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Samar kabeer
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Samar kabeer commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post झूठ फैलाते हैं अक़्सर जो तक़ारीर के साथ (१५)
"जनाब गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत' जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'ग़म मेरे पास हमेशा नहीं रह पाते हैंकोई शम्शीर कहाँ रहती है शम्शीर* के साथ' इस शैर के ऊला मिसरे में ऐब-ए-तनाफ़ुर देखें,दूसरी बात ये कि कथ्य पर…"
1 hour ago
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post मेरे आसमान का चाँद ...
"जनाब सुशील सरना जी आदाब,अच्छी कविता हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । 'आसमान का चाँद से'--"आसमान के चाँद से" ये त्रुटि दो जगह है,देखियेगा ।"
14 hours ago
Samar kabeer commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post मेरे घर अब उजाला बन के मुझमे कौन रहता है
"जनाब आमोद बिंदौरी जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । बह्र पर आपकी पकड़ अच्छी हो गई है,लेकिन शिल्प और व्याकरण पर अभी अभ्यास की ज़रूरत है,इस पर विचार करें । 'तुम्हारा प्यार, तुम सा यार तेरी यादें वो सारी।भुला हर कुछ अवारा बनके…"
14 hours ago
Samar kabeer commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post खुशी बाँटो कि बँटकर  भी  - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । मतले के सानी मिसरे का शिल्प कमज़ोर लगा,देखियेगा ।"
14 hours ago
Samar kabeer commented on Mahendra Kumar's blog post ग़ज़ल : अशआर मेरे जिनको सुनाने के लिए हैं
"छटे और आख़री शैर पर ग़ौर करें ।"
yesterday
Md. anis sheikh commented on Samar kabeer's blog post वफ़ाओं का अपनी सिला चाहता हूँ
"जी सर समझ में आ गया  ,आपका बहुत बहुत शुक्रिया |"
yesterday
Naveen Mani Tripathi commented on Samar kabeer's blog post 'वतन को आग लगाने की चाल किसकी है'
"आ0 कबीर सर हर एक शेर बहुत खूब लिखा आपने  हमें तू बेवफ़ा कहता है ,ये तो देख ज़रा लबों पे सबके वफ़ा की मिसाल किसकी है बेहतरीन शेर लगा । आ0 अजय तिवारी जी की बात से सहमत हूँ कि आसान शब्दो मे भी बहुत अच्छी गज़ल कही जा सकती है । यह आपकी ग़ज़ल से सीख मिली…"
yesterday
राज़ नवादवी commented on Samar kabeer's blog post 'वतन को आग लगाने की चाल किसकी है'
"आदरणीय समर कबीर साहब, आदाब. सुन्दर ग़ज़ल की प्रस्तुति पे दाद के साथ मुबारकबाद. सादर. "
yesterday
Tasdiq Ahmed Khan commented on Samar kabeer's blog post 'वतन को आग लगाने की चाल किसकी है'
"मुहतरम जनाब समर साहिब आदाब, बहुत ही उम्दा ग़ज़ल हुई है , मुबारकबाद क़ुबुल फरमाएं l "
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Samar kabeer's blog post 'वतन को आग लगाने की चाल किसकी है'
"आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन । इस बेहतरीन गजल के लिए कोटि कोटि हार्दिक बधाईयाँ।"
yesterday
Samar kabeer commented on Samar kabeer's blog post वफ़ाओं का अपनी सिला चाहता हूँ
"जनाब अनीस शैख़ साहिब आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिये आपका बहुत बहुत शुक्रिया । क़वाफ़ी 'आ' स्वरांत हैं इसलिए लिया जा सकता है,मतले में क़वाफ़ी हैं 'ला' और "का""
yesterday
Md. anis sheikh commented on Samar kabeer's blog post वफ़ाओं का अपनी सिला चाहता हूँ
"समर सर आदाब बहुत सुन्दर ग़ज़ल हुई है मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए,  इस ग़ज़ल का मतला  पढ़ के एक सवाल दिमाग़ में उठ रहा है, मुझे ये भी यकीन है कि आपने लिखा है तो ऐसा ही होता होगा ,फिर भी आप से सीखना चाहता हूँ ,सर ग़ज़ल में आ स्वरांत काफिआ है मतले…"
yesterday
Samar kabeer commented on सुचिसंदीप अग्रवालl's blog post हास्य कुंडलिया
"बहना सुचिसंदीप अग्रवाल जी आदाब,हास्य व्यंग के अच्छे कुण्डलिया छन्द रचे आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । 'ट्रक पे लिखा पढ़ हाय'--12 मात्रा 'मिलेंगे कल फिर बाय'--12 मात्रा 'ओढ़ दुप्पटा लाल' "ओढ़ दुपट्टा…"
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Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"'दिया था जो वसीयत में तुम्हें वो अभी तक वह खज़ाना चल रहा है' इस शैर में 'वो' और 'वह' शब्द के टकराव की सूरत बन रही है,इसका कारण ये है कि दोनों ही शब्द वस्तु के लिए इस्तेमाल हुए हैं,जबकि 'वो' शब्द वयक्ति और…"
yesterday
Samar kabeer commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (दिल ने जिसे बना लिया गुलफाम दोस्तो)
"जनाब तस्दीक़ अहमद साहिब आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।"
yesterday
Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"जनाब डॉ. नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'तुझे बख्सा खुदा ने हुस्न इतना' इस मिसरे में 'बख्सा' को "बख़्शा" कर लें । 'दिया था जो वसीयत में तुम्हें वो' इस मिसरे को यूं कर…"
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'वतन को आग लगाने की चाल किसकी है'

