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Chetan Prakash
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Chetan Prakash replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"कि रानी कहेगा ज़माना  हमारी फसाना बनेगी लड़ाका  कुँआरी लड़ेगी  लड़ाई   महाधार  पानी, चली वो हवा तालिमी राजधानी ! कि लंका रुहानी जलानी उसे ही निशाना लगाना अँधेरे  फँसे  ही डराती फ़ज़ा वो रुदाली …"
16 hours ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"सही बात है आपकी, आदरणीय भाई, लक्ष्मण सिंह मुसाफ़िर साहब, मुझसे भूल हुई! लेकिन  'है', अथवा 'वो' उपयुक्त जान पड़ता है! सादर"
17 hours ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"नमस्कार, भाई, लक्ष्मण सिंह मुसाफ़िर!  चित्रोक्त विवरण पर भुजंग प्रयात छंद का सुन्दर उदाहरण है, आपकी प्रस्तुति! तीसरे प्रयास का अंतिम चरण ' नहीं किन्तु' में किन्तु को 'पर, से बदलन दीजिये, शिल्प बेहतर हो जायेगा! सादर"
20 hours ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"आदाब, आदरणीय समर कबीर साहब, भुजंग प्रयात छंद पर अच्छी प्रस्तुति है आपकी, बधाई स्वीकार करें, किन्तु अन्तिम चरण में 'जिहालत' कि स्थान पर, 'गरीबी' शिल्प की दृष्टि से उचित होता! सादर  "
20 hours ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-131
"नमस्कार, भाई लक्ष्मण सिंह मुसाफिर, अच्छे दोहे लिखे आपने ।किन्तु पहले दोहे के तीसरे चरण में कदाचित कहने के बजाय कहती लिख गये हैं। चौथे दोहे के प्रथम चरण( बात ) सुनते नेता सेठ की होना चाहिये सादर...."
Sep 12
Chetan Prakash commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post चर्चा प्रलय की करती हैं धर्मों की पुस्तकें -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"पुनश्च ः 'सराफत' को शराफत होना चाहिए । और, हाँ, 'जो बन के सीढ़ी खप गये सत्ता के वास्ते, उनको क़फ़न भी य़ार सियासत न दे सकी ।' मुझे खास पसन्द आया ।"
Sep 12
Chetan Prakash commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post चर्चा प्रलय की करती हैं धर्मों की पुस्तकें -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"शुुभ प्रभात, भाई लक्ष्मण सिंह मुसाफिर, एक अच्छी सार्थक ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकार करेें ।एकाध जगह शब्द संयोजन गड़बड़ाता लगा, यथा, पापों को किन्तु अन्त क़यामत न दे सकी । जिसमें वाक्य विन्यास की दृष्टि से अन्त पहले और किन्तु बाद में आना चाहिए। सादर"
Sep 12
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-131
"मुझे कुछ  कहना है इस बार.... कि  कब तक चुप  बैठोगे  यार तालिबान का आतंक उस  पार   कब्जा लिया  अफगानिस्तान  घाटी  होगी  सखा  बढ़वार   ! मुझे  कुछ  कहना है इस…"
Sep 11
