For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Aazi Tamaam
  • Male
  • Bareilly, UP
  • India
Share

Aazi Tamaam's Friends

  • Mamta gupta
  • अमीरुद्दीन 'अमीर'
  • Rachna Bhatia
  • शुचिता अग्रवाल "शुचिसंदीप"
  • Krish mishra 'jaan' gorakhpuri
  • Samar kabeer
  • लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
  • Saurabh Pandey
 

Aazi Tamaam's Page

Latest Activity

Aazi Tamaam commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post शठ लोग अब पहनकर चोला ये गेरुआ सा - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"वाह आ dh@mi सर बेहद खूबसूरत ग़ज़ल हुई है सहृदय बधाय"
Oct 30
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"आ धामी सर बेहद दुखद समाचार है विनम्र श्रद्धांजलि"
Oct 30
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-136
"22 22 22 22 22 22 22 2 हमने तुमको तुमने हमको दिल से जब आज़ाद किया चैन सुकूँ तो मिल न सका इक दर्द नया ईजाद किया हम भी थे छलनी छलनी और तुम भी टूटे टूटे थे कितना वक़्त लगा जब दो बिखरे जिस्मों को शाद किया हमने तुमने हाथों में ले हाथ बुने कितने…"
Oct 29
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-136
"सहृदय शुक्रिया गुरु जी आप एक बार पहले भी ये बात बता चुके हैं क्षमा चाहूंगा फिर से वही गलती दुहरा दी मार्गदर्शन करने के लिए सहृदय अभार"
Oct 29
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-136
"आ रवि जी खूब ग़ज़ल हुई बधाई स्वीकार करें"
Oct 29
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-136
"आ आरज़ू जी खूब ग़ज़ल हुई आ गुरु जी की इस्लाह सर आँखों पर"
Oct 29
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-136
"आ दिनेश जी खूब ग़ज़ल हुई बधाई स्वीकार करें गुणीजनों की इस्लाह सर आँखों पर"
Oct 29
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-136
"आ दयाराम जी खूब ग़ज़ल हुई आ गुरु जी की इस्लाह सर आँखों पर"
Oct 29
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-136
"जी आ आशीष जी खूब ग़ज़ल कही बधाई स्वीकार करें"
Oct 29
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-136
"सहृदय शुक्रिया आदरणीय रिचा जी ग़ज़ल तक आने के लिये तहे दिल से आभार"
Oct 29
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-136
"सहृदय शुक्रिया आ अमीर जी ग़ज़ल तक आने के लिये आपकी हौसला अफ़ज़ाई का तहे दिल से शुक्रिया"
Oct 29
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-136
"सहृदय शुक्रिया आदरणीय नूर जी ग़ज़ल तक आने के लिये आपका भी सुझाव अच्छा है आभार"
Oct 29
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-136
"सहृदय शुक्रिया आ रचना जी ग़ज़ल तक आने व हौसला अफ़ज़ाई के लिये आभार"
Oct 29
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-136
"सहृदय शुक्रिया आ सालिक जी ग़ज़ल तक आने व मार्गदर्शन करने के लिये आभार"
Oct 29
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-136
"क्षमा चाहूंगा आ गुरु जी एवं आ नूर जी बीच में अपनी बात रखने के लिये क्या हम इस बहर को आसानी के लिये इस तरह ले सकते हैं ये 222 का चक्कर छोड़ कर ये भी जानना चाहता हूँ की जो मैंने लिक्खी हैं उनमें से कौन कौन सी गलत हैं कौन कौन सी सही हैं सादर 22 22 22…"
Oct 29
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-136
"सहृदय शुक्रिया गुरु जी ग़ज़ल तक आने के लिये गुरु जी बदलाव किया है देखियेगा हमने तुमको तुमने हमको दिल से जब आज़ाद किया चैन ओ सुकूँ तो मिल न सका इक दर्द नया ईजाद किया"
Oct 29

Profile Information

Gender
Male
City State
Uttar Pradesh
Native Place
CHANDAUSI
Profession
Poet, Lawer, Engineer
About me
Poetic Nature

