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Nilesh Shevgaonkar
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Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-94
"ख़फ़ा ख़फ़ा ही सही साथ चल तो सकती है ऐ ज़िन्दगी तू ये तेवर बदल तो सकती है. . उठी हुई है जो रिश्ते में बर्फ़ की दीवार अगर न टूट सके तो पिघल तो सकती है. . हुईं हैं बाँझ ये आहें असर नहीं करतीं दुआ-गो रहिए; दुआ कोई फल तो सकती है. . ये ठीक है कि तेरा ज़ुल्म घट…"
2 hours ago
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- बहुत आसाँ है दुनिया में किसी का प्यार पा लेना,
"धन्यवाद आ. श्याम जी "
2 hours ago
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- बहुत आसाँ है दुनिया में किसी का प्यार पा लेना,
"धन्यवाद आ. डॉ आशुतोष जी "
2 hours ago
Shyam Narain Verma commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- बहुत आसाँ है दुनिया में किसी का प्यार पा लेना,
"बहुत खूबसूरत अशआर ...दिल से बधाई "
10 hours ago
Dr Ashutosh Mishra commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- बहुत आसाँ है दुनिया में किसी का प्यार पा लेना,
"आदरणीय भाई निलेश जी आजकल एक के बाद एक उम्दा ग़ज़लें पढने को मिल रही हैं ..रचना पर हार्दिक शुभकामनाओं के साथ सादर "
16 hours ago
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- बहुत आसाँ है दुनिया में किसी का प्यार पा लेना,
"धन्यवाद आ. समर सर,मैंने अपनी प्रति में  सुधार कर लिया है सादर "
yesterday
Samar kabeer commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- बहुत आसाँ है दुनिया में किसी का प्यार पा लेना,
"जनाब निलेश 'नूर' साहिब आदाब,बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ । 4थे शैर में 'तबीयत' को "तबीअत" कर लें ।"
yesterday
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- बहुत आसाँ है दुनिया में किसी का प्यार पा लेना,
"धन्यवाद आ, तेजवीर सिंह जी आभार"
yesterday
Nilesh Shevgaonkar commented on Nand Kumar Sanmukhani's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय नंद कुमार जी, एक ग़ज़लकार होने के नाते मैं भी इसी दुविधा से दोचार होता हूँ। मुझे लगता है कि मैंने जो कहना चाहा है वही पाठक ने भी समझा है। अस्ल में हमारा अवचेतन मन उस विचार में इतना गुँथ जाता है कि उस का कोई भी प्रकटीकरण हमें परिपुर्ण लगने लगता…"
yesterday
TEJ VEER SINGH commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- बहुत आसाँ है दुनिया में किसी का प्यार पा लेना,
"हार्दिक बधाई आदरणीय निलेश जी।बेहतरीन गज़ल। बहुत वादे वो करता है मगर सब तोड़ देता है, ये दावा भी उसी का है कि मुझ को आज़मा लेना."
yesterday
Nilesh Shevgaonkar commented on Nand Kumar Sanmukhani's blog post ग़ज़ल
"अच्छी ग़ज़ल हुई है आ. नन्द कुमार जी बधाई ..तीसरे शेर में ऊला और सानी में रब्त कम लग रहा है .. झुकने और खेल करने में कोई सम्बन्ध नहीं मिल पा रहा है ..अंतिम शेर अच्छा बन पडा है..बधाई "
yesterday
Nilesh Shevgaonkar posted a blog post

