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Chetan Prakash
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Chetan Prakash commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post जिसकी आदत है घाव देने की - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आदाब, भाई  लक्ष्मण सिंह मुसाफिर बहुत खूबसूरत लेकिन छोटी  ग़ज़ल  कही आपने ! बधाई  स्वीकार  करें  ! चौथे  शे'र  में, भाई जी, मुझे रब्त  की क़ी जान पड़ी ! देखिएगा  !"
Nov 30
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-80 (विषय: आकर्षण)
"           चुनाव  सरकारी नौकरी ...... पक्की .. समयबद्ध  प्रोन्नति... एक बार  घुस  जाएं  आप किसी विभाग में ...आजीवन मस्ती...सेवानिवृत्त होने  पर पैंशन जीवित रहते  स्वयं...मरणोपरांत…"
Nov 30
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-137
"भाई लक्ष्मण सिंह धामी एक अच्छी ग़ज़ल से मुशायरे का प्रारंभ हुआ है, इसकेे लिए बधाई! लेकिन क्या आप को नहीं लगता कि यदि बह्र न लिखी हो, यह समझना बहुत कठिन है कि ग़ज़ल फइलातु फाईलुन फइलातु फाईलुन पर कही गयी है! कारण आप बेहतर जानते है ं! मुझे बताने…"
Nov 27
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-137
"तरही ग़ज़ल  : 1121     2122     1121     2122 कि बहार से रही दुश्मनी घर ख़िजा बदल के वो फिज़ा अभी दहकने लगी रात से दहल के न खुदा ने ही नवाज़ा  न कृपा हुई किसी की न चराग़ जल उठे मौज में…"
Nov 26
Chetan Prakash replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-127 in the group चित्र से काव्य तक
"रही स्वार्थपरता कहानी जहाँ । नहीं सोच कोई  सुहानी वहाँ ।। जिधर देखिये आप लालच बड़ा । न कोई किसी के लिये है खड़ा ।। यहाँ देखता हूँ कई देवियाँ । कि बैठी हुई तीन हैं लड़कियाँ ।। बड़ी व्यस्त मोबाइलों हैं अभी । कि संवेदनाहीन दिखती सभी ।। दुखी एक…"
Nov 21
Chetan Prakash replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-127 in the group चित्र से काव्य तक
"नमस्कार, भाई  छोटे लाल  सिंह  चित्रानुसार  सार्थक  शक्ति  छंद  रचे  हैं, आपने । बधाई स्वीकार करें ।"
Nov 21
Chetan Prakash commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - ज़ुल्म सहना छोड़ कर इन्कार करना सीख ले
"आदाब,  भाई नीलेश शेवगांवकर साहब! महर्षि  पाणिनि की व्याकरण के अनुसार विसर्ग (  : ) लगने पर अक्षर की मात्रा बढ़  जाती है ! तद्नुसार दुख  विसर्ग सहित  ( दु:ख ) होने  पर मात्रा भार तीन  (3) हो जाएगा, जो आपके…"
Nov 9
Chetan Prakash commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - ज़ुल्म सहना छोड़ कर इन्कार करना सीख ले
"आदाब, भाई  नीलेश शेवगांवकर साहब,  आपने वस्तुत: मेरी बात  की पुष्टि की  ! आपने अपनी ग़ज़ल के दूसरे शे'र  के ऊला में 'दु:ख'  लिखा  है , 'नासिर काज़मी  की तरह 'दुख' नहीं ! मेरी शंका…"
Nov 9
Chetan Prakash commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - ज़ुल्म सहना छोड़ कर इन्कार करना सीख ले
"आदाब, आदरणीय भाई नीलेश जी, बहुत खूबसूरत ग़ज़ल हुई है ! एक से एक बढकर शे'र हुए हैं! " तन है एक शापित अहिल्या चेतना के मार्ग पर  / राम सी ठोकर लगा उद्धार करना सीख ले " वाहहहहह क्या बात है!  कृपया मेरा एक शंका समाधान भी करें,…"
Nov 8
Chetan Prakash commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - हाँ में हाँ मिलाइये
"आदाब,  भाई,  नीलेश  शेवगांवकर साहब,  क्या  सच बयानी  की है, आप बधाई  के  पात्र  है ! अंग्रेजी में एक  कहावत  है, "Who will bell  the cat", आप ने ओ बी ओ पर  इसका जवाब …"
Nov 6
Chetan Prakash posted a blog post

