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अमीरुद्दीन 'अमीर'
  • Male
  • बाग़पत, उत्तर प्रदेश.
  • India
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अमीरुद्दीन 'अमीर' posted a blog post

(ग़ज़ल )...कहाँ मेरी ज़रूरत है

1222 - 1222 - 1222 - 1222फ़क़त रिश्ते जताने को यहाँ मेरी ज़रूरत है अज़ीज़ों को सिवा इसके कहाँ मेरी ज़रूरत है मुझे ग़म देने वाले आज मेरी राह देखेंगे मुझे मालूम है उन को जहाँ मेरी ज़रूरत है मेरे अपने मेरे बनकर दग़ा देते रहे मुझको सभी को ग़ैर से रग़्बत कहाँ मेरी ज़रूरत है इसी उम्मीद बैठे हैं वो मेरी सादा-लौही पर चला आता हूँ मैं अक्सर जहाँ मेरी ज़रूरत हैमुझे ही ज़ेर करते हैं मुझी से लौ लगाते फिर वो जब घबरा के कहते हैं कि हाँ मेरी ज़रूरत है ज़रूरत कब रही मेरी तुम्हें ख़ुशियों के मौक़े पर मगर.. रखने…See More
14 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post (ग़ज़ल )...कहाँ मेरी ज़रूरत है
"मुहतरम सुशील सरना जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद सुख़न नवाज़ी और हौसला अफ़ज़ाई का तह-ए-दिल से शुक्रिया। सादर।"
yesterday
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post (ग़ज़ल )...कहाँ मेरी ज़रूरत है
"मुहतरम तेजवीर सिंह जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद सुख़न नवाज़ी और हौसला अफ़ज़ाई का तह-ए-दिल से शुक्रिया। सादर।"
yesterday
Sushil Sarna commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post (ग़ज़ल )...कहाँ मेरी ज़रूरत है
"वाह आदरणीय खूबसूरत अश'आर खूबसूरत अन्दाज की शानदार गजल । दिल से मुबारक कबूल करें सर ।"
yesterday
TEJ VEER SINGH commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post (ग़ज़ल )...कहाँ मेरी ज़रूरत है
"हार्दिक बधाई आदरणीय अमीरुददीन 'अमीर' साहब जी। लाजवाब ग़ज़ल।"
yesterday
अमीरुद्दीन 'अमीर' posted a blog post

(ग़ज़ल )...कहाँ मेरी ज़रूरत है

1222 - 1222 - 1222 - 1222फ़क़त रिश्ते जताने को यहाँ मेरी ज़रूरत है अज़ीज़ों को सिवा इसके कहाँ मेरी ज़रूरत है मुझे ग़म देने वाले आज मेरी राह देखेंगे मुझे मालूम है उन को जहाँ मेरी ज़रूरत है मेरे अपने मेरे बनकर दग़ा देते रहे मुझको सभी को ग़ैर से रग़्बत कहाँ मेरी ज़रूरत है इसी उम्मीद बैठे हैं वो मेरी सादा-लौही पर चला आता हूँ मैं अक्सर जहाँ मेरी ज़रूरत हैमुझे ही ज़ेर करते हैं मुझी से लौ लगाते फिर वो जब घबरा के कहते हैं कि हाँ मेरी ज़रूरत है ज़रूरत कब रही मेरी तुम्हें ख़ुशियों के मौक़े पर मगर.. रखने…See More
Saturday
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on TEJ VEER SINGH's blog post रहीम काका - लघुकथा -
"जनाब तेजवीर सिंह जी आदाब, अच्छी प्रेरणादायी लघुकथा हुई है, बधाई स्वीकार करें। सादर। "
Saturday
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post दूर तम में बैठकर वो रोशनी अच्छी लगी- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"जनाब लक्ष्मण धामी भाई मुसाफ़िर जी आदाब अच्छी ग़ज़ल हुई है मुबारकबाद पेश करता हूँ। सादर।"
Saturday
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - हाँ में हाँ मिलाइये
"कोई बात नहीं जनाब मैं समझ सकता हूँ। its ok. "
Saturday
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Gurpreet Singh jammu's blog post ग़ज़ल - गुरप्रीत सिंह जम्मू
"जनाब गुरप्रीत सिंह जम्मू साहिब आदाब, मज़ाहिया अंदाज़ की उर्दू- इंग्लिश क़वाफ़ी के साथ अच्छी ग़ज़ल कही है आपने मुबारकबाद पेश करता हूँ। सादर।"
Saturday
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Veena Gupta's blog post आज का सच
"मुहतरमा वीणा गुप्ता जी आदाब, यथार्थता पर आधारित अच्छी रचना हुई है बधाई स्वीकार करें। सादर। "
Saturday
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Sushil Sarna's blog post तेरे मेरे दोहे ......
"जनाब सुशील सरना जी आदाब, मुझे दोहे अचछे लगे, बधाई स्वीकार करें। सादर। "
Saturday
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post क्यों कर हसीन ख्वाब की बस्ती मिटा दूँ मैं- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"जनाब लक्ष्मण धामी भाई मुसाफ़िर जी आदाब अच्छी ग़ज़ल हुई है बधाई स्वीकार करें।  सादर। "
Saturday
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हुई कागजों में पूरी यूँ तो नीर की जरूरत - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"जनाब लक्ष्मण धामी भाई मुसाफ़िर जी आदाब अच्छी ग़ज़ल हुई है बधाई स्वीकार करें।  सादर। "
Saturday
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-तुम्हारे प्यार के क़ाबिल
"जनाब बृजेश कुमार ब्रज जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है मुबारकबाद पेश करता हूँ। मुद्दआ पर निलेश जी से सहमत हूँ। //मेरी पिछली ग़ज़ल में मैंने एक शब्द लिया था मियाद ..जो बहुत ही आम फ़हम व प्रचलित शब्द है लेकिन समर सर ने बताया कि उसे मीआद पढ़ा जाता है.. इस पर उन…"
Saturday
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - मेरी ज़ीस्त की कड़ी धूप ने मुझे रख दिया है निचोड़ कर
"जनाब निलेश शेवगाँवकर जी आदाब, मुश्किल ज़मीन में बहुत उम्दा ग़ज़ल कही है आपने, मुबारकबाद पेश करता हूँ। हासिल-ए-ग़ज़ल शे'र -  "मेरे दिल में अक्स उन्हीं का था उन्हें ऐतबार मगर न था                …"
Saturday