Chetan Prakash commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post मुसल्सल ग़ज़ल (नसीहत प्यार की)
"आदाब,  'अमीर साहब,  खूबसूरत  ग़ज़ल के हवाले  से अच्छा  और सच्चा प्यार का फलसफा दिया है, आपने ! मँजे  हुए  खिलाड़ी  जान पड़ते हैं, जनाब  आप ! मुबारकबाद  कबूल कीजिए  !"
Sep 10
Chetan Prakash commented on babitagupta's blog post वक्त से आगे चलने वाली....अमृता प्रीतम
"नमन आदरणीया,  अमृता प्रीतम के साहित्य और  काव्य  का सही चित्रण किया  है, आपने  ! किन्तु उनके जीवन वृत्त  पर  अमिट  छाप  छोड़ने  वाली प्रेरक घटनाओं को कदाचित  आप  छूती तो आलेख …"
Sep 10
Chetan Prakash commented on Sushil Sarna's blog post एक दोहा गज़ल - नज़रें
"नमस्कार,  भाई सुशील सरना  जी, दोहा ग़ज़ल  का आपका  प्रयास  अच्छा  ही कहा जाएगा, आपको  इस  हेतु  बधाई  ! लेकिन  दूसरा  दोहा संशोधन  चाहता  है, दूसरा ( सानी ) मिसरा  भाव से…"
Sep 10
Chetan Prakash commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post पर्व गुरुओं का मनाते आज हम -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आदाब,  भाई  लक्ष्मण सिंह मुसाफिर,  अच्छी  ग़ज़ल हुई  है ! गुरुवर  मात्र  समर्पण के आकांक्षी होते  हैं, शेष तो बस कृपा  बरसती है । ग़ज़ल  हेतु  आप  भाई  के पात्र  हैं ।"
Sep 10
Chetan Prakash commented on Manan Kumar singh's blog post निर्भरता(लघुकथा)
"नमस्कार, मनन कुमार सिंह, एक अच्छी सुगठित लघुकथा के लिए बधाई स्वीकार करें! बात कुछ ज्यादा गहरी किन्तु वास्तविकता है! विकास यात्रा निश्चित रूप से उर्ध्वगामी है! आनंद का विषय है.... "
Sep 10
Chetan Prakash commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post किये कैद बैठा हवाओं को जो भी - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आदाब, भाई लक्ष्मण सिंह धामी खूबसूरत ग़ज़ल हुई है! पहली बार लगा प्रतीकों के माध्यम से आप अच्छी ग़ज़ल कह सकते है ं! बधाई स्वीकार करें! लेकिन भाई, मतला रब्तहीन है! " डर कर " रोशनी तक नहीं पहुँचा जा सकता ! 'लड़ कर' न्यायोचित है!…"
Sep 10
Chetan Prakash commented on babitagupta's blog post गुरवै: नमों नमः
"नमस्कार, महोदया, प्रेरक आलेख है, गुरु की महत्व पर  ! लेकिन माननीया आलेख शोध परक विधा है, तथ्य सौ फीसदी सही होने चाहिए! विधवा-विवाह की सर्वप्रथम पैरवी करने वाले और स्त्री-शिक्षा हेतु आंदोलन का बिगुल फूंकने वाले बंगाल में स्वतंत्रता आंदोलन को धार…"
Sep 8
Chetan Prakash commented on Sushil Sarna's blog post चाँद - चाँदनी पर दोहावली ......
"आदाब, सुशील सरना जी, दोहावली आपका अच्छा प्रयास कहा जाएगा! किन्तु कुछ शब्दों का प्रयोग सही नहीं जान प़ड़ा, यथा 'रक्स' जिसे रश्क़ होना चाहिए! साथ ही 'वीचि वीचि' जैसा शब्द-यु्म मैंने पहली बार प्रयुक्त हुआ देखा, आशय आप ही, माननीय…"
Sep 5

