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बृजेश कुमार 'ब्रज'
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बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on rajesh kumari's blog post वक़्त ऐसी किताब माँगेगा (ग़ज़ल 'राज')
"बहुतखूब ग़ज़ल हुई आदरणीया..अपनी खुशबु गुलाब मांगेगा..बेहतरीन"
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बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Afroz 'sahr''s blog post ग़ज़ल: फूंकने को इसे बिजलियाँ आगईं
"बहुत ही खूब ग़ज़ल हुई आदरणीय...आदरणीय नीलेश जी बड़ी बारीक़ बात कही है..सादर"
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बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on SALIM RAZA REWA's blog post ग़ज़ल : ज़रा  सोचिए दिल लगाने से पहले : SALIM RAZA REWA
"खूबसूरत ग़ज़ल हुई आदरणीय...सादर"
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बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post तब सिवा परमेश्वर के औ'र जला है कौन-----गज़ल, पंकज मिश्र
"उम्दा ग़ज़ल हुई आदरणीय.."
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बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post तू गांधी की लाठी ले ले (लघुकथा)/शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"प्रतीकों का बड़ा ही खूबसूरत इस्तेमाल किया है आदरणीय..इस उम्दा लघु कथा के लिए बधाई.."
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बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल- हिंदी तुकांत के साथ एक प्रयोग (..अण ,, क़ाफ़िये पर संभवत: पहली ग़ज़ल है इस मंच पर)
"उम्दा ग़ज़ल हुई आदरणीय..सीखने के लिए बहुत कुछ मिला..हार्दिक बधाई.."
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बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on vandana's blog post दीप दान की थाती
"बहुत ही सुमधुर रचना हुई आदरणीया..सादर बधाई"
yesterday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Dr.Prachi Singh's blog post अम्बर के विस्तार सरीखे मेरे पापा // डॉ० प्राची
"बहुत ही उत्तम गीत हुआ आदरणीया..सादर"
yesterday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on CA (Dr.)SHAILENDRA SINGH 'MRIDU''s blog post जागे हिंदुस्तान/ गीत
"बहुत ही सुन्दर और सरस गीत हुआ आदरणीय..दूसरे बन्द में बिका हुआ बाजरों में..क्या यहाँ बाजारों होना चाहिए..?"
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बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post उसी का तसव्वुर पढ़ा जा रहा है
"बड़े धैर्य की जरुरत है ग़ज़ल पढ़ने के लिए..लेकिन पढ़ने बाद आप एक अच्छी ग़ज़ल पाएंगे..सादर बधाई।"
yesterday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...ज़िन्दगी मुस्कुराने लगी शाम से-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"आपका हार्दिक अभिनन्दन एवं आभार आदरणीया.."
Thursday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on विनय कुमार's blog post अपने अपने जज़्बात- लघुकथा
"उम्दा पेशकस के लिए बधाई आदरणीय.."
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KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...ज़िन्दगी मुस्कुराने लगी शाम से-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"सुंदर ग़ज़ल हुई है आदरणीय बधाई स्वीकारें |"
Wednesday
बृजेश कुमार 'ब्रज' posted a blog post

ग़ज़ल...ज़िन्दगी मुस्कुराने लगी शाम से-बृजेश कुमार 'ब्रज'

मुतदारिक सालिम मुसम्मन बहर212 212 212 212आपकी याद आने लगी शाम सेज़िन्दगी मुस्कुराने लगी शाम सेगुनगुनाती हुई चल रही है हवाशाम भी गीत गाने लगी शाम सेचाँदनी रात से क्यों करें हम गिलाहर ख़ुशी झिलमिलाने लगी शाम सेबड़ रही प्यार की तिश्नगी हर घड़ीहसरतें सिर उठाने लगी शाम सेताल बेताल थे सुर बड़े बेसुरेरागनी वो सुनाने लगी शाम सेआस दिल में लिये चल पड़ी बावरीरात सपने सजाने लगी शाम से(मौलिक एवं अप्रकाशित)बृजेश कुमार 'ब्रज'See More
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बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Mohammed Arif's blog post समय का चक्कर (कटाक्षिकाएँ)
"वक़्त के कैनवास पर जीवन के रेखाचित्र को बखूबी उकेरा है आदरणीय..बधाई"
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बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...ज़िन्दगी मुस्कुराने लगी शाम से-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"सादर नमन स्वीकारें आदरणीय लक्ष्मण धामी जी.."
Oct 10

