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Manan Kumar singh
  • बिहार
  • India
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Manan Kumar singh's blog post प्रति व्यक्ति आय
"आ. भाई मनन जी, सादर अभिवादन। सुन्दर समसामयिक लघुकथा हुई है। हार्दिक बधाई।"
4 hours ago
Manan Kumar singh posted blog posts
Monday
Manan Kumar singh replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-88 (विषय: 'संतान)
"आपका आभार आदरणीया प्रतिभा जी।"
Jul 31
Manan Kumar singh replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-88 (विषय: 'संतान)
"जी आपका आभार।"
Jul 31
Manan Kumar singh replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-88 (विषय: 'संतान)
"आपका आभार आदरणीय योगराज जी।आपकी सलाह अनुकरणीय है।"
Jul 31
Manan Kumar singh replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-88 (विषय: 'संतान)
"आदरणीय तेजवीर भाई जी,लघुकथा के लिए बधाई। हां,यहां नकारात्मकता कुछ ज्यादा ही हावी हुई लगती है।'शिव जी का धनुष किसने तोड़ा होगा,तो मंगरुआ ने ही,ऐसा हमेशा सच नहीं होता न। फिलवक्त बधाइयां।"
Jul 31
Manan Kumar singh replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-88 (विषय: 'संतान)
"आपका आभार भाई चेतन, प्रकाश जी।"
Jul 31
Manan Kumar singh replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-88 (विषय: 'संतान)
"आपका हार्दिक आभार मोहतरम ,उस्मानी जी।"
Jul 30
Manan Kumar singh replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-88 (विषय: 'संतान)
"  डालियां भयंकर झंझावात से खंडित हुए पेड़ के एक हिस्से के रिक्त स्थान से कोंपलें निकलीं।बढ़ती गईं।शाखें हुईं।फिर पहले की डालियों से नई डालियां टकराने लगीं।माद्दा कि हम ही असली जड़ की उपज हैं।पुरानी डालें, पातें सूखेंगी।झड़ेंगी।डालें कट जाएंगी।…"
Jul 30
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-87 (विषय: मार्गदर्शन)
"लघुकथा गोष्ठी का आज अंतिम दिन उम्मीदों से पूर्ण है।"
Jun 30
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-87 (विषय: मार्गदर्शन)
"अंतर्व्यथा मैं पानी की एक बूंद हूं। समंदर के अंदर के उथल - पुथल,कोलाहल और ताप से उत्तप्त हो उठते भाव - भाप के संघनित होने से मैं  नभ में सृजित हुई।फिर प्यासी -झुलसती धरती की प्यास बुझाने की कामना मुझमें जागृत हुई।सोचा,किसी मरते को जीवन देकर…"
Jun 29
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-86 (विषय: समर्पण)
"आ.उस्मानिजी,आपकी चिंता बिलकुल जायज है।ऐसा मैं भी सोच रहा हूं।आपके द्वारा इंगित सभी बिंदु सार्थक हैं।इस मंच की लघुकथा गोष्ठी में इस तरह की उदासीनता चिंतनीय है। हां,यदि कुछ अन्य कारण हों,तो मैं क्षमा प्रार्थी रहूंगा।"
May 31
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-86 (विषय: समर्पण)
"आभार आ.रचना जी।"
May 31
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-86 (विषय: समर्पण)
"गोष्ठी की शुरुआत करने हेतु आपको बधाई आ.उस्मानी जी।"
May 30
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-86 (विषय: समर्पण)
"बेवफा उड़ता बादल थमा।थका हुआ था।नीचे धरा का विस्तृत आंचल दिखा।बरसने लगा।बरसता ही गया।धरती नहाई।प्रफुल्लित,प्रमुदित हुई। उसकी कोख में संचित बीज अंकुरित हुए।प्रस्फुटित हुए। बिरवे निकल चले।वह धन्य हुई। पल्लवित पौधों की हवाओं संग अठखेलियां देख धरा की…"
May 30
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143
"आभार आ.नाहक जी।"
May 28

Profile Information

Gender
Male
City State
Mumbai
Native Place
E 52 Krishna Apt , Patna
Profession
Service
About me
A poet/ Writer

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आजादी

आजादी

1. मैं शाम को स्कूटी से आ रहा था।एक ऑटो से आगे निकलता कि उसी लेन में सामने से तेज गति से लहराती एक मोटर साइकिल आ गई। मैं थोड़ा दाएं हटा,ऑटो थोड़ा बाएं।मोटर साइकिल सवार बेधड़क निकल गए।भयमुक्त होने के बाद मैंने पीछे की तरफ आंखें तरेड़ी।

"कोई फायदा नहीं।आजादी है।"ऑटो ड्राइवर बोला।

2. फ्लैट के म्यूटेशन के क्रम में वह आज फिर निगम कार्यालय गया।कागजात पहले ही जमा हो चुके थे।संबंधित अधिकारी से उस दिन बात शुरू हुई थी,तो वह बोला था," आदेश होगा,तो आपका…

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Posted on August 15, 2022 at 11:41am

प्रति व्यक्ति आय

"हमारा देश तरक्की कर रहा है।प्रति व्यक्ति आय लगातार बढ़ी है।"अर्थशास्त्री ने ज्ञान बघाड़ा।
"तो लोगों के हाथ में भीख का कटोरा क्यों है?"समाजशास्त्री ने कील चुभोई।
"भीख का कटोरा?मतलब?"
"लोग मुफ्त का राशन खाने को मजबूर हैं।मंदिरों -मस्जिदों के सामने एक -एक सिक्के के लिए गुहार लगाते लोग नहीं दिखते आपको?" सुनकर अर्थशास्त्री जी मुंह फिरा चल पड़े।
"मौलिक एवं अप्रकाशित"

