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Ashok Kumar Raktale
  • Male
  • Ujjain,M.P.
  • India
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Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-84
"आदरणीया कल्पना भट्ट जी सादर, प्रस्तुति को मान देने के लिए आपका बहुत-बहुत आभार. सादर."
Saturday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-84
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, आपने प्रस्तुत छंदों के भावों को महसूस किया मेरा रचनाकर्म सार्थक हुआ है. आदरणीय समर कबीर साहब ने तो दोहों पर अब खूब ही पकड बना ली है. कबीर की उलटबाँसियाँ  बहुत सुंदर विषय पर चर्चा हुई है अर्थात. सादर."
Saturday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-84
"आदरणीया कल्पना भट्ट जी सादर, प्रदत्त विषय पर सुंदर हायकू रचे हैं आपने. हार्दिक बधाई स्वीकारें. सादर."
Saturday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-84
"आदरणीय डॉ. गोपाल कृष्ण भट्ट साहब सादर. प्रदत्त विषय पर सुंदर नवगीत रचा है आपने. हार्दिक बधाई स्वीकारें. सादर."
Saturday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-84
"वाह ! सुबह का नदी तट का एक सुंदर दृश्य आपकी नज़रों से दिखाती सुंदर प्रस्तुति. हार्दिक बधाई. सादर. "
Saturday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-84
"आदरणीय डॉ.गोपाल नारायण श्रीवास्तव साहब सादर, प्रस्तुत कुण्डलिया छंदों को बेहतरीन पाने के लिए आपका दिल से शुक्रिया.पतलून का भाव /इंसानी ताकत के जवाब दे जाने के लिए प्रयुक्त किया है. सादर."
Saturday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-84
"आदरणीय मोहम्मद आरिफ साहब सादर, आपने प्रस्तुति की गहराई को महसूस किया मेरी रचना मान पा गई. हार्दिक आभार आपका.सादर."
Saturday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-84
"प्रस्तुत कुण्डलिया छंदों को सराहने के लिए आपका दिल से आभार आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी.सादर."
Saturday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-84
"आदरणीया आपको प्रस्तुत कुण्डलिया छंद अच्छे लगे मेरी रचना सफल हुई है. हार्दिक आभार आपका. लाया यहाँ नहीं आयेगा. क्योंकि इसमें मैंने  यह कहने का प्रयास किया है कि सूरज की जब बहुत आवश्यकता थी तब वह नहीं आया और वह तब आया जब बारिश ने इंसानी ताकत को…"
Saturday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-84
"आदरणीय शेख शहजाद उस्मानी साहब सादर, प्रस्तुत कुण्डलिया छंद आपको अच्छे लगे मेरी रचना सफल हुई है. हार्दिक आभार आपका. सादर."
Saturday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-84
"आदरणीय समर कबीर साहब सादर नमस्कार, प्रस्तुत कुण्डलिया छंदों पर आपकी सुन्दrप्रतिक्रिया पाकर  रचना सफल हुई है. हार्दिक आभार आपका. सादर."
Saturday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-84
"आदरणीय तस्दीक एहमद खान साहब सादर, प्रस्तुति पर आपकी उत्साहवर्धन करती प्रतिक्रिया के लिए आपका दिल से आभार. सादर"
Saturday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-84
"आदरणीय सतविन्द्र कुमार जी सादर, प्रस्तुति पर आपकी छंदमय प्रतिक्रिया पाकर मेरे रचनाकर्म को मान मिला है. हार्दिक आभार आपका. सादर."
Saturday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-84
"आदरणीय मनन कुमार सिंह जी सादर, प्रदत्त विषय पर यह रचना भी सुंदर हुई है आपकी, हार्दिक बधाई. सादर. "
Saturday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-84
"आदरणीय सतविन्द्र कुमार जी सादर, प्रदत्त विषय पर सुंदर माहिया रचे हैं आपने. किन्तु मुझे लगता है गेयता पर कुछ काम और होना चाहिए तो गाने का आनंद और भी बढ़ जाएगा. सादर. मैं चन्दा तू तारा लेकिन  सूरज है हम दोनों से प्यारा |"
Saturday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-84
"आदरणीय मुनीश 'तन्हा' जी सादर, प्रदत्त विषय पर सुंदर बाल कविता जैसी गजल कही है आपने. हार्दिक बधाई स्वीकारें. सादर."
Saturday

Profile Information

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Male
City State
Ujjain
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Ujjain
Profession
service
About me
I am a technical person and always talk in right angle.

