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Nilesh Shevgaonkar
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Samar kabeer commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - किसी साधू के गहरे ध्यान से हम
"जनाब निलेश'नूर'साहिब आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ । मतले के सानी मिसरे में 'इत्मिनान'ग़लत शब्द है,सही शब्द है "इत्मीनान",देखियेगा । 'बात जो कुछ है साफ़ साफ़ कहें ऊँचा सुनने लगे हैं कान से…"
14 hours ago
दिनेश कुमार commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - किसी साधू के गहरे ध्यान से हम
"आ. निलेश सर जी। बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है। वह वाह सभी शेर उम्दा लगे। दिली दाद। सर,... ऐक से बढ़कर एक"
19 hours ago
Nilesh Shevgaonkar commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- इस्लाह हेतु / ज़िन्दगी भर सलीब ढ़ोने को / दिनेश कुमार
"बहुत खूब आ. दिनेश जी एक बस वो नहीं हुआ मेरा क्या नहीं होता वर्ना होने को... इस शेर से मोमिन खान मोमिन याद आ गए ग़ज़ल के लिए बधाई"
19 hours ago
Afroz 'sahr' commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - किसी साधू के गहरे ध्यान से हम
"बहुत ख़ूबसूरत ग़ज़ल के लिए बहुत सारी मुबारकबाद आदरणीय निलेश जी सादर,,,"
20 hours ago
Mohammed Arif commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - किसी साधू के गहरे ध्यान से हम
"आदरणीय निलेश जी आदाब, बहुत ही उम्दा शे'रों से सुसज्जित ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।बाक़ी गुणीजन अपनी राय देंगे ।"
yesterday
Nilesh Shevgaonkar posted a blog post

