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Ashok Kumar Raktale
  • Male
  • Ujjain,M.P.
  • India
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Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-129 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर, प्रदत्त चित्र पर दिन विशेष के महत्व के साथ ही इस दिन मनाये जाने वाले त्यौहारों की जानकारी आदि लिए सुन्दर छंद रचे हैं आपने. हार्दिक बधाई स्वीकारें. किन्तु प्रारम्भ के दो छंद कुकुभ न होकर 'लावणी' छंद हो गये…"
11 minutes ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-129 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय हिरेन अरविन्द जोशी जी सादर, प्रदत्त चित्र पर संक्रांति का महत्व और रीति दर्शाते सुंदर कुकुभ छंद रचे हैं आपने. हार्दिक बधाई स्वीकारें.  मंगल प्रसंग के शुभ मुहूर्त / द्वार खटखटायेगा वसंत ......कोई निश्चित नियम तो नहीं है किन्तु कुकुभ के…"
19 minutes ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-129 in the group चित्र से काव्य तक
"कुकुभ छंद   * स्नान मकर संक्रांति पर्व का, श्रद्धा से करते सारे । लगा-लगाकर हर डुबकी पर, सूर्य देव के जयकारे । बैठे गाध कई सरिता के, कई - कई गहरे जाते । कई अचंभित देखें उनको , जो डर-डर दिखे नहाते ।। * अयन बदल कर सूरज प्यारा, आया उत्तर के द्वारे…"
32 minutes ago
Ashok Kumar Raktale replied to Ashok Kumar Raktale's discussion समीक्षा : 'न बहुरे लोक के दिन' (नवगीत संग्रह) in the group पुस्तक समीक्षा
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत समीक्षा पर आपका आशीर्वाद से मेरे कार्य का मूल्यांकन हुआ. यह उत्तम और पठनीय नवीत संग्रह है. आपका हृदय से आभार. सादर"
Jan 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Ashok Kumar Raktale's discussion समीक्षा : 'न बहुरे लोक के दिन' (नवगीत संग्रह) in the group पुस्तक समीक्षा
"//नवगीत सृजन एक संवेदनशील मन की तपस्या का परिणाम होता है. जिसे परम्परा और आधुनिक काल का पूर्ण बोध हो. // उपर्युक्त पंक्ति की पारिभाषिक क्षमता नवगीत के विधान को पूर्णरूप से सार्थक साबित करती है.  आदरणीय अशोकजी, मुझे इस पाठकीय समीक्षा से…"
Jan 12
Ashok Kumar Raktale added a discussion to the group पुस्तक समीक्षा
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समीक्षा : 'न बहुरे लोक के दिन' (नवगीत संग्रह)