ग़ज़ल नूर की- बहुत आसाँ है दुनिया में किसी का प्यार पा लेना,

१२२२/१२२२/१२२२/१२२२ .बहुत आसाँ है दुनिया में किसी का प्यार पा लेना, बहुत मुश्किल है ऐबों को मगर उस के निभा लेना. . नज़र मिलते ही उस का झेंप कर नज़रें चुरा लेना, मचलती मौज का जैसे किसी साहिल को पा लेना. . बहुत वादे वो करता है मगर सब तोड़ देता है, ये…See More
yesterday
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल-नूर की - इस तरह हर इक गुनह का सामना करना पड़ा,
"धन्यवाद आ. हर्ष जी "
yesterday
Nilesh Shevgaonkar commented on Nand Kumar Sanmukhani's blog post ग़ज़ल
"आ. नंदकुमार जी.आपकी टिप्पणी का अंश यहाँ उधृत कर रहा हूँ ..//दूसरा, आदरणीय नीलेश जी की टिप्पणी यदि मज़कूर शइर की मिसरा-अव्वल पर आधारित मानकर पढ़ें तो शतप्रतिशत सही है, लेकिन इसी शइर के सानी-मिसिरे में जो आया है कि 'वो तो "फिर से" घात…"
yesterday
Harash Mahajan commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल-नूर की - इस तरह हर इक गुनह का सामना करना पड़ा,
"वाह आदरणीय नीलेश जी  बहुत ही खूबसूरत पेशकश दिली दाद हाजिर है सर! सादर !"
yesterday
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल-नूर की - इस तरह हर इक गुनह का सामना करना पड़ा,
"धन्यवाद आ. महेंद्र जी "
yesterday
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल-नूर की - इस तरह हर इक गुनह का सामना करना पड़ा,
"धन्यवाद आ. रवि जी "
yesterday
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल-नूर की - इस तरह हर इक गुनह का सामना करना पड़ा,
"धन्यवाद आ. गिरिराज जी "
yesterday
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल-नूर की - इस तरह हर इक गुनह का सामना करना पड़ा,
"धन्यवाद आ. राजेशी कुमारी जी "
yesterday
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post नख़्ल-ए-दिल रेगज़ार करना था-ग़ज़ल नूर की
"धन्यवाद आ. महेंद्र जी "
yesterday

Profile Information

Gender
Male
City State
Indore-MP
Native Place
Indore-MP
Profession
Civil Engineer

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Nilesh Shevgaonkar's Blog

ग़ज़ल नूर की- बहुत आसाँ है दुनिया में किसी का प्यार पा लेना,

१२२२/१२२२/१२२२/१२२२ 

.

बहुत आसाँ है दुनिया में किसी का प्यार पा लेना,

बहुत मुश्किल है ऐबों को मगर उस के निभा लेना.

.

नज़र मिलते ही उस का झेंप कर नज़रें चुरा लेना,

मचलती मौज का जैसे किसी साहिल को पा लेना.

.

बहुत वादे वो करता है मगर सब तोड़ देता है,

ये दावा भी उसी का है कि मुझ को आज़मा लेना.

.

मलंगों सी तबीयत है सो अपनी धुन में रहता हूँ   

पिये हैं रौशनी के जाम फिर ग़ैरों से क्या लेना.

.

मिलन होगा मुकम्मल जब मिलेगी बूँद सागर से…

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Posted on April 25, 2018 at 12:09pm — 8 Comments

ग़ज़ल नूर की-2-ऐ ख़ुदा! रूतबा इबादत-गाहों का अपनी जगह

२१२२/२१२२/२१२२/२१२ 

.

ज़ाहिदो! रूतबा इबादत-गाहों का अपनी जगह

पर सुकूँ की राह में है मैकदा अपनी जगह.

.  

इश्क़ में मजबूरियों को बेवफ़ाई क्यूँ कहें   

चाहना अपनी जगह था भूलना अपनी जगह.

.

सादा-दिल होने के दुनिया में कई नुक्सान हैं

पर किसी के काम आने का मज़ा अपनी जगह.

.

आपने जब दिल लगाया ही नहीं, समझेंगे क्या?  

जीतना हो शौक़ कोई, हारना अपनी जगह.

.

इम्तिहाँ कब “नूर” का है इम्तिहाँ आँधी का है

रात भर जलता रहेगा यह दीया…

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Posted on April 21, 2018 at 12:30pm — 11 Comments

ग़ज़ल नूर की -जो किताबों ने दिया वो फ़लसफ़ा अपनी जगह.