ग़ज़ल नूर की - किसी साधू के गहरे ध्यान से हम

२१२२, १२१२, २२ (११२) +१ .किसी साधू के गहरे ध्यान से हम बैठे रहते है इत्मिनान से हम. . तुम हो इक टूटती हुई दीवार एक ढहते हुए मकान से हम. . गर ख़ुदा को वहाँ नहीं पाया,    लौट आयेंगे आसमान से हम.    . बात जो कुछ है साफ़ साफ़ कहें ऊँचा सुनने लगे हैं कान से हम. . बुतकदे में जलाने को दीपक जाग जाते हैं इक अज़ान से हम.    . एक एल्बम में तुम हसीं थी बहुत  साथ में थे बड़े जवान से हम.  . वस्ल का पल, ये जिस्म और वो “नूर” हट गए अपने दरमियान से हम.  .निलेश "नूर"मौलिक/ अप्रकाशित See More
yesterday
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल- हिंदी तुकांत के साथ एक प्रयोग (..अण ,, क़ाफ़िये पर संभवत: पहली ग़ज़ल है इस मंच पर)
"धन्यवाद आ. बृजेश जी "
yesterday
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल- हिंदी तुकांत के साथ एक प्रयोग (..अण ,, क़ाफ़िये पर संभवत: पहली ग़ज़ल है इस मंच पर)
"धन्यवाद आ. अजय जी "
yesterday
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल- हिंदी तुकांत के साथ एक प्रयोग (..अण ,, क़ाफ़िये पर संभवत: पहली ग़ज़ल है इस मंच पर)
"जी आ. सौरभ सर, समर सर...सादर "
yesterday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल- हिंदी तुकांत के साथ एक प्रयोग (..अण ,, क़ाफ़िये पर संभवत: पहली ग़ज़ल है इस मंच पर)
"उम्दा ग़ज़ल हुई आदरणीय..सीखने के लिए बहुत कुछ मिला..हार्दिक बधाई.."
yesterday
Ajay Tiwari commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की -जैसे धुल कर आईना फ़िर चमकीला हो जाता है,
"आदरणीय निलेश जी. उम्दा ग़ज़ल हुई है. शुभकामनाएं. सादर "
Sunday
Ajay Tiwari commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल- हिंदी तुकांत के साथ एक प्रयोग (..अण ,, क़ाफ़िये पर संभवत: पहली ग़ज़ल है इस मंच पर)
"आदरणीय निलेश जी, बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है. शुभकामनाएं. सादर "
Sunday
Samar kabeer commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल- हिंदी तुकांत के साथ एक प्रयोग (..अण ,, क़ाफ़िये पर संभवत: पहली ग़ज़ल है इस मंच पर)
"जनाब निलेश जी आदाब,मुझे भी बहना राजेश कुमारी जी के सुझाव बहतर लगे,आप तो इन बारीकियों को बहुत अच्छे से समझ लेते हैं । 'कठिनाई भी बहुत ढीठ है'-और 'कठिनाई भी ढीठ बहुत हे'इसमें जो लय बन रही है वही इस बह्र की जान है, ग़ौर कीजियेगा। ।"
Saturday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल- हिंदी तुकांत के साथ एक प्रयोग (..अण ,, क़ाफ़िये पर संभवत: पहली ग़ज़ल है इस मंच पर)
":-)) आदरणीय नीलेश जी, इस बहर की इसे अच्छाई कहिए या इसके साथ की दिक्कत, इसके साथ वो बहुत कुछ नहीं चलता जो अन्य बहर पर सधे मिसरों में चलता है. बेहतर है, कुछ देर के लिए ग़ज़ल के अरुज़िया विन्दु भूल जाइए और गीत- नज़्म गाइये. रास्ता, देखिएगा, तब ही निकलेगा.…"
Saturday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-84
"अच्छी ग़ज़ल हुई है आ. अफरोज़ जी,बधाई "
Saturday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-84
"आ. सुरेन्द्र जी ,अच्छे दोहे हुए है ..राह भले कंकण भरा, आगे बढ़ना काम..कंकण तो कंगन को कहते हैं मार्ग भले  कंटक भरा ..वैसे मुझे  दोहों की   समझ नहीं है लेकिन कुछ परिष्कार की आवश्यकता महसूस हुई ..सादर "
Saturday

Profile Information

Gender
Male
City State
Indore-MP
Native Place
Indore-MP
Profession
Civil Engineer

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ग़ज़ल नूर की - किसी साधू के गहरे ध्यान से हम

२१२२, १२१२, २२ (११२) +१ 

.

किसी साधू के गहरे ध्यान से हम

बैठे रहते है इत्मिनान से हम.

.

तुम हो इक टूटती हुई दीवार

एक ढहते हुए मकान से हम.

.

गर ख़ुदा को वहाँ नहीं पाया,   

लौट आयेंगे आसमान से हम.   

.

बात जो कुछ है साफ़ साफ़ कहें

ऊँचा सुनने लगे हैं कान से हम.

.

बुतकदे में जलाने को दीपक

जाग जाते हैं इक अज़ान से हम.   

.

एक एल्बम में तुम हसीं थी बहुत 

साथ में थे बड़े जवान से हम. 

.

वस्ल का पल, ये…

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Posted on October 16, 2017 at 8:18am — 6 Comments

ग़ज़ल- हिंदी तुकांत के साथ एक प्रयोग (..अण ,, क़ाफ़िये पर संभवत: पहली ग़ज़ल है इस मंच पर)

२२/२२/२२/२२/



कर्म अगर साधारण होगा

कैसे नर...नारायण होगा.

.

सच्चाई की राह चुनी है

पग पग दोषारोपण होगा.

.

जिस के भीतर विष का घट है  

उस पर छद्म-आवरण होगा.

.

कठिनाई भी बहुत ढीठ है  

इस से जीवन भर रण होगा.

.

बस्ती बाद में सुलगाएँगे  

पहले प्रेम पे भाषण होगा.   

.