‘न बहुरे लोक के दिन’रचनाकार – अनामिका सिंहप्रकाशक – बोधि प्रकाशन, जयपुर (राज.)ISBN : 978-93-5536-091-5मूल्य -  रूपये 250/-             वर्ष २०२२ का प्रथम मास और चर्चित नवगीतकार अनामिका सिंह की प्रथम पुस्तक ‘न बहुरे लोक के दिन’ का प्राप्त होना एक सुखद अनभूति कराता है. आदरणीया का छंद रचते-रचते कब गीतों की ओर झुकाव हुआ पता ही नहीं चला और आज उनका यह प्रथम नवगीत ग्रन्थ हाथ में है.             पुस्तक की भूमिका लिखते हुए श्री वीरेंद्र आस्तिक लिखते हैं ‘संग्रह के नवगीत एक नए प्रकार के भाषा मुहावरे में…See More
Jan 12
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-128 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, जी ! उत्तम सुझाव है आपका. मैंने अपनी रचना में यह परिवर्तन कर लिया है. प्रस्तुत गीत रचना पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से आभार. सादर"
Dec 26, 2021
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-128 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय भाई लक्षमण धामी जी प्रस्तुत गीत रचना पर उत्साहवर्धन हेतु हृदय से आभार आपका. सादर"
Dec 26, 2021
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-128 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय चेतन प्रकाश जी सादर, प्रदत्त चित्र को भावों पर सुंदर सृजन हुआ है आपका. बहुत बधाई स्वीकारें. किन्तु तुक पर अभी कार्य किये जाने की महती आवश्यता है. सादर"
Dec 26, 2021
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-128 in the group चित्र से काव्य तक
"थकन से भरा पर  न कुछ खा रहा निवाला लिये हाथ  क्यों जम गये..................वाह ! शब्द-शब्द चित्र को परिभाषित करता शक्ति छंद आधारित सुंदर गीत रचा है आपने. हार्दिक बधाई स्वीकारें आदरणीया प्रतिभा पांडे जी. सादर"
Dec 26, 2021
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-128 in the group चित्र से काव्य तक
"किरन भोर की क्यों निकलती नहीं।कि तकदीर क्यों कर बदलती नहीं।।यही सोच रोटी निगलती नहीं।रुँधा कण्ठ पर आँख बहती नहीं।।...........प्रदत्त चित्र के माध्यम से कृषकों की पीड़ा को शब्द देते सुन्दर छंद रचे हैं आपने आदरणीय भाई लक्षमण धामी जी. हार्दिक बधाई…"
Dec 26, 2021
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-128 in the group चित्र से काव्य तक
"शक्ति छंद आधारित गीत   लगी एक हर दिन यही आस है । कभी तो बुझेगी भले प्यास है ।    * निवाला गले से उतरता नहीं, बुरा दौर जल्दी गुज़रता नहीं । उजाला खड़ा श्रम बना पास है । * मिली भूमि बंजर कहें खेत क्या, पड़े ढेर पत्थर कहें रेत क्या । उगेंगे…"
Dec 26, 2021
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-127 in the group चित्र से काव्य तक
"लिए गोद में नार नवजात है।किसी के लिए ना नयी बात है।।नयी सोच के जन नयी है सदी।तभी सीट उस को किसी ने न दी।।*.....बुरी आदतें प्रथा सी बनती जा रही है. आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर प्रदत्त चित्र पर सुंदर शक्ति छंद रचे हैं आपने. हार्दिक बधाई स्वीकारें.…"
Nov 21, 2021
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-127 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय चेतन प्रकाश जी सादर, प्रदत्त चित्र पर सुंदर शक्ति छंद रचे हैं आपने. हार्दिक बधाई स्वीकारें. सादर"
Nov 21, 2021
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-127 in the group चित्र से काव्य तक
"सभी युवतियाँ मास्क पहनी हुईबिचारी दुपट्टा लपेटे हुई.........वाह ! चित्र को बहुत बारीकी से निरखने का ही परिणाम है आपकी रचना में ऐसी पंक्ति का आना. आदरणीय मुकुल कुमार जी सादर, बहुत सुंदर रचना हुई है आपकी. आपने मात्रा क्रम का तो खूब ध्यान रखा है,…"
Nov 21, 2021
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-127 in the group चित्र से काव्य तक
"न शिक्षा सही है न संस्कार है| बिगड़ते युवा देश लाचार है||...........सही कहा है आपने. कहीं न कहीं हम सभी से चूक हो रही है. इसीकारण यह परिवेश निर्माण हो रहा है. आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब बहुत सुंदर छंद प्रदत्त चित्र पर रचे हैं आपने. हार्दिक…"
Nov 21, 2021

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Ujjain
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About me
I am a technical person and always talk in right angle.

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ग़ज़ल

1222 1222 1222



मिला था जो हमें पल खो दिया हमने

मुलायम नर्म मखमल खो दिया हमने ।

*

बचा रख्खे हैं यादों के नुकीले शर

मज़े से झूमता कल खो दिया हमने ।

*

उड़ा दी खुशबुएँ जो साथ रहती थीं

गँवा दी उम्र संदल खो दिया हमने ।

*

मुहब्बत नाम से हर दिन जिहालत की

सुकूँ था एक आँचल खो दिया हमने ।

*

सवालों पर सवालों की थीं बौछारें

जवाब आए तो संबल खो…
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Posted on September 22, 2021 at 8:00pm — 10 Comments

गज़ल

 221 1222 221 1222

 

उसकी ये अदा आदत इन्कार पुराना है

बेचैन नहीं करता ये प्यार पुराना है ।

 

ये हुस्न नया पाया उसने है सताने को

ये जिस्म तमन्नाएं इसरार पुराना है ।…

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Posted on June 4, 2020 at 10:30pm — 11 Comments

गज़ल

उठाओ नजर रहगुज़र देख लो ।

यहाँ जिन्दगी का सफ़र देख लो ।

 

नियम कायदे तो बने हैं कई

मगर भंग हैं सब जिधर देख लो ।

 

न भय है न चिंता न है शर्म ही

बना है बशर जानवर देख लो ।

 

कहीं लूट है तो कहीं क़त्ल है

किसी भी नगर की ख़बर देख लो ।

 

गले मिल रहे दोस्त खंजर लिए

बदलते समय का असर देख लो ।

 

करें फ़िक्र उनकी जो हैं नापसंद

सियासत का है ये हुनर देख लो ।

 

बिछा हर तरफ सिर्फ कंक्रीट…

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Posted on October 2, 2019 at 10:00pm — 8 Comments

सावन आया है

फेलुन फेलुन फेलुन फेलुन

 

गुपचुप उसपर मन आया है

लगता है सावन आया है

 

महका है हर कोना-कोना

अम्बर से चन्दन आया है

 

देखो नभ पर छाये बादल

दूल्हा ज्यों बनठन आया है 

 

