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बृजेश कुमार 'ब्रज'
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"बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल हुई ज़नाब राज साहब..हार्दिक बधाई"
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"हो न हो तुझको यकीं लेकिन है सच्चाई यही किस ने आख़िर है किया मेरे सिवा तेरा ख़याल | वाह वाह आदरणीय बहुत खूबसूरत ग़ज़ल हुआ.."
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बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on अनहद गुंजन's blog post *मन मनोरम* छ्न्द में गीत.....
"बहुत अनुपम मधुर गीत हुआ आदरणीया..हार्दिक बधाई"
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"वाह वाह आदरणीय बहुत ही सुन्दर ग़ज़ल कही है बहुत मुश्किल है सीले खत सुखाना अब की बारिश में..बेहतरीन"
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बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Gurpreet Singh's blog post ग़ज़ल --इस्लाह के लिए
"बहुत बहुत बधाई आदरणीय.."
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बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post पार्थनंदन (भाग १ ):- मोहित मिश्रा
"बहुत सुन्दर वीर रस से परिपूर्ण रचना..हार्दिक बधाई"
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"आदरणीय शुक्ला जी आप लोग बड़े हैं..आपकी हर सलाह में कुछ न कुछ सीख ही होगी....सादर"
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बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...हर कदम पर जह्न मेरा आजमाता कौन है-बृजेश कुमार 'ब्रज'
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बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...हर कदम पर जह्न मेरा आजमाता कौन है-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"आदरणीया सुनंदा जी रचना पटल पे आपका हार्दिक अभिनन्दन एवं आभार..सादर"
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"आदरणीय बृजेश जी हमारे कहे को मान देने के लिये आभार"
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Niraj Kumar commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...हर कदम पर जह्न मेरा आजमाता कौन है-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"आदरणीय बृजेश जी,  ख़ूबसूरत ग़ज़ल हुई है दाद के साथ मुबारकबाद. सादर "
Aug 13
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Aug 13

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Male
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बृजेश कुमार 'ब्रज''s Blog

ग़ज़ल...हर कदम पर जह्न मेरा आजमाता कौन है-बृजेश कुमार 'ब्रज'

2122 2122 2122 212
वेदना के तार झंकृत,गीत गाता कौन है
दर्द की ये रागनी आखिर सुनाता कौन है

कौन है ये रात के आगोश में सिमटा हुआ
चाँदनी की ओट लेकर मुस्कुराता कौन है

बादलों के पार से आवाज थी किसकी सुनी
ओढ़कर घूँघट घटा का ये लजाता कौन है

गुँजतीं हैं आहटें खामोशियों को चीरती
हर कदम पर जह्न मेरा आजमाता कौन है

चल रही पुरवा बसन्ती मुस्कुरा कर झूमती
लेके थाली आरती की गुनगुनाता कौन है
(मौलिक एवं अप्रकाशित)
बृजेश कुमार 'ब्रज'

Posted on August 9, 2017 at 4:30pm — 16 Comments

ग़ज़ल....यार तुम भी कमाल करते हो-बृजेश कुमार 'ब्रज

2122 1212 22
रहबरों से सवाल करते हो
तौबा ये क्या मजाल करते हो

रस्मे उल्फत की बात कर बैठे
काम सब बेमिसाल करते हो

हीर समझा हुई ग़लतफ़हमी
खुद क्यों रांझे सा हाल करते हो

आइने में ये किसकी सूरत है
किसपे दिल ये निहाल करते हो

किसने साये को साथ रक्खा है
किस लिये 'ब्रज' मलाल करते हो
(मौलिक एवं अप्रकाशित)
बृजेश कुमार 'ब्रज'

Posted on August 4, 2017 at 4:30pm — 14 Comments

ग़ज़ल...नींद हमारी ख्वाब तुम्हारे-बृजेश कुमार 'ब्रज'

22 22 22 22
फिरते हैं बन वन बंजारे
नींद हमारी ख्वाब तुम्हारे

जब भी होंट खुले तो पाया
नाम तुम्हारा साँझ सकारे

जाने वाले आ भी जा अब
तुझको मेरी आह पुकारे

दर्द जुदाई आहें आँसू
जीवन है या कोइ सजा रे

कितने अरसे बाद मिले हो
ओ मेघा मनमीत सखा रे
(मौलिक एवं अप्रकाशित)
बृजेश कुमार 'ब्रज'

Posted on July 31, 2017 at 8:51am — 14 Comments

ग़ज़ल....जो दिल को घेर कर बैठी उदासी क्यों नहीं जाती

1222 1222 1222 1222

जो दिल को घेर कर बैठी उदासी क्यों नहीं जाती

नदारद नींद आँखों से उबासी क्यों नहीं जाती



चलीं जायेगीं बरसातें ये मौसम भी न ठहरेगा

हमारे दिल की बैचैनी जरा सी क्यों नहीं जाती



तुम्हारे साथ ही ये ज़िन्दगी तैयार जाने को

दिलों के दरमियाँ काबिज़ अना सी क्यों नहीं जाती



सुना है उसके दर पे सब मुरादें पूरी होतीं हैं

ये व्याकुल रूह जन्मों से है प्यासी क्यों नहीं जाती



ग़मों में मुस्कुराना सीख 'ब्रज' लोगों ने समझाया

बसी… Continue

Posted on July 10, 2017 at 5:00pm — 9 Comments

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At 11:43pm on November 17, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

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 ग़ज़ल की बातें 

 

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