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SALIM RAZA REWA
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SALIM RAZA REWA commented on dandpani nahak's blog post गज़ल
"भाई बधाई स्वविकरण मतला मज़ा नहीं दे ,"
4 hours ago
SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post सुख उसका दुख उसका है - सलीम 'रज़ा' रीवा
"आदरणीय बृजेश कुमार 'ब्रज' जी आपकी मोहब्बतों के लिए बेहद शुक्रिया।"
4 hours ago
SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post सुख उसका दुख उसका है - सलीम 'रज़ा' रीवा
"मोहतरम समर साहब, आपकी मुहब्बत के लिए शुक्रिया, अगर सिर्फ़ उसकी हो तो 22 है मगर ज़रूरत के मुताबिक़, अगर आगे का लफ्ज़ सिंगल है तो और अरकान की ज़रूरत है तो अख़िरी लफ्ज़ के मात्रा को गिरा सकते हैं उसी का फ़ायदा लिया गया है, 2  1 1 22 उस कि हु कू…"
15 hours ago
Samar kabeer commented on SALIM RAZA REWA's blog post सुख उसका दुख उसका है - सलीम 'रज़ा' रीवा
"//उसकी हु/ कूमत है हर सू वो जो चाहे सो होना है' 2 11/ 22 // 'उसकी' शब्द अपने आप में 22 है तो मात्रा पतन करके आप उसे 21 क्यों करना चाहते हैं?"
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Saturday
SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post सुख उसका दुख उसका है - सलीम 'रज़ा' रीवा
"मोहतरम कबीर साहब आपकी मोहब्बत के लिए बहुत बहुत शुक्रिया,, अल्लाह आपको सलामत रखे  उसकी हु/ कूमत है हर सू वो जो चाहे सो होना है' 2 11/ 22  बदलाव कर दिया जाएगा  'काम बुरे और बद आमाली दोज़ख़ में ले जाएँगे, टाइपिंग मे आगे पीछे हो…"
Saturday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on SALIM RAZA REWA's blog post सुख उसका दुख उसका है - सलीम 'रज़ा' रीवा
"बढ़िया ग़ज़ल कही है सलीम साहब..बधाई"
Saturday
Samar kabeer commented on SALIM RAZA REWA's blog post सुख उसका दुख उसका है - सलीम 'रज़ा' रीवा
"जनाब सलीम रज़ा साहिब आदाब,ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है,बधाई स्वीकार करें । "उसकी हुकूमत है हर सू वो जो चाहे सो होना है' इस मिसरे की बह्र चेक करें,'हुकूमत' शब्द 122 है । 'बुरे काम और बद-आमाली दोज़ख में ले जाएँगे' इस मिसरे की…"
Friday
SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post सुख उसका दुख उसका है - सलीम 'रज़ा' रीवा
"आदरणीय प्रदीप देवीशरण भट्ट जी आपकी मोहब्बतों के लिए बेहद शुक्रिया।"
Thursday
SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post सुख उसका दुख उसका है - सलीम 'रज़ा' रीवा
"आदरणीय तेजवीर सिंह जी आपकी मोहब्बतों के लिए बेहद शुक्रिया।"
Thursday
SALIM RAZA REWA posted a blog post

बिन तेरे रात गुज़र जाए बड़