Posted on August 14, 2022 at 7:45pm — 1 Comment

निर्भरता(लघुकथा)

मलाई की मिठाई बेचते बेचते मंगनी हलवाई का नाम चल निकला था।वह दूधवालों से खास मौकों पर दूध लेता।मिठाई बनाता।बेचता। बानगी के तौर थोड़ा थोड़ा दूध देनेवालों को चखने भर दे देता। वाह वाह होती।क्या खूब मिठाई बनाता है अपुन का मंगनी,ऐसा सब कहते फिरते।मंगनी की शोहरत बढ़ती।मिठाई की मांग में इजाफा होता।वह मालामाल होता।

आज फिर उसने दूधवालों से दूध पहुंचाने की अपील कर डाली।शर्तें हैं कि हर दूधवाला खुद उसके यहां दूध पहुंचाए।पेठवना नहीं चलेगा। और हां,अब जो मिठाई बनेगी उसे दूध…

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Posted on September 6, 2021 at 3:00pm — 4 Comments

हिस्सा (लघुकथा)

आखिरकार जंगल के पेड़ों की गिनती के उपरांत पक्षियों और पशुओं की, उनकी जाति आधारित गिनती प्रारंभ हुई।कौवे कांव कांव करने लगे कि हम भी संख्या में कम नहीं हैं। गिद्ध अलग ही राग छेड़े हुए थे कि हम लुप्तप्राय हैं तो क्या,हमारी हिस्सेदारी जंगल की चीजों में कम क्यों हो?तीतर -बटेर,गौरैए आदि हर तरह के पक्षी जंगल की चीजों पर अपना हक जमाने के लिए बेताबी से अपने अपने तर्क रखते।कोई संख्या,तो कोई समझ पर जोर देता।कोई मुफ्तखोरी के चलते आलसी हो चुके परिंदों के हाथ पांख चलाने,खाना चुगने की जुगत पर…

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Posted on August 24, 2021 at 8:00am — 5 Comments

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At 12:51pm on January 23, 2020, TEJ VEER SINGH said…

जन्म दिन की हार्दिक बधाई एवम शुभ कामनायें आदरणीय मनन कुमार सिंह जी।

At 2:33pm on September 28, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय मनन कुमार सिंह जी आदाब बहुत शुक्रिया आपने समय निकाला और मेरा हौसला बढ़ाया मैं ह्रदय से शुक्रगुज़ार हूँ| बहुत शुक्रिया!
At 11:05pm on June 27, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय मनन कुमार सिंह जी बहुत शुक्रिया आपने जो हौसला बढ़ाया है
At 11:03pm on September 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
आदरणीय
श्री मनन कुमार सिंह जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन
At 8:47pm on May 24, 2015, kanta roy said…
स्वागत आपका दोस्त
At 5:20pm on April 12, 2015, Manan Kumar singh said…
आदरणीय गोपालजी, आपकी मित्रता मेरे लिए अमूल्य है।
At 8:29pm on April 7, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आ0 मनन जी

आपकी मित्रता मेरा गौरव है . सादर .

 
 
 

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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Manan Kumar singh's blog post प्रति व्यक्ति आय
"आ. भाई मनन जी, सादर अभिवादन। सुन्दर समसामयिक लघुकथा हुई है। हार्दिक बधाई।"
4 hours ago
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post आशा
"लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी, रचना अच्छी लगी , जानकर खुशी हुर्ई। हार्दिक आभार आपका , सादर"
5 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Usha Awasthi's blog post आशा
"आ. ऊषा जी, सादर अभिवादन। अच्छी रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Awanish Dhar Dvivedi's blog post गज़ल
"आ. भाई अवनीश जी, सादर अभिवादन। सुन्दर रचना हुई है। हार्दिक बधाई."
7 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-अलग है
"आ. भाई ब्रिजेश जी, सादर अभिवादन। बहुत सुन्दर इजल हुई है। हार्दिक बधाई।"
7 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी's blog post ग़ज़ल (जुनून-ए-इश्क़ जिसे हो कहाँ ठहरता है)
"आ. भाई अमीरूद्दीन जी, सादर अभिवादन। सुन्दर गजल हुई है । हार्दिक बधाई।"
8 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on babitagupta's blog post प्रेमचंद जी के जन्मदिन पर लेख
"आ. बहन प्रतिभा जी, सादर अभिवादन। प्रेचन्द जी पर सारगर्भित लेख हुआ है। हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
8 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

कान्हा कहाँ गये -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

२२१/२१२१/२२१/२१२*फिरती स्वयम्  से  पूछती  राधा  कहाँ गयेभक्तों के दुख को भूल के कान्हा कहाँ…See More
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Deo Shankar Navin is now a member of Open Books Online
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ग़ज़ल की कक्षा

इस समूह मे ग़ज़ल की कक्षा आदरणीय श्री तिलक राज कपूर द्वारा आयोजित की जाएगी, जो सदस्य सीखने के…See More
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Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post क्या दबदबा हमारा है!
"अवनीश धर द्विवेदी जी, रचना सुन्दर लगने हेतु हार्दिक आभार आपका, सादर।"
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