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Ashok Kumar Raktale
  • Male
  • Ujjain,M.P.
  • India
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Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-116
"बिन प्यार यहां जीना मुश्किल तो कहाँ जायेंतकरार भुला कर अपने दिल को मनाना है.........सत्य कहा है साहब. उम्दा शेर  आदरणीय दयाराम मेठानी साहब सादर, प्रदत्त विषय को कोरोना महारोग से जोड़कर खूबसूरत गज़ल कह डाली है आपने. बहुत-बहुत बधाई स्वीकारें.…"
Jun 14
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-116
"सदा के लिए नश्वर जग में, ना कोई ठौर ठिकाना है। तोड़ सभी से रिश्ते नाते, एक दिवस सबको जाना है॥......यही सच्चाई है.  आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब सादर, प्रदत्त विषय पर आत्म चिंतन को प्रेरित करती सुन्दर प्रस्तुति आपकी. हार्दिक बधाई…"
Jun 14
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-116
"आदरणीया प्रतिभा पांडे जी सादर, स्वार्थ में लिप्त इंसान को मैं से बाहर आने का उत्तम सन्देश देता सुन्दर गीत रचा है आपने. हार्दिक बधाई स्वीकारें. सादर "
Jun 14
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-116
"हम और हमारे दृढ़ होकरचैतन्य भाव फैलाएंगे।दुर्धर गतिरोधक शूलों कोपथ से अविलम्ब हटाएंगे।।....वाह ! वाह ! उत्तम भावना  आदरणीय डॉ. छोटेलाल सिंह जी सादर, प्रदत्त विषय को सार्थक करती बहुत सुन्दर रचना आपकी. हार्दिक बधाई स्वीकारें. सादर "
Jun 14
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-116
"आदरणीय दयाराम मेठानी साहब सादर नमस्कार, प्रस्तुत गीत पर आपकी प्रतिक्रिया से सृजन को मान मिला है. आपका हृदयतल से आभार. सादर "
Jun 14
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-116
"आदरणीय भाई सतविन्द्र कुमार जी सादर मेरी प्रस्तुति पर आपकी उत्तम छान्दसिक प्रतिक्रिया पाकर मन प्रफुल्लित हो गया है. आपका. बहुत-बहुत आभार. सादर "
Jun 14
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-116
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब सादर नमस्कार, प्रदत्त विषय पर मेरे प्रयास को आपकी सराहना से और भी बल मिला है. आपका हृदय से आभार. सादर "
Jun 14
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-116
"आदरणीय डॉ. छोटेलाल सिंह जी सादर, प्रस्तुत रचना पर आपकी सराहना से रचना कर्म सफल हुआ है. हार्दिक आभार आपका. सादर "
Jun 14
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-116
"आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह जी सादर, प्रस्तुत गीत को सार्थकता प्रदान करती सुंदर प्रतिक्रिया के लिए आपका हृदय से आभार. सादर "
Jun 14
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-116
"हर कूचे में खोज करें सब,ढूंढें अपने प्यारे लोग।धौंस जमाएं फिर दूजों पर,कह हम और हमारे लोग।।.......सच है जब अपना घर ठीक होगा तभी आप दूसरे से प्रश्न करने के हकदार होते हैं. प्रदत्त विषय पर सुंदर गीत रचा है आपने. आदरणीय भाई सतविन्द्र कुमार जी.…"
Jun 13
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-116
"आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह जी सादर, प्रदत्त विषय पर सुंदर गीत रचा है आपने. सच है इंसान स्वार्थ के इस कदर वशीभूत हो चुका है की उसे अपना और चंद अपनों के अतिरिक्त सच्चाई नजर ही नहीं आ रही है. बहुत-बहुत बधाई स्वीकारें.सादर "
Jun 13
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-116
"आदरणीय विवेक पांडे द्विज जी सादर, प्रदत्त विषय पर समाज के बिखराव और पुनः अपनत्व पनपाने के लिए कहाँ कार्य करने की आवश्यकता है इसको स्पष्टता से दर्शाती सुंदर तुकांत रचना अपने प्रस्तुत की है. हार्दिक बधाई स्वीकारें. सादर "
Jun 13
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-116
"आदरणीया डॉ. प्राची सिंह जी सादर नमस्कार, प्रदत्त विषय पर रिश्ते-नातों, संस्कारों की समीक्षा करता सुंदर चिंतनपरक गीत रचा है आपने. बहुत-बहुत बधाई स्वीकारें. सादर "
Jun 13
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-116
"आदरणीय गंगा धर शर्मा जी सादर, बिलकुल ही चिंता का विषय है, भौतिकता का इसतरह इंसान पर भारी होना. जो कि मानव को दानव बना दे या गर्त में धकेल दे. प्रदत्त विषय पर सुंदर अतुकांत रचना आपकी. हार्दिक बधाई स्वीकारें. सादर "
Jun 13
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post गज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद' साहब सादर, प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से धन्यवाद. आपके सुझावों का स्वागत है. किन्तु यहाँ 'कई' की जगह मात्र 'नये' रख देने से बात नहीं बनने वाली है. उसके लिए सम्बंधित मिसरे में…"
Jun 13
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-116
"गीत.   कोई भी तो शेष नहीं है, क्या हम और हमारे,   घर आँगन सब दूर भले थे, पर था भाईचारा, खोज न पाता था अनजाना, सबमें लाल हमारा, सारे बच्चे एक सरीखे, लगते थे हर घर में, लड़ते थे कुछ देर एक फिर, होते थे पल भर में ।।   बंद द्वार के पीछे…"
Jun 13

Profile Information

Gender
Male
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Ujjain
Native Place
Ujjain
Profession
service
About me
I am a technical person and always talk in right angle.