ग़ज़ल

संगदिल फिर ज़िन्दगी है उससे टकराना भी क्या ! फोड़कर सर अपना यारो रोना-चिल्लाना भी क्या !!कीमती आँसू हैं तेरे वो निशाँ जुल्म ओ सितम, बंद दरवाजों के आगे सर को टकराना भी क्या !कर खुदा की बन्दगी और एहतराम उसका कर ले, लोग ही क़मज़र्फ हों गर उनको जतलाना भी क्या !बढ़ रही तन्हाईयाँ है उम्र के बढ़ने के साथ, खाली-खाली जीस्त है गर वो सर खुजलाना भी क्या !नौंचनी हैं उनको लाशें क़ौम भी तो बाँटनी, शहर सौदागर आये उनको मुँह दिखलाना भी क्या !ज़िन्दगी गर है चुनौती मुँह छिपाकर जीना क्या ! हाथ दो-दो होने दो फिर सच…See More
Oct 29
Chetan Prakash replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-126 in the group चित्र से काव्य तक
"नमन, आदरणीय सौरभ साहब, आपने प्रस्तुति को समय देकर मुझे कृतार्थ किया! विमर्श से निखार आएगा, आप की बात सही है ! साभार !"
Oct 24
Chetan Prakash replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-126 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय समर कबीर साहब, नमन! आशा है, आपकी नातिन शीघ्र ही, स्वास्थ्य लाभ कर घर लौटेगी ! मान्यवर डेंगू बुखार में प्लैटलैट्स गिर जाने का खतरा मुंह बाये खड़ा रहता है! मेरे एक मात्र पुत्र को भी कई वर्ष पहले हो गया था! डाक्टरों का प्रयास जब बहुत सफल होता…"
Oct 24
Chetan Prakash replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-126 in the group चित्र से काव्य तक
"रखाना उसे खेत सारा अभी  उठानी फसल अन्नदाने सभी !  बितानी पड़ेगी यहाँ ज़िन्दगी प्रबंधन न आसान खेती ठगी!!  मिले अन्न केवल धरा से सदा अभी पालना है जगत आपदा !  लगाते जुगत खेत पहरा हुआ कि जीवन मचानों बचाते जुआ !  वही खेत भरता…"
Oct 24
Chetan Prakash replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-126 in the group चित्र से काव्य तक
"नमस्कार आदरणीय,  आप का निर्णय मुझे स्वीकार है! कृपया मुझे अनुमत करें जिससे मैं 'शक्ति छंद' में चित्रोक्त भाव को केन्द्र में रखकर अपनी प्रस्तुति पोस्ट कर सकूँ! "
Oct 24
Chetan Prakash commented on सालिक गणवीर's blog post जाने क्या लोग कर गए होंगे.......( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
" आदाब भाई सालिक गणवीर  जी, अच्छी छोटी बह्र की ग़ज़ल हुई है, बधाई  ! मतला देखिएगा, दोमुंहा लगता है! "
Oct 24

Profile Information

Gender
Male
City State
Baraut
Native Place
Hapur
Profession
Teaching
About me
I'm a poet rather born than made or trained since my childhood

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ग़ज़ल

संगदिल फिर ज़िन्दगी है उससे टकराना भी क्या !

फोड़कर सर अपना यारो रोना-चिल्लाना भी क्या !!

कीमती आँसू हैं तेरे वो निशाँ जुल्म ओ सितम,

बंद दरवाजों के आगे सर को टकराना भी क्या !

कर खुदा की बन्दगी और एहतराम उसका कर ले,

लोग ही क़मज़र्फ हों गर उनको जतलाना भी क्या !

बढ़ रही तन्हाईयाँ है उम्र के बढ़ने के साथ,

खाली-खाली जीस्त है गर वो सर खुजलाना भी क्या !

नौंचनी हैं उनको लाशें क़ौम भी तो बाँटनी,

शहर सौदागर आये उनको…

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Posted on October 29, 2021 at 6:30am

ग़ज़ल: संगदिल गर ज़िन्दगी है उस से टकराना भी क्या ...!

