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Manan Kumar singh
  • बिहार
  • India
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"आभार आदरणीय अजीत भाई।"
4 hours ago
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"बहुत बहुत आभार आदणीय सुरेन्द्र जी।"
10 hours ago
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"आपका आभार आदरणीय।"
14 hours ago
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"बढ़िया! गिरह के दर्द को गिरह मुखरित किया गया है।"
16 hours ago
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"दर्द में दम है।"
16 hours ago
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"बहुत उम्दा गजल आदनियागिरह भी जबरदस्त लगी है,बधाइयाँ।"
16 hours ago
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"शुक्रिया आदरणीय शिज्जू जी।"
16 hours ago
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"आभारी हूँ आदरणीय आकाश जी।"
16 hours ago
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"आदरणीय समर जी,क्या खूब अंदाजे-बयां! बधाइयाँ कम पड़ जाएँ तो क्या करें? उस्ताद जो गिरह यूँ लगाएँ तो क्या करें??"
yesterday
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"बढ़िया गजल आदरणीय,बधाइयाँ!हाँ, खिड़की से झाँकते चाँद को भूलेंगे,तो झाँक चुके पर क्या कहेंगे?"
yesterday
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"बढ़िया !बधाई!!"
yesterday
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"बधाई आदरणीय! गिरह  में ----जब दर्द काफूर हो रहा, तो फिर भूलना क्या?"
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"बहुत अच्छी गजल,आदरणीय शिज्जू जी,बधाई।"
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"आदनिया राजेश जी,आपका आभार।"
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"बढ़िया प्रयास अंजलि जी,बधाई।"
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"आदरणीय समर साहिब नमस्ते,आभारी हूँ।"
yesterday

Profile Information

Gender
Male
City State
Mumbai
Native Place
E 52 Krishna Apt , Patna
Profession
Service
About me
A poet/ Writer

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हेडलाइन(लघुकथा)

-हेलो सर।

-हाँ, बोलो रवि',समाचार-संपादक ने खबर की बावत तफ्तीश की।

-जोरदार खबर है सर।

-बताओ भी जल्दी।जान मत खाओ।

-सर,शहर-कोतवाल की बीबी भाग गई।पहले बेटी,अब....।

-धत्त ससुरे!ये भी कोई खबर है?

-तहलका मच जायेगा सर,इस खबर से।

-नहीं रे,कुछ नहीं होगा।अभी घोटालों की खबर चाहिए, ....बस घोटालों की।

-वो भी है साहिब।

-तो बोल ना रे....।

-आज कलम वाली कंपनी के यहाँ छापे पड़ रहे हैं।

-कहाँ?

-यू पी में।हजारों करोड़ की बात…

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Posted on February 20, 2018 at 8:30am — 6 Comments

वेलेंटाइन गिफ्ट(लघु कथा)



शहरी छोरा देहात घूमने आया है,मौसी के यहाँ।गाँव का नाम पंडितपुर है,देहात यहाँ दिखता है। उजड्ड लोग,अनपढ़ औरतें,गिल्ली-डंडा, कबड्डी और तिलंगी में अझुराये लड़के-बच्चे।बकरी चराती, मवेशियों को सानी देती लड़कियाँ, बस।गाँव के स्कूल की पढ़ाई का आलम है कि तीन-तीन बार मैट्रिक में फेल हुए तीन मास्टर दिहाड़ी जितनी रकम पर उसे संभाले हुए हैं।रही बात विद्यार्थियों की ,तो खिचड़ी के नाम पर कुछ घर से समय निकालकर आ जाते हैं।फिर खिचड़ी खतम, स्कूल खतम।मुखियाजी से मिलकर रजिस्टर -लिखाई हो जाती है।वही झुनिया जरा…

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Posted on February 14, 2018 at 10:04pm — 8 Comments

बातचीत(लघु कथा)


-मेरी तो पक गयी।
-मेरी भी छन गयी।
-तो चल सब को छकाया जाय',पकौड़ी और छकौड़ी छहकती हुई एक साथ बोलीं।
-लेकिन उसके लिए चाय चाहिए,जो मेरे ही पास है',केतली ने कहर भरी नजर से  दोनों को देखा।
-आ जा राम प्यारी! चल साथ-साथ चलते हैं',छकौड़ी और पकौड़ी केतली को गले लगाने लगीं।

"मौलिक व अप्रकाशित"

Posted on February 7, 2018 at 10:06am — 1 Comment

बीरबल की खिचड़ी(लघु कथा)

-कब फिरेंगे अपने दिन?

-फिर ही तो रहे हैं।सुबह से शाम,फिर बातें तमाम।

-अरे भइये!अच्छे दिन आनेवाले थे।सुना था कभी।

-सब दिन अच्छे होते हैं।सब ईश्वर प्रदत्त हैं।

-सो तो ठीक है,अकलू।पर यहाँ तो 'नून-तेल-तरकारी,पड़ रही है भारी।'

-ठीके बोलते हो ,बकलू।ई नयको बजटवा में तरकारी महंगी हुई है।और वनस्पति तेल भी।

-ऊपर से होरी आई है।रंग फीका हो गया भाई।

-सो तो है।

-अरे का खुसर-पुसर चल रहल बा रे तू दुनो में?' टकलू ने टिटकारी भरी।

-लो आ गया अपन टकलू।'जोरू न…

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Posted on February 4, 2018 at 11:30pm — 5 Comments

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At 11:03pm on September 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
आदरणीय
श्री मनन कुमार सिंह जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन
At 8:47pm on May 24, 2015, kanta roy said…
स्वागत आपका दोस्त
At 5:20pm on April 12, 2015, Manan Kumar singh said…
आदरणीय गोपालजी, आपकी मित्रता मेरे लिए अमूल्य है।
At 8:29pm on April 7, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आ0 मनन जी

आपकी मित्रता मेरा गौरव है . सादर .

 
 
 

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