For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

AMAN SINHA
Share
 

AMAN SINHA's Page

Latest Activity

AMAN SINHA commented on AMAN SINHA's blog post अक्स
"@samar kabeer sahab  dhnyavaad"
Jun 28
Samar kabeer commented on AMAN SINHA's blog post अक्स
"जनाब अमन सिन्हा जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
Jun 13
AMAN SINHA posted a blog post

अक्स

थक गया हूँ झूठ खुद से और ना कह पाऊंगापत्थरों सा हो गया हूँ शैल ना बन पाऊंगादेखते है सब यहाँ पे अजनबी अंदाज़ सेपास से गुजरते है तो लगते है नाराज़ सेबेसबर सा हो रहा हूँ जिस्म के लिबास मेंबंद बैठा हूँ मैं कब से अक्स के लिहाफ में काटता है खलीपन अब मन कही लगता नहींवक़्त इतना है पड़ा के वक़्त ही मिलता नहींरात भर मैं सोचता हूँ कल मुझे कारना है क्याहै नहीं कुछ हाथ मेरे सोच के डरना है क्याटोक न दे कोई मुझको मेरी इस बेकारी मेंकुछ नहीं है दोष मेरा मेरी इस लाचारी में चाह नाग बनने की है पर देव बनना है नहींराह…See More
Jun 12
AMAN SINHA commented on AMAN SINHA's blog post वो सुहाने दिन
"श्रीमान राम साहब और कबीर साहब, हौंसला बढ़ाने के लिए धन्यवाद। "
May 28
Ram Awadh VIshwakarma commented on AMAN SINHA's blog post वो सुहाने दिन
"बचपन की यादे आपकी कविता पढ़कर ताजा हो गईंं। खूबसूरत कविता. के लिये बधाई"
May 28
Samar kabeer commented on AMAN SINHA's blog post वो सुहाने दिन
"जनाब अमन सिन्हा जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
May 28
AMAN SINHA posted a blog post

वो सुहाने दिन

कभी लड़ाई कभी खिचाई, कभी हँसी ठिठोली थीकभी पढ़ाई कभी पिटाई, बच्चों की ये टोली थीएक स्थान है जहाँ सभी हम, पढ़ने लिखने आते थेबड़े प्यार से गुरु हमारे, हम सबको यहाँ पढ़ाते थेकोई रटे है " क ख ग घ", कोई अंग्रेजी के बोल कहेपढ़े पहाड़ा कोई यहां पर, कोई गुरु की डाँट सहे एक यहां पर बहुत तेज़ था, दूजा बिलकुल ढीला थाएक ने पाठ याद कर लिया, दूजे का चेहरा पीला था कमीज़ तंग थी यहाँ किसी की, पतलून किसी की ढीली थीकिसी ने अपने फटे झोले को, अपने हाथों से सी ली थीकपडे चमके यहाँ किसी के, किसी का बिलकुल मैला थापन्नी था पास…See More
May 27
डॉ छोटेलाल सिंह commented on AMAN SINHA's blog post बेगैरत
"आदरणीय अमन सिन्हा जी बहुत वेमिशाल रचना है बार बार पढ़ने को जी कर रहा ऐसे लग रहा जैसे मुँह की बात किसी ने छीन ली,बहुत बहुत बधाई"
May 25
AMAN SINHA commented on AMAN SINHA's blog post बेगैरत
"श्री "मुसाफिर" जी एवं "कबीर " साहब, समीक्षा के लिए धन्यवाद । "
May 24
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on AMAN SINHA's blog post बेगैरत
"आ. अमन जी, अच्छी कविता हुई है । हार्दिक बधाई ।"
May 24
Samar kabeer commented on AMAN SINHA's blog post बेगैरत
"जनाब अमन सिन्हा जी आदाब, अच्छी रचना है, बधाई स्वीकार करें ।"
May 21
Samar kabeer commented on AMAN SINHA's blog post पश्चाताप
"जनाब अमन सिन्हा जी आदाब,अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
May 21
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on AMAN SINHA's blog post बेकार की मनोदशा
"आद0 अमन सिन्हा जी अच्छी रचना हुई है।थोड़ा शब्दकल संयोजन और समान मात्राभार पर भी काम कीजिये,, इससे गेयता आएगी। सादर"
May 20
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on AMAN SINHA's blog post पहचाना सा एक चेहरा
"आद0 अमन सिंह जी सादर अभिवादन। बढ़िया भावपुरक रचना लिखी है आपने। बधाई स्वीकार कीजिये"
May 20
AMAN SINHA posted blog posts
May 20
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on AMAN SINHA's blog post पश्चाताप
"आ. भाई अमन जी, अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
May 19

Profile Information

Gender
Male
City State
KOLKATA
Native Place
KOLKATA
Profession
WRITER
About me
NEW WRITER

AMAN SINHA's Blog

अक्स

थक गया हूँ झूठ खुद से और ना कह पाऊंगा

पत्थरों सा हो गया हूँ शैल ना बन पाऊंगा

देखते है सब यहाँ पे अजनबी अंदाज़ से

पास से गुजरते है तो लगते है नाराज़ से

बेसबर सा हो रहा हूँ जिस्म के लिबास में

बंद बैठा हूँ मैं कब से अक्स के लिहाफ में

 

