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धार्मिक साहित्य

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धार्मिक साहित्य

इस ग्रुप मे धार्मिक साहित्य और धर्म से सम्बंधित बाते लिखी जा सकती है,

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कान्हा को नाच नचा गयी राधा

बैरिन बंशी चुराने चली जब तो पहले सकुचा गयी राधा चोरी से चुपके से हौले से धीरे से कान्हा की आँख बचा गयी राधा पूछा किये मुरलीधर श्याम तो लीला अनेक रचा गयी राधा नाच नचाते हैं जो सबको उन्हीं कान्हा को नाच नचा गयी राधामौलिक एवं अप्रकाशितआलोक रावत Continue

Started by Alok Rawat on Monday.

शक्ति के रूप

शक्ति के रूप  (मौलिक एवं अप्रकाशित )हिमालय की लाली मां, हैं बैल पर सवार |दिव्य रूप हाथ त्रिशूल, सुशोभित पद्म सार || सत्व सत्ता प्रकृति रूप, शिखरों पर हैं धाम |सती यज्ञ से दुर्गा का, ‘ शैलपुत्री ’ है नाम एक हाथ में जप माला, दूजे कमण्डल नीर |तपाचार की…Continue

Started by VINOD GUPTA Apr 7.

मेरो किशन कन्हाई काहे मोहे तड़पायो

मेरो किशन कन्हाई काहे मोहे तड़पायो ,मो कहूँ आवत नाही कबहू -२ना मुख चंद्र दिखायो ,मेरो किशन कन्हाई काहे मोहे तड़पायो।बहुत सुनिन्ह है तोरे बतिया ,तुम बिन गुजरे ना दिन रतिया ,राधा के ओ मोहन प्यारे -२मोको बहुत सतायो ,मेरो किशन कन्हाई काहे मोहे…Continue

Started by Mohit mishra (mukt) Mar 29.

तुम्ही हो खेवइयाँ सबकी

दरबार सजा भक्तो से माँ, दर्शन आस जगाऊ मै।तेरे बिन माँ कौन सहारा, तुझमे आश्रय पाऊ मै।डूब रही पतवार हमारी, माया के भवसागर में।मोह पाश में जकड़ गया हूँ, कैसे पार लगाऊ मै।।पाप धरा पर घेर लिया है, मन में है संताप भरादेख जगत का दुःख माँ तेरे, फिर कैसे…Continue

Started by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' Oct 10, 2016.

श्रीकृष्ण-स्तुति-गीत(आधार छंद-चौपाई)

मोर-मुकुटधारी-अवतारी।हे नट-नर्तक -कृष्ण-मुरारी।।नयन-कंज तन नीलनलिन नव।वक्ष वृहद उर करुणा-गृह तव।।कानों मे मकराकृत कुंडल।अधर सुधा-मुरली की हर पल।।जय जय जय पीताम्बरधारी।हे नट-नर्तक-कृष्ण-मुरारी।।तुम जग का नित पालन करते।सुर-नर-मुनि सबके दुख…Continue

Started by रामबली गुप्ता Sep 30, 2016.

भजन

भजन .....बरसो रे घनश्यामतुम चाहो तो अपने आँसू करूं तुम्हारे नामबरसो रे घनश्याम......मन उपवन में अभिलाषा की सूख गयी है क्यारीजित देखूं मैं उत आशा की टूट गयी है डालीदरशन दो बिन दरशन मेरो जीवन है निष्कामबरसो रे घनश्याम.......पंथ निहारे और निहारे गोपी…Continue

Started by Abha saxena Sep 16, 2016.

राधा प्रियस्वामिनि 2 Replies

हे राधा प्रियस्वामिनि, तेरी किरपा किरण दामिनिमोह तम को हरे, कृतकृत्य करे, माता आपके पावन चरण।श्री राधे की बोले जो जय, उसको भव का नहीं होता भय।उससे यम भी डरे, भवसागर तरे, जिसपे हो जाती मां तू सदय।।निर्भय रहता वो जग में सदा, और होता है जब वो…Continue

Tags: स्वामिनि, राधा

Started by डा॰ सुरेन्द्र कुमार वर्मा. Last reply by डा॰ सुरेन्द्र कुमार वर्मा Oct 25, 2016.

श्रीवृन्दावनधाम अपार, जपे जा राधेराधे

कदम्ब कुंज वनमाली, वो नाचे दे दे ताली।छलिया को नचावनहार... जपे जा राधेराधेसखियन बिच कुंज बिहारी, संग सोहें राधा प्यारी।सब वेदन को ये सार... जपे जा राधेराधेश्रीकृष्णचन्द्र की प्यारी, वृषभानु राजदुलारी।महारास रचावनहार... जपे जा राधेराधेनटनागर धेनु…Continue

Tags: वृन्दावन, राधे

Started by डा॰ सुरेन्द्र कुमार वर्मा Jul 15, 2016.

भुजंगप्रयात छन्द

जपो नाम कान्हा वही है सहारा।वही तारता है वही है किनारा।।करे धर्म रक्षा वही मोक्षदाता।अरे विश्व का है वही तो विधाता।१।उसी के सहारे धरा बोझ ढोती।उसी की कृपा दृष्टि सर्वत्र होती।।सुनो नन्दलाला यही प्रार्थना है।न कोई दुखी हो यही याचना है।२।✍ डॉ पवन…Continue

Started by डॉ पवन मिश्र Jun 2, 2016.

छप्पय छंद

जय जय जय हनुमान, ज्ञान-गुण उर में भर दो।सदा रहो मम ध्यान, तेजमय तन-मन कर दो।।जला सत्य की ज्योंति, तमस हिय के हर लो सब।बल-बुद्धि-विद्या-धैर्य, शूरता-साहस दो अब।।है नम्र निवेदन जोरि कर, लाल-देह लंगूर हे!प्रभु! कष्ट हरो निज भक्त के, महावीर कपिशूर…Continue

Started by रामबली गुप्ता May 2, 2016.

 
 
 

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