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Manan Kumar singh
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Manan Kumar singh posted a blog post

ग्राहक फ्रेंडली(लघुकथा)

बैंक ने रेहन रखी संपत्तियों की नीलामी की सूचना छपवाई।साथ में फोन पर बात करती किसी लड़की की भी फोटो छप गई। बैंक वाले खुश थे कि इससे नीलामी प्रक्रिया का प्रचार प्रसार होगा,मुफ्त में ।उधर फोटो वाली लड़की आग - बबूला हो रही थी  -- ' भला ऐसा कैसे कर सकते हैं ये बैंक वाले?' ' कर चुके,' दूसरे ग्राहक ने आं खें मटकाई। ' अरे मैं तो इस ऑफिस में कल पैसे जमा कराने आई थी,जब ये बैंक वाले अपने नोटिस बोर्ड की फोटो ले रहे थे...करम..ज ...ले सब।' ' और संपत्ति विवरण में आपकी भी फोटो आ गई?' ' और क्या?..…. ये सब…See More
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Manan Kumar singh's blog post कान और कांव कांव(लघुकथा)
"आ. भाई मनन जी, अच्छी कथा हुई है । हार्दिक बधाई।"
Tuesday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-111
"आभार आदरणीया।"
Jan 12
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-111
"       ग़ज़ल          *** कान कौवे ले गएवो गए रे, ये गए।नागरिकता की हवामें उड़े ठिगने गए।कुछ उठा झंडे यहां'जय व भय' कहते गए।आंख मूंदे आदमीनाव को खेते गए।जो 'हिजाबों ' में रहेवे…"
Jan 12
Manan Kumar singh posted a blog post

कान और कांव कांव(लघुकथा)

कान और कांव कांव  *****एक आदमी(नकाब में) :तेरे कान कौवे ले गए।दूसरा:एं?पहला:और क्या?वो देखो, कौवे उड़ते जा रहे हैं।दूसरा व्यक्ति दो कौवों के पीछे दौड़ने लगा। उसके पीछे एक एक कर लोग दौड़ने लगे। कारवां बन गया....गुबार देखते बनता था ... कारवां के पिछले हिस्से में दौड़ते हांफते लोग एक दूसरे से सवाल करते कि आखिर वे कहां जा रहे हैं,क्या कर रहे हैं? हां, आगे के हिस्से की आवाज में आवाज जरूर मिलाते कि ' वापस दो,वापस दो...।' कोई कोई तो ' वापस लो..वापस लो..' की भी आवाज उठाता।भीड़ के पृष्ठ भाग में उड़ते दो…See More
Jan 11
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-111
"ओहो,पूरा ही भ्रम आदरणीया। हां,महज मेरी तरफ।"
Jan 11
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-111
"कान और कांव कांव *****एक आदमी(नकाब में) :तेरे कान कौवे ले गए।दूसरा:एं?पहला:और क्या?वो देखो, कौवे उड़ते जा रहे हैं।दूसरा व्यक्ति दो कौवों के पीछे दौड़ने लगा। उसके पीछे एक एक कर लोग दौड़ने लगे। कारवां बन गया....गुबार देखते बनता था ... कारवां के पिछले…"
Jan 11
Samar kabeer commented on Manan Kumar singh's blog post जांच की रिपोर्ट
"जनाब मनन कुमार सिंह जी आदाब,अच्छी लघुकथा लिखी आपने,बधाई स्वीकार करें ।कि"
Jan 3
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-57 (विषय: औलाद)
"आपका आभार आदरणीया।"
Dec 31, 2019
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-57 (विषय: औलाद)
"आपका आभार आदरणीय विनय जी।"
Dec 31, 2019
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-57 (विषय: औलाद)
"आपका आभार आदरणीय विनय जी।"
Dec 31, 2019
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-57 (विषय: औलाद)
"आपका आभार आदरणीय विनय जी।"
Dec 31, 2019
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-57 (विषय: औलाद)
"आदरणीय उसमनी  जी,आपका आभार! औलाद,जनमानस व भविष्य का मेल आपने अच्छे ढंग से प्रतिपादित किया है।ये तीनों वस्तुतः एक दूसरे से परस्पर आबद्ध हैं।"
Dec 31, 2019
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-57 (विषय: औलाद)
"आदरणीय उसमनी  जी,आपका आभार! औलाद,जनमानस व भविष्य का मेल आपने अच्छे ढंग से प्रतिपादित किया है।ये तीनों वस्तुतः एक दूसरे से परस्पर आबद्ध हैं।"
Dec 31, 2019
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-57 (विषय: औलाद)
"आदरणीया प्रतिभा जी, आपका बहुत बहुत आभार व्यक्त करता हूं। हां,यह सही है कि डिजिटल क्रांति है,जानकारियां उपलब्ध हैं।परन्तु, सही जानकारी या तथ्य को ठीक ढंग से परख लेने के बाद भटकाव की स्थिति कहां आती है?आधी अधूरी जानकारी तथा औरों के बहकावे में आने के…"
Dec 31, 2019
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-57 (विषय: औलाद)
"आपका आभार आदरणीय लक्ष्मण जी।"
Dec 31, 2019

