For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

धार्मिक साहित्य

Information

धार्मिक साहित्य

इस ग्रुप मे धार्मिक साहित्य और धर्म से सम्बंधित बाते लिखी जा सकती है,

Location: All world
Members: 109
Latest Activity: Apr 1

Discussion Forum

हरो बाधा सभी हनुमन........

हरो बाधा सभी हनुमन.....विधाता छंद हरो बाधा सभी हनुमन.........शरण मैं आपकी आया। करो मुझपर कृपा ऐसी,....विमल हो बुद्धि मन काया।। नमन करता सदा भजता,.........हृदय से केशरी नंदन। द्रवित हों अंजनी लाला, पवन सुत सुन विनय वंदन।१। सिया के राम लगते…Continue

Tags: छंद, विधाता

Started by Satyanarayan Singh Apr 1.

मौसे कह गयो थो कान्हा (कविता)

मौसे कह गयो थो कान्हाबेगी ही आ जावेगोसलौनी सन्ध्या हो चली हैजाने कब वो आवेगोमाखन देखो सूख गयो हैधूप में कान्हा जब से गयो हैहाय हाय अब मैं का करूँमेरो कान्हा खो गयो है ।देखो ग्वाल सब आये गए हैमाय माय कह बुलाये रहए हैसब के ललना आये गए हैंकान्हा कू…Continue

Started by KALPANA BHATT ('रौनक़') Oct 12, 2017.

राधा राधा नाम रटे

राधा राधा नाम रटे, सारे बन्धन तुरंत कटे।आप तरे भवसागर से, युक्त रहे नटनागर से।।नाम धन जो लूटेगा,  चौरासी से छूटेगा।।गाएंगे जो प्रेम से,  हरि नाम को नेम से।।जो उनसे प्रीत लगाएगा, वो उनका ही हो जाएगा।राधा राधा नाम रटे, सारे बन्धन तुरंत कटे।आप तरे…Continue

Tags: प्रेम, राधा

Started by डा॰ सुरेन्द्र कुमार वर्मा Aug 29, 2017.

कान्हा को नाच नचा गयी राधा 2 Replies

बैरिन बंशी चुराने चली जब तो पहले सकुचा गयी राधा चोरी से चुपके से हौले से धीरे से कान्हा की आँख बचा गयी राधा पूछा किये मुरलीधर श्याम तो लीला अनेक रचा गयी राधा नाच नचाते हैं जो सबको उन्हीं कान्हा को नाच नचा गयी राधामौलिक एवं अप्रकाशितआलोक रावत Continue

Started by Alok Rawat. Last reply by Alok Rawat Aug 29, 2017.

शक्ति के रूप 2 Replies

शक्ति के रूप  (मौलिक एवं अप्रकाशित )हिमालय की लाली मां, हैं बैल पर सवार |दिव्य रूप हाथ त्रिशूल, सुशोभित पद्म सार || सत्व सत्ता प्रकृति रूप, शिखरों पर हैं धाम |सती यज्ञ से दुर्गा का, ‘ शैलपुत्री ’ है नाम एक हाथ में जप माला, दूजे कमण्डल नीर |तपाचार की…Continue

Started by VINOD GUPTA. Last reply by VINOD GUPTA Sep 6, 2017.

मेरो किशन कन्हाई काहे मोहे तड़पायो 2 Replies

मेरो किशन कन्हाई काहे मोहे तड़पायो ,मो कहूँ आवत नाही कबहू -२ना मुख चंद्र दिखायो ,मेरो किशन कन्हाई काहे मोहे तड़पायो।बहुत सुनिन्ह है तोरे बतिया ,तुम बिन गुजरे ना दिन रतिया ,राधा के ओ मोहन प्यारे -२मोको बहुत सतायो ,मेरो किशन कन्हाई काहे मोहे…Continue

Started by Mohit mishra (mukt). Last reply by Mohit mishra (mukt) Aug 30, 2017.

तुम्ही हो खेवइयाँ सबकी 1 Reply

दरबार सजा भक्तो से माँ, दर्शन आस जगाऊ मै।तेरे बिन माँ कौन सहारा, तुझमे आश्रय पाऊ मै।डूब रही पतवार हमारी, माया के भवसागर में।मोह पाश में जकड़ गया हूँ, कैसे पार लगाऊ मै।।पाप धरा पर घेर लिया है, मन में है संताप भरादेख जगत का दुःख माँ तेरे, फिर कैसे…Continue

Started by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप'. Last reply by KALPANA BHATT ('रौनक़') Aug 28, 2017.

