For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

जितेन्द्र पस्टारिया
  • Male
  • Harda, Madhya Pradesh
  • India
Share

जितेन्द्र पस्टारिया's Friends

  • Govind pandit 'swapnadarshi'
  • Jitendra Upadhyay
  • Manoj kumar Ahsaas
  • डिम्पल गौड़ 'अनन्या'
  • Hari Prakash Dubey
  • संदेश नायक 'स्वर्ण'
  • somesh kumar
  • seemahari sharma
  • harivallabh sharma
  • Dr. Vijai Shanker
  • Talib Toofani
  • Mukesh Verma "Chiragh"
  • kalpna mishra bajpai
  • M Vijish kumar
  • atul kushwah
 

जितेन्द्र पस्टारिया's Page

Profile Information

Gender
Male
City State
हरदा (नर्मदांचल ) मध्यप्रदेश
Native Place
हरदा (नर्मदांचल ) मध्यप्रदेश
Profession
कृषि
About me
वास्तविक व् सरल इंसान हूँ, कभी सोचा नही था की कुछ लिख भी पाऊंगा. पिछले एक वर्ष से ओ बी ओ परिवार से जुड़ा हुआ हूँ यहाँ धीरे -धीरे पढ़ कर कुछ लिखना सीखा हूँ, अपने काम के बाद अपना अधिकतर समय ओ बी ओ पर ही देता हूँ. यहाँ सभी सदस्यों के मार्गदर्शन व् स्नेह का आभारी हूँ.

जितेन्द्र पस्टारिया's Blog

डस्ट-बिन....(लघुकथा)

“अरे बिटिया यह क्या..? पूरे कमरे में  पैकिंग वाले कागजों का कचरा फैला रखा है..”

“मम्मी!! वो क्या है कि मुझे एक-दो दिन हो गये , मेरा टाईम आये.  आप कहती थी, न. कि ऐसे समय में पति की बहुत जरुरत होती है, हर नवविवाहिता को. तो मैं उनके पास जाने की तैयारी कर रही थी.."

“हाँ..बिटिया ! आदमी को तो रोज औरत चाहिए, और औरत का बस यही टाईम मजबूर करता है . बस! तू एक बार उसे, संयुक्त परिवार से निकाल ले. क्यूंकि मैं अपनी तरह तुझे भी, खुश देखना चाहती हूँ. तू अभी जा, फिर मैं बुला लूंगी किसी…

Continue

Posted on August 25, 2015 at 3:30am — 3 Comments

सीख....(लघुकथा)

“सुन बेटा!! बारिश तो ठीक हुई और खेतों में नमी पर्याप्त है, बस बीज को सही नमी और शुष्कता के बीच में ही बोना, अंकुरण का प्रतिशत अच्छा रहेगा. ज्यादा गहरी नमी में मत उतार देना, वरना सड जायगा..” रमेश ने अपने बेटे को खेत में बोनी करने से पहले समझाते हुए कहा

“ जी पिताजी.. मैं आपकी बात समझ गया, सब संभाल लूँगा. आप घर जा रहे हो, अगर हो सके तो छोटू के खाते में कुछ पैसे जमा कर आना. कल उसका फोन आया था. वहां शहर में गर्मी बहुत है पंखे से काम नहीं चलता, तो कूलर का कह रहा था..”  बेटे ने काम…

Continue

Posted on July 13, 2015 at 11:02am — 5 Comments

विधि....(लघुकथा)

"सुनो! आजकल न्यूज चैनल पर अदालती कार्यवाही की खबर सुनकर, यूँ लगता है कि क़ानून तेज और सबसे ऊपर है"

"हाँ! बिलकुल सही कह रही हो. यार!  रिमोर्ट कहाँ है..? थोड़ा वाल्यूम कम करना, वकील साहब का फोन आ रहा है "

"नमस्ते वकील साहब! कहाँ तक पहुंचा मामला..? अगली तारीख कब है..? "

"उन लोगों ने कहीं से कुछ साक्ष्य प्रस्तुत किये है हम कमजोर पड़ सकते हैं. और अगली तारीख इसी माह है..?

"इसी माह्ह्ह.. वकील साहब! इतनी गर्मी पड़ रही है. मेरा परिवार के साथ सैर-सपाटे पर जाने का प्लान है. आप…

Continue

Posted on June 7, 2015 at 3:30am — 19 Comments

फ्लेक्सिबिलिटी....(लघुकथा)

“ओय! रितु.. अब बता कैसी लग रही हूँ...?” सोनिया ने पूरा ट्रडिशनल श्रृंगार करके, अपनी फ्रेंड से पूछा

“अरे! सोनिया. तू तो बिलकुल अबला लग रही है यार. भारतीय नारी..हा हा हा हा”

“हाँ! यार..अबला ही तो दिखना होगा. ऐसा मेरे वकील का कहना है, ताकि कल कोर्ट में जज सहानुभूति के तौर पर जल्दी से मेंटेनेंस बना देगा तो  मुझे अपने हसबेंड के घिसे-पिटे विचारों और बूढ़े सास-ससुर की खांसी-खुजली से छुटकारा मिल जाएगा.”