मफ़ाइलुन फ़इलातुन मफ़ाइलुन फ़ेलुन

1212     1122     1212      22

ग़ज़ल

उठा है ज़ह्न में सबके सवाल,किसकी है

तू जिस पे नाच रहा है वो ताल किसकी है

खड़े हुए हैं सर-ए-राह आइना लेकर

हमारे सामने आए मजाल किसकी है

ज़रा सा ग़ौर करोगे तो जान जाओगे

वतन को आग लगाने की चाल किसकी है

हमें तू बेवफ़ा कहता है ,ये तो देख ज़रा

लबों पे सबके वफ़ा की मिसाल किसकी…

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Posted on January 16, 2019 at 8:30pm — 9 Comments

"तरही ग़ज़ल नम्बर 4

नोट:-

तरही मुशायरा अंक-100 में 87 ग़ज़लें पोस्ट हुईं,मेरी इस ग़ज़ल में जो क़वाफ़ी इस्तेमाल हुए हैं वो बिल्कुल नये हैं ।

पहले सिल पर घिसा गया है मुझे

फिर जबीं पर मला गया है मुझे

जाल हूँ इक सियासी लीडर का

नफ़रतों से बुना गया है मुझे

कोई बारूद की तरह देखो

सरहदों पर बिछा गया है मुझे

कहदो तक़दीर से बखेरे नहीं

करके वो एक जा गया है…

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Posted on October 24, 2018 at 5:54pm — 40 Comments

"हिन्दी दिवस पर विशेष" हिन्दी ग़ज़ल

कितनी प्यारी ये मनभावन हिन्दी है

भारत की वैचारिक धड़कन हिन्दी है

जो लिखता हूँ हिन्दी में ही लिखता हूँ

मेरी ख़ुशियों का घर आँगन हिन्दी है

रफ़ी, लता,मन्नाडे को तुम सुन लेना

इन सबकी भाषा और गायन हिन्दी है

भारत में कितनी हैं भाषाएँ लेकिन

सारी भाषाओँ का यौवन हिन्दी है

पहले मैं अक्सर उर्दू में लिखता था

अब तो मेरा सारा लेखन हिन्दी है

मुझको तो लगती है ये भाषा…

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Posted on September 13, 2018 at 11:39pm — 33 Comments

"बहुत दिनों से है बाक़ी ये काम करता चलूँ"