मन में दृढ़ विश्वास न हो फिर  

कैसे कष्ट निवारण होगा.

.

दसों दिशाओं में शासन है

शासक .. शायद रावण होगा.

.

उजड़ेगा…

Continue

Posted on October 11, 2017 at 3:52pm — 29 Comments

ग़ज़ल नूर की-तन्हाइयों के गहरे जंगल में रात काटी

२२१२, १२२; २२१२, १२२ (अरकान का क्रम भिन्न भी हो सकता है)

.

तन्हाइयों के गहरे जंगल में रात काटी

तृष्णाओं से भरे इक मरुथल में रात काटी.

.

जब रौशनी बढ़ा कर चन्दा ने उस को छेड़ा

शरमा के चाँदनी ने बादल में रात काटी. 

. `    

चुगली न कर दे बैरन थी जान कश्मकश में

बाहों में थे पिया और पायल में रात काटी.

.

साजन का नाम जपते अधरों का थरथराना,     

बिरहन के मुख पे फैले काजल में रात काटी.

.

हर कूक ने उठाई है हूक मेरे दिल में …

Continue

Posted on October 5, 2017 at 1:27pm — 19 Comments

ग़ज़ल नूर की- सीने से चिमटा कर रोये,

२२, २२, २२, २२ 

.

सीने से चिमटा कर रोये,

ख़ुद को गले लगा कर रोये.

.

आईना जिस को दिखलाया,  

उस को रोता पा कर रोये.

.

इक बस्ते की चोर जेब में,

ख़त तेरा दफ़ना कर रोये.

.

इक मुद्दत से ज़ह’न है ख़ाली,

हर मुश्किल सुलझा कर रोये.



तेरी दुनिया, अजब खिलौना,

खो कर रोये, पा कर रोये. 

.

सीखे कब आदाब-ए-इबादत,

बस,,,, दामन फैला कर रोये.

.

हम असीर हैं अपनी अना के,

लेकिन मौका पा कर रोये.

.

सूरज…

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Posted on October 3, 2017 at 9:00pm — 28 Comments

Comment Wall (7 comments)

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At 2:21pm on September 16, 2017, Afroz 'sahr' said…
आदरणीय निलेश जी आपने ख़ाकसार की बात की ताईद की बहुत आभार प्रकट करता हूँ !सादर
At 9:50pm on March 3, 2017, Hemant kumar said…
आदरणीय सर प्रणम ! मै ओ बी ओ मे काफीया पढ़ रहा हूं पर पल्ले कुछ भी नही पड़ रहा है ।
सर आपसे विनम्र आग्रह है काफीया निर्धारण पर पुनः प्रकाश डालने की अनुकंपा करें ।सादर..
At 2:37am on June 29, 2014, Adesh Tyagi said…
जनाबे-मोहतरम निलेश शेव्गाँवकर साहब, अल्फ़ाज़े-तहसीन का तहे-दिल से शुक्रगुज़ार हूँ।
At 4:47am on November 11, 2013, Abhinav Arun said…

महीने का सक्रिय सदस्य (Active Member of the Month)चुने जाने पर आ. नीलेश जी आपको दिली मुबारकबाद !

At 1:45pm on November 7, 2013, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ0 नीलेश भाई जी, आपको महीने का सकिय सदस्य चुने जाने पर आपको हार्दिक बधाई।  सादर,

At 1:14pm on November 6, 2013,
सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी
said…

आदरणीय नीलेश भाई , सक्रिय सदस्य चुने जाने के लिये आपको हार्दिक बधाईयाँ  !!!!!!

At 12:32pm on November 6, 2013,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय Nilesh Shevgaonkar जी
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करे | कृपया अपना पता और नाम (जिस नाम से ड्राफ्ट/चेक निर्गत होगा), बैंक खता विवरणी एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |

सादर । 


आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

 
 
 

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"आदरणीय लक्ष्मण सर बहुत आभार"
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