For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

AMAN SINHA
Share

AMAN SINHA's Friends

  • अमीरुद्दीन 'अमीर'
  • Samar kabeer
  • लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
 

AMAN SINHA's Page

Latest Activity

सूबे सिंह सुजान commented on AMAN SINHA's blog post क्या रंग है आँसू का
"बहुत सुंदर कविता"
yesterday
AMAN SINHA commented on नाथ सोनांचली's blog post अर्धांगिनी को समर्पित (दुर्मिल सवैया पर आधारित)
"आदरणीय  नाथ सोनांचली जी,  बहुत मनमोहक रचना हेतु बधाई।"
Thursday
AMAN SINHA posted a blog post

क्या रंग है आँसू का

क्या रंग है आँसू का कैसे कोई बतलाएगा?सुख का है या दु:ख का है ये कोई कैसे समझाएगा?कभी किसी के खो जाने से, कोई कभी मिल जाए तो कभी कोई जो दूर हो गया, कोई पास कभी आ जाए तो किस भाव में कितना बहता, कोई ध्यान नहीं रखताहर हाल में इसका एक ही रंग है, फर्क ना कोई कर सकता कभी दर्द में बह जाता है, हंसी में भी ये दूर नहीं हम इस पर काबू कर पाये, ये इतना भी कमजोर नहीं हरेक काल में एक जैसा है, चाहे धूप या छाया हो भूखे पेट कोई हो या फिर, कई दिनों पर खाया हो पैसे कोई लूट ले जाए, या ज्यादा पैसा घर आ जाए दुनिया कोई…See More
Wednesday
नाथ सोनांचली commented on AMAN SINHA's blog post पश्चाताप
"आद0 अम्न सिन्हा जी सादर अभिवादन बढ़िया सृजन है। बधाई स्वीकार कीजिये"
Wednesday
AMAN SINHA commented on AMAN SINHA's blog post मैं धरती बोल रही हूँ
"आदरणीय  Rachna Bhatia जी,  हौसला बढाने के लिये धन्यवाद। "
Wednesday
Rachna Bhatia commented on AMAN SINHA's blog post मैं धरती बोल रही हूँ
"आदरणीय अमन सिन्हा जी , वाह वाह"
Tuesday
AMAN SINHA posted a blog post

मैं धरती बोल रही हूँ

मैं धरती बोल रही हूँ,हाँ-हाँ धरती बोल रही हूँअपनी व्यथा सुनाने को मैंमैं कब से डोल रही हूँमैं धरती बोल रही हूँ मैंने ही तुमको जन्म दियामैंने तुम सबको पाला भीअपने कोख में सींचा तुमकोमैंने ही दिया निवाला भीपर तुमको मेरी फ़िक्र नहींमैं कब से उबल रही हूँमैं धरती बोल रही हूँतूमने अपना संसार बसायाफिर अपना परिवार बढ़ायासदा अपने स्वार्थ की ख़ातिरतूमने मेरा खून बहायाजितना चाहा दोहा मुझकोमैं सब कुछ झेल रही हूँमैं धरती बोल रही हूँ खेत बनाए, खलिहान बनाएजीने के सब सामान बनाएमतलब से ज्यादा नीर बहायानदियों का…See More
Tuesday
AMAN SINHA posted a blog post

तुम वीरांगना हो जीवन की

तुम वीरांगना हो जीवन की, तुम अपने पथ पर डटी रहोचाहे उलाहना पाओ जितनी, तुम अपने जिद पर अड़ी रहोगर्भ में ही मारेंगे तुमको, वो सांस नहीं लेने देंगे कली मसल कर रख देंगे वो फूल नही बनने देंगे तुम मगर गर्भ से निकल कर अपनी खुशबू बिखरा दो तुम वीरांगना हो जीवन की, तुम अपने पथ पर डटी रहोचाहे पथ पर पत्थर फेंके, शिक्षा से रोके तुमको  कुछ पुराने मनोवृत्ति वाले चूल्हे में झोंके तुमको  तुम ना डिगना अपने प्रण से, एकाग्रचित्त हो जमी रहो  तुम वीरांगना हो जीवन की, तुम अपने पथ पर डटी रहोचाहे तेरे पहनावे पर कोई…See More
May 21
AMAN SINHA posted a blog post

तलाक़

दर्द है ये दो दिलों का, एक का होता नहींजागते है संग दोनों, कोई भी सोता नहींये ख़ुशी है या के ग़म है, कोई कह सकता नहींदर्द का वैसे भी यारो, रंग होता हीं नहींयाद आती है घडी वो, जब पहली बार हम मिले थेबसंत के वो दिन नहीं थे, पर फूल दिल में खिले थेक्या हुआ जो सारी यादें, धूल बन के उड़ गयीदोनों ने मांगी थी खुशियां, क्यों शूल बनके चुभ गयींआपसी सम्मान को क्यों, दोनों ने भुला दिया?घोंसला सपनो का हमने, खुद हीं क्यों जला दिया?मैं गलत या तू सही है, फर्क अब पड़ता है क्या?फैसला अब पूछता है, अमल से डरता है…See More
May 15
AMAN SINHA posted a blog post