Profile Information

Gender
Male
City State
BAGHPAT , UTTAR PRADESH.
Native Place
BARAUT
Profession
Private job
About me
उर्दु शायरी हिन्दी में लिखने और पढ़ने का शौक़ है॥

अमीरुद्दीन 'अमीर''s Blog

(ग़ज़ल )...कहाँ मेरी ज़रूरत है

1222 - 1222 - 1222 - 1222

फ़क़त रिश्ते जताने को यहाँ मेरी ज़रूरत है 

अज़ीज़ों को सिवा इसके कहाँ मेरी ज़रूरत है 

मुझे ग़म देने वाले आज मेरी राह देखेंगे 

मुझे मालूम है उन को जहाँ मेरी ज़रूरत है 

मेरे अपने मेरे बनकर दग़ा देते रहे मुझको 

सभी को ग़ैर से रग़्बत कहाँ मेरी ज़रूरत है 

इसी उम्मीद बैठे हैं वो मेरी सादा-लौही पर 

चला आता हूँ मैं अक्सर जहाँ मेरी ज़रूरत है

मुझे ही ज़ेर करते हैं मुझी से लौ…

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Posted on December 5, 2021 at 11:21pm — 4 Comments

ग़ज़ल (ग़ज़ल में ऐब रखता हूँ...)

1222 - 1222 - 1222 - 1222

ग़ज़ल में ऐब रखता हूँ  कि वो इस्लाह कर जाते 

फ़क़त इक दाद देने  कम ही आते हैं गुज़र जाते 

न हो उनकी नज़र तो बाँध भी पाता नहीं मिसरा 

ग़ज़ल हो नज़्म हो अशआर मेरे सब बिखर जाते

हुई  मुद्दत  नहीं  मैं भी  'मुरस्सा' नज़्म कह पाया 

ग़ज़ल पे सरसरी नज़रों से ही वो भी गुज़र जाते

अरूज़ी  हैं  अदब-दाँ  वो  हमें  बारीक-बीनी  से 

न देते इल्म की दौलत  तो कैसे हम निखर जाते

मिले…

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Posted on October 14, 2021 at 6:10pm — 17 Comments

ग़ज़ल (दिलों से ख़राशें हटाने चला हूँ )

122 - 122 - 122 - 122

(भुजंगप्रयात छंद नियम एवं मात्रा भार पर आधारित ग़ज़ल का प्रयास) 

दिलों  में उमीदें  जगाने  चला हूँ 

बुझे दीपकों को जलाने चला हूँ 

कि सारा जहाँ देश होगा हमारा 

हदों के निशाँ मैं मिटाने चला हूँ 

हवा ही मुझे वो  पता  दे गयी है 

जहाँ आशियाना बसाने चला हूँ

चुभा ख़ार सा था निगाहों में तेरी 

तुझी से निगाहें  मिलाने चला हूँ

ख़तावार  हूँ  मैं  सभी दोष …

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Posted on October 14, 2021 at 3:13pm — 38 Comments

ग़ज़ल (हुस्न तो  मिट जाएगा...)

2122 -  2122 -  2122 - 212

 

हुस्न तो  मिट जाएगा  फिर भी अदा रह जाएगी 

ढल  चलेगी  ये  जवानी  पर  वफ़ा  रह  जाएगी 

साथ मेरे  तुम हो जब  तक प्यार की  सौग़ात है 

बिन तुम्हारे  ज़िन्दगी ये  इक सज़ा  रह  जाएगी 

जब तलक  माँ-बाप राज़ी  बस दुआ मक़्बूल है 

दिल दुखा तो फ़र्श पर  ही  हर दुआ रह जाएगी 

ईद का दिन है  तेरी  रहमत भी  है अब जोश में 

मेरे जैसों की भी झोली  ख़ाली क्या रह जाएगी

कर भलाई  के भी…

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Posted on September 12, 2021 at 10:38pm — 4 Comments

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At 6:21pm on March 9, 2020, Samar kabeer said…

जनाब अमीरुद्दीन साहिब,ओबीओ पर आपका स्वागत है,मैं हर ख़िदमत के लिए हाज़िर हूँ ।

 
 
 

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