Profile Information

Gender
Male
City State
Mumbai
Native Place
E 52 Krishna Apt , Patna
Profession
Service
About me
A poet/ Writer

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ग्राहक फ्रेंडली(लघुकथा)

बैंक ने रेहन रखी संपत्तियों की नीलामी की सूचना छपवाई।साथ में फोन पर बात करती किसी लड़की की भी फोटो छप गई। बैंक वाले खुश थे कि इससे नीलामी प्रक्रिया का प्रचार प्रसार होगा,मुफ्त में ।उधर फोटो वाली लड़की आग - बबूला हो रही थी  --

' भला ऐसा कैसे कर सकते हैं ये बैंक वाले?'

' कर चुके,' दूसरे ग्राहक ने आं खें मटकाई।

' अरे मैं तो इस ऑफिस में कल पैसे जमा कराने आई थी,जब ये बैंक वाले अपने नोटिस बोर्ड की फोटो ले रहे थे...करम..ज ...ले सब।'

' और संपत्ति विवरण में आपकी भी फोटो…

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Posted on January 16, 2020 at 7:00pm

कान और कांव कांव(लघुकथा)

कान और कांव कांव 

*****

एक आदमी(नकाब में) :तेरे कान कौवे ले गए।

दूसरा:एं?

पहला:और क्या?वो देखो, कौवे उड़ते जा रहे हैं।

दूसरा व्यक्ति दो कौवों के पीछे दौड़ने लगा। उसके पीछे एक एक कर लोग दौड़ने लगे। कारवां बन गया....गुबार देखते बनता था ... कारवां के पिछले हिस्से में दौड़ते हांफते लोग एक दूसरे से सवाल करते कि आखिर वे कहां जा रहे हैं,क्या कर रहे हैं? हां, आगे के हिस्से की आवाज में आवाज जरूर मिलाते कि ' वापस दो,वापस दो...।' कोई कोई तो ' वापस लो..वापस लो..' की भी आवाज…

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Posted on January 11, 2020 at 2:58pm — 1 Comment

जांच की रिपोर्ट

लड़की को डायरिया थी।आज उसे इस तीसरे नामी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया।रिपोर्ट की फाइलें साथ थीं।घरवाले परेशान थे,पर हॉस्पिटल तो जैसे देवालय हो।सब लोग बड़े आराम से अपनी अपनी ड्यूटी में लगे थे।डॉक्टर आया।सुना था कि बड़ा डॉक्टर है।उसने सरसरी निगाह से कुछ ताजा रिपोर्टें देखी।फिर दवाएं लिखने लगा।तीमारदारों में से एक ने यूरिन कल्चर की रिपोर्ट की तरफ इंगित करना चाहा,पर डॉक्टर ने कोई तवज्जो नहीं दी।दवाएं लिख दी।इलाज शुरू हुआ।लड़की की तबीयत बिगड़ती ही गई।पेट फूलता जा रहा था।फिर रात को घरवालों ने…

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Posted on December 29, 2019 at 12:42pm — 1 Comment

गजल(वोटर.....)

वोटर पापड़ बेल रहे हैं

और मसीहे खेल रहे हैं।1

उम्मीदें जिनकी मुरझाईं

उट्ठक - बैठक पेल रहे हैं।2

मत देने पर स्याही सूखी,

दाग लगे, सब झेल रहे हैं।3

लड़ते - मरते लोग - लुगाई

नेता भरसक रेल रहे हैं।4

'अक्ल बड़ी कह भैंस लजाई,

अंधे गाड़ी ठेल रहे हैं।5

जिसकी पूंछ मिले,पकड़ें सब

बैतरणी को हेल रहे हैं।6

पाठ पढ़ाते चलते हैं वे

जो जीवन भर फेल रहे हैं।7

कुर्सी खातिर मिल…

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Posted on December 14, 2019 at 4:44pm — 3 Comments

Comment Wall (6 comments)

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At 2:33pm on September 28, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय मनन कुमार सिंह जी आदाब बहुत शुक्रिया आपने समय निकाला और मेरा हौसला बढ़ाया मैं ह्रदय से शुक्रगुज़ार हूँ| बहुत शुक्रिया!
At 11:05pm on June 27, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय मनन कुमार सिंह जी बहुत शुक्रिया आपने जो हौसला बढ़ाया है
At 11:03pm on September 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
आदरणीय
श्री मनन कुमार सिंह जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन
At 8:47pm on May 24, 2015, kanta roy said…
स्वागत आपका दोस्त
At 5:20pm on April 12, 2015, Manan Kumar singh said…
आदरणीय गोपालजी, आपकी मित्रता मेरे लिए अमूल्य है।
At 8:29pm on April 7, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आ0 मनन जी

आपकी मित्रता मेरा गौरव है . सादर .

 
 
 

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