अज्ञात

ख़यालों में मेरे ख़याल एक आता हैभरम मेरा मुझको यूं भरमा के जाता हैदिखता नहीं है पर कोई बातें करता हैनहीं साथ मेरे पर महसूस होता हैमैं अंजान उससे पर वो जानता हैवो है बस यहीं पर ये दिल मानता हैदिखा जो कहीं पर तो पहचान लूंगीयही मर्ज़ मेरा है मैं जान लूंगीवो है झोंका हवा का है अंदाज़ मेरानहीं जानती मैं क्या है अंजाम मेरामिला जो कहीं तो उसे जाने ना दुंगीमैं बाहों से अपने उसे बांध लूंगीजहाँ चाहता है वहाँ घूमता हैगगन हो ज़मीं हो वो सब चूमता हैभेद सकता है वो दीवारों को मन केविचारों को मेरे वो भांपता हैनहीं…See More
May 12
AMAN SINHA posted a blog post

पश्चाताप

तोड़े थे यकीन मैंने मुहल्ले की हर गली मेंचैन हम कैसे पाते इतनी आहें लेकरमौत हो जाए मेहरबा हमपे नामुमकिन हैठोकरे हीं हमको मिलेंगी उसके दरवाज़े परहर परत रंग मेरा यूँ ही उतरता गयाज़मी थी सख्त मैं मगर बस धंसता हीं गयागुनाह जो मैंने किये थे बे-खयाली मेंयाद करके उन सबको मैं बस गिनता गया किसी का हाथ छोड़ा किसी का साथ छोड़ दियामैंने हर बदनामी को उनकी तरफ मोड़ दियासामने जब भी वो आए अपना बनाने के लिएअपने बेअदबी से मैंने उनका भरम तोड़ दिया वो न मिले महफ़िल में मुझसे तो अच्छा हैगलत थे हम ही दिल उनका आज भी सच्चा…See More
May 10
AMAN SINHA posted blog posts
May 3
AMAN SINHA posted a blog post

कुछ याद सम्हाले रखा है

कुछ याद सम्हाले रखा है,हमने दर्द को पाले रक्खा हैहँसते चेहरे के आड़ में हमने,दिल के छालों को रक्खा है सब कहते है हम हँसते हैं,हम अपने अंदर ही बसते हैं  अब सबको हम बतलाएं क्या,हम तनहाई से कैसे बचते है अब रोना धोना छोड़ दिया,बस कहना सुनना छोड़ दियाना बात कोई अब चुभती है,हमने तह तक जाना छोड़ दिया लहज़ा जो हमने बदल लिया,खुद हीं खुद का कत्ल कियाजो बातों से बह जाया करता था,उन जज़्बातों को दफन किया अब दर्द से अपनी यारी है,हर ज़ख्म में हिस्सेदारी हैउठना गिरना, गिरकर उठना,बेमतलब की दुनियादारी है अब पाना क्या…See More
Apr 28
Sushil Sarna commented on AMAN SINHA's blog post पहचाना सा एक चेहरा
"वाह मार्मिक अभिव्यक्ति आदरणीय जी ।"
Apr 28
AMAN SINHA posted a blog post

पहचाना सा एक चेहरा

वर्षों हुएएक बार देखे उसकोतब वो पूरे श्रृंगार में होती थीबात बहुतकरती थी अपनी गहरी आँखों सेशब्द कहने से उसे उलझने तमाम होती थीइमली चटनीआम की क्यारीचटपट खाना बहुत पसंद थासैर सपाटेचकमक कपडे रंगों का खेलगाना बजाना हरदम थाखेलना, कूदनापढ़ना, लिखना, सपने सजानासब उसके फेहरिस्त का हिस्सा थेसावन, झूलेनहरों में नहाना, पसंद का खानाकई तरह के किस्से थेआज दिखी थीनुक्कड़ के बाजार में अकेलीसादा सा लिबास ओढे हुएचाल धीमी थीकंधे पर कटे बाल झूलतेचेहरा बिल्कुल ही उदास थाकाले पड़े थेहोंठ उनमें लाली न थीकई दिनों से जैसे…See More
Apr 27
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on AMAN SINHA's blog post मैं थक गया हूँ
"अच्छे भाव हैं भाई लेकिन ऊपर से दूसरी पंक्ति में पत्थर और शैल में अंतर होता है क्या?"
Apr 22

Profile Information

Gender
Male
City State
KOLKATA
Native Place
KOLKATA
Profession
WRITER
About me
NEW WRITER

AMAN SINHA's Blog

क्या रंग है आँसू का

क्या रंग है आँसू का कैसे कोई बतलाएगा?

