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अमीरुद्दीन 'अमीर'
  • Male
  • बाग़पत, उत्तर प्रदेश.
  • India
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अमीरुद्दीन 'अमीर''s Page

Latest Activity

Nilesh Shevgaonkar commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (दिलों से ख़राशें हटाने चला हूँ )
"आभार आ. अमीरुदीन अमीर साहब.सहीह हो सहीह कहना मेरी आदत है .सादर धन्यवाद "
4 hours ago
Rachna Bhatia and अमीरुद्दीन 'अमीर' are now friends
14 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' left a comment for Chanchal Mishra
"मुहतरमा चंचल मिश्रा जी आदाब, ओ बी ओ के मंच पर आप का स्वागत है।  सादर। "
18 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on सालिक गणवीर's blog post जाने क्या लोग कर गए होंगे.......( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आदरणीय सालिक गणवीर जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है बधाई स्वीकार करें। मतले पर जनाब चेतन प्रकाश जी से सहमत हूँ, यही बात मतला-ए-सानी पर भी लागू होती है। शेष शुभ शुभ।  सादर।"
yesterday
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Anjuman Mansury 'Arzoo''s blog post ग़ज़ल- मसीहा बन के जो आसानियाँ बनाते हैं
"मुहतरमा अंजुमन 'आरज़ू' साहिबा आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है बधाई स्वीकार करें। 'मसीहा बन के जो आसानियाँ बनाते हैं  लगा के आग वही बस्तियाँ बनाते हैं'     मतले के मिसरों में रब्त का अभाव है, सानी मिसरे में…"
yesterday
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (दिलों से ख़राशें हटाने चला हूँ )
"ग़ज़ल और मतले पर हुई चर्चा में भाग लेने वाले सभी गुणीजनों का आभार व्यक्त करते हुए, ख़ासतौर पर आदरणीय निलेश शेवगाँवकर जी का बेहद ममनून और मश्कूर हूँ कि उन्होंने बहुत सारे मुस्तनद शाइरों के मक़बूल और मा'रूफ़ कलामों की मिसालों के ज़रिए से ख़ाकसार…"
Thursday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (दिलों से ख़राशें हटाने चला हूँ )
"//यहाँ पर मैं उन के आलेख से सहमत नहीं हूँ. उनके अनुसार रहे और कहे आदि में इता दोष होगा-यह कथ अपने आप में दोषपूर्ण है . यह ए मात्रिक काफिया है. मात्रा से पहले का वर्ण भिन्न होने से कोई इता दोष हो ही नहीं सकता// आदरणीय, जैसा कि मैं निवेदन कर चुका…"
Thursday
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Anita Maurya's blog post एक साँचे में ढाल रक्खा है
"मुहतरमा अनिता मौर्य जी आदाब, अच्छे अशआर कहे आपने, दाद क़ुबूल फ़रमाएं। समर कबीर साहिब से सहमत हूँ। लेकिन आप तो ओ बी ओ से वर्ष 2010 से जुड़ी हैं। कृपया नियमित रूप से मंच पर आईये। सादर।"
Oct 20
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Anjuman Mansury 'Arzoo''s blog post ग़ज़ल - फिर ख़ुद को अपने ही अंदर दफ़्न किया
"//अजदाद आदत के रूप में भी हम में रहते हैं// ये तो बच्चे भी जानते हैं, आप मुझे ये समझाइये कि किसी की मौत वाक़ै होने के बाद उस में किस तरह ख़ुद की या उसके अजदाद की आदत रहेगी ? //और फिर ग़ज़ल में जो कहा जाए हमेशा उसके सीधे म'आनी तो नहीं होते…"
Oct 20
Nilesh Shevgaonkar commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (दिलों से ख़राशें हटाने चला हूँ )
"आ. सौरभ सर श्री पंकज सुबीर के जिस आलेख का हवाला आपने दिया है उसका स्क्रीन शॉट यहाँ सलग्न है . यहाँ पर मैं उन के आलेख से सहमत नहीं हूँ. उनके अनुसार रहे और कहे आदि में इता दोष होगा-यह कथ अपने आप में दोषपूर्ण है . यह ए मात्रिक काफिया है. मात्रा से…"
Oct 20
Nilesh Shevgaonkar commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (दिलों से ख़राशें हटाने चला हूँ )
"आ. सौरभ सर,चर्चा में कहीं श्री पंकज सुबीर साहब का ज़िक्र पढ़ा था.. उन्हीं के ऑनलाइन आलेख का स्क्रीन शॉट साझा कर रहा हूँ ..योजित काफिया बचाऊं और सुनाऊं पर गौर करें.. इससे आप के मन का संशय दूर होगा ..आलेख 26 फरवरी 2008 का है और हिन्द युग्म पर उपलब्ध…"
Oct 20
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Anjuman Mansury 'Arzoo''s blog post ग़ज़ल - फिर ख़ुद को अपने ही अंदर दफ़्न किया
"मुहतरमा अंजुमन आरज़ू साहिबा आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है बधाई स्वीकार करें I 'मुझमें ज़िंदा हैं मेरे अजदाद सभी   ... मरने के बाद भी ? (देव या हमज़ाद की शक्ल में ?)  :-))  मौत सुनो तुमने बस पैकर दफ़्न…"
Oct 19
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Anjuman Mansury 'Arzoo''s blog post ग़ज़ल - इक अधूरी 'आरज़ू' को उम्र भर रहने दिया
"मुहतरमा आरज़ू अंजुमन साहिबा आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है बधाई स्वीकार करें। मतले के शिल्प में तकनीकी गड़बड़ है। 'ख़ुद को उनकी बेरुख़ी से बे- ख़बर रहने दिया  ...कैसे ? आप तो जान रहे हैं कि वो ख़फ़ा हैं! तो आप बेख़बर कैसे हुए? अगर आप कहते…"
Oct 19
Samar kabeer commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (दिलों से ख़राशें हटाने चला हूँ )
"//चर्चा समाप्त// जनाब सौरभ पाण्डेय जी, क्या ये आदेश है?  मेरी समझ में नहीं आ रहा है कि आप कैसी चर्चा कर रहे हैं, जनाब अमीरुद्दीन साहिब ने आपसे जो प्रश्न किये हैं उनके उत्तर देना भी आपकी ज़िम्मेदारी में शामिल है, उन्हें तो आपने नज़र अंदाज़ ही कर…"
Oct 18

