For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Rakshita Singh
  • Female
  • noida , uttar pradesh
  • India
Share

Rakshita Singh's Friends

  • Mohit mishra (mukt)
 

Rakshita Singh's Page

Latest Activity

राज़ नवादवी commented on Rakshita Singh's blog post जरा ज़ुल्फें हटाओ....(ग़ज़ल)
"आदरणीय रक्षिता जी, सुन्दर ग़ज़ल के प्रयास के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें. ये ग़ज़ल १२२२ १२२२ १२२२ १२२२ की बह्र में हैं. चुनांचे नीचे के शेर पे गौर कीजिएगा. क्या ये बह्र में हैं? दानिस्ता दिल जला के यूँ तेरा पर्दानशीं होना !है तीर-ए-नीमकश इसको जिगर के…"
Jul 1
Samar kabeer commented on Rakshita Singh's blog post जरा ज़ुल्फें हटाओ....(ग़ज़ल)
"जनाब लक्ष्मण धामी जी आदाब,आप ओबीओ के पुराने सदस्य होने के नाते ये बात अच्छी तरह जानते हैं कि इतनी मुख़्तसर टिप्पणी देना ओबीओ की परिपाटी नहीं है,उम्मीद है आप मेरी बात पर ध्यान अवश्य देंगे ।"
Jul 1
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Rakshita Singh's blog post जरा ज़ुल्फें हटाओ....(ग़ज़ल)
"हार्दिक बधाई .."
Jul 1
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Rakshita Singh's blog post जरा ज़ुल्फें हटाओ....(ग़ज़ल)
"अच्छी ग़ज़ल कही है आदरणीया...भाव बहुतखूब हैं.."
Jun 30
Dr Ashutosh Mishra commented on Rakshita Singh's blog post जरा ज़ुल्फें हटाओ....(ग़ज़ल)
"आदरणीया रक्षिता सिंह जी इस मनभावन ग़ज़ल के लिए ढेर सारी बधाई सादर "
Jun 29
Samar kabeer commented on Rakshita Singh's blog post जरा ज़ुल्फें हटाओ....(ग़ज़ल)
"मुहतरमा रक्षिता सिंह जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । कुछ बातें आपके संज्ञान में लाना चाहूँगा । 'बस्ल की रात हे तुमसे ज़रा सा प्यार में कर लूँ' सबसे पहली बात इस मिसरे में 'बस्ल'शब्द ग़लत है,सहीह शब्द…"
Jun 29
Neelam Upadhyaya commented on Rakshita Singh's blog post जरा ज़ुल्फें हटाओ....(ग़ज़ल)
"आदरणीया रक्षिता जी, नमस्कार । खूबसूरत गजल कि प्रस्तुति के हार्दिक बधाई ।  "
Jun 29
Shyam Narain Verma commented on Rakshita Singh's blog post जरा ज़ुल्फें हटाओ....(ग़ज़ल)
"क्या बात है .... बहुत उम्दा | बधाई आप को "
Jun 29
Rakshita Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-96
"आदरणीय अमित जी नमस्कार, आपकी शिर्कत व हौसला अफजाई के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया ।।"
Jun 28
Rakshita Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-96
"आदरणीय आरिफ जी नमस्कार, आपकी शिर्कत के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।"
Jun 28
Rakshita Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-96
"ये कहानी बहुत पुरानी है। मीत है, गीत है, सुनानी है।।1।। थी जो अपनी कभी बेगानी है। वो पड़ोसी की आज रानी है।।2।। पास मेरे ये जिंदगानी हैं। रात है नींद है कहानी है।।3।। आज फिर नींद किसको आनी है। भूख है, प्यास है, मिटानी है।।4।। और भी चोट दिल पे खानी…"
Jun 28
Rakshita Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-96
Jun 28
Amit Kumar "Amit" commented on Rakshita Singh's blog post जरा ज़ुल्फें हटाओ....(ग़ज़ल)
"आदरणीय रक्षिता जी शानदार एक शानदार दिल में उतरने वाली गज़ल कहने के लिए बहुत-बहुत बधाइयां"
Jun 28
Rakshita Singh commented on Rakshita Singh's blog post जरा ज़ुल्फें हटाओ....(ग़ज़ल)
"आदरणीय शहज़ाद जी नमस्कार, आपकी शिर्कत व हौसला अफजाई के लिए तहे दिल से शुक्रिया ।"
Jun 28
Sheikh Shahzad Usmani commented on Rakshita Singh's blog post जरा ज़ुल्फें हटाओ....(ग़ज़ल)
"प्यार के इज़हार और तहज़ीब पर बेहतरीन ग़ज़ल। हार्दिक बधाई आदरणीया  रक्षिता सिंह  साहिबा।"
Jun 28

Profile Information

Gender
Female
City State
Noida
Native Place
Ujhani
Profession
Fashion desinger
About me
NA

Comment Wall (1 comment)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 10:25pm on June 20, 2018, SudhenduOjha said…

आदरणीया सुश्री रक्षिता सिंह जी, नमस्कार। रचना आपको पसंद आई, धन्यवाद....

Rakshita Singh's Blog

जरा ज़ुल्फें हटाओ....(ग़ज़ल)

जरा ज़ुल्फें हटाओ चाँद का दीदार मैं कर लूँ !