सुख का है या दु:ख का है ये कोई कैसे समझाएगा?

कभी किसी के खो जाने से, कोई कभी मिल जाए तो 

कभी कोई जो दूर हो गया, कोई पास कभी आ जाए तो 

किस भाव में कितना बहता, कोई ध्यान नहीं रखता

हर हाल में इसका एक ही रंग है, फर्क ना कोई कर सकता 

कभी दर्द में बह जाता है, हंसी में भी ये दूर…

Continue

Posted on May 25, 2022 at 11:47am — 1 Comment

तुम वीरांगना हो जीवन की

तुम वीरांगना हो जीवन की, तुम अपने पथ पर डटी रहो

चाहे उलाहना पाओ जितनी, तुम अपने जिद पर अड़ी रहो



गर्भ में ही मारेंगे तुमको, वो सांस नहीं लेने देंगे 

कली मसल कर रख देंगे वो फूल नही बनने देंगे 

तुम मगर गर्भ से निकल कर अपनी खुशबू बिखरा दो 

तुम वीरांगना हो जीवन की, तुम अपने पथ पर डटी रहो



चाहे पथ पर पत्थर फेंके, शिक्षा से रोके तुमको 

कुछ पुराने मनोवृत्ति वाले चूल्हे में झोंके तुमको 

तुम ना डिगना अपने प्रण से, एकाग्रचित्त हो जमी…

Continue

Posted on May 21, 2022 at 11:59am

मैं धरती बोल रही हूँ

मैं धरती बोल रही हूँ,

हाँ-हाँ धरती बोल रही हूँ

अपनी व्यथा सुनाने को मैं

मैं कब से डोल रही हूँ

मैं धरती बोल रही हूँ

 

मैंने ही तुमको जन्म दिया…

Continue

Posted on May 16, 2022 at 11:30am — 2 Comments

तलाक़

दर्द है ये दो दिलों का, एक का होता नहीं

जागते है संग दोनों, कोई भी सोता नहीं

ये ख़ुशी है या के ग़म है, कोई कह सकता नहीं

दर्द का वैसे भी यारो, रंग होता हीं नहीं

याद आती है घडी वो, जब पहली बार हम मिले थे

बसंत के वो दिन नहीं थे, पर फूल दिल में खिले थे

क्या हुआ जो…

Continue

Posted on May 13, 2022 at 1:00pm

Comment Wall

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

  • No comments yet!
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

रोला छंद. . . . .

रोला छंद. . . .विगत पलों की याद, हृदय  को  लगे  सुहानी।छलक-छलक ये नैन, गाल पर लिखें कहानी । मौन…See More
11 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143
""ओबीओ लाइव तरही मुशाइर:"अंक-143 को सफल बनाने के लिए सभी ग़ज़लकारों और पाठकों का हार्दिक…"
17 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Sushil Sarna's blog post आँधियों से क्या गिला. . . . .
"आदरणीय सुशील सरना जी आदाब, क्या बहतरीन अंदाज़ के साथ ख़ूबसूरत अहसासात से लबरेज़ ग़ज़ल कही है, वाह!…"
17 hours ago
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143
"आदरणीय अमीरुद्दीन अमीर साहब सादर अभिवादन बहुत-बहुत शुक्रिया आपका "
18 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143
"//आदरणीय मैंने "और" को 2 में लिया है 21 में नहीं// ठीक है। "
18 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143
"मुहतरमा ऋचा यादव जी आदाब तरही मिसरे पर ग़ज़ल का उम्दा प्रयास है मुबारकबाद पेश करता हूँ। किनारा कर…"
19 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143
"आ. भाई अमीरूद्दीन जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति, प्रशंसा व स्नेह के लिए आभार।"
19 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143
"आदरणीय दयाराम मेठाणी जी आदाब, तरही मिसरे पर अच्छी ग़ज़ल हुई है, गिरह भी उम्दा लगी है, बधाई स्वीकार…"
19 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143
"आदरणीय दण्डपाणि नाहक़ जी आदाब तरही मिसरे पर अच्छी ग़ज़ल कही है आपने मुबारकबाद पेश करता हूँ। गिरह…"
19 hours ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143
"आदरणीय दण्डपाणि नाहक जी, प्रोत्साहन के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
19 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143
"आदरणीय सूबे सिंह जी आदाब, तरही मिसरे पर ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है बधाई स्वीकार करें।"
19 hours ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143
"आदरणीय चेतन प्रकाश जी, पोस्ट पर आने व कमियां बताने के लिए हार्दिक धन्यवाद। आपके सुझाव पर ध्यान…"
19 hours ago

© 2022   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service