Profile Information

Gender
Male
City State
Baraut
Native Place
Hapur
Profession
Teaching
About me
I'm a poet rather born than made or trained since my childhood

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ग़ज़ल

1212     1122     1212     22 / 112

मेरे  अपनों  का  ही खंजर मेरी तलाश में है ।

जिन्हें बनाया था अफसर मेरी तलाश में है ।।

जड़ों को सींच रहा हूँ शुरू से ओ बी ओ की,

नये  आए हैं  वो  चाकर  मेरी तलाश  में हैं ।

जताते झूूठा वो हक़ जो ग़ज़ल की शोहरत पर,

उन्हीं  के  हाथ  का  पत्थर  मेरी  तलाश में है ।

बहुत गुमान है उनको तो जन्म के शहर का,

नगर का हूँ  मैं तो रहबर  मेरी  तलाश  में हैं ।

जहाँ में सच…

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Posted on August 24, 2021 at 7:00pm — 5 Comments

ग़ज़ल

रहगुज़र को मेरी कारवाँ दे गया....

212     212     212     212

रहगुज़र  को  मेरी कारवाँ  दे गया

वो खुदी  को अभी पासवाँ दे गया

मुफलिसी वो बुरा ख्वाब थी ज़िन्दगी 

था खुदा जात वो कहकशाँ  दे  गया

आँख भर आए है याद कर के उसे

वो खुदा  था मुझे  बागवाँ  दे गया

ज़िन्दगी  को रज़ा की जबाँ दे गया

रास्ता  एक  था  दो  जहाँ  दे गया

जो बुरा ख्वाब  होता मुझे नींद में

वो बदल  कर नई दास्ताँ  दे…

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Posted on August 7, 2021 at 6:00pm

ग़ज़ल

2122     1212    22 / 112

आज  सोया है शहर घर कर के ! 

खूब  रोया  खुदा  महर  कर के  !!

क्या बुरा हो गया  सनम मुझ से

देखता कब है वो नज़र कर के  !

ज़हरीला बन गया हरेक रिश्ता याँ 

खत्म हो हर अजाब मर कर के  !

हम हैं मारे उसी की बेरुखी के

जिसको देखा नज़र वो भर कर के !

कोई है बात जो लगी दिल को

मिलता कोई नहीं खबर  कर के !

क्या करू मिल के ज़िन्दगी से मैं

खौलता  खून  है …

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Posted on August 3, 2021 at 12:46am — 2 Comments

वो बेकार है

  1212     1122     1212      22 / 112

 तमाम उम्र सहेजी मगर वो बेकार है 

 अजीब बात है शाइर डगर वो बेकार है

सुहाने चाँद की रातों सफर वो बेकार है

लो अब कहूँ तो कहूँ क्या असर वो बेकार है

बिना किताब बिना बिम्ब काव्य की सर्जना 

जो खोलता है मआनी नगर वो बेकार है

नयी - नयी है ये दुल्हन बहार सावनी अब

नया चलन है सो सहवास घर वो बेकार है 

हमारे गुरू जी अभी सुन बहुत बड़ी जीत हैं

हवा  चहक  तो  रही…

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Posted on July 27, 2021 at 8:30am

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At 6:35am on July 22, 2021, रणवीर सिंह 'अनुपम' said…
आदरणीय, चेतन जी, "दोहे : कैसे- कैसे  लोग" शीर्षक के तहत लिखे गए दोहे बहुत सुंदर हैं और बहुत अच्छे लगे।

निम्न चरण विधान में न होने से इनमें लय भंग है। जिसे दूर करने की जरूरत है।

जन्म-भूमि स्वर्ग सम हो
(कारण-नवीं मात्रा पर शब्द पूरा हो रहा है जो नहीं होना चाहिए)

कृतघ्न पक्के लोग
(कारण-आरंभ में जगण "कृतघ्न"आ रहा है, जो नहीं होना चाहिए)

कर रहे बस भोग
(कारण-एक मात्राभार कम है, साथ ही पाँचवीं मात्रा पर शब्द पूरा हो रहा है जो नहीं होना चाहिए)

न हों कभी बदनाम
(कारण-पहली मात्रा पर शब्द पूरा हो रहा है जो नहीं होना चाहिए)

विद्या  हमें  सिखाती है,
(कारण-13 मात्राओं की जगह 14 मात्राएँ हैं, जो नहीं होनी चाहिए)

कर अन्याय प्रतिकार
(कारण-11 की जगह 12 मात्राएँ हैं जो नहीं होनी चाहिए)
At 11:46pm on November 22, 2020, DR ARUN KUMAR SHASTRI said…

भाई चेतन जी
नमन -
इस्लाह का
सलीका आ जायेगा
मैंने आज तलक
मुकम्मल तो कोई देखा नहीं
गलतियां निकालोगे-
तो सीखूंगा ही ।।
मैं तो अधूरा था
अधूरा रहा
और हूँ अब तलक
आज आया हूँ आपकी बज्म में
कुछ सिखा दोगे -
तो सीखूंगा भी ।।

At 11:59am on June 27, 2020, Samar kabeer said…

जनाब चेतन प्रकाश जी,ये टिप्पणी आप मुशाइर: में दें,तो मुझे जवाब देने में आसानी होगी ।

 
 
 

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"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, आपकी प्रस्तुति छंद की तुष्टि के साथ प्रदत्त चित्र के गहन भावों को भी पकड़…"
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"वाह.. वाह !  आदरणीय समर साहब, आपकी प्रस्तुति सतत अभ्यास का सुंदर उदाहरण है. जैसा कि अगाह किया…"
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Saurabh Pandey replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
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