काटता है खलीपन अब मन कही लगता नहीं

वक़्त इतना है पड़ा के वक़्त ही मिलता नहीं

रात भर मैं सोचता हूँ कल मुझे कारना है क्या

है नहीं कुछ हाथ मेरे सोच के डरना है क्या

टोक न दे कोई मुझको मेरी इस…

Continue

Posted on June 11, 2020 at 3:30pm — 2 Comments

वो सुहाने दिन

कभी लड़ाई कभी खिचाई, कभी हँसी ठिठोली थी

कभी पढ़ाई कभी पिटाई, बच्चों की ये टोली थी

एक स्थान है जहाँ सभी हम, पढ़ने लिखने आते थे

बड़े प्यार से गुरु हमारे, हम सबको यहाँ पढ़ाते थे

कोई रटे है " क ख ग घ", कोई अंग्रेजी के बोल कहे

पढ़े पहाड़ा कोई यहां पर, कोई गुरु की डाँट सहे 

एक यहां पर बहुत तेज़ था, दूजा बिलकुल ढीला था

एक ने पाठ याद कर लिया, दूजे का चेहरा पीला था

 

कमीज़ तंग थी यहाँ किसी की, पतलून किसी की ढीली…

Continue

Posted on May 27, 2020 at 8:06am — 3 Comments

बेगैरत

वो मेरा करीबी था, मैं मगर फरेबी था

इश्क़ वो वफाओं वाली, चाह बन के रह गयी

जो भी सितम हुए, सब मैंने ही सनम किए

टोकड़ी दुआओं वाली, आह बनके रह गयी

 

था मेरा गरूर उसको, मेरा था शुरूर उसको

साथ जब मैंने छोड़ा, आंखे नम रह गयी

सपनों का था  एक क़िला, मिलने का वो सिलसिला

तोड़ा उसके दिल को मैंने, पल मे सारी ढह गयी

वादे उसकी सच्ची थी, मेरी डोर कच्ची…

Continue

Posted on May 19, 2020 at 1:46pm — 4 Comments

पश्चाताप

तोड़े थे यकीन मैंने मोहल्ले की हर गली में

सुकून हम कैसे पाते इतनी आहे लेकर

मौत हो जाए मेहरबा हमपे नामुमकिन है

ठोकरे ही हमको मिलेंगी उसके दरवाज़े पर

 

हर परत रंग मेरा यूँ ही उतरता गया 

ज़मी थी शख्त मगर मैं बस धस्ता ही गया

गुनाह जो मैंने किये थे बेखयाली में

याद करके उन सबको मैं बस गिनता ही गया

 

किसी का हाथ छोड़ा किसी का साथ छोड़ दिया

मैंने हर बदनामी को उनकी तरफ मोड़ दिया

सामने जब भी वो आए अपना बनाने के…

Continue

Posted on May 17, 2020 at 12:12pm — 2 Comments

Comment Wall

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

  • No comments yet!
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

सालिक गणवीर commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post हम उनकी याद में रोए भी मुस्कुराए भी (~रूपम कुमार 'मीत')
"प्रिय रुपम बहुत उम्दा ग़ज़ल कही है. वाह.ढेरों बधाइयाँ।"
1 hour ago
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post फ़ितरत से हूँ मैं सब से जुदागाना समझिये (123)
"भाई  Nilesh Shevgaonkar  जी , आपकी हौसला आफ़जाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया |  मात्रा…"
2 hours ago
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post फ़ितरत से हूँ मैं सब से जुदागाना समझिये (123)
"Dimple Sharma जी , हार्दिक आभार "
3 hours ago
Deepalee Thakur replied to Dr.Prachi Singh's discussion चिड़िया रानी चिड़िया रानी in the group बाल साहित्य
"बहुत सुंदर बालगीत प्राची जी,बधाई"
3 hours ago
dr. somnath yadav added a discussion to the group बाल साहित्य
Thumbnail

अब मै नहीं चिढूंगा

बाल कहानी*अब मैं नहीं चिढूंगा*.. डॉ सोमनाथ यादव "सोम"आज फिर कक्षा मेंसहपाठियों ने अनिल की हंसी…See More
6 hours ago
Deepalee Thakur joined Admin's group
Thumbnail

बाल साहित्य

यहाँ पर बाल साहित्य लिखा जा सकता है |
7 hours ago
Deepalee Thakur replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-66 (विषय: "देश")
"लघुकथा गोष्ठी अंक 66 कैसे भूले बिट्टू! चलो सुनाओ टू वन्स आर टू टू टूज़ आर फोर नही पापा मुझे नही…"
8 hours ago
TEJ VEER SINGH replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-66 (विषय: "देश")
"अपनी ढपली अपना राग  - लघुकथा  – बिहार के चुनाव की घोषणा होते ही हर गली हर चौराहे के…"
9 hours ago
Nilesh Shevgaonkar commented on dandpani nahak's blog post ग़ज़ल 2122 1212 22
"आ दण्डपाणी जी, ग़ज़ल के प्रयास हेतु बधाई। कुछ जगह बह्र टूट रही है। एक टिप है कि सिर्फ मात्राएं गिनने…"
9 hours ago
Nilesh Shevgaonkar commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post फ़ितरत से हूँ मैं सब से जुदागाना समझिये (123)
"आ. तुरंत साहब अच्छी ग़ज़ल के लिए बधाई। बस एक बात जो खटक रही है वो यह कि क़ाफ़िया की मात्रा को गिरा कर…"
9 hours ago
Nilesh Shevgaonkar commented on सालिक गणवीर's blog post सूखी हुई है आज मगर इक नदी है तू...( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आ. सालिक साहब, अच्छी ग़ज़ल हुई है। बधाई। चौथे शेर में मिरे लिख कर बहर तोड़ दी आपने। पाँचवें शेर का…"
9 hours ago
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - तर्क-ए-वफ़ा का जब कभी इल्ज़ाम आएगा
"धन्यवाद आदरणीया डिम्पल जी। आभार"
9 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service