August 13, 2022 at 12:20pm

विचारणीय

  • विचारणीय



    सत्य है, लोग

    व्यवहारिक हो गए हैं

    कल के रिश्ते

    आज खो गए हैं



    किसी के बाप

    किसी की माँ का पता ही नहीं

    झेलें अवसाद…

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Posted on July 11, 2022 at 11:11pm

कुछ उक्तियाँ

कुछ उक्तियाँ



उषा अवस्थी



आज 'गधे' को पीट कर

'घोड़ा' दिया बनाय

कल फिर तुम क्या करोगे

जब रेंकेगा जाय?



कैसे - कैसे लोग है

कैसे - कैसे घाघ?…

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Posted on July 6, 2022 at 3:30pm

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At 6:29am on August 5, 2018, Kishorekant said…

सुन्दर रचना केलिये हार्दिक अभिनंदन सुश्री उषा अवस्थिजी ।

At 9:01pm on September 9, 2017,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए....

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है.

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"आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी , रचना सुन्दर लगी , जानकर हर्ष हुआ। हार्दिक आभार आपका"
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Usha Awasthi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-142
"आदरणीया प्रतिभा पाण्डे जी, रचना सुन्दर लगने हेतु हार्दिक धन्यवाद"
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Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-142
"आदरणीय प्रतिभा पांडे जी, प्रोत्साहन के लिए हार्दिक आभार।"
Sunday

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