श्रीकृष्ण-स्तुति-गीत(आधार छंद-चौपाई) 1 Reply

मोर-मुकुटधारी-अवतारी।हे नट-नर्तक -कृष्ण-मुरारी।।नयन-कंज तन नीलनलिन नव।वक्ष वृहद उर करुणा-गृह तव।।कानों मे मकराकृत कुंडल।अधर सुधा-मुरली की हर पल।।जय जय जय पीताम्बरधारी।हे नट-नर्तक-कृष्ण-मुरारी।।तुम जग का नित पालन करते।सुर-नर-मुनि सबके दुख…Continue

Started by रामबली गुप्ता. Last reply by KALPANA BHATT ('रौनक़') Aug 28, 2017.

भजन 1 Reply

भजन .....बरसो रे घनश्यामतुम चाहो तो अपने आँसू करूं तुम्हारे नामबरसो रे घनश्याम......मन उपवन में अभिलाषा की सूख गयी है क्यारीजित देखूं मैं उत आशा की टूट गयी है डालीदरशन दो बिन दरशन मेरो जीवन है निष्कामबरसो रे घनश्याम.......पंथ निहारे और निहारे गोपी…Continue

Started by Abha saxena. Last reply by KALPANA BHATT ('रौनक़') Aug 28, 2017.

राधा प्रियस्वामिनि 5 Replies

हे राधा प्रियस्वामिनि, तेरी किरपा किरण दामिनिमोह तम को हरे, कृतकृत्य करे, माता आपके पावन चरण।श्री राधे की बोले जो जय, उसको भव का नहीं होता भय।उससे यम भी डरे, भवसागर तरे, जिसपे हो जाती मां तू सदय।।निर्भय रहता वो जग में सदा, और होता है जब वो…Continue

Tags: स्वामिनि, राधा

Started by डा॰ सुरेन्द्र कुमार वर्मा. Last reply by KALPANA BHATT ('रौनक़') Aug 29, 2017.

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Mahendra Kumar commented on TEJ VEER SINGH's blog post आपसी सहयोग - लघुकथा –
"जीवन में आपसी सहयोग के महत्त्व को दर्शाती बढ़िया लघुकथा है आदरणीय तेज वीर सिंह जी. हार्दिक बधाई…"
26 minutes ago
Shyam Narain Verma posted a blog post

जब ये तपन दूर हो जाये |

दहक  रहा हर कोना कोना   ,  सूरज बना आग का गोला |मुश्किल  हुआ निकलना घर से ,  लू ने आकर धावा बोला…See More
40 minutes ago
Dr Ashutosh Mishra posted a blog post

मेरी आँखों में कभी अक्स ये अपना देखो

मेरी आँखों में कभी अक्स ये अपना देखो इस बहाने ही सही प्यार का सहरा देखो बेखबर गुल के लवों को छुआ…See More
41 minutes ago
babitagupta commented on TEJ VEER SINGH's blog post आपसी सहयोग - लघुकथा –
"लघु कथा के माध्यम से आपसी सहयोग के बिना जीवन निस्सार ,अच्छा संदेश दिया हैं.प्रस्तुत रचना के लिए…"
13 hours ago
babitagupta commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post समय की लाठियां (लघुकथा)
"लघु  कथा का माध्यम से लाठी के दबदबे का सही कटाक्ष किया हैं,प्रस्तुत रचना पर बधाई ."
13 hours ago
बसंत कुमार शर्मा posted a blog post

गजल - वो अक्सर कुछ नहीं कहता

गजल मापनी १२२२ १२२२ १२२२ १२२२ सभी कुछ झेल लेता है, वो’ अक्सर कुछ नहीं कहतानचाता है मदारी पर, ये’…See More
17 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani posted a blog post

समय की लाठियां (लघुकथा)

पार्क की ओर जाते हुए उन दोनों बुज़ुर्ग दोस्तों के दरमियाँ चल रही बातचीत और उनके हाथों में लहरा सी…See More
21 hours ago
TEJ VEER SINGH posted a blog post

आपसी सहयोग - लघुकथा –

आपसी सहयोग - लघुकथा – साहित्यकार तरुण घोष के नवीनतम लघुकथा संग्रह "अपने मुँह मियाँ मिट्ठू" को वर्ष…See More
21 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"समय नहीं है अब ।"
yesterday
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"उपर अजय जी की ग़ज़ल पर मेरी टिप्पणी देखें।"
yesterday
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"ओबीओ लाइव तरही मुशायरा अंक-95 को सफल बनाने के लिये सभी ग़ज़लकारों और पाठकों का हार्दिक आभार व धन्यवाद…"
yesterday
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"अजय जी, मत्ले के शेर को ही लें। आप क्या कहना चाह रहे हैं यह स्पष्ट नहीं है। शेर स्वयंपूर्ण…"
yesterday

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service