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Nilesh Shevgaonkar
  • Male
  • Indore
  • India
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Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आ. अनिल जी,यह शायर पर निर्भर है कि वो दर्शक चाहते हैं या श्रोता... अगर दर्शक चाहिए तो वहां क़िस्सा या नाटक की जगह तमाशा उपयुक्त होगा लेकिन मिसरा नई तरकीब से कहना पड़ेगा सादर "
35 minutes ago
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आ. अनिल जी इसलिए इस देश को ये चाहते हैं बाँटनाक्यूँ कि हर नेता को अपनी राजधानी चाहिए  .सादर "
40 minutes ago
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- ख़ुद को क़िस्सा-गो समझे है हर क़िरदार कहानी में
"शुक्रिया आ. सालिक गणवीर जी.आपका नम्बर नहीं लग रहा है."
1 hour ago
सालिक गणवीर commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- ख़ुद को क़िस्सा-गो समझे है हर क़िरदार कहानी में
"आदरणीय निलेश नूर साहेब सादर अभिवादन आपकी ग़ज़ल वाकई शानदार है. शैर दर शैर दाद और मुबारकबाद क़ुबूल करें. बहस तो उससे भी ज़ियादा दिलचस्प है. मेरा व्हाट्सएप नं 9407980637 है अगर उचित समझें तो  Hi लिख कर भेंज दें,आपसे बित करना चाहता हूँ आदरणीय."
1 hour ago
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
":( पुछल्ला बेबह्र है... क्षमा करें ... कि को की पढ़ा नहीं जा सकता ..."
2 hours ago
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
2 hours ago
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"शुक्रिया आ. सालिक गणवीर साहब,इस कूड़ेदानी का क़िस्सा बड़ा दिलचस्प है.. मंच पर किसी ग़ज़ल में मैंने इसे क़ाफ़िये के तौर पर इस्तेमाल किया था जिस पर समर सर को ऐतराज़ था... उस पर हमारी लम्बी बहस चली थी..उस में मुर्गी भी आ गयी थी... इस बार समर सर का आदेश था…"
2 hours ago
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आ. रचना जी,अल्फ़ाज़ का लफ़्ज़ों लम्हात का लम्हों जज़्बात का जज़्बों  अशआर का शे'रों ..आदि उर्दू में स्वीकार्य हैं . तहरीर से वर्ना मिरी क्या हो नहीं सकताइक तू है जो लफ़्ज़ों में अदा हो नहीं सकता वसीम बरेलवी. कहता है कोई कुछ तो…"
2 hours ago
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"शुक्रिया आ. मनन जी.क्या उस अव्वल में .. उस + अव्वल का अलिफ़ वस्ल है (स्वर संधि ) जिसे उ सव्वल पढ़ा गया है ..जो शास्त्रोक्त है .सादर "
2 hours ago
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"धन्यवाद आ. लक्ष्मण धामी जी "
3 hours ago
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"ये शिकस्ता दिल के टुकड़े हैं इन्हें रख लीजिएइससे बढ़ कर इश्क़ की और क्या निशानी चाहिए.. इस शेर में भी ऐब ए तक़ाबुल ए रदीफ़ की सूरत है देखिएगा सादर "
3 hours ago
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आ. तस्दीक़ साहब..बड़े मुरस्सा कलाम से नवाज़ा है आपने मंच को..ग़ज़ल के लिए बहुत बहुत बधाई सादर "
3 hours ago
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आ. नाकाम जी आयोजन में सहभागिता के लिए बधाई ...प्यार से पहले ग़ज़ल में हक़बयानी चाहिए... यानी जो ग़ज़ल न कहे उसे प्यार भी नहीं करना चाहिए?. हो असर तेज़ाब से भी अब ज़ियादा अश्क़ में अब तेरी आँखों की ख़ातिर वैसा पानी चाहिए... दोनों मिसरों में अब भर्ती…"
3 hours ago
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आ. मनन जी,ग़ज़ल के प्रयास और शिरक़त के लिए बधाई सादर "
3 hours ago
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आ. लक्ष्मण जी,ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है...लेकिन शेरों में ग़ज़लपन की कमी है .. थोड़े हेर फेर से ..थोड़े और विचार से ग़ज़ल निखर सकती है.. दूसरों  की  बात कड़वी  भूल जानी चाहिए... अब यह मिसरा वैसा हो गया जैसा हम आम बोलचाल में कहते हैं..…"
3 hours ago
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आ. अनिल जी .अच्छी ग़ज़ल हुई है ..कुछ रिवायत आज भी फिरसे पुरानी चाहिए.. यहाँ भी भर्ती का है आज फिर से में बात पूरी हो रही है शेष ग़ज़ल के लिए बधाई "
3 hours ago
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"दिल में घुटती ख़ाहिशों को तर्जुमानी चाहिए फूट के रो लेने की ज़हमत उठानी चाहिए.  . घर के रौशनदान से जाली हटानी चाहिए  फिर से गौरैया घरों में चहचहानी चाहिए.  . सिर्फ हर्फ़ों की जमावट को कहें कैसे ग़ज़ल कुछ तग़ज़्ज़ुल चाहिए थोड़ी रवानी चाहिए.…"
3 hours ago
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आ. सालिक जी,अच्छी ग़ज़ल हुई है ..बधाई स्वीकार करें,,.थक चुके हैं इश्क़ के क़िस्से पुराने सुन के ये (देख कर)दर्शकों को अब कोई ताज़ा कहानी चाहिए ... सुनने वाले श्रोता होते हैं.. देखने वाले दर्शक  ग़ज़ल के लिए पुन: बधाई सादर "
3 hours ago
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आ. मुनीश जी,मतले में बतानी को सिखानी करने से मिसरा निखर जाएगा वक़्त ने रोटी तुम्हें दी मिल बांट खानी चाहिए.. इसकी बहर देख लें ..ग़ज़ल के लिए बधाई सादर "
3 hours ago
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आ. अंजली जी,अच्छी ग़ज़ल हुई है .. मतले में गीत सी ये  ज़िंदगी है  गुनगुनानी चाहिए ..करने से मिसरा बेहतर होगा ऐसा मुझे लगा ..दूसरा शेर बाकमाल हुआ है ..बहुत ख़ूब .तुमको भी तो बात अपनी कहते  आनी चाहिए.उम्दा ग़ज़ल के लिए ढेरों…"
4 hours ago

