For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

प्रशांत "दीक्षित"
  • Male
  • Bhopal, Madhya Pradesh
  • India
Share

प्रशांत "दीक्षित"'s Friends

  • Balram Dhakar
  • sunanda jha
  • Samar kabeer
  • Saurabh Pandey
 

प्रशांत "दीक्षित"'s Page

Latest Activity

प्रशांत "दीक्षित" updated their profile
Nov 1, 2020
sunanda jha and प्रशांत "दीक्षित" are now friends
Sep 14, 2020
प्रशांत "दीक्षित" commented on प्रशांत "दीक्षित"'s blog post वीर जवान
"बहुत बहुत धन्यवाद लक्ष्मण धामी'मुसाफिर' जी । बहुत बहुत धन्यवाद समर कबीर जी"
Feb 5, 2020
प्रशांत "दीक्षित"'s blog post was featured

वीर जवान

फ़ाइलातुन  फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन2122   2122 2122धमनियों में दौड़ता यूँ तो सदा है ।।रक्त है जो देश हित में खोलता है ।।हौसला उस वीर का देखो ज़रा तुम ।गोलियों की धार में सीना तना है ।।        रणविजय तक सांस ये चलती रहेगी ।जीत से पहले यहाँ मरना मना है ।।रक्त की हर बूंद रण में है गिरी जो बूंद से  रण बांकुरा इक उठ खड़ा हैहर जनम तेरा ही बेटा मैं बनूं माँ ।आयु कम मां भारती का ऋण बड़ा है ।"मौलिक व अप्रकाशित"See More
Jan 31, 2020
Samar kabeer commented on प्रशांत "दीक्षित"'s blog post वीर जवान
"जनाब प्रशांत दीक्षित 'सागर' जी आदाब,ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है,बधाई स्वीकार करें । जनाब मुसाफ़िर जी की बात का संज्ञान लें ।"
Jan 29, 2020
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on प्रशांत "दीक्षित"'s blog post वीर जवान
"आ. भाई प्रशांत जी, सुंदर गजल हुई है हार्दिक बधाई।  होसला को हौसला कर लीजिएगा  बूंद से  रण बांकुरा इक उठ खड़ा है इस मिसरे को यूँ करने से गुणवत्ता निखर सकती है ..सादर 'उससे नव रण बांकुरा इक उठ खड़ा है'"
Jan 27, 2020
प्रशांत "दीक्षित" posted a blog post

वीर जवान

फ़ाइलातुन  फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन2122   2122 2122धमनियों में दौड़ता यूँ तो सदा है ।।रक्त है जो देश हित में खोलता है ।।हौसला उस वीर का देखो ज़रा तुम ।गोलियों की धार में सीना तना है ।।        रणविजय तक सांस ये चलती रहेगी ।जीत से पहले यहाँ मरना मना है ।।रक्त की हर बूंद रण में है गिरी जो बूंद से  रण बांकुरा इक उठ खड़ा हैहर जनम तेरा ही बेटा मैं बनूं माँ ।आयु कम मां भारती का ऋण बड़ा है ।"मौलिक व अप्रकाशित"See More
Jan 25, 2020
प्रशांत "दीक्षित" posted a blog post