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Ashok Kumar Raktale's Blog

गज़ल

 221 1222 221 1222

 

उसकी ये अदा आदत इन्कार पुराना है

बेचैन नहीं करता ये प्यार पुराना है ।

 

ये हुस्न नया पाया उसने है सताने को

ये जिस्म तमन्नाएं इसरार पुराना है ।…

Continue

Posted on June 4, 2020 at 10:30pm — 11 Comments

गज़ल

उठाओ नजर रहगुज़र देख लो ।

यहाँ जिन्दगी का सफ़र देख लो ।

 

नियम कायदे तो बने हैं कई

मगर भंग हैं सब जिधर देख लो ।

 

न भय है न चिंता न है शर्म ही

बना है बशर जानवर देख लो ।

 

कहीं लूट है तो कहीं क़त्ल है

किसी भी नगर की ख़बर देख लो ।

 

गले मिल रहे दोस्त खंजर लिए

बदलते समय का असर देख लो ।

 

करें फ़िक्र उनकी जो हैं नापसंद

सियासत का है ये हुनर देख लो ।

 

बिछा हर तरफ सिर्फ कंक्रीट…

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Posted on October 2, 2019 at 10:00pm — 8 Comments

सावन आया है

फेलुन फेलुन फेलुन फेलुन

 

गुपचुप उसपर मन आया है

लगता है सावन आया है

 

महका है हर कोना-कोना

अम्बर से चन्दन आया है

 

देखो नभ पर छाये बादल

दूल्हा ज्यों बनठन आया है 

 

भीग रही है प्यासी धरती

ज्यों बीता यौवन आया है

 

रह-रह नाच रही हैं बूँदें

राधा का मोहन आया है

 

झूला झूल रही हैं सखियाँ

सज रक्षा बंधन आया है

 

कागज़ की नैया ले आओ

याद मुझे बचपन आया…

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Posted on November 30, 2018 at 9:00am — 9 Comments

रसाला छंद एक प्रयास – (भ न ज भ ज ज ल)

जीवन विषम अबोध , जानकर ना डर मानव |

प्राप्त प्रथम कर ज्ञान, ज्ञान बिन पार न हो भव ||

अंतर तल अँधियार , दूर कर रोशन हो मग |

हो जगमग हर पंथ , पंथ अति रोशन हो जग ||

 

श्रेष्ठ जटिल हर कर्म, है मनुज उन्नति दायक |

भूल बिसर मत कृत्य, सत्य हर भूपति नायक ||

भूमि सतह पर स्वर्ग, कर्म बिन हो कब संभव |

जीवन पथ पर कर्म , धर्म सम भूल न मानव ||

 

मानव परहित कार्य , हैं न बस दाहकता दुख |

कष्ट सहन कर लाख, एक यदि जीवन का सुख…

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Posted on September 22, 2017 at 1:30pm — 2 Comments

Comment Wall (26 comments)

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At 9:23am on April 21, 2020, dandpani nahak said…
आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी सादर प्रणाम !बहुत धन्यवाद ! कुण्डलिया के लिए बिलकुल नया हूँ ये दूसरी ही कोशिश है आशा है आप के सानिध्य से कुछ सीख सकूंगा !
आपने ऐसे संशोधित किया वाह्ह्हह्ह्ह्ह क्या कहूँ बेहतरीन ! आपकी कृपा बनी रहे !
At 10:20pm on April 13, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी बहुत बहुत शुक्रिया हौसला बढ़ाने का
At 3:43pm on September 4, 2016, kanta roy said…
सार्थक रचना का सम्मानित होना अच्छा लगता ही है।
"मन उस आँगन ले जाय" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित होने के लिये बहुत बहुत बधाई आपको आदरणीय अशोक जी।
At 11:52pm on August 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी  गीतिका : मन उस आँगन ले जाय को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 5:31pm on July 23, 2014, seemahari sharma said…
बहुत बहुत आभार आदरणीय अशोक रकताले जी।
At 8:43pm on June 15, 2014, mrs manjari pandey said…
आदरणीय रक्ताले जी बहुत बहुत धन्यवाद। वस्तुतः विषय तो चिंतनीय है ही .
At 5:01pm on July 26, 2013, Dr Ashutosh Vajpeyee said…

ashok ji apne Mujhe aur Om neerav ji ko FB par Block kar diya is baat se ham logon ko ateev kasht hua hai ham dono hi yah jaan lena chahtey hain ki kis apradh ke liye apne hame yah dand diya aur kavita lok group kyon chhoda,,,,uttar ki prateeksha me me vyagra hoon

At 10:35am on June 10, 2013, D P Mathur said…

आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले सर हौंसला बढ़ाने के लिए आपका आभार !

At 6:13pm on May 8, 2013, Dr Dilip Mittal said…

आदरणीय इसी तरह आशीर्वाद बनाए रखें 

हार्दिक आभार 
At 7:40pm on May 4, 2013, Dr Dilip Mittal said…

आपके प्रोत्साहन भरे भावों के लिए शुक्रिया 

 
 
 

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