Profile Information

Gender
Male
City State
Indore-MP
Native Place
Indore-MP
Profession
Civil Engineer

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ग़ज़ल नूर की- जिन की ख़ातिर हम हुए मिस्मार; पागल हो गये

जिन की ख़ातिर हम हुए मिस्मार; पागल हो गये

उन से मिल कर यूँ लगा बेकार पागल हो गये.

.

सुन के उस इक शख्स की गुफ़्तार पागल हो गये

पागलों से लड़ने को तैयार पागल हो गये.

.

छोटे लोगों को बड़ों की सुहबतें आईं  न रास

ख़ुशबुएँ पाकर गुलों से ख़ार पागल हो गये.

.

थी दरस की आस दिल में तो भी कम पागल न थे

और जिस पल हो गया दीदार; पागल हो गये.

.

एक ही पागल था मेरे गाँव में पहले-पहल

रफ़्ता रफ़्ता हम सभी हुशियार पागल हो गये.

.

इल्तिजा थी…

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Posted on October 15, 2020 at 3:00pm — 12 Comments

ग़ज़ल नूर की- ख़ूब इतराते हैं हम अपना ख़ज़ाना देख कर

ख़ूब इतराते हैं हम अपना ख़ज़ाना देख कर

आँसुओं पर तो कभी उन का मुहाना देख कर.

.

ग़ैब जब बख्शे ग़ज़ल तो बस यही कहता हूँ मैं  

अपनी बेटी दी है उसने और घराना देख कर. 

.

साँप डस ले या मिले सीढ़ी ये उस के हाथ है,

हम को आज़ादी नहीं चलने की ख़ाना देख कर.

.

इक तजल्ली यक-ब-यक दिल में मेरे भरती गयी

एक लौ का आँधियों से सर लड़ाना देख कर.

.

ऐसे तो आसान हूँ वैसे मगर मुश्किल भी हूँ

मूड कब…

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Posted on October 3, 2020 at 12:37pm — 7 Comments

ग़ज़ल नूर की- तुम्हें लगता है रस्ता जानता हूँ

तुम्हें लगता है रस्ता जानता हूँ

मगर मैं सिर्फ चलना जानता हूँ.