Profile Information

Gender
Male
City State
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jhansi

बृजेश कुमार 'ब्रज''s Blog

ग़ज़ल...ज़िन्दगी मुस्कुराने लगी शाम से-बृजेश कुमार 'ब्रज'

मुतदारिक सालिम मुसम्मन बहर

212 212 212 212

आपकी याद आने लगी शाम से

ज़िन्दगी मुस्कुराने लगी शाम से



गुनगुनाती हुई चल रही है हवा

शाम भी गीत गाने लगी शाम से



चाँदनी रात से क्यों करें हम गिला

हर ख़ुशी झिलमिलाने लगी शाम से



बड़ रही प्यार की तिश्नगी हर घड़ी

हसरतें सिर उठाने लगी शाम से



ताल बेताल थे सुर बड़े बेसुरे

रागनी वो सुनाने लगी शाम से



आस दिल में लिये चल पड़ी बावरी

रात सपने सजाने लगी शाम से

(मौलिक एवं… Continue

Posted on October 8, 2017 at 7:00pm — 18 Comments

ग़ज़ल....कितने घावों को सिल डाला शब्दों के पैबंदों से-बृजेश कुमार 'ब्रज'

622 22 22 22 22 22 22 2

भावों के धागे चुन चुन कर अरमानों के बंधों से

कितने घावों को सिल डाला शब्दों के पैबंदों से



साँसों से जीवन जैसा फूलों से तितली का रिश्ता

कुछ ऐसा ही नाता अपना कविता गीतों छंदों से



जन्मों जन्मों का बंधन है डरना क्या इनसे बन्धू

दुख चलते हैं बनके साथी इनसे हैं अनुबंधों से



अक्सर सच की नीलामी भी चौराहों पे होती है

उसकी हालत बद से बदतर लूले बहरे अंधों से



मजहब को जीने वाले वो मजहब को ही खाते हैं

कोने में… Continue

Posted on September 29, 2017 at 5:30pm — 7 Comments

ग़ज़ल....धीरे धीरे रीत गया - बृजेश कुमार 'ब्रज'

22 22 22 22 22 22 22 2

यादों के गलियारे होकर जब मैं आज अतीत गया

लाख सँभाला आँखों ने पर धीरे धीरे रीत गया



नाम पुकारा कुछ ने मेरा कुछ के अश्क़ छलक आये

कुछ तस्वीरें मुस्काईं तो गूँज कहीं संगीत गया



ख्वाब सुहाने कुछ बचपन के टूट गये कुछ रूठ गये

कैसे जी को समझाऊँ मैं क्या गुजरी क्या बीत गया



ऐसा क्या माँगा था उनसे ऐसी क्या मज़बूरी थी

बीच भँवर क्यों हाथ छुड़ाकर बेदर्दी मनमीत गया



खेल रचा क्या भावों का हाथों की चन्द लकीरों ने

हार गया… Continue

Posted on September 16, 2017 at 8:25pm — 28 Comments

गैर मुरद्दफ़ ग़ज़ल..मेरे दीदा ए नम में तू ही तू-बृजेश कुमार 'ब्रज'

गैर मुरद्दफ़ ग़ज़ल
2122 1212 22
तेरी आँखें ज़हान की खुशबू
मेरे दीदा ए नम में तू ही तू

गीत ग़ज़लों में तू नुमायाँ है
तेरा ही चर्चा नज़्म में हर सू

याद किसकी शुरुर है किसका
किसलिये आँखों से रवां आँसू

तेरी जुल्फों की खुशबुएँ लेकर
कोई झोंका सबा का जाये छू

धर्म मजहब से ये हुआ हासिल
जल रहे हैं बशर यहाँ धू धु

राज है 'ब्रज' तेरी उदासी में
बेसबब आज फिर बहे आँसू
(मौलिक एवं अप्रकाशित)
बृजेश कुमार 'ब्रज'

Posted on September 6, 2017 at 3:00pm — 2 Comments

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At 11:43pm on November 17, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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