ग़ज़ल

बहुत दिनों से है बाक़ी ये काम करता चलूँ

मैं नफ़रतों का ही क़िस्सा तमाम करता चलूँ

अब आख़िरत का भी कुछ इन्तिज़ाम करता चलूँ

दिल-ओ-ज़मीर को अपने मैं राम करता चलूँ

जहाँ जहाँ से भी गुज़रूँ ये दिल कहे मेरा

तेरा ही ज़िक्र फ़क़त सुब्ह-ओ-शाम करता चलूँ

अमीर हो कि वो मुफ़लिस,बड़ा हो या छोटा

मिले जो राह में उसको सलाम करता चलूँ

गुज़रता है जो परेशान मुझको करता है

तेरे ख़याल से…

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Posted on September 1, 2018 at 3:12pm — 50 Comments

Comment Wall (18 comments)

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At 12:57pm on January 14, 2019, गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' said…

कोई बारूद की तरह देखो

सरहदों पर बिछा गया है मुझे ---क्या बात है समर कबीर साहेब लाजवाब अशआर हुए हैं | दाद ही दाद क़ुबूल फ़रमाएं | 

At 11:38am on December 25, 2018, Surkhab Bashar said…

जनाब समर कबीर साहब बहुत ही उम्दा ग़ज़ल कही है आपने 

हर शेर का़बिले दाद है 

  • मुबारक बाद कुबूल करें
At 11:39pm on August 19, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय प्रणाम!
एवम् शुक्रिया मैं निरंतर सुधर करूँगा
At 6:09pm on August 7, 2018, Kishorekant said…

आपका आभार आदरणीय समर कबीर जी । आप की सुचना के अनुसार अभ्यास शुरु कर दिया है । आशा है आगे भी आपका मार्गदर्शन मिलता रहेगा ।भूलों के लिये दरगुजर करें ।

At 8:05pm on March 22, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय
समर कबीर महोदय प्रणाम
आपका आदेश सर माथे पर
आपका बहुत बहुत शुक्रिया
At 5:21pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय समर कबीर जी
आपका बहुत बहुत शुक्रिया
At 10:54am on October 9, 2016, सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' said…
आदरणीय समर कबीर साहिब प्रणाम आपको।

गजल विधा सिखने का इच्छुक हूँ और मैंने दूसरी गजल आज इस पटल पर रखी है।

आपके आने से मेरा घर जग जगमगाया।

आपक नजर कर मुझे कुछ सुझाव देंगे तो आगे से मुझे कुछ सीखने में मदद मिलेगी। सादर
At 11:29am on September 26, 2016, Kalipad Prasad Mandal said…

आदरणीय समीर कबीर साहिब आदाब , आपको थोड़ा कष्ट दे रहा हूँ क्योंकि ग़ज़ल में जितनी जानकारी आपको है शायद मेरी जानकारी में और कोई नहीं है | मैं कुछ शे'र ग़ालिब के पढ़ रहा था और उनके बहर जांच कर रहा था अपनी जानकारी केलिए | दो शेर में अटक गया हूँ ,नीचे लिखा है :-

बेनिया/जी हद से गुज/री , बन्दा पर/वर कब तलक 

२१२/ २२१ २/           1222        / २२१२ 

हम कहें/गे हाले  दिल, और आ/प फरमाएं/गे क्या 

२१२/     २२१    २ /   २१२ /    १  222   /२२(१२)

गर किया /नासेह ने/ हमको कै/द ,अच्छा यूं स/ही 

२१२/      २२१२/      212     /२२ २१/२ 

ये जुनू/ने -इश्क के /अंदाज़ छुट /जायेंगे क्या 

212/   २२१२/        221२/       2212

कृपया आप इस्नके सही बहर बताने का कष्ट करें |

सादर 

At 11:08pm on September 24, 2016, Samar kabeer said…
सरिता जी आप किस विषय में
पूछ रही हैं ?
At 9:14pm on September 24, 2016, sarita panthi said…
आदरणीय सर क्या मैंने अब सही जगह पोस्ट की है ?
 
 
 

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