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Chetan Prakash
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Chetan Prakash's blog post पाँच बासंती दोहेः
"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन। अच्छे दोहे हुए हैं । हार्दिक बधाई।"
yesterday
Chetan Prakash posted a blog post

गीत

उतरा है मधु मास धरा पर हर शय पर मस्ती छाई है !जन गण के तन मन सुरा घुली गुनगुनी धूप की चोट लगी कली खुल, वन प्रसफुटित हुई, मुस्काय बेला चमेली है !उतरा है मधुमास धरा पर हर शय पर मस्ती छाई है !!कमल खिले हैं सरोवरों मेंं मौज करे हम नावों में मगन चिड़िया झील के तन हैं वर बसन्त, प्रकृति मुस्काई है ! उतरा है मधुमास धरा पर हर शय  पर मस्ती  छाई है !!बाण चलाया कामदेव ने घायल चम्पा गुलमोहर हैं लगी आग अंग-प्रत्यंग में प्रकृति धूप में झुलसाई हैं !उतरा है मधुमास धरा पर हर शय पर मस्ती छाई है!!।मधु चुराते…See More
yesterday
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पाँच बासंती दोहेः

चम्पई गंध बसे मन, स्वर्णिम हुआ प्रभात । कौन बसा  प्राणों, प्रकृति, तन - मन के निर्वात ।। धूप हुई मन फागुनी, रजनीगंधा रात । नद-नाले मचलते वन,गंगा तीर प्रपात।। रजत रश्मियाँ हँसे नद, चाँद झील के गात । काँप जाय है चाँदनी, बरगद हृदय आत ।। पोर- पोर टेसू हुआ, प्राणों बसे पलाश । गुलाबी रंग मन अहा, घर नीला आकाश ।।रंग - बिरंगी छटा वन, सतरंगा आकाश । इन्द्रधनुष रच रहा, पत्ती फूल पलाश।। मौलिक व अप्रकाशितSee More
Feb 28
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-71
"              "दौड़, समय से" अभी  तो परीक्षा  के  पास महीने हैं, मुझे आप  केवल  चार  माह  दै दीजिए,  आपकी बेटी शत- प्रतिशत  नहीं पिचानवे  प्रतिशत …"
Feb 27
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
" आदाब, तत्काल  ही गिरह का शे'र जोड़ दिया  था लेकिन  किसी भाई के उसी  समय टिप्पण करते, टिप्पणीकार के कधन के नीचे  छप गया, कृपया  देखें  !"
Feb 26
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"आदाब, भाई  श्री लक्ष्मण  धामी 'मुसाफिर '  ! काश 'सुधीजनों' की सलाह  की पड़ताल  करने के बाद  आप  कहते तो, श्री जी,  बेहतर  होता! फिर  भी  ग़ज़ल तक  पहुँचने के …"
Feb 26
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"आदाब, सलिक गणवीर साहब,  बह्र  से खारिज मिसरे  उदाहरण  सहित  दोष बद्ध किस तरह है, कृपया समझाए ! और  उनका  विकल्प  ज़रूर  देकर लाभान्वित  करें!"
Feb 25
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"आदाब,  सु  श्री रचना भाटिया जी,  कृपया, संदर्भित  माननीया  को संबोधित   मेरा प्रत्युत्तर देखें । कदाचित  आपकी  शंकाओं का भी समाधान हो सके !"
Feb 25
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"भाई, नाथ सोनांचली, नमस्कार  ! ग़ज़ल का प्रयास  ही  कि या , शुद्ध  ग़ज़ल  कही  है ,भ्रमित  न हो ,  आभार  !"
Feb 25
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"आदाब , मोहतरम कबीर  साहब , ग़ज़ल तक आपकी  आमद हुई,  आभारी  हूूँ !"
Feb 25
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"आदाब, आदरेया, सु  श्री  राजेश कुमारी जी।  तीसरे शेर का ऊला, " शबे ग़म तनहा रहे थे भीड भी दुनिया में"  2122, के स्थान पर 1122, लिया  गया  है, जिसकी इस बह्र मे ली जा  सकती है! चौथे  शेर का सानी, "…"
Feb 25
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"बहुत धन्यवाद ,  भाई नीलेश !"
Feb 25
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"गिरहः बारहा हम से ही सौगात दिखाई न गई क्या हुआ उनसे अगर बात बनाई न गई"
Feb 25
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"तरही ग़जलः 2122 1122 1122 22 ( 112 ) फिर मिलेंगे कई मौके ये सुझाई न गई । राहे उल्फत है कठिन बात बताई न गई । एक दूजे के लिये कब बने थे हम या रब, दिल्लगी ही सही वो बात जताई न गई । शबे ग़म तनहा रहे थे भीड़ भी दुनिया में टूटे दिल तो उन्हें औक़ात बताई न…"
Feb 25
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 118 in the group चित्र से काव्य तक
" पहले मतले  के ऊला से, कृपया 'हैं निकाल कर पढ़ने की ज़हमत फरमा हो, आभार !"
Feb 20
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 118 in the group चित्र से काव्य तक
"ग़ज़ल 1222.    1222.   1222.   1222 कि फूटा ज्वार बासंती हिलोरें मन हैं अहा  राधा | वो ज्वाला सुप्त बहती मन रही सावन कहा राधा | प्रिया उसकी रही है भेज पाती कान्हा राधा | असर  मुझ पर हुआ बिल्कुल नहीं …"
Feb 20