बस्ल की रात है तुमसे जरा सा प्यार मैं कर लूँ !!



बड़ी शोखी लिए बैठा हूँ यूँ तो अपने दामन में !

इजाजत हो अगरतो इनको हदके पार मैंकरलूँ!!



मुआलिज है तू दर्दे दिल का ये अग़यार कहते हैं!

हरीमे यार में खुद को जरा बीमार मैं कर लूँ !!



यूँ ही बैठे रहें इकदूजे के आगोश में शबभर !

जमाना देख ना पाये कोई दीवार मैं कर लूँ !!



तुझे लेकर के बाहों में लब-ए-शीरीं को मैं चूमूँ !

कि होके बेगरज़ अब इकनहीं…

Continue

Posted on June 28, 2018 at 3:16pm — 11 Comments

आप बीती...

इक आवारा तितली सी मैं

उड़ती फिरती थी सड़कों पे...



दौड़ा करती थी राहों पे

इक चंचल हिरनी के जैसे ...



इक कदम यहाँ इक कदम वहाँ

बेपरवाह घूमा करती थी...



कर उछल कूद ऊँचे वृक्षों के

पत्ते चूमा करती थी...



चलते चलते यूँ ही लब पर

जो गीत मधुर आ जाता था...



बदरंग हवाओं में जैसे

सुख का मंजर छा जाता था...



बीते पल की यादों से फिर

मैं मन ही मन भरमाती थी...



इठलाती थी बलखाती थी

लहराती फिर…

Continue

Posted on June 21, 2018 at 11:30pm — 16 Comments

बेबसी...

तपती धूप,

जर्जर शरीर,

फुटपाथ का किनारा,

बदन पर पसीना,

किसी के आने के इन्तजार में...

पथराई सी आँखें,

घुटनों पर मुँह रखे-

एक टक, एक ही दिशा में देख रही थीं...



- ना जाने कब से?



यूँ तो सामने दो छतरी पड़ी थीं, पर

कड़ी धूप में जल-जल के,

बदन काला पड़ गया था ....



रंग बिरंगे रूमाल -

सजे तो बहुत थे, पर

जिस्म पसीने में लथपथ था....



सफेद बाल,

तजुर्बों की गबाही दे रहे थे....

जिस्म पर लटकती खाल…

Continue

Posted on June 19, 2018 at 6:30am — 11 Comments

तुम्हारे स्पर्श से....

मैं संग चल दी उनके,

मेरा मन यहीं रह गया...

उन्होंने दिखाये होंगे हजारों ख्वाब,

पर इन आँखों में रौशनी कहाँ थी !!

कितने ही गीत सुनाये होंगे उन्होंने,

पर इन कानों के पट तो बंद हो चुके थे !!

उनके सबालों का,

जबाब भी ना दे पायी थी मैं....

क्योंकी इन होठों पे, तुम्हारा ही नाम रखा था!!

कितना आक्रोश था उनके ह्रदय में,

जब उन्होंने,

मेरे केशों को पकड़कर खींचा था...

और मैं पत्थर सी हो गयी थी,

किसी भी आघात की पीड़ा ना हुई…

Continue

Posted on June 15, 2018 at 5:12pm — 11 Comments

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Mohammed Arif commented on Neelam Upadhyaya's blog post कुछ हाइकू
"आदरणीया नीलम उपाध्याय जी आदाब,                  …"
1 hour ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 87 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया प्रतिभा पांडे जी आदाब,                  …"
2 hours ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 87 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश जी आदाब,                      …"
2 hours ago
Afroz 'sahr' commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (हम अगर राहे वफ़ा में कामरां हो जाएँगे)
"बहुत खू़ब जनाब क्या कहने वाह,,,,"
2 hours ago
Arpana Sharma posted a blog post

"धरा की पाती"/ कविता-अर्पणा शर्मा, भोपाल

मैं तृषित धरा , आकुल ह्रदया, रचती हूँ ये पाती, मेरे बदरा, तुम खोए कहाँ, मुझसे रूठे क्यों, हे जल…See More
2 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 87 in the group चित्र से काव्य तक
"सुधीजनो ! सत्य तो यह है कि मैं कल मिली नीरज जी के गोलोकवासी होने की सूचना के कारण इस बार छंदोत्सव…"
5 hours ago
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 श्याम नारायण वर्मा साहब तहे दिल से शुक्रिया"
5 hours ago
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post हिचक--लघुकथा
"बहुत बहुत आभार आ नीलम उपाध्याय जी"
5 hours ago
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post हिचक--लघुकथा
"बहुत बहुत आभार आ शेख सहजाद उस्मानी साहब"
5 hours ago
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post हिचक--लघुकथा
"बहुत बहुत आभार आ तस्दीक़ अहमद खान साहब"
5 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 87 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया प्रतिभाजी हार्दिक बधाई चित्र के अनुरूप इस सुंदर सार्थक प्रस्तुति के लिए। प्यारे मुखड़े पर…"
6 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 87 in the group चित्र से काव्य तक
"मुह तरमा प्रतिभा साहिबा, प्रदत्त चित्र पर सुंदर कुकुभ छंद हुए हैं मुबारकबाद क़ुबुल फरमाएं l "
6 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service