२१२२/२१२२/२१२२/२१२ 

.

जो किताबों ने दिया वो फ़लसफ़ा अपनी जगह.

लोग जिस पर चल पड़े वो रास्ता अपनी जगह.

.

फिर लिपटकर रो सकूँ मैं ये दुआ अपनी जगह

लौट कर आए न तुम मैं भी रहा अपनी जगह.

.

हक़ बयानी का सभी को हौसला होता नहीं  

संग हैं बेताब फिर भी आईना अपनी जगह.   

.

छोड़ कर मुझ को तेरा क्या हाल है यह तो बता

तेरे पीछे हश्र मेरा जो हुआ अपनी जगह.

.

ये वो मंजिल तो नहीं है आज पहुँचे हैं जहाँ

गो तुम्हारे साथ चलने का मज़ा अपनी…

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Posted on April 18, 2018 at 8:30pm — 19 Comments

ग़ज़ल नूर की-जिस्म है मिट्टी इसे पतवार कैसे मैं करूँ

२१२२ / २१२२ / २१२२ / २१२

.

जिस्म है मिट्टी इसे पतवार कैसे मैं करूँ

कागज़ी कश्ती से दरिया पार कैसे मैं करूँ.

.

ऐ अदू तेरी तरह गुफ़्तार कैसे मैं करूँ,

फूल बरसाती ज़बां को ख़ार कैसे मैं करूँ.



चाबियाँ मैंने ही दिल की सौंप दी थीं यादों को

आ धमकती हैं जो अब, इन्कार कैसे मैं करूँ.

.

रेत का घर है ये दुनिया तिफ़्ल सी उलझन मेरी  

ख़ुद बना कर ख़ुद इसे मिस्मार कैसे मैं करूँ.

.

रूह बुलबुल है जिसे ये क़ैद रास आती नहीं  

है क़फ़स…

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Posted on April 16, 2018 at 7:15pm — 16 Comments

Comment Wall (8 comments)

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At 8:49pm on March 22, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय नीलेश सर प्रणाम
बहुत शुक्रिया
At 2:21pm on September 16, 2017, Afroz 'sahr' said…
आदरणीय निलेश जी आपने ख़ाकसार की बात की ताईद की बहुत आभार प्रकट करता हूँ !सादर
At 9:50pm on March 3, 2017, Hemant kumar said…
आदरणीय सर प्रणम ! मै ओ बी ओ मे काफीया पढ़ रहा हूं पर पल्ले कुछ भी नही पड़ रहा है ।
सर आपसे विनम्र आग्रह है काफीया निर्धारण पर पुनः प्रकाश डालने की अनुकंपा करें ।सादर..
At 2:37am on June 29, 2014, Adesh Tyagi said…
जनाबे-मोहतरम निलेश शेव्गाँवकर साहब, अल्फ़ाज़े-तहसीन का तहे-दिल से शुक्रगुज़ार हूँ।
At 4:47am on November 11, 2013, Abhinav Arun said…

महीने का सक्रिय सदस्य (Active Member of the Month)चुने जाने पर आ. नीलेश जी आपको दिली मुबारकबाद !

At 1:45pm on November 7, 2013, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ0 नीलेश भाई जी, आपको महीने का सकिय सदस्य चुने जाने पर आपको हार्दिक बधाई।  सादर,

At 1:14pm on November 6, 2013,
सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी
said…

आदरणीय नीलेश भाई , सक्रिय सदस्य चुने जाने के लिये आपको हार्दिक बधाईयाँ  !!!!!!

At 12:32pm on November 6, 2013,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय Nilesh Shevgaonkar जी
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करे | कृपया अपना पता और नाम (जिस नाम से ड्राफ्ट/चेक निर्गत होगा), बैंक खता विवरणी एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |

सादर । 


आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

 
 
 

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