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Rakshita Singh
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Latest Activity

दिगंबर नासवा commented on Rakshita Singh's blog post उन्हें मालूम नहीं ...
"आपकी कहन ठीक है ... मौलिक विचार हैं आपके पास ...  इसको ग़ज़ल के अंदाज़ में लिखने का प्रयास करें तो जरूर सफल होंगी ... इस मंच पर उपलब्ध जानकारी और आदरणीय समर साहब से मार्गदर्शन ले के प्रयास करें ... जल्दी ही अच्छी ग़ज़ल और शेर कह पाएंगी आप ... बहुत…"
Wednesday
Samar kabeer commented on Rakshita Singh's blog post उन्हें मालूम नहीं ...
"मुहतरमा रक्षिता सिंह जी आदाब,क्या ये ग़ज़ल है? अगर हाँ तो इसके अरकान क्या हैं? 'गलीचा बुन रहे हैं ये उन्हें मालूम नहीं' इस पंक्ति में 'गलीचा' ग़लत शब्द है,सहीह शब्द है "ग़ालीचा" ।"
Tuesday
Rakshita Singh posted a blog post

उन्हें मालूम नहीं ...

बड़ी खामोशी से वो कर रहें हैं गुफ्तगूमगर सब सुन रहे हैं ये उन्हें मालूम नहीं !!मोहब्बत के खिलें हैं फूल जिनके दर्मियाँवो काँटे चुन रहे हैं ये उन्हें मालूम नहीं !!यूँ शब भर जागकर सौदाई बन तन्हाई कागलीचा बुन रहे हैं ये उन्हें मालूम नहीं !!किये हैं ज़ब्त, वादों में जो रिश्ते प्यार केवो रिश्ते घुन रहें हैं ये उन्हें मालूम नहीं !!वो हमसे पूंछते हैं इश्क करने की वज़ह मोहब्बत बेवज़ह है ये उन्हें मालूम नहीं !!मोहब्बत के बने बैठे हैं मीर,अंजुमन में -असल में इश्क क्या है खुद उन्हें मालूम नहीं है !!लगाके…See More
Monday

सदस्य कार्यकारिणी
शिज्जु "शकूर" commented on Rakshita Singh's blog post अल्फाज़
"अच्छी भावाभिव्यक्ति है, सादर बधाई आपको"
Feb 12
Rafique Nagori commented on Rakshita Singh's blog post अल्फाज़
"WAA"
Feb 10
Samar kabeer commented on Rakshita Singh's blog post अल्फाज़
"मुहतरमा रक्षिता सिंह जी आदाब,अच्छी रचना हुई,बधाई स्वीकार करें ।"
Feb 8
Rakshita Singh commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल मनोज अहसास
" आदरणीय मनोज जी नमस्कार  बहुत सुंदर पंक्तियाँ, हार्दिक बधाई स्वीकार करें।"
Feb 8
Rakshita Singh posted a blog post

अल्फाज़

अल्फाज़ रूठें हैं -छोटे बच्चों की तरह,  मेरी शायरी पर -अपने पैर पटक रहे हैं,बहुत अरसे के बाद -आया हूँ मिलने इनसे,यकीनन इसलिए-रूठे हैं मुझसे कट रहे हैं !!(मौलिक व अप्रकाशित)See More
Feb 8
Rakshita Singh commented on Maheshwari Kaneri's blog post कुछ अनमोल रिश्ते   ( कहानी )
" आदरणीया कनेरी जी, नमस्कार  भावविभोर कर देने वाली सुंदर लघुकथा। "
Feb 8
Rakshita Singh commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post सुन! जो उनसे हो मुलाकात जाये तो क्या होगा
"आदरणीय अमोद जी ,नमस्कार ! बहुत सुंदर भाव, बधाई हो। "जाये तो क्या होगा"  के स्थान पर यदि रदीफ़  "हो जाये तो क्या होगाा"  ज्यादा उचित रहेेेेगा । कुछ अन्य बदलाव भी जो मुझे आवश्यक लगे, कृपया गौर फरमाइये ।    …"
Feb 8
Rakshita Singh commented on Rakshita Singh's blog post प्रिय
"आदरणीय महेन्द्र जी नमस्कार, रचना पर आपकी प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद ।।"
Jan 14
Mahendra Kumar commented on Rakshita Singh's blog post प्रिय
"अच्छी रचना है आदरणीया रक्षिता सिंह जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर."
Jan 7
Samar kabeer commented on Rakshita Singh's blog post प्रिय
"मोहतरमा रक्षिता सिंह जी आदाब,अच्छी रचना हुई है,बधाई स्वीकार करें ।"
Jan 5
Rakshita Singh posted a blog post