"उफ्फ!! बड़ी दूर की सोच होती है यार, वकीलों की.. अब चल ये पकड़ तेरे जींस-टॉप,…

Continue

Posted on May 18, 2015 at 9:30am — 26 Comments

Comment Wall (31 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 3:40pm on December 22, 2014, vijay nikore said…

शुभकामनाओं के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय जितेन्द्र जी।

At 1:08pm on December 8, 2014, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

जीतू भाई

आपकी दुर्घटना के बारे में जानकार दुःख हुआ i  ईश्वर आपको शीघ्र ही स्वस्थ करे  i हम सब आपकी प्रतीक्षा इस मंच पर कर रहे हैं i सादर i

At 5:57pm on November 7, 2014, Hari Prakash Dubey said…
आपकी आत्मीय प्रतिक्रिया एवं प्रोत्साहन के लिए आपका हार्दिक आभार आदरणीय जितेन्द्र पस्टारिया जी
At 4:41pm on October 23, 2014, Sushil Sarna said…

आपको  सपरिवार ज्योति पर्व की हार्दिक एवं मंगलमय शुभकामनाएं...

At 8:44pm on July 12, 2014, Santlal Karun said…

आदरणीय जितेन्द्र जी,

"दस्तख़त" -- अच्छी लघु कथा, संदेशपरक; साधुवाद एवं सद्भावनाएँ !

At 4:01pm on June 30, 2014, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

जीतू जी

आपके मित्र बनाने से मेरे गौरव में बृद्धि हुयी है i  सादर i

At 8:20am on June 22, 2014, Dr. Vijai Shanker said…
स्वागत है जितेंद्र जी , सस्नेह. ।
At 11:07am on January 17, 2014, Abhinav Arun said…

शुक्रिया आदरणीय श्री जितेन्द्र जी !!

At 9:07pm on December 5, 2013, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

गीत जी

आपका बहुत बहुत आभार i

सादर  i

At 11:46am on November 23, 2013, Vindu Babu said…

आदरणीय जितेन्द्र जी मैं आपकी मित्रता का हार्दिक स्वागत करती हूँ।

सादर

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

vijay nikore commented on SALIM RAZA REWA's blog post अपने हर ग़म को वो अश्कों में पिरो लेती है - सलीम 'रज़ा'
"बहुत ही सुन्दर रचना पेश की है, मित्र सलीम जी।हार्दिक बधाई।"
41 minutes ago
SALIM RAZA REWA posted blog posts
22 hours ago
Manan Kumar singh posted a blog post

नागरिक(लघुकथा)

' नागरिक...जी हां नागरिक ही कहा मैंने ', जर्जर भिखारी ने कहा।' तो यहां क्या कर रहे हो?' सूट बूट…See More
22 hours ago
विमल शर्मा 'विमल' posted a blog post

महकता यौवन/ विमल शर्मा 'विमल'

उठे सरस मृदु गंध, महकता यौवन तेरा। देख जिसे दिन रात ,डोलता है मन मेरा। अधर मधुर मुस्कान, छलकती मय…See More
22 hours ago
Mahendra Kumar posted a blog post

ग़ज़ल : इक दिन मैं अपने आप से इतना ख़फ़ा रहा

अरकान : 221 2121 1221 212इक दिन मैं अपने आप से इतना ख़फ़ा रहाख़ुद को लगा के आग धुआँ देखता रहादुनिया…See More
22 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

विशाल सागर ......

विशाल सागर ......सागरतेरी वीचियों पर मैंअपनी यादों को छोड़ आया हूँतेरे रेतीले किनारों परअपनी मोहब्बत…See More
22 hours ago
विमल शर्मा 'विमल' commented on विमल शर्मा 'विमल''s blog post रंग हम ऐसा लगाने आ गये - विमल शर्मा 'विमल'
"आदरणी अग्रज लक्ष्मण धामी जी कोटिशः आभार एवं धन्यवाद"
yesterday
SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post कैसे कहें की इश्क़ ने क्या क्या बना दिया - सलीम 'रज़ा'
"नज़रे इनायत के लिए बहुत शुक्रिया नीलेश भाई , आप सही कह रहें हैं कुछ मशवरा अत फरमाएं।"
Tuesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कठिन बस वासना से पार पाना है-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'( गजल )
"आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन । गजल के अनुमोदन के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
Tuesday
Mahendra Kumar commented on Mahendra Kumar's blog post ग़ज़ल : इक दिन मैं अपने आप से इतना ख़फ़ा रहा
"आपकी पारखी नज़र को सलाम आदरणीय निलेश सर। इस मिसरे को ले कर मैं दुविधा में था। पहले 'दी' के…"
Tuesday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post कुछ क्षणिकाएँ : ....
""आदरणीय   Samar kabeer' जी सृजन पर आपकी ऊर्जावान प्रतिक्रिया का दिल से…"
Tuesday
PHOOL SINGH commented on PHOOL SINGH's blog post पिशुन/चुगलखोर-एक भेदी
"भाई विजय निकोरे आपने मेरी रचना के अपना समय निकाला उसके लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद "
Tuesday

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service