Profile Information

Gender
Male
City State
Baraut
Native Place
Hapur
Profession
Teaching
About me
I'm a poet rather born than made or trained since my childhood

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गीत

उतरा है मधु मास धरा पर

हर शय पर मस्ती छाई है !

जन गण के तन मन सुरा घुली

गुनगुनी धूप की चोट लगी

कली खुल, वन प्रसफुटित हुई,

मुस्काय बेला चमेली है !

उतरा है मधुमास धरा पर

हर शय पर मस्ती छाई है !!

कमल खिले हैं सरोवरों मेंं

मौज करे हम नावों में

मगन चिड़िया झील के तन हैं

वर बसन्त, प्रकृति मुस्काई है !

उतरा है मधुमास धरा पर

हर शय  पर मस्ती  छाई है !!

बाण चलाया कामदेव ने

घायल चम्पा गुलमोहर…

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Posted on March 5, 2021 at 1:30am

पाँच बासंती दोहेः

चम्पई गंध बसे मन, स्वर्णिम हुआ प्रभात ।

कौन बसा  प्राणों, प्रकृति, तन - मन के निर्वात ।।



धूप हुई मन फागुनी, रजनीगंधा रात ।

नद-नाले मचलते वन,गंगा तीर प्रपात।।



रजत रश्मियाँ हँसे नद, चाँद झील के गात ।

काँप जाय है चाँदनी, बरगद हृदय आत ।।



पोर- पोर टेसू हुआ, प्राणों बसे पलाश ।

गुलाबी रंग मन अहा, घर नीला आकाश ।।



रंग - बिरंगी छटा वन, सतरंगा आकाश ।

इन्द्रधनुष रच रहा, पत्ती फूल पलाश।।…





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Posted on February 28, 2021 at 1:30pm — 1 Comment

नज़्म

यह दुनिया है, या जंगल

आजकल पेशोपेश में हूँ,

इन्सान और जानवर का

भेद मिटता जा रहा है

मौका पाते ही इन्सान

हैवान बन जाता है

अकेले किसी अबला को

कही बेसहारा पाकर

कुत्तों सा टूट पड़ता है,

नोच डालता है अस्मत

किसी बेवा की, किसी कुंवारी की

परम्परा की बेड़िया काटकर शैतान

उजालों के अन्तर्ध्यान होने पर

बोतल से जिन्न निकलकर

विराट राक्षस होकर सड़क पर

आ जाता है,

मानवों का भक्षण करने

सड़क पर आ जाता…

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Posted on February 12, 2021 at 1:30pm — 4 Comments

नवाचार

राधे इस बार गाँव लौटा तो उसने देखा कि उसके दबंग पड़ौसी ने वाकई उसके दरवाजे पर अपना ताला जड़ दिया था ।

दर असल जयसिंह उसे कहता, " काम जब करते ही शहर में हो तो मकान हमें दे दो" कभी कहता, " मान जाओ, नहीं तो तुम्हारे जाते ही अपना ताला डाल दूंगा ।"

राधे को एकाएक कुछ सूझा, बच्चों और पत्नि को वहीं खड़े रहने को कहा, खुद भागा-भागा अपने दोस्त करीमू के पास जा पहुँँचा और बोला, " भाई करीमू, चल, चल जल्दी कर, बच्चे ठंडी रात मे घर से बाहर खड़े है, ताला खोल" ! चाबी मुझ से रास्ते मे खो गयी, इस…

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Posted on February 5, 2021 at 5:00pm — 2 Comments

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At 11:46pm on November 22, 2020, DR ARUN KUMAR SHASTRI said…

भाई चेतन जी
नमन -
इस्लाह का
सलीका आ जायेगा
मैंने आज तलक
मुकम्मल तो कोई देखा नहीं
गलतियां निकालोगे-
तो सीखूंगा ही ।।
मैं तो अधूरा था
अधूरा रहा
और हूँ अब तलक
आज आया हूँ आपकी बज्म में
कुछ सिखा दोगे -
तो सीखूंगा भी ।।

At 11:59am on June 27, 2020, Samar kabeer said…

जनाब चेतन प्रकाश जी,ये टिप्पणी आप मुशाइर: में दें,तो मुझे जवाब देने में आसानी होगी ।

 
 
 

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