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Manan Kumar singh
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"स्वागत-योग्य।"
Jul 7
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-51 (विषय: मुसाफिर)
"जी शुक्रिया आदरणीय।"
Jun 30
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-51 (विषय: मुसाफिर)
"जी शुक्रिया आदरणीय।"
Jun 30
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-51 (विषय: मुसाफिर)
"बहुत बहुत आभार आदरणीय समर जी।"
Jun 30
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"आभार आदरणीय।"
Jun 29
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-51 (विषय: मुसाफिर)
"जी शुक्रिया।"
Jun 29
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-51 (विषय: मुसाफिर)
"लोक-संस्कार  --- वह विदा हो गई।सुहागन थी,पर नैहर में थी।पीहर वालों को तीसरे पक्ष से खबर हुई।सब लोग दूर-दूर नौकरी पर तैनात थे।पीहरवाले जरा भी प्रतीक्षा को तैयार न थे।उन्हें उसे जल्दी से जल्दी निपटाने की पड़ी थी।खैर पीहरवाले उतरी लेकर उसका संस्कार…"
Jun 29
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"आपका आभार आदरणीय शुक्ला जी।मार्गदर्शन वांछित रहेगा।"
Jun 28
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"आभार आदरणीय।"
Jun 28
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"आभार आदरणीय।"
Jun 28
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"आभार आदरणीय।"
Jun 28
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"आभार आदरणीय।"
Jun 28
dandpani nahak left a comment for Manan Kumar singh
"आदरणीय मनन कुमार सिंह जी बहुत शुक्रिया आपने जो हौसला बढ़ाया है"
Jun 27
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"आदरणीया,अच्छी गजल हीउ है।आपको बधाई।"
Jun 27
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"बढ़िया गजल आदरणीय,बधाई आपको।"
Jun 27
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"आभार आदरणीय निगम जी।"
Jun 27

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Male
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Mumbai
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E 52 Krishna Apt , Patna
Profession
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शरणार्थी (लघुकथाएं )

शरणार्थी

(1)

---

दो मित्र आपस में बातें कर रहे थे;एक मानवतावादी था, दूसरा समाजवादी।पहले ने कहा-

अरे भई!वो भी आदमी हैं,परिस्थिति के मारे हुए।बेचारों को शरण देना पुण्य-परमार्थ का काम है।

दूसरा:हाँ तभी तक,जबतक यहाँ के लोगों को शरणार्थी बनने की नौबत न आ जाये।



(2)

---

-हाँ,जुझारूपन हमारे खून में है।

-हमारी खातिर तुम क्या करोगे?

-जान भी दे सकते हैं।

-हमें वोट चाहिए।जान…

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Posted on June 8, 2019 at 8:53am — 2 Comments

मत समझना मैं...(गजल)

2122 2122 2122 2

मत समझना मैं पढ़ा अख़बार हूँ कल का

हमसफ़र हूँ,काबिले-आसार हूँ कल का।1

राह सिमटी जा रही है आज की पल-पल

देख लो मुझको जरा आधार हूँ कल का।2

कौड़ियों के मोल बिकता आज तुम्हारा

सच लिए चलता रहा मनुहार हूँ कल का।3

रोशनाई की उमंगों का…

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Posted on February 8, 2019 at 11:00pm — 6 Comments

गजल(जैसे तैसे बात बनी है...)

22  22  22 22

जैसे-तैसे बात बनी है

रमई चादर हाथ लगी है।1

मंदिर-मंदिर घूम रहा मैं

चमचा-चमचा आस पली है।2

'बबुआ काम करेगा बढ़कर',

'दादाओं' ने बात कही है।3

'मम्मी' का मैं राजदुलारा

लगता, 'पगड़ी' माथ चढ़ी है।4

अपनी कुर्सी पर बैठा 'वह'

दिल में कितनी बात खली है!5

साँझ-सबेरे ईश-विनय कर

'राम-रमा' में प्रीत जगी है।6

रंगे आज सियार बहुत हैं

मुझपर सबकी आँख लगी है।7

चोट…

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Posted on November 11, 2018 at 11:08am — 6 Comments

गजल(उठे हैं.....)

122 122  122 12

उठे हैं किसी को गिरा के मियाँ

चले पाग सर पे सजा के मियाँ।1

कहा था, डरेगा न कोई यहाँ

रहे खुद को हाफ़िज बना के मियाँ।2

रहेगा न सूखा शज़र एक भी--

कहें नीर सारा सुखा के मियाँ।3

मिटी भूख उनकी हुए सब सुखी

चहकते चले माल खा के मियाँ।4

किये लाख सज़दे, मिले कब सनम?

गये थे कभी सर नवा के…

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Posted on October 29, 2018 at 7:15am — 10 Comments

Comment Wall (5 comments)

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At 11:05pm on June 27, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय मनन कुमार सिंह जी बहुत शुक्रिया आपने जो हौसला बढ़ाया है
At 11:03pm on September 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
आदरणीय
श्री मनन कुमार सिंह जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
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सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन
At 8:47pm on May 24, 2015, kanta roy said…
स्वागत आपका दोस्त
At 5:20pm on April 12, 2015, Manan Kumar singh said…
आदरणीय गोपालजी, आपकी मित्रता मेरे लिए अमूल्य है।
At 8:29pm on April 7, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आ0 मनन जी

आपकी मित्रता मेरा गौरव है . सादर .

 
 
 

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