भीग रही है प्यासी धरती

ज्यों बीता यौवन आया है

 

रह-रह नाच रही हैं बूँदें

राधा का मोहन आया है

 

झूला झूल रही हैं सखियाँ

सज रक्षा बंधन आया है

 

कागज़ की नैया ले आओ

याद मुझे बचपन आया…

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Posted on November 30, 2018 at 9:00am — 9 Comments

Comment Wall (26 comments)

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At 9:23am on April 21, 2020, dandpani nahak said…
आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी सादर प्रणाम !बहुत धन्यवाद ! कुण्डलिया के लिए बिलकुल नया हूँ ये दूसरी ही कोशिश है आशा है आप के सानिध्य से कुछ सीख सकूंगा !
आपने ऐसे संशोधित किया वाह्ह्हह्ह्ह्ह क्या कहूँ बेहतरीन ! आपकी कृपा बनी रहे !
At 10:20pm on April 13, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी बहुत बहुत शुक्रिया हौसला बढ़ाने का
At 3:43pm on September 4, 2016, kanta roy said…
सार्थक रचना का सम्मानित होना अच्छा लगता ही है।
"मन उस आँगन ले जाय" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित होने के लिये बहुत बहुत बधाई आपको आदरणीय अशोक जी।
At 11:52pm on August 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी  गीतिका : मन उस आँगन ले जाय को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 5:31pm on July 23, 2014, seemahari sharma said…
बहुत बहुत आभार आदरणीय अशोक रकताले जी।
At 8:43pm on June 15, 2014, mrs manjari pandey said…
आदरणीय रक्ताले जी बहुत बहुत धन्यवाद। वस्तुतः विषय तो चिंतनीय है ही .
At 5:01pm on July 26, 2013, Dr Ashutosh Vajpeyee said…

ashok ji apne Mujhe aur Om neerav ji ko FB par Block kar diya is baat se ham logon ko ateev kasht hua hai ham dono hi yah jaan lena chahtey hain ki kis apradh ke liye apne hame yah dand diya aur kavita lok group kyon chhoda,,,,uttar ki prateeksha me me vyagra hoon

At 10:35am on June 10, 2013, D P Mathur said…

आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले सर हौंसला बढ़ाने के लिए आपका आभार !

At 6:13pm on May 8, 2013, Dr Dilip Mittal said…

आदरणीय इसी तरह आशीर्वाद बनाए रखें 

हार्दिक आभार 
At 7:40pm on May 4, 2013, Dr Dilip Mittal said…

आपके प्रोत्साहन भरे भावों के लिए शुक्रिया 

 
 
 

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"कुकुभ छंद   * स्नान मकर संक्रांति पर्व का, श्रद्धा से करते सारे । लगा-लगाकर हर डुबकी पर, सूर्य…"
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dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-129 in the group चित्र से काव्य तक
"कुकुभ छन्द एक यही बस मन में थी आस, इस तरह संक्रांति मनाना गंगा मईया में लें डुबकी, और तिल के…"
3 hours ago
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-129 in the group चित्र से काव्य तक
"गीत _____ सूरज होता उत्तरगामी,  परिवर्तन की रुत आई इधर चहकता तिल का लड्डू, उधर रेवड़ी…"
3 hours ago
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-129 in the group चित्र से काव्य तक
"वाह आ बेहद खूबसूरत छंद कहे आपने"
5 hours ago
Aazi Tamaam commented on Aazi Tamaam's blog post ग़ज़ल: आख़िरश में जिसकी खातिर सर गया
"सहृदय शुक्रिया आदरणीय नीलेश जी मैंने ' में ' पर इतना गौर नहीं किया था आपका तहे दिल…"
6 hours ago
Nilesh Shevgaonkar commented on Aazi Tamaam's blog post ग़ज़ल: आख़िरश में जिसकी खातिर सर गया
"आ. आज़ी भाई,आख़िरश का अर्थ ही अंतत: हुआ ..फिर इस में //में// का क्या काम .ग़ज़ल के लिए बधाई "
8 hours ago
Nilesh Shevgaonkar commented on Deepanjali Dubey's blog post ग़ज़ल: लिखें हिंदी कहें हिंदी पढ़ें हिंदी जहाँ हिंदी
"त थ द ध..... न के हिसाब से मानक शब्द हिन्दी है न कि हिंदी .. हिन्दी के गुणगान करती रचना में हिन्दी…"
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Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- कहीं ये उन के मुख़ालिफ़ की कोई चाल न हो
"शुक्रिया आ. ब्रज जी "
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pratibha pande replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"आप शीघ्र स्वस्थ हों ईश्वर से ये ही प्रार्थना है"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-129 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई हीरेन जी, सादर अभिवादन। चित्रानुरूप बेहतरीन छंदों से मंच का शुभारम्भ करने के लिए । हार्दिक…"
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