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Ashok Kumar Raktale's Blog

रसाला छंद एक प्रयास – (भ न ज भ ज ज ल)

जीवन विषम अबोध , जानकर ना डर मानव |

प्राप्त प्रथम कर ज्ञान, ज्ञान बिन पार न हो भव ||

अंतर तल अँधियार , दूर कर रोशन हो मग |

हो जगमग हर पंथ , पंथ अति रोशन हो जग ||

 

श्रेष्ठ जटिल हर कर्म, है मनुज उन्नति दायक |

भूल बिसर मत कृत्य, सत्य हर भूपति नायक ||

भूमि सतह पर स्वर्ग, कर्म बिन हो कब संभव |

जीवन पथ पर कर्म , धर्म सम भूल न मानव ||

 

मानव परहित कार्य , हैं न बस दाहकता दुख |

कष्ट सहन कर लाख, एक यदि जीवन का सुख…

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Posted on September 22, 2017 at 1:30pm — 2 Comments

आया मधुमास (अति बरवै पर आधारित गीत)

सजनी ने साजन को, खींच लिया पास |

अमराई फूल गई, आया मधुमास ||

  

धूप खिली निखरी-सी, आयी मुस्कान |

बागों में छेड़ दिया, भँवरों ने तान ||

कलियों के मन जागी, खिलने की आस......... 

खिड़की से झाँक रही, जिद्दी है धूप |

रंग बिना लाल हुआ, गोरी का रूप  ||

सखियों की सुधियों में, कौंधा परिहास........... 

 

डाली है अल्हड पर , फिरभी है भान |

बौराए महुए के , खींच रही कान ||

महक रहे वन-कानन, महका…

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Posted on February 2, 2017 at 11:00pm — 21 Comments

‘वागीश्वरी’ सवैया पर एक प्रयास

१२२ १२२ १२२ १२२ १२२ १२२ १२२ १२

भजो राम को या भजो श्याम को या, भजो नित्य ही मित्र माँ बाप को |

चुनों धर्म का मार्ग सच्चा हमेशा , बढ़ावा न देना कभी पाप को,

सिखाना सभी को सिखाना स्वतः को, भुलाना यहाँ व्यर्थ संताप को,

नई ये हवाएं कहें क्या सुनो तो, सुनो थाप को वक्त की चाप को ||

तजो लाज सारी करो कर्म अच्छे, रहोगे जहां में तभी शान से |

न लेना किसी का न देना किसी का, जिलाता यही मार्ग सम्मान से,

बिना कर्म पाते सभी दुःख देखो,…

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Posted on November 5, 2016 at 10:53pm — 9 Comments

माता मैं ना जाऊँगा

कितने कष्ट सहे हैं तूने , कैसे मुझे पढ़ाया है,

तुझे छोड़कर घर से बाहर, मैंने कदम बढाया है |

अनचाहे ही माता तुझको , मैंने आज रुलाया है

भाग्य विधाता ने भी देखो, कैसा खेल रचाया है ||

 

 

रुक जाता मैं माता क्षणमें, बस कहने की देरी थी,

जाऊँ मैं परदेस मगर माँ, ये जिद भी तो तेरी थी |

देवों को नित पूजा तूने , माला भी नित फेरी थी,

तुझको छोड़ कहीं जाऊँ मैं, ये ईच्छा कब मेरी थी ||

 

 

दमकुंगा बन कुंदन लेकिन, काम न तेरे…

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Posted on September 17, 2016 at 9:30pm — 13 Comments

Comment Wall (24 comments)

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At 3:43pm on September 4, 2016, kanta roy said…
सार्थक रचना का सम्मानित होना अच्छा लगता ही है।
"मन उस आँगन ले जाय" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित होने के लिये बहुत बहुत बधाई आपको आदरणीय अशोक जी।
At 11:52pm on August 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी  गीतिका : मन उस आँगन ले जाय को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 5:31pm on July 23, 2014, seemahari sharma said…
बहुत बहुत आभार आदरणीय अशोक रकताले जी।
At 8:43pm on June 15, 2014, mrs manjari pandey said…
आदरणीय रक्ताले जी बहुत बहुत धन्यवाद। वस्तुतः विषय तो चिंतनीय है ही .
At 5:01pm on July 26, 2013, Dr Ashutosh Vajpeyee said…

ashok ji apne Mujhe aur Om neerav ji ko FB par Block kar diya is baat se ham logon ko ateev kasht hua hai ham dono hi yah jaan lena chahtey hain ki kis apradh ke liye apne hame yah dand diya aur kavita lok group kyon chhoda,,,,uttar ki prateeksha me me vyagra hoon

At 10:35am on June 10, 2013, D P Mathur said…

आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले सर हौंसला बढ़ाने के लिए आपका आभार !

At 6:13pm on May 8, 2013, Dr Dilip Mittal said…

आदरणीय इसी तरह आशीर्वाद बनाए रखें 

हार्दिक आभार 
At 7:40pm on May 4, 2013, Dr Dilip Mittal said…

आपके प्रोत्साहन भरे भावों के लिए शुक्रिया 

At 1:51pm on February 27, 2013, Meena Pathak said…

सादर आभार 

At 11:53pm on February 22, 2013, बृजेश नीरज said…

आपने मुझे मित्रता योग्य समझा इसके लिए आपका आभार!

 
 
 

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