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Aazi Tamaam
  • Male
  • Bareilly, UP
  • India
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Aazi Tamaam commented on Samar kabeer's blog post ओबीओ की बारहवीं सालगिरह का तुहफ़ा
"वाह वाह आ गुरू जी बेहद सुन्दर रचना ओ बी ओ के लिए नायाब तुह्फ़ा बधाई स्वीकार करें आदरणीय"
Apr 12
Aazi Tamaam posted a photo
Mar 16
Aazi Tamaam commented on Aazi Tamaam's blog post ग़ज़ल: इक ऐसे ग़म से आज मुलाक़ात हो गई
"सहृदय शुक्रिया आ हौसला अफ़ज़ाई का सादर"
Mar 5
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Aazi Tamaam's blog post ग़ज़ल: इक ऐसे ग़म से आज मुलाक़ात हो गई
"आ. भाई आजी तमाम जी , तरही मिसरे की जमीन पर गजल का अच्छा प्रयास हुआ है । हार्दिक बधाई।"
Mar 3
Aazi Tamaam posted blog posts
Feb 27
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-140
"आ गुरु जी मुआफ़ी चाहता ग़ज़ल सुधार न पाने के लिये लेकिन मैंने जो भी आज आपकी नज़र ए क़रम व इस्लाह से सीखा है उस से दूसरी तरहि ग़ज़ल लिखी है जिसे मैं obo पर upload कर दूँगा आज सादर"
Feb 26
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-140
"सहृदय शुक्रिया आ"
Feb 26
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-140
"सहृदय शुक्रिया आ"
Feb 26
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-140
"सहृदय शुक्रिया आ"
Feb 26
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-140
"सहृदय शुक्रिया आ"
Feb 26
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-140
"सहृदय शुक्रिया आ"
Feb 26
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-140
"वाह आ बेहद खूबसूरत ग़ज़ल कही लेकिन मतले का उला स्पष्ट नहीं हुआ तीसरा शे र भी स्पष्ट नहीं हो पाया बाकी गुणीजन की इस्लाह सर आँखों पर"
Feb 26
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-140
"जी आ ग़ज़ल का उम्दा प्रयास रहा"
Feb 26
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-140
"वाह आ बहुत खूबसूरत ग़ज़ल हुई बधाई स्वीकार करें आ गुरु जी की इस्लाहा l से और निखर जायेगी"
Feb 26
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-140
"जी आ सालिक जी ग़ज़ल का उम्दा प्रयास रहा आ गुरु जी की इस्लाह काबिल ए गौर है"
Feb 26
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-140
"वाह आ बेहद उम्दा ग़ज़ल कही आ गुरु जी की इस्लाह से और निखर जायेगी"
Feb 26

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Gender
Male
City State
Uttar Pradesh
Native Place
CHANDAUSI
Profession
Poet, Lawer, Engineer
About me
Poetic Nature

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Aazi Tamaam's Blog

ग़ज़ल: इक ऐसे ग़म से आज मुलाक़ात हो गई

२२१ २१२१ १२२१ २१२

पाकर जिसे हयात हवालात हो गई

इक ऐसे ग़म से आज मुलाक़ात हो गई

कैसे बताएँ आपके बिन कुछ नहीं हैं हम

कैसे बताएँ आपको क्या बात हो गई

अंजान थी जो आँख मिरी जान अश्क़ से

बाद आपके यूँ रोई की बरसात हो गई

इक पल में खुशनुमा हुई इक पल में रहनुमा

फ़िर एक पल में दर्द की सौग़ात हो गई

कैसी है दास्ताँ ये मिरी जान ज़िंदगी

रौशन हुई कहीं तो कहीं रात हो गई

मौलिक व…

Continue

Posted on February 26, 2022 at 11:30pm — 2 Comments

ग़ज़ल: हर इक दिन इन फ़ज़ाओं में नई अल्बम लगाता है

1222 1222 1222 1222

हर इक दिन इन फ़ज़ाओं में नई अल्बम लगाता है

कोई तो है हरी सी घास पर शबनम लगाता है

कहीं सुनता नहीं महफ़िल में भी अब दर्द ए दिल कोई

किसे आवाज वीराने में तू हमदम लगाता है

अज़ब है वाक़िया या रब अज़ब साकी मिला दिल को

नमक ज़ख़्मों पे दिल के किस क़दर पैहम लगाता है

धुआँ होकर निकलती हैं ये साँसें दिल के अंदर से

किसी की याद में दिल दम व दम फिर दम लगाता…

Continue

Posted on January 15, 2022 at 3:00pm

ग़ज़ल: आख़िरश वो जिसकी खातिर सर गया

2122 2122 212

आख़िरश वो जिसकी ख़ातिर सर गया

इश्क़ था सो बे वफ़ाई कर गया

आरज़ू-ए-इश्क़ दिल में रह गई

जुस्तजू-ए-इश्क़ से दिल भर गया

दिल की दुनिया दर्द का बाजार है

दर-ब-दर…

Continue

Posted on January 13, 2022 at 12:30pm — 6 Comments

ग़ज़ल: किसी कँवल का हंसीं ख़ाब देखने के लिये

1212 1122 1212 112

यूँ उम्र भर रहे बेताब देखने के लिये

किसी कँवल का हंसीं ख़ाब देखने के लिये

कहाँ थे देखो सनम हम कहाँ चले आये

वो गुलबदन के वो महताब देखने के लिये

न जाने कब से हक़ीक़त की थी तलब हमको

न जाने कब से थे बेताब देखने के लिये

छुआ तो जाना हर इक ख़्वाब था धुआँ यारो

बचा न कुछ भी याँ नायाब देखने के लिये

क़रीब जा के हर एक चीज खोयी है हमने

लुटे हैं ज़िंदगी शादाब देखने के…

Continue

Posted on October 10, 2021 at 12:00pm — 8 Comments

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At 1:08pm on January 16, 2021, लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' said…

आ. भाई आज़ी तमाम जी, सादर अभिवादन । मेरी गजलें आपको अच्छी लगीं यह हर्ष का विषय है । आपके इस स्नेह के लिए हार्दिक धन्यवाद।

मंच पर अपनी रचनाओं का आनन्द लेने का अवसर प्रदान करें और अन्य रचनाकारों का भी अपनी प्रतिक्रिया से उत्साहवर्धन करते रहिए ।

At 8:15pm on January 12, 2021, Samar kabeer said…

जनाब आज़ी साहिब,तरही मुशाइर: में शामिल सभी ग़ज़लों पर लाइव ही तफ़सील से गुफ़्तगू होती है, शिर्कत फ़रमाएँ, और कोई उलझन हो तो मुझसे 09753845522 पर बात कर सकते हैं ।

 
 
 

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