.

तेरे हर मूड को परखा है मैंने

तुझे तुझ से ज़ियादा जानता हूँ.

.

गले मिलकर वो ख़ंजर घोंप देगा

ज़माने का इरादा जानता हूँ.

.

मैं उतरा अपने ही दिल में तो पाया  

अभी ख़ुद को ज़रा सा जानता हूँ.

.

बहा लायी है सदियों की रवानी

मगर अपना किनारा जानता हूँ.

.

बता कुछ भी कभी माँगा है तुझ से?

मैं अपना घर चलाना जानता हूँ.      

.

निलेश…

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Posted on September 30, 2020 at 1:46pm — 8 Comments

ग़ज़ल नूर की - तर्क-ए-वफ़ा का जब कभी इल्ज़ाम आएगा

तर्क-ए-वफ़ा का जब कभी इल्ज़ाम आएगा

हर बार मुझ से पहले तेरा नाम आएगा.

.

अच्छा हुआ जो टूट गया दिल तेरे लिए

वैसे भी तय नहीं था कि किस काम आएगा.

.

अब रात घिर चुकी है इसे लौट जाने दे

यादों का क़ाफ़िला तो हर इक शाम आएगा.`

`

उर्दू की बज़्म में कभी हिन्दी चला के देख

तेरे कलाम में नया आयाम आएगा.

.

उस सुब’ह धमनियों में ठहर जाएगा ख़िराम  

जिस भोर मेरे नाम का पैग़ाम…

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Posted on September 27, 2020 at 12:00pm — 12 Comments

Comment Wall (12 comments)

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At 7:53pm on September 27, 2019, dandpani nahak said…
परम आदरणीय नीलेश जी आदाब बहुत बहुत शुक्रिया मैं बता नहीं सकता मैं कितना खुश हूँ आपने मेरी ग़ज़ल को सराहा मेरा तो आज का दिन बन गया ! ह्रदय से शुक्रिया
At 8:17pm on July 27, 2019, dandpani nahak said…
मुआफ़ी चाहता हूँ ! बढ़ाने का
At 8:16pm on July 27, 2019, dandpani nahak said…
हौसला बढ़ने का
At 8:15pm on July 27, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय नीलेश जी आदाब . बहुत शुक्रिया हौसला बढ़ने का
At 8:49pm on March 22, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय नीलेश सर प्रणाम
बहुत शुक्रिया
At 2:21pm on September 16, 2017, Afroz 'sahr' said…
आदरणीय निलेश जी आपने ख़ाकसार की बात की ताईद की बहुत आभार प्रकट करता हूँ !सादर
At 9:50pm on March 3, 2017, Hemant kumar said…
आदरणीय सर प्रणम ! मै ओ बी ओ मे काफीया पढ़ रहा हूं पर पल्ले कुछ भी नही पड़ रहा है ।
सर आपसे विनम्र आग्रह है काफीया निर्धारण पर पुनः प्रकाश डालने की अनुकंपा करें ।सादर..
At 2:37am on June 29, 2014, Adesh Tyagi said…
जनाबे-मोहतरम निलेश शेव्गाँवकर साहब, अल्फ़ाज़े-तहसीन का तहे-दिल से शुक्रगुज़ार हूँ।
At 4:47am on November 11, 2013, Abhinav Arun said…

महीने का सक्रिय सदस्य (Active Member of the Month)चुने जाने पर आ. नीलेश जी आपको दिली मुबारकबाद !

At 1:45pm on November 7, 2013, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ0 नीलेश भाई जी, आपको महीने का सकिय सदस्य चुने जाने पर आपको हार्दिक बधाई।  सादर,

 
 
 

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"आदरणीय योगराज प्रभाकर जी नमस्ते, ख़ूबसूरत ग़ज़ल पर बधाई स्वीकार करें आदरणीय, ख़ासतौर पर छठा और…"
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"आद. सालिक गणवीर जी उत्साह वर्धन हेतु धन्यवाद "
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"2122       2122       2122      212 है…"
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"आद नीलेश जी इस ऊला में किस्सा से बेहतर नाटक होगा क्या !"
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