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Dr. Geeta Chaudhary
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  • Ghaziabad, U.P.
  • India
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नाथ सोनांचली commented on Dr. Geeta Chaudhary's blog post क्षणिकाएं
"आद0 गीता चौधरी जी सादर अभिवादन। बढ़िया क्षणिकाएँ हुई हैं। बधाई लीजिये।"
May 5, 2020
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Dr. Geeta Chaudhary's blog post क्षणिकाएं
"आ. गीता जी, अच्छी क्षणिकाएँ हुई हैं । हार्दिक बधाई । शेष आ. समर जी कह चुके हैं । सादर.."
May 4, 2020
Dr. Geeta Chaudhary commented on Dr. Geeta Chaudhary's blog post क्षणिकाएं
"नमस्कार सर, हार्दिक आभार । सर वो शब्द मैंने बे -अदबी ही लिखा था, वो मैंने नोटिस भी कर लिया था, पर सर उसमें बाद में संशोधन नहीं हो सका। आगे इस बात का अवश्य ध्यान रखूंगी। पुनः आपके मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार।"
May 4, 2020
Samar kabeer commented on Dr. Geeta Chaudhary's blog post क्षणिकाएं
"मुहतरमा डॉ. गीता चौधरी जी आदाब, अच्छी क्षणिकाएँ लिखीं आपने,बधाई स्वीकार करें । तीसरी क्षणिका में 'बेअद्बी' ग़लत लिखा है "बे अदबी" ऐसे लिखें,कुछ टंकण त्रुटियाँ देखें,रचना लिखने के बाद ध्यान से पढ़ा भी करें ।"
May 4, 2020
Dr. Geeta Chaudhary posted a blog post

क्षणिकाएं

1. बड़ी बात ना कर, बड़ी ज़ात ना कर, ना बड़ा गुरूर,ख़ुदा की नजरे-इनायत हुई, तो आजमाएगा ज़रूर।.2 . कभी वक्त का हिसाब, कभी बातों का,ज्यादा ना माँगा करो, हम गणित के कच्चे हैं।.3. मेरे हौसलें भी बेअद्बी,उसकी बेअद्बी भी हौसलें।ये दुनियादारी का गणित है,ज़मीर से नहीं हिसाब से चलता है।.4. तर्कों के तीर काट नहीं पाते,तेरी यादों का तिलिस्म।.5. चल कुछ और हक़ जताएं,और थोड़ी सी ज़िद की जाय,हम मुक्त हो कन्यादान से,और उनकी विदाई की बात की जाय।.6. शिकायतें जब अलफ़ाज़ बनकागज़ पर उतरती हैं,ना पूछ कितनी उम्मीदोंऔर अरमानों का…See More
May 4, 2020
Dr. Geeta Chaudhary commented on Samar kabeer's blog post "ओबीओ की सालगिरह का तुहफ़ा"
"आदरणीय समर कबीर सर नमस्कार, मैं भगवान से प्रार्थना करती हूं कि आपके भाई जल्दी ठीक हो जाए। सर हम सभी की दुआएं आपके साथ हैं।"
Apr 8, 2020
Dr. Geeta Chaudhary commented on Samar kabeer's blog post "ओबीओ की सालगिरह का तुहफ़ा"
"आदरणीय समर कबीर सर, सुंदर प्रस्तुति, बिल्कुल सही कहा आपने बहुत ही अनोखा अनुभव इस मंच का।  खुशनसीबी आप जैसे विशेषज्ञों के सानिध्य में बहुत कुछ सीखने को मिल रहा है। हार्दिक आभार आपका, मंच का और संचालकों का। सभी को हार्दिक बधाई एवं ढेरों…"
Apr 7, 2020
Dr. Geeta Chaudhary commented on Dr. Geeta Chaudhary's blog post ऐ पागल पथिक !
"आदरणीय समर कबीर जी उत्साहवर्धन एवम् बधाई के लिए हार्दिक आभार।"
Mar 28, 2020
Samar kabeer commented on Dr. Geeta Chaudhary's blog post ऐ पागल पथिक !
"मुहतरमा डॉ. गीता चौधरी जी आदाब,अच्छी कविता लिखी आपने,बधाई स्वीकार करें ।"
Mar 28, 2020
Dr. Geeta Chaudhary commented on Usha Awasthi's blog post हिन्दी सी भला मिठास कहाँ?
"आदरणीय उषा मैडम, अदभुत मीठें शब्दों  में हिंदी की मिठास को व्य करती कविता, बहुत अच्छी लगी। हार्दिक बधाई आपको।"
Mar 28, 2020
Dr. Geeta Chaudhary posted a blog post

ऐ पागल पथिक !

