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Afroz 'sahr'
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  • बृजेश कुमार 'ब्रज'

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Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-93
"जनाब मुनीश तंहा साहिब ग़ज़ल में शिरकत और सुख़न नवाज़ी का शुक्रिया,,"
Mar 24
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-93
"जनाब लक्षमण धामी साहिब ग़ज़ल में शिरकत और सुख़न नवाज़ी का शुक्रिया,,,"
Mar 24
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-93
"जनाब तस्दीक़ एहमद साहिब ग़ज़ल में शिरकत और सुख़न नवाज़ी का बहुत बहुत शुक्रिया,,,,"
Mar 24
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-93
"जनाब अजय तिवारी साहिब ग़ज़ल में शिरकत और सुख़न नवाज़ी का शुक्रिया,,,"
Mar 24
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-93
"आली जनाब समर कबीर साहिब ग़ज़ल को अपना की़मती वक़्त देने और हौसला अफ़ज़ाई का शुक्रिया,,, "अपनों से कोई शरमाता है" ये टुकड़ा शकील साहब का है।ये मेरे इल्म में नहीं था। "इक शम्स उगाना पड़ता है, फिर सुब्ह के आने से पहले, परचम ये…"
Mar 24
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-93
"जनाब वासूदेव नमन साहिब ग़ज़ल को मान देने के लिए आपका शुक्रिया,,,"
Mar 24
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-93
"जनाब आरिफ़ साहिब ग़ज़ल की सराहना पर आपका मश्कूर हूँ।"
Mar 24
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-93
"हैं लाख अगर मुश्किल राहें मन काहे को तू घबराता है। ले कर जो ख़ुदा का नाम चले आसान सफ़र हो जाता है।। दीदार की हसरत जागी है चहरे से हटा भी दो आँचल। आशिक हैं तुम्हारे ग़ैर नहीं अपनों से कोई शरमाता है।। हो चूर थकन से जिस्म भले ग़म लाख छुपे हों सीने…"
Mar 23
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"जनाब युनुस साहिब सुख़न नवाज़ी का शुक्रिया,,"
Feb 24
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"जनाब सुरेंद्र नाथ जी ग़ज़ल में शिरकत पर आपका मश्कूर हूँ।"
Feb 24
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"जनाब तस्दीक़ साहिब ग़ज़ल में शिरकत पर मश्कूर हूँ। आपने सही कहा है। मसरूफ़ियत के सबब ब मुश्किल वक़्त निकालकर चंद घंटों में ग़ज़ल कही है। ग़ज़ल पर आई हुई प्रतिक्रियाओं का जवाब अ,दबन देना ज़रूरी होता है ।इसलिए जब भी वक़्त मिलता है हाज़िर हो जाता…"
Feb 24
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"जनाब शिज्जु शकूर साहिब शुक्रिया ये बताने के लिए कि मैने कोशिश की है,,,"
Feb 24
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"आदरणीय आशीष जी सुख़न नवाज़ी का शुक्रिया,,,, शे'र " बीमार ए इश्क़ हैं हमें लिख देना ला'दवा।       " आती नहीं हैं काम दवाएँ तो क्या करें।। को आपने शायद गो़र से देखे बग़ैर ही प्रतिक्रिया दे दी। ऊला मिसरे में बेज़ार…"
Feb 24
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"मुहतरमा राजेश कुमारी जी सुख़न नवाज़ी पर आपका मश्कूर हूँ,,"
Feb 24
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"बहुत बहुत शुक्रिया जनाब आरिफ़ साहब"
Feb 24
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"जनाब समर साहिब ग़ज़ल को अपना क़ीमती वक़्त देने और निहायत मुफ़ीद मश्वरों के लिए आपका बहुत बहुत मश्कूर हूँ,,,"
Feb 24

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About me
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Afroz 'sahr''s Blog

ग़ज़ल निकल गए आँसू,,,,

   2122  1212  22

दफ़अतन जो निकल गए आँसू।

सारे मंज़र बदल गए आँसू।।

लाख की कोशिशें छुपाने की।

राज़ दिल का उगल गए आँसू।।

इक ख़ुशी ने मुझे पुकारा है।

ये ख़बर सुन के जल गए आँसू।।

ख़ुश्क दामन तुझे बताऊँ क्या।

वो सबब जो सँभल गए आँसू।।

इत्तिफ़ाकन ही ख़ुश्क थीं पलकें।

इंतिकामन मचल गए आँसू।।

इक तबस्सुम जो आगया लब पर।

मारे ग़म के पिघल गए आँसू।।

कौन सा पल…

Continue

Posted on December 24, 2017 at 11:00am — 11 Comments

ग़ज़ल,,,,इशारों का साथ दो,,,,,,,

221/2121/1221/212



है इख़्तियार तुमको बहारों का साथ दो।

लेकिन कभी तो दर्द के मारों का साथ दो।।



गर हैं निजात के लिए दरकार नेकियाँ।

डोली उठाने वाले कहारों का साथ दो।।



बाहम वो मिल सके न जो सारी हयात में।

मजबूर बेक़रार कनारों का साथ दो।।



तुम इन उदासियों की रिदाओं को चीर कर।

दिलकश हसीन शौख़ नजारों का साथ दो।।



ये वक़्त का तकाजा़ है दानाइ भी यही।

रक्खो ज़ुबान बंद इशारों का साथ दो।।



मिट्टी के ढेर हैं ये फ़कत और… Continue

Posted on December 4, 2017 at 1:36pm — 20 Comments

ग़ज़ल,,,,भीगी पलकों पे कई ख़्वाब,,

2122/1122/1122/22/112



अश्क़ आँखों में यूँ बेताब हुआ करते हैं

भीगी पलकों पे कई ख़्वाब हुआ करते हैं।



जिनकी क़ीमत ही नहीं लोगों की नज़रों में कोई

रब की नज़रों में वो सुरख़ाब हुआ करते हैं।



जो भी रखते हैं बुज़ुर्गों की रिवायत का भरम

लोग दुनिया में वो नायाब हुआ करतें हैं।



ख़ुश्क फूलों की तरह मुझको समझने वालों

गुल में ख़ुश्बू के कई बाब हुआ करते हैं।



तुहमतें गैरों पे साज़िश की लगाने वाले

तेरे दुश्मन तेरे एहबाब हुआ करते… Continue

Posted on November 7, 2017 at 1:00pm — 20 Comments

ग़ज़ल,,,,में अपनी हसरतें,,,,,

1222/1222/1222/1222



जो सच हो ही नहीं सकता वो सपना छोड़ आया हूँ

में अपनी हसरतें सहरा में तंहा छोड़ आया हूँ।



ख़िरद ने जबसे जोड़ा है हक़ीकत से मेंरा रिश्ता

तख़य्युल को ख़लाओं में भटकता छोड़ आया हूँ।



ज़रूरत मुझको ले कर आ गई परदेस में लेकिन

में अपने घर में इक पुतला अना का छोड़ आया हूँ।



सबब जिसके हुए जाते थे अपने ही मेंरे दुश्मन

वो चाँदी छोड़ दी मैंने वो सोना छोड़ आया हूँ।



वो इक लम्हा जो गफ़लत में तेरी चाहत के बिन… Continue

Posted on October 17, 2017 at 7:30pm — 10 Comments

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At 5:25pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय अफरोज जी आदाब
बहुत शुक्रिया आपने मेरी रचना पढ़ी मुझे अभी बहुत सीखना है आशा है आप मेरी इसी तरह मदद करेंगे
At 2:29pm on September 12, 2017,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए....

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है.

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