याद उनको कभी,मेरी आती नहीं

212 212 212 212याद उसको कभी,मेरी आती नहीं ।और ख्वाबों से मेरे,वो जाती नहीं ।।सो रही अब भी वो, चैन से रात भर ।अब इधर नींद आँखों में आती नहीं ।।वो मिले जब कभी,बात पूंछू यहीप्यार उसको नहीं, या जताती नहीं ।।लफ़्ज़ तेरे सभी,मेरे होंठों पे हैं ।गीत क्यूँ तू मिरे गुनगुनाती नहीं ।।तेरी हर बात का मैं तो काइल हुआ ।मेरी बातें तुझे क्यों लुभाती नहीं ।। मौलिक व अप्रकाशितSee More
Dec 6, 2019
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on प्रशांत "दीक्षित"'s blog post लघुकथा-दीवाली के पटाखे
"http://www.openbooksonline.com/m/discussion?id=5170231%3ATopic%3A637805 आप लघुकथा की पाठशाला ज्वाइन कर सकते हैं जो ओबीओ में ही है वहां से भी आप सीख सकते हैं। सादर।"
Oct 31, 2019
प्रशांत "दीक्षित" commented on प्रशांत "दीक्षित"'s blog post लघुकथा-दीवाली के पटाखे
"बहुत बहुत धन्यवाद कल्पना भट्ट'रौनक" जी । अभी सीखना प्रारम्भ किया है और मार्गदर्शन की बहुत आवश्यकता है । लघुकथा के विषय में कैसे सीखा जाए,इसके विषय में मार्गदर्शन दें । आपका आभारी रहूंगा । सधन्यवाद ।"
Oct 31, 2019
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on प्रशांत "दीक्षित"'s blog post लघुकथा-दीवाली के पटाखे
"अच्छा प्रयास हुआ है आदरणीय प्रशांत दीक्षित 'सागर' जी पर अभी लघुकथा नहीं बन पायी है | सादर| "
Oct 30, 2019
प्रशांत "दीक्षित" commented on प्रशांत "दीक्षित"'s blog post वाह ख़ुदा ! क्या तेरी कुदरत है(मुक्तछंद) -"सागर"
"आदरणीय समर कबीर जी, आपके प्रेरणादायक वचनों के लिए हृदय तल से आभारी हूँ। प्रस्तुति आपको पसंद आयी तो रचना सफ़ल हुई ।बहुत-बहुत धन्यवाद ।"
Oct 29, 2019
Samar kabeer commented on प्रशांत "दीक्षित"'s blog post वाह ख़ुदा ! क्या तेरी कुदरत है(मुक्तछंद) -"सागर"
"जनाब प्रशांत दीक्षित 'सागर' जी आदाब, सुंदर प्रस्तुति हेतु बधाई स्वीकार करें ।"
Oct 29, 2019
प्रशांत "दीक्षित" posted a blog post

वाह ख़ुदा ! क्या तेरी कुदरत है(मुक्तछंद) -"सागर"

वाह ख़ुदा ! क्या तेरी कुदरत है,कहीं है चैन-ओ-सुकून,तो कहीं मुसीबत है,वाह ख़ुदा ! क्या तेरी कुदरत है । क्या था ख्याल तेरा,बनाया किसी को गूंगा,किसी को बहरा,बनाया तूने किसी को सबल-सुअंग,क्यों बनाया किसी को अपाहिज-अपंग?बता तो क्या तेरी चाहत है, वाह ख़ुदा ! क्या तेरी कुदरत है ।तू किसी से ज़ुबान छीने,किसी से हाथ,पैर,कान छीने ।क्यों तूने ऐसी सजा दी,किसी के नैनों की बत्ती बुझा दी ।या नहीं मिली तुझे,यह बनाने की फुर्सत है,वाह ख़ुदा ! क्या तेरी कुदरत है ।क्यों किसी के हाथ लगी निराशा, बोलनी पड़ी उसे हाथों…See More
Oct 29, 2019
प्रशांत "दीक्षित" commented on प्रशांत "दीक्षित"'s blog post लघुकथा-दीवाली के पटाखे
"बहुत बहुत धन्यवाद समर सर । आपके comments से बहुत बल मिलता है ।"
Oct 28, 2019
Samar kabeer commented on प्रशांत "दीक्षित"'s blog post लघुकथा-दीवाली के पटाखे
"जनाब प्रशांत दीक्षित 'सागर' जी आदाब,लघुकथा का अच्छा प्रयास हुआ है,बधाई स्वीकार करें ।"
Oct 28, 2019

Profile Information

Gender
Male
City State
Bhopal,Madhya Pradesh
Native Place
Sagar,Madhya Pradesh
Profession
Training Officer,Dept. Of Skill Development,Madhya Pradesh