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (दिलों से ख़राशें हटाने चला हूँ )
"लिखने और केवल लिखने मात्र को परिचर्चा का अंग नहीं कह सकते. पढ़ना और पढ़े को गुनना भी उतना ही जरूरी हिस्सा है. मेरी टिप्पणियों में सारी बातें लिखी हुई हैं. उन पंक्तियों को ठहर कर पढ़ा जाय तो अनावश्यक बहसबाजी से इतर तार्किक समझ-बूझ के बिन्दु प्रश्रय…"
Oct 18
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (ग़ज़ल में ऐब रखता हूँ...)
"जनाब बृजेश कुमार ब्रज जी आदाब, आदरणीय निलेश जी की टिप्पणी ग़ज़ल पर आई थी, जिस पर मेरी प्रतिक्रिया भी आप देख सकते हैं लेकिन शायद किसी तकनीकी ख़राबी के कारण टिप्पणी हट गयी है। उनकी टिप्पणी का अंश मेरी प्रतिक्रिया में //दिक्कत यह है कि हिन्दी वाले…"
Oct 18

Profile Information

Gender
Male
City State
BAGHPAT , UTTAR PRADESH.
Native Place
BARAUT
Profession
Private job
About me
उर्दु शायरी हिन्दी में लिखने और पढ़ने का शौक़ है॥

अमीरुद्दीन 'अमीर''s Blog

ग़ज़ल (ग़ज़ल में ऐब रखता हूँ...)

1222 - 1222 - 1222 - 1222

ग़ज़ल में ऐब रखता हूँ  कि वो इस्लाह कर जाते 

फ़क़त इक दाद देने  कम ही आते हैं गुज़र जाते 

न हो उनकी नज़र तो बाँध भी पाता नहीं मिसरा 

ग़ज़ल हो नज़्म हो अशआर मेरे सब बिखर जाते

हुई  मुद्दत  नहीं  मैं भी  'मुरस्सा' नज़्म कह पाया 

ग़ज़ल पे सरसरी नज़रों से ही वो भी गुज़र जाते

अरूज़ी  हैं  अदब-दाँ  वो  हमें  बारीक-बीनी  से 

न देते इल्म की दौलत  तो कैसे हम निखर जाते

मिले…

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Posted on October 14, 2021 at 6:10pm — 17 Comments

ग़ज़ल (दिलों से ख़राशें हटाने चला हूँ )

122 - 122 - 122 - 122

(भुजंगप्रयात छंद नियम एवं मात्रा भार पर आधारित ग़ज़ल का प्रयास) 

दिलों  में उमीदें  जगाने  चला हूँ 

बुझे दीपकों को जलाने चला हूँ 

कि सारा जहाँ देश होगा हमारा 

हदों के निशाँ मैं मिटाने चला हूँ 

हवा ही मुझे वो  पता  दे गयी है 

जहाँ आशियाना बसाने चला हूँ

चुभा ख़ार सा था निगाहों में तेरी 

तुझी से निगाहें  मिलाने चला हूँ

ख़तावार  हूँ  मैं  सभी दोष …

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Posted on October 14, 2021 at 3:13pm — 38 Comments

ग़ज़ल (हुस्न तो  मिट जाएगा...)