Aazi Tamaam's Photos

  • Add Photos
  • View All

Aazi Tamaam's Blog

ग़ज़ल: किसी कँवल का हंसीं ख़ाब देखने के लिये

1212 1122 1212 112

किसी कँवल का हंसीं ख़ाब देखने के लिये

किसी के हुस्न का सैलाब देखने के लिये

कहाँ थे देखो सनम हम कहाँ चले आये

वो गुलबदन वो आब ओ ताब देखने के लिये

न जाने कब से हक़ीक़त की थी तलब हमको

न जाने कब से थे बेताब देखने के लिये

छुआ तो जाना हर इक ख़ाब था धुंआ यारो

बचा न कुछ भी याँ नायाब देखने के लिये

करीब जा के हर एक चीज खोयी है हमने

लुटे हैं खुद को ही ईजाब देखने के…

Continue

Posted on October 10, 2021 at 12:15pm — 8 Comments

ग़ज़ल: ज़ुमुररुद कब किसी मुफ़्लिस के घर चूल्हा जलाता है

1222 1222 1222 1222

ज़ुमुररुद कब किसी मुफ़्लिस के घर चूल्हा जलाता है

मिरी जाँ ये तो बस शाहों कि पोशाकें सजाता है

रिआया भी तो देखो कितनी दीवानी सी लगती है

उसी को ताज़ कहती है जो इनके घर जलाता है

नगर में नफ़रतों के भी महब्बत कौन समझेगा

ए पागल दिल तू वीराने में क्यों बाजा बजाता है

हमारे हौसले तो कब के आज़ी टूट जाते पर

ये नन्हा सा परिंदा है जो आशाएँ जगाता है

कोई बेचे यहाँ आँसू तो कोई…

Continue

Posted on June 24, 2021 at 6:00pm — 8 Comments

ग़ज़ल: उठाकर शहंशाह क़लम बोलता है

122 122 122 122

उठाकर शहंशह क़लम बोलता है

चढ़ा दो जो सूली पे ग़म बोलता है

ये फरियाद लेकर चला आया है जो

ये काफ़िर बहुत दम ब दम बोलता है

जुबाँ काट दो उसकी हद को बता दो

बड़ा कर जो कद को ख़दम बोलता है

गँवारों की वस्ती है कहता है ज़ालिम

किसे नीच ढा कर सितम बोलता है

बिठाता है सर पर उठाकर उसी को

जो कर दो हर इक सर क़लम बोलता है

बड़ी बेबसी में है जीता वो ख़ादिम

बड़ाकर जो…

Continue

Posted on June 15, 2021 at 4:30pm — 6 Comments

नग़मा: दिल

1222 1222 1222 1222

अज़ीब इस दिल की बातें हैं अज़ीब इसके तराने हैं

अज़ीब ही दर्द है इसका अज़ीब ही दास्तानें हैं

अज़ीब अंज़ाम है इसका अज़ीब आग़ाज़ करता है

अगर जो टूट भी जाये तो ना आवाज़ करता है

कभी सुरख़ाब करता है कभी बेताब करता है

दिल ए नादाँ............. दिल ए नादाँ...........

दिल ए नादाँ हर इक ख़्वाहिश को ही आदाब करता है

ये करतब कितनी आसानी से यारो दिल ये करता है

कभी ये ज़ख़्म देता है,…

Continue

Posted on June 10, 2021 at 10:23am — 2 Comments

Comment Wall (2 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 1:08pm on January 16, 2021, लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' said…

आ. भाई आज़ी तमाम जी, सादर अभिवादन । मेरी गजलें आपको अच्छी लगीं यह हर्ष का विषय है । आपके इस स्नेह के लिए हार्दिक धन्यवाद।

मंच पर अपनी रचनाओं का आनन्द लेने का अवसर प्रदान करें और अन्य रचनाकारों का भी अपनी प्रतिक्रिया से उत्साहवर्धन करते रहिए ।

At 8:15pm on January 12, 2021, Samar kabeer said…

जनाब आज़ी साहिब,तरही मुशाइर: में शामिल सभी ग़ज़लों पर लाइव ही तफ़सील से गुफ़्तगू होती है, शिर्कत फ़रमाएँ, और कोई उलझन हो तो मुझसे 09753845522 पर बात कर सकते हैं ।

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"सादर आभार, आदरणीय अमीरुद्दीन साहब"
6 minutes ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"सादर आभार, आदरणीय लक्ष्मण जी"
7 minutes ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"आपका सादर आभार, आदरणीय विजय जी. "
12 minutes ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post तेरे मेरे दोहे ......
"आदरणीय सुशील सरना जी का दोहा कहीं खारिज नहीं होने जा रहा है, आदरणीय नीलेश जी.  भ्रमकारी सुझाव…"
30 minutes ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post तेरे मेरे दोहे ......
"आदरणीय तेज वीर सिंह जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार । सादर नमन"
7 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' posted a blog post

(ग़ज़ल )...कहाँ मेरी ज़रूरत है

1222 - 1222 - 1222 - 1222फ़क़त रिश्ते जताने को यहाँ मेरी ज़रूरत है अज़ीज़ों को सिवा इसके कहाँ मेरी…See More
14 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post जिसकी आदत है घाव देने की - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई तेजवीर जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
21 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post जिसकी आदत है घाव देने की - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई चेतन जी, गजल पर उपस्थिति, उत्साहवर्धन व सुझाव के लिए हार्दिक धन्यवाद । बदलाव का प्रयास करता…"
21 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post दूर तम में बैठकर वो रोशनी अच्छी लगी- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई तेजवीर जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद."
21 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-तुम्हारे प्यार के क़ाबिल
"बहुत बहुत शुक्रिया आदणीय अमीरुद्दीन जी...सादर"
23 hours ago
Sushil Sarna commented on vijay nikore's blog post यह भूला-बिसरा पत्र ...तुम्हारे लिए
"मेरे "प्यार", मेरे "प्राण-रत्न" मेरे बाद तुम बहुत दिन जीना रोना नहीं तब मेरे…"
23 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on Sushil Sarna's blog post तेरे मेरे दोहे ......
"हार्दिक बधाई आदरणीय सुशील सरना जी। बेहतरीन दोहे।"
yesterday

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service