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सालिक गणवीर
  • Male
  • Chhattisgarh
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सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-148
"आदरणीय  Zaif   जीसादर अभिवादनतरही मिसरे पर उम्दः ग़ज़ल कही आपने।  बधाई स्वीकार करें।  ख़ुशी की जग़ह आज ग़म देखते हैं ,सादर सुझाव"
Oct 29
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-148
"आदरणीय  Ashok Kumar Raktale जीसादर अभिवादनतरही मिसरे पर उम्दः ग़ज़ल कही आपने।  बधाई स्वीकार करें। उस्ताद जी की इस्लाह क़ाबिल - ए - ग़ौर है।"
Oct 29
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-148
"आदरणीय  Tasdiq Ahmed Khan जीसादर अभिवादनतरही मिसरे पर उम्दः ग़ज़ल कही आपने।  बधाई स्वीकार करें।"
Oct 29
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-148
"आदरणीय  Ashok Kumar Raktale जीसादर अभिवादनग़ज़ल पर आपकी उपस्थिती और सराहना के लिए हार्दिक आभार।"
Oct 29
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-148
"आदरणीय भाई  रवि भसीन 'शाहिद' जीसादर अभिवादनग़ज़ल पर आपकी उपस्थिती और सराहना के लिए हार्दिक आभार।"
Oct 29
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-148
"आदरणीय भाई  dandpani nahak जीसादर अभिवादनग़ज़ल पर आपकी उपस्थिती और सराहना के लिए हार्दिक आभार।"
Oct 29
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-148
"आदरणीय भाई  Mahendra Kumar  जीसादर अभिवादनग़ज़ल पर आपकी उपस्थिती और सराहना के लिए हार्दिक आभार।"
Oct 29
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-148
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'  जीसादर अभिवादनग़ज़ल पर आपकी उपस्थिती और सराहना के लिए हार्दिक आभार।"
Oct 29
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-148
"आदरणीय  अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी  जीसादर अभिवादनग़ज़ल पर आपकी उपस्थिती और सराहना के लिए हार्दिक आभार।"
Oct 29
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-148
"आदरणीया  Richa Yadav जी सादर अभिवादन ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिती और सराहना के लिए हार्दिक आभार।"
Oct 28
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-148
"आदरणीय भाई  नाथ सोनांचली जीसादर अभिवादनग़ज़ल पर आपकी उपस्थिती और सराहना के लिए हार्दिक आभार।"
Oct 28
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-148
"आदरणीय  Samar kabeer साहिब सादर अभिवादन ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिती और सराहना के लिए हार्दिक आभार। आवश्यक सुधार कर दिया उस्ताद जी। सलामत रहें।"
Oct 28
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-148
"आदरणीय भाई DINESH KUMAR VISHWAKARMA  जी सादर अभिवादन ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिती और सराहना के लिए हार्दिक आभार।"
Oct 28
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-148
"आदरणीय भाई  नाथ सोनांचली जी सादर अभिवादन तरही मिसरे पर उम्दः ग़ज़ल कही आपने। शैर दर शैर बधाई स्वीकार करें।"
Oct 28
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-148
"आदरणीया  Richa Yadav जी सादर अभिवादन तरही मिसरे पर उम्दः ग़ज़ल कही आपने। बधाई स्वीकार करें।"
Oct 28
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-148
"आदरणीय भाई  Sanjay Shukla  जी सादर अभिवादन तरही मिसरे पर उम्दः ग़ज़ल कही आपने। शैर दर शैर बधाई स्वीकार करें।"
Oct 28

Profile Information

Gender
Male
City State
Bhilai, Chhattisgarh
Native Place
Bhilai
Profession
Retired from SAIL,as a Senior Electrical engineer
About me
Reading,writing and photography were my hobbies and after retirement I am totally indulged to fulfill my dreams.

सालिक गणवीर's Blog

झूठ बोले हैं न जाने कितने.......ग़ज़ल- सालिक गणवीर

2122-1122-22/112

झूठ बोले हैं न जाने कितने

उसको आते हैं बहाने कितने (1)

मैं किसी से भी तो नाराज नहीं

आ गए लोग मनाने कितने (2)

अब भी लोगों के नई दुनिया में

हैं ख़यालात पुराने कितने (3)

एक भी लफ़्ज मुझे याद नहीं

याद आते हैं वो गाने कितने (4)

घर जला कोई बुझाने न गया

आ गए आग लगाने कितने (5)

साथ आया न निभाने कोई

रस्म आएंँगे निभाने कितने (6)

अब कहीं पर तू ठहर जा…

Continue

Posted on February 3, 2022 at 9:33am — 4 Comments

यही है शिकायत यही तो गिला है....ग़ज़ल ( सालिक गणवीर)

122-122-122-122

यही है शिकायत यही तो गिला है

चराग़ों तले क्यों अँधेरा हुआ है (1)

लुटाया है सब कुछ कहा जा रहा है

मैं ये सोचता हूँ मुझे क्या मिला है (2)

कभी सामने जो अकड़ता बहुत था

वही उसके क़दमों के नीचे पड़ा है (3)

न आगे कोई है न है कोई पीछे

बयाँ दे रहा बीच सबके खड़ा है (4)

बड़ी मुश्किलों से कटी ज़िंदगी ये

न जाने मुक़द्दर में क्या क्या लिखा है (5)

ख़ुशी के दो पल हाथ आते नहीं पर

ये ग़म है कि…

Continue

Posted on December 24, 2021 at 11:00pm — 4 Comments

अब तो इंसाफ भी करें साहिब.......ग़ज़ल सालिक गणवीर

2122-1212-22/112

अब तो इंसाफ भी करें साहिब

हक़ मिरा मुझको दे भी दें साहिब (1)

ऊँचे पेड़ों ने फिर से की साजिश

लोग सब धूप में रहें साहिब (2)

आप सब क्यों उड़े हवाओं में

हम ज़मीं पर ही क्यों चलें साहिब (3)

काग़ज़ों पर लिखा तो पढ़ते हैं

पीठ पर भी कभी लिखें साहिब (4)

न ज़मीं है न आसमाँ अपना

ये बता दो कहाँ रहें साहिब (5)

इतना अफ़सोस है अगर फिर तो

शर्म से डूब कर मरें साहिब (6)

आप सुनते नहीं…

Continue

Posted on November 13, 2021 at 9:54pm — 10 Comments

जाने क्या लोग कर गए होंगे.......( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

2122-1212-22/112

जाने क्या लोग कर गए होंगे

जी रहे हैं या मर गए होंगे (1)

वो भरी दोपहर गए होंगे

पाँव छालों से भर गए होंगे (2)

लड़कियाँ माँ की तर्ह सीधी हैं

लड़के तो बाप पर गए होंगे (3)

ख़ौफ़ होता है देख कर जिनको

आइना देख डर गए होंगे (4)

टेढ़े-मेढ़े जलेबी जैसे लोग

है ये मुमकिन सुधर गए होंगे (5)

दफ़्न माज़ी को जब किया होगा

याद के गड्ढे भर गए होंगे (6)

हमको जिन पर नहीं…

Continue

Posted on October 24, 2021 at 10:00am — 8 Comments

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