ऐ पागल पथिक ! ठहरो जरा ,रुको जरा , सांस लो तनिक ,सम्भलो जरा I सब कुछ पाने की चाह में ,कुछ टूट गया उस आशियाने में,कुछ छूट गया उस हसीं फ़सानें में ,ठहरों, रुको, उसे सवारों, उसे खोजो जरा I रुको जरा ........ घर पर नन्हों की आस में , और बुजुर्गों की लम्बी प्यास में ,छूटे किसी साज और रियाज़ में ,वक्त की चीनी घोलो जरा, कोई सुर ताल छेड़ो जरा I रुको जरा ........ लूडो की गोटियाँ खोजो ,शतरंज की बिसात बिछाओ जरा ,कैरम की धूल झाड़ो,रानी पर नजर लगाओ जरा I रुको जरा .......पर भूल न जाना एक नेक काम ,फिर हो न जाना…See More
Mar 27, 2020
Dr. Geeta Chaudhary commented on Dr. Geeta Chaudhary's blog post कविता: "तुम्हारे हित देशहित से बड़े क्यूँ है?"
"आदरणीय समर कबीर जी उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक आभार। "
Jan 24, 2020
Samar kabeer commented on Dr. Geeta Chaudhary's blog post कविता: "तुम्हारे हित देशहित से बड़े क्यूँ है?"
"मुहतरमा गीता चौधरी जी आदाब,अच्छी जज़्बाती कविता लिखी आपने,बधाई स्वीकार करें ।"
Jan 19, 2020
Dr. Geeta Chaudhary commented on Dr. Geeta Chaudhary's blog post कविता: "तुम्हारे हित देशहित से बड़े क्यूँ है?"
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी उत्साहवर्धन के लिए सादर आभार।"
Jan 15, 2020
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Dr. Geeta Chaudhary's blog post कविता: "तुम्हारे हित देशहित से बड़े क्यूँ है?"
"आ. गीता जी, समसामयिक विषय पर अच्छी अभिव्यक्ति हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Jan 14, 2020
Dr. Geeta Chaudhary posted a blog post

कविता: "तुम्हारे हित देशहित से बड़े क्यूँ है?"

तुम्हारे हित देशहित से बड़े क्यूँ है?ये दुश्चरित्र है तुम्हारा,सताता मुझे क्यूँ है?तुम इन्सान ही बुरे हो,इल्जाम धर्म और जात पर क्यूँ है?तुम्हे इसमें सुकून है बहुत,ये मेरे सुकूं को खाता क्यूँ है?ये धर्म के ठेकेदार हैं,फिर मानवता के भक्षक क्यूँ हैं?ये दोषी है समाज के, कतार में इतने रक्षक क्यूँ है?क्या तेरा ईमान है, कहाँ तेरा ज़मीर है?भौंडे कुतर्कों का इतना गुमान क्यूँ है?कर्म- संदेशी इस धरा पर,कर्म से भटका मानव क्यूँ है?गंगा- जमुनी इस तहजीब में,लगा ये कलंक क्यूँ है?कौन रहेगा कौन सहेगा?किसकी होगी…See More
Jan 12, 2020

Profile Information

Gender
Female
City State
Ghaziabad
Native Place
Ghaziabad
Profession
Associate professor

Dr. Geeta Chaudhary's Blog

क्षणिकाएं

1. बड़ी बात ना कर, बड़ी ज़ात ना कर, ना बड़ा गुरूर,
ख़ुदा की नजरे-इनायत हुई, तो आजमाएगा ज़रूर।
.
2 . कभी वक्त का हिसाब, कभी बातों का,
ज्यादा ना माँगा करो, हम गणित के कच्चे हैं।
.
3. मेरे हौसलें भी बेअद्बी,
उसकी बेअद्बी भी हौसलें।
ये दुनियादारी का गणित है,
ज़मीर से नहीं हिसाब से चलता है।
.
4. तर्कों के तीर काट नहीं पाते,
तेरी…
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Posted on May 3, 2020 at 2:00am — 4 Comments

ऐ पागल पथिक !

ऐ पागल पथिक ! ठहरो जरा ,

रुको जरा , सांस लो तनिक ,

सम्भलो जरा I

सब कुछ पाने की चाह में ,

कुछ टूट गया उस आशियाने में,

कुछ छूट गया उस हसीं फ़सानें में ,

ठहरों, रुको, उसे सवारों, उसे खोजो जरा I

रुको जरा ........

घर पर नन्हों की आस में ,

और बुजुर्गों की लम्बी प्यास में ,

छूटे किसी साज और रियाज़ में ,

वक्त की चीनी घोलो जरा, कोई सुर ताल छेड़ो जरा I

रुको जरा ........

लूडो की गोटियाँ खोजो ,

शतरंज की बिसात बिछाओ जरा ,

कैरम की धूल…

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Posted on March 27, 2020 at 3:32pm — 2 Comments

कविता: "तुम्हारे हित देशहित से बड़े क्यूँ है?"

तुम्हारे हित देशहित से बड़े क्यूँ है?

ये दुश्चरित्र है तुम्हारा,

सताता मुझे क्यूँ है?

तुम इन्सान ही बुरे हो,

इल्जाम धर्म और जात पर क्यूँ है?

तुम्हे इसमें सुकून है बहुत,

ये मेरे सुकूं को खाता क्यूँ है?

ये धर्म के ठेकेदार हैं,

फिर मानवता के भक्षक क्यूँ हैं?

ये दोषी है समाज…

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Posted on January 12, 2020 at 8:09pm — 4 Comments

गीत: तब तुम कोई गीत लिखना प्रिये!

जब पीड़ा आसुओं को मात दे,

और संभाले ना संभले मन।

जब यादें मेरी दिल पर दस्तक दें,

और बेचैन हो ये अंतर्मन।

तब तुम कोई गीत लिखना प्रिये,

मैं आऊँगी भाव बनकर ज़रूर।

जब मेरी कमी तुमको खले,

और खोजे अक्श मेरा तुम्हारा मन।

जब बोझिल हो रातें काटे ना कटे,

और नींद से आँख-मिचौली खेले नयन।

तब तुम कोई सपना सजाना प्रिये,

मैं आऊँगी तुमसे मिलने ज़रूर।

जब पतझड़ में झड़ते हो पत्ते पुरातन,

और लहरों को देख विचलित हो मन।…

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Posted on December 26, 2019 at 2:00pm — 6 Comments

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