2122 -  2122 -  2122 - 212

 

हुस्न तो  मिट जाएगा  फिर भी अदा रह जाएगी 

ढल  चलेगी  ये  जवानी  पर  वफ़ा  रह  जाएगी 

साथ मेरे  तुम हो जब  तक प्यार की  सौग़ात है 

बिन तुम्हारे  ज़िन्दगी ये  इक सज़ा  रह  जाएगी 

जब तलक  माँ-बाप राज़ी  बस दुआ मक़्बूल है 

दिल दुखा तो फ़र्श पर  ही  हर दुआ रह जाएगी 

ईद का दिन है  तेरी  रहमत भी  है अब जोश में 

मेरे जैसों की भी झोली  ख़ाली क्या रह जाएगी

कर भलाई  के भी…

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Posted on September 12, 2021 at 10:38pm — 4 Comments

ग़ज़ल (मेरी माँ)

2122 - 2122 



तू  शफ़ीक़-ओ-मह्रबाँ  है

तुझसा माँ  कोई कहाँ  है



तेरे आँचल  का  ये साया 

मुझको जन्नत का गुमाँ है



तेरा  दामन  मेरी  दुनिया 

और क़दम सारा जहाँ है



रंज हो या  हो ख़ुशी बस

तू सदा  ही ख़ुश-बयाँ  है



बिन  तेरे  ये  ज़िन्दगी तो

ख़ाक है या फिर धुआँ है    



तेरे  दामन  के ये  रौज़न    

माँ  ये  मेरी कहकशाँ …

Continue

Posted on September 12, 2021 at 2:35pm — 4 Comments

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At 6:21pm on March 9, 2020, Samar kabeer said…

जनाब अमीरुद्दीन साहिब,ओबीओ पर आपका स्वागत है,मैं हर ख़िदमत के लिए हाज़िर हूँ ।

 
 
 

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"आ.आरज़ू जी ,ग़ज़ल के गुणदोषों पर पहले ही विवेचन हो चुका है अत: उस में नई बात कहना ठीक नहीं होगा.ग़ज़ल के…"
3 hours ago
Nilesh Shevgaonkar commented on सालिक गणवीर's blog post जाने क्या लोग कर गए होंगे.......( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आ. सालिक जी,अच्छी ग़ज़ल हुई है. मतला काम मांग रहा है .ग़ज़ल के लिए बधाई "
4 hours ago
Nilesh Shevgaonkar commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (दिलों से ख़राशें हटाने चला हूँ )
"आभार आ. अमीरुदीन अमीर साहब.सहीह हो सहीह कहना मेरी आदत है .सादर धन्यवाद "
4 hours ago
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - तमन्नाओं को फिर रोका गया है
"धन्यवाद आ. लक्ष्मण जी "
4 hours ago
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - तमन्नाओं को फिर रोका गया है
"धन्यवाद आ. सालिक जी "
4 hours ago
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - तमन्नाओं को फिर रोका गया है
"धन्यवाद आ. बृजेश जी "
4 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - तमन्नाओं को फिर रोका गया है
"आ. भाई नीलेश जी, सादर अभिवादन। बेहतरीन गज हुई है । हार्दिक बधाई।"
4 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Anjuman Mansury 'Arzoo''s blog post ग़ज़ल - मिश्कात अपने दिल को बनाने चली हूँ मैं
"आ. अंजुमन जी, अभिवादन। गजल का अच्छा प्रयास हुआ है। हार्दिक बधाई।"
4 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post मुक्तक (आधार छंद - रोला )
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। सुंदर रचना हुई है । हार्दिक बधाई। "
4 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Md. Anis arman's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई अनीस जी, सादर अभिवादन । बहुत खूब गजल हुई है। हार्दिक बधाई।"
4 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कैसे कैसे लोग यहाँ -(गजल)-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई नाथ सोनांचली जी, सादर अभिवादन। गजल पर उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
12 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कैसे कैसे लोग यहाँ -(गजल)-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन। गजल पर आपकी उपस्थिति और स्नेहसे मन हर्षित हुआ। प्रशंसा व सर्वोत्तम…"
13 hours ago

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