प्रिय

तेरी मीठी बातों से ही भरता मेरा पेट प्रिय,जिस दिन तू गुमसुम रहती है-भूखा मैं सो जाता हूँ !!मैखाना, ये आँखें तेरीपीने दे मत रोक प्रिय,जब जब ये छलका करती हैं-और बहक मैं जाता हूँ !!रहता हूँ तेरे दिल में मैं बनकर तेरा दास प्रिय,जब भी टूटा है दिल तेरा-तब मैं बेघर हो जाता हूँ !!मदहोश सा कुछ हो जाता हूँ जब होती हो तुम साथ प्रिय,छू कर निकलूँ जो लव तेरे तो-ज़ुल्फ़ों में खो जाता हूँ !!तू ही कह दे अब कहाँ गुजारूँतुझ बिन अपनी रात प्रिय,तेरी ही बाहों में अक्सर-थककर के मैं सो जाता हूँ !!तुम बिन मेरा जीवित…See More
Jan 4
Rakshita Singh commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post गजल- नहीं आती
"आदरणीय बसंत जी  नमस्कार  बहुत ही सुंदर  प्रस्तुति, हार्दिक बधाई स्वीकार करें। "
Nov 1, 2018
Rakshita Singh commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ग़ज़ल - ज़माने के लिए
"आदरणीय बसंत जी बहुत ही खूबसूरत गज़ल। बहुत बहुत बधाई"
Sep 15, 2018

Profile Information

Gender
Female
City State
Noida
Native Place
Ujhani
Profession
Fashion desinger
About me
NA

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At 10:25pm on June 20, 2018, SudhenduOjha said…

आदरणीया सुश्री रक्षिता सिंह जी, नमस्कार। रचना आपको पसंद आई, धन्यवाद....

Rakshita Singh's Blog

उन्हें मालूम नहीं ...

बड़ी खामोशी से वो कर रहें हैं गुफ्तगू

मगर सब सुन रहे हैं ये उन्हें मालूम नहीं !!

मोहब्बत के खिलें हैं फूल जिनके दर्मियाँ

वो काँटे चुन रहे हैं ये उन्हें मालूम नहीं !!

यूँ शब भर जागकर सौदाई बन तन्हाई का

गलीचा बुन रहे हैं ये उन्हें मालूम नहीं !!

किये हैं ज़ब्त, वादों में जो रिश्ते प्यार के

वो रिश्ते घुन रहें हैं ये उन्हें मालूम नहीं !!

वो हमसे पूंछते हैं इश्क करने की वज़ह

मोहब्बत बेवज़ह है ये उन्हें मालूम नहीं…

Continue

Posted on February 18, 2019 at 9:49am — 2 Comments

अल्फाज़

अल्फाज़ रूठें हैं -
छोटे बच्चों की तरह,  

मेरी शायरी पर -
अपने पैर पटक रहे हैं,

बहुत अरसे के बाद -
आया हूँ मिलने इनसे,

यकीनन इसलिए-
रूठे हैं मुझसे कट रहे हैं !!

(मौलिक व अप्रकाशित)

Posted on February 8, 2019 at 10:25am — 4 Comments

प्रिय

तेरी मीठी बातों से ही

भरता मेरा पेट प्रिय,

जिस दिन तू गुमसुम रहती है-

भूखा मैं सो जाता हूँ !!

मैखाना, ये आँखें तेरी

पीने दे मत रोक प्रिय,

जब जब ये छलका करती हैं-

और बहक मैं जाता हूँ !!

रहता हूँ तेरे दिल में मैं

बनकर तेरा दास प्रिय,

जब भी टूटा है दिल तेरा-

तब मैं बेघर हो जाता हूँ !!

मदहोश सा कुछ हो जाता हूँ

जब होती हो तुम साथ प्रिय,

छू कर निकलूँ जो लव तेरे तो-

ज़ुल्फ़ों में खो जाता हूँ…

Continue

Posted on January 3, 2019 at 6:41pm — 4 Comments

विरह गीत

अश्रु भरे नैन,
नाहीं आवे मोहे चैन
कैसे कटें दिन रैन,
इस विरहा की मारी के...

मन में समायो है,
ये जसुदा को जायो
कोई ले चलो री गाम मोहे,
कृष्ण मुरारी के...

कर गयो टोना,
नंनबाबा को ये छोना
देख सांवरो सलौना,
गाऊँ गीत मल्हारी के...

व्याकुल सो मन
अकुलाये से नयन
बिन धीरज धरें ना
चितवन को निहारि के...

(मौलिक व अप्रकाशित)

Posted on August 19, 2018 at 8:58pm — 11 Comments

 
 
 

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