प्रशांत "दीक्षित"'s Blog

वीर जवान

फ़ाइलातुन  फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन

2122   2122 2122

धमनियों में दौड़ता यूँ तो सदा है ।।

रक्त है जो देश हित में खोलता है ।।

हौसला उस वीर का देखो ज़रा तुम ।

गोलियों की धार में सीना तना है ।।…

Continue

Posted on January 25, 2020 at 5:33pm — 3 Comments

वाह ख़ुदा ! क्या तेरी कुदरत है(मुक्तछंद) -"सागर"

वाह ख़ुदा ! क्या तेरी कुदरत है,

कहीं है चैन-ओ-सुकून,तो कहीं मुसीबत है,

वाह ख़ुदा ! क्या तेरी कुदरत है । 

क्या था ख्याल तेरा,

बनाया किसी को गूंगा,किसी को बहरा,

बनाया तूने किसी को सबल-सुअंग,…

Continue

Posted on October 28, 2019 at 12:00pm — 2 Comments

लघुकथा-दीवाली के पटाखे

दीपावली का दिन लगभग 3:00 बजे शाम के पूजन की तैयारियां चल रही थी । माँ किचन में खीर बना रही थी,तो हमारी धर्मपत्नी जी आंगन में रंगोली डाल रही थी । मैं हॉल में बैठा हुआ व्हाट्सएप पर लोगों को दिवाली की शुभकामनाएं भेज रहा था और मेरे पिताजी,मेरे पुत्र(भैय्यू),जिसने पिछले महीने अपना तीसरा जन्म दिन मनाया था,के साथ मस्ती करने में व्यस्त थे। इस मौसम में आमतौर पर मच्छर बहुत होते हैं,इसलिए पिताजी यह भी ख़याल रख रहे थे कि भैय्यू को मच्छर न कांटें और इसके लिए उन्हें काफ़ी मसक्कत भी करनी पड़ रही थी । तभी मेरा…

Continue

Posted on October 27, 2019 at 10:23pm — 5 Comments

याद उनको कभी,मेरी आती नहीं

212 212 212 212

याद उसको कभी,मेरी आती नहीं ।

और ख्वाबों से मेरे,वो जाती नहीं ।।

सो रही अब भी वो, चैन से रात भर…

Continue

Posted on October 19, 2019 at 10:30pm — 3 Comments

Comment Wall

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

  • No comments yet!
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"वाह वाह वाह !  भाई आशीष जी, एक अरसे बाद आपसे दो-चार हो रहा हूँ. आपने अपनी प्रस्तुति से मुग्ध…"
4 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"दूसरी प्रस्तुति:- छपा आज है ये समाचार देखोचली एक बालानदी पार देखो तरीक़ा मियाँ ख़ूब है ये निकालाचली…"
4 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, आपकी प्रस्तुति छंद की तुष्टि के साथ प्रदत्त चित्र के गहन भावों को भी पकड़…"
4 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"'नहीं किंतु' का 'अच्छा' जैसे शब्द के पूर्व प्रयुक्त किया जाना, रचना के छांदसिक…"
4 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"वाह.. वाह !  आदरणीय समर साहब, आपकी प्रस्तुति सतत अभ्यास का सुंदर उदाहरण है. जैसा कि अगाह किया…"
4 hours ago
आशीष यादव replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"यहाँ एक बेटी चली नाँव लेके  करेगी नदी पार कैसे? निरेखे  खिवैया स्वयं है बड़ा फासला…"
4 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"दूसरी या अन्य रचनाओं की रोक तो है ही नहीं. तभी तो आयोजन की भूमिका में छंदबद्ध गीतात्मक रचनाओं के…"
5 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on AMAN SINHA's blog post नास्तिक
"आ. भाई अमन जी, अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई।"
6 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (हुस्न तो  मिट जाएगा...)
"आ. भाई अमीरुद्दीन जी, सादर अभिवादन। सुन्दर गजल हुई है । हार्दिक बधाई। "
6 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post उस रात ....
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभारी है सर"
12 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"जनाब चेतन प्रकाश जी आदाब, प्रदत्त चित्र पर छंदों का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें । आपके छंदों…"
12 hours ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"कि रानी कहेगा ज़माना  हमारी फसाना बनेगी लड़ाका  कुँआरी लड़ेगी  लड़ाई …"
15 hours ago

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service