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सालिक गणवीर
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अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on सालिक गणवीर's blog post अब तो इंसाफ भी करें साहिब.......ग़ज़ल सालिक गणवीर
"जनाब सालिक गणवीर जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है मुबारकबाद पेश करता हूँ। शे'र नं. 4 पर गुणीजनों से सहमत हूँ, मिसरा - 'इतना अफ़सोस है अगर 'फिर तो' में 'तुम को' कह कर देखें। सादर। "
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on सालिक गणवीर's blog post अब तो इंसाफ भी करें साहिब.......ग़ज़ल सालिक गणवीर
"आ. भाई सालिक गणवीर जी, सादर अभिवादन। गजल का प्रयास अच्छा हुआ है। हार्दिक बधाई।"
Thursday
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-137
"आदरणीया  Richa Yadav जी सादर नमस्कार ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिती और सराहना के लिए हार्दिक आभार व्यक्त करता हूँ।"
Nov 27
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-137
"आदरणीय भाई dandpani nahak  जीसादर नमस्कारग़ज़ल पर आपकी उपस्थिती और सराहना के लिए हार्दिक आभार व्यक्त करता हूँ।"
Nov 27
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-137
"आदरणीय भाई  लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी सादर नमस्कार ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिती और सराहना के लिए हार्दिक आभार व्यक्त करता हूँ।"
Nov 27
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-137
"आदरणीय  Dayaram Methani  जी सादर नमस्कार ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिती और सराहना के लिए हार्दिक आभार व्यक्त करता हूँ।"
Nov 27
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-137
"1121-2122-1121-2122 न वो आएँगे पता है कभी दूर इतनी चल केचले आ गए हैं सबसे ज़रा दूर हम निकल के (1) जो दिए हैं तूने ताने मेरा पेट भर गया हैकरूँ क्या मैं रोटियों के बता कौर ये निगल के (2) तेरी बज़्म-ए-नाज़ में हम न पँहुच सके हैं जानाँकटे पैर जिनके…"
Nov 26
सालिक गणवीर commented on Gurpreet Singh jammu's blog post ग़ज़ल - गुरप्रीत सिंह जम्मू
"भाई  Gurpreet Singh jammu  जी सादर नमस्कार बहुत उम्दः ग़ज़ल कही है आपने ,शैर दर शैर मुबारक़बाद क़ुबूल करें। कुछ टंकण त्रुटियाँ हैं ,ध्यान दें. यथा हूँ ,आँखों ,पँहुचे। जहाँ तक मैं जानता हूँ ग़ज़ल में कॉमा या प्रश्नवाचक चिन्हों का इस्तेमाल…"
Nov 22
सालिक गणवीर commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - मेरी ज़ीस्त की कड़ी धूप ने मुझे रख दिया है निचोड़ कर
"भाई Nilesh Shevgaonkar जी सादर नमस्कार बहुत उम्दः ग़ज़ल कही है आपने ,शैर दर शैर मुबारक़बाद क़ुबूल करें"
Nov 22
सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post अब तो इंसाफ भी करें साहिब.......ग़ज़ल सालिक गणवीर
"आदरणीया  Rachna दी सादर नमस्कार ग़ज़ल पर आपकी आमद और सराहना के लिए हार्दिक आभार. इस्लाह के लिए बहुत शुक्रिया"
Nov 18
सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post अब तो इंसाफ भी करें साहिब.......ग़ज़ल सालिक गणवीर
"आदरणीय  बृजेश कुमार 'ब्रज' जी सादर नमस्कार ग़ज़ल पर आपकी आमद और सराहना के लिए हार्दिक आभार. "
Nov 18
सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post अब तो इंसाफ भी करें साहिब.......ग़ज़ल सालिक गणवीर
"आदरणीय Sushil Sarna   जी सादर नमस्कार ग़ज़ल पर आपकी आमद और सराहना के लिए हार्दिक आभार. "
Nov 18
Rachna Bhatia commented on सालिक गणवीर's blog post अब तो इंसाफ भी करें साहिब.......ग़ज़ल सालिक गणवीर
"आदरणीय सालिक गणवीर जी बेहतरीन रदीफ़ के साथ आपने अच्छी ग़ज़ल कही। हार्दिक बधाई। 4 समझने में मुश्किल आ रही है। 5 में "अगर फिर तो" को आपको है तो में बदल सकते हैं। सादर।"
Nov 17
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on सालिक गणवीर's blog post अब तो इंसाफ भी करें साहिब.......ग़ज़ल सालिक गणवीर
"बढ़िया कहा आदरणीय सालिक जी...बधाई"
Nov 15
Sushil Sarna commented on सालिक गणवीर's blog post अब तो इंसाफ भी करें साहिब.......ग़ज़ल सालिक गणवीर
"वाह बहुत सुंदर गजल बनी है सर । हार्दिक बधाई"
Nov 14
सालिक गणवीर commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - हाँ में हाँ मिलाइये
"आदरणीय भाई Nilesh Shevgaonkar जी सादर नमस्कार बहुत उम्दा ग़ज़ल कही है आपने , बधाईयाँ स्वीकार करें। आपके इसी तन्ज़िया मिज़ाज़ का मैं कायल हूँ। भई वाह।"
Nov 14