संगदिल गर ज़िन्दगी  है उससे टकराना भी क्या ।

फोड़कर सर अपना यारो रोना चिल्लाना भी क्या ।।

ज़िन्दगी गर है चुनौती मुँह छिपाकर जीना क्या ।

हाथ  दो - दो होने  दो फिर सच को झुठलाना भी क्या 

कीमती आँसू हैं तेरे वो निशाँ जुल्म ओ सितम, 

बंद दरवाजों के आगे  सर वो फुड़वाना भी  क्या ।

कर खुदा की  बन्दगी  और एहतराम उसका  कर ले, 

लोग  ही क़मज़र्फ हैं गर उनको जतलाना भी  क्या ।

नोंचनी  लाशें हैं उनको कौम को है…

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Posted on October 10, 2021 at 7:25am

ग़ज़ल

1212     1122     1212     22 / 112

मेरे  अपनों  का  ही खंजर मेरी तलाश में है ।

जिन्हें बनाया था अफसर मेरी तलाश में है ।।

जड़ों को सींच रहा हूँ शुरू से ओ बी ओ की,

नये  आए हैं  वो  चाकर  मेरी तलाश  में हैं ।

जताते झूूठा वो हक़ जो ग़ज़ल की शोहरत पर,

उन्हीं  के  हाथ  का  पत्थर  मेरी  तलाश में है ।

बहुत गुमान है उनको तो जन्म के शहर का,

नगर का हूँ  मैं तो रहबर  मेरी  तलाश  में हैं ।

जहाँ में सच…

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Posted on August 24, 2021 at 7:00pm — 5 Comments

ग़ज़ल

रहगुज़र को मेरी कारवाँ दे गया....

212     212     212     212

रहगुज़र  को  मेरी कारवाँ  दे गया

वो खुदी  को अभी पासवाँ दे गया

मुफलिसी वो बुरा ख्वाब थी ज़िन्दगी 

था खुदा जात वो कहकशाँ  दे  गया

आँख भर आए है याद कर के उसे

वो खुदा  था मुझे  बागवाँ  दे गया

ज़िन्दगी  को रज़ा की जबाँ दे गया

रास्ता  एक  था  दो  जहाँ  दे गया

जो बुरा ख्वाब  होता मुझे नींद में

वो बदल  कर नई दास्ताँ  दे…

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Posted on August 7, 2021 at 6:00pm

Comment Wall (3 comments)

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At 6:35am on July 22, 2021, रणवीर सिंह 'अनुपम' said…
आदरणीय, चेतन जी, "दोहे : कैसे- कैसे  लोग" शीर्षक के तहत लिखे गए दोहे बहुत सुंदर हैं और बहुत अच्छे लगे।

निम्न चरण विधान में न होने से इनमें लय भंग है। जिसे दूर करने की जरूरत है।

जन्म-भूमि स्वर्ग सम हो
(कारण-नवीं मात्रा पर शब्द पूरा हो रहा है जो नहीं होना चाहिए)

कृतघ्न पक्के लोग
(कारण-आरंभ में जगण "कृतघ्न"आ रहा है, जो नहीं होना चाहिए)

कर रहे बस भोग
(कारण-एक मात्राभार कम है, साथ ही पाँचवीं मात्रा पर शब्द पूरा हो रहा है जो नहीं होना चाहिए)

न हों कभी बदनाम
(कारण-पहली मात्रा पर शब्द पूरा हो रहा है जो नहीं होना चाहिए)

विद्या  हमें  सिखाती है,
(कारण-13 मात्राओं की जगह 14 मात्राएँ हैं, जो नहीं होनी चाहिए)

कर अन्याय प्रतिकार
(कारण-11 की जगह 12 मात्राएँ हैं जो नहीं होनी चाहिए)
At 11:46pm on November 22, 2020, DR ARUN KUMAR SHASTRI said…

भाई चेतन जी
नमन -
इस्लाह का
सलीका आ जायेगा
मैंने आज तलक
मुकम्मल तो कोई देखा नहीं
गलतियां निकालोगे-
तो सीखूंगा ही ।।
मैं तो अधूरा था
अधूरा रहा
और हूँ अब तलक
आज आया हूँ आपकी बज्म में
कुछ सिखा दोगे -
तो सीखूंगा भी ।।

At 11:59am on June 27, 2020, Samar kabeer said…

जनाब चेतन प्रकाश जी,ये टिप्पणी आप मुशाइर: में दें,तो मुझे जवाब देने में आसानी होगी ।

 
 
 

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