Profile Information

Gender
Male
City State
Bhilai, Chhattisgarh
Native Place
Bhilai
Profession
Retired from SAIL,as a Senior Electrical engineer
About me
Reading,writing and photography were my hobbies and after retirement I am totally indulged to fulfill my dreams.

सालिक गणवीर's Blog

अब तो इंसाफ भी करें साहिब.......ग़ज़ल सालिक गणवीर

2122-1212-22/112

अब तो इंसाफ भी करें साहिब

हक़ मिरा मुझको दे भी दें साहिब (1)

ऊँचे पेड़ों ने फिर से की साजिश

लोग सब धूप में रहें साहिब (2)

आप सब क्यों उड़े हवाओं में

हम ज़मीं पर ही क्यों चलें साहिब (3)

काग़ज़ों पर लिखा तो पढ़ते हैं

पीठ पर भी कभी लिखें साहिब (4)

न ज़मीं है न आसमाँ अपना

ये बता दो कहाँ रहें साहिब (5)

इतना अफ़सोस है अगर फिर तो

शर्म से डूब कर मरें साहिब (6)

आप सुनते नहीं…

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Posted on November 13, 2021 at 9:54pm — 10 Comments

जाने क्या लोग कर गए होंगे.......( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

2122-1212-22/112

जाने क्या लोग कर गए होंगे

जी रहे हैं या मर गए होंगे (1)

वो भरी दोपहर गए होंगे

पाँव छालों से भर गए होंगे (2)

लड़कियाँ माँ की तर्ह सीधी हैं

लड़के तो बाप पर गए होंगे (3)

ख़ौफ़ होता है देख कर जिनको

आइना देख डर गए होंगे (4)

टेढ़े-मेढ़े जलेबी जैसे लोग

है ये मुमकिन सुधर गए होंगे (5)

दफ़्न माज़ी को जब किया होगा

याद के गड्ढे भर गए होंगे (6)

हमको जिन पर नहीं…

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Posted on October 24, 2021 at 10:00am — 8 Comments

हालत जो तेरी देखी है हैरान हूँ मैं भी....( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

221-1221-1221-122

हालत जो तेरी देखी है हैरान हूँ मैं भी

कोने में पड़ा घर के परेशान हूँ मैं भी (1)

गर आप सरल होंगे तो आसान हूँ मैं भी

ज़ालिम हैं अगर आप तो हैवान हूँ मैं भी (2)

ये सूनी दिवारें ही मुझे घूर रहीं हैं

खाली है मकाँ भी मिरा सुनसान हूँ मैं भी (3)

गर मिल भी गए हम भी तो आबाद न होंगे

उजड़ा है अगर तू भी तो वीरान हूँ मैं भी (4)

आएगा किसी दिन वो लगाएगा ठिकाने

कमरे में पड़ा फालतू सामान हूँ मैं भी…

Continue

Posted on September 16, 2021 at 8:30am — 5 Comments

बेवज़्ह मुझे रोने की आदत भी बहुत थी...( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

221-1221-1221-122

बेवज़्ह मुझे रोने की आदत भी बहुत थी

पर मुझको रुलाने में सियासत भी बहुत थी (1)

माज़ी को भुला कर मियाँ अच्छा किया मैंने

रखने में उसे याद अज़ीयत भी बहुत थी (2)

मैंने भी बुझा दी थीं वो जलती हुई शम'एँ

कमरे में हवाओं की शरारत भी बहुत थी (3)

है मुझसे अदावत उन्हें अब हद से ज़ियादा

था और ज़माना वो महब्बत भी बहुत थी (4)

ज़ालिम की शिकायत भी करें तो करें किससे

हाकिम की उसी पर ही इनायत भी…

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Posted on August 16, 2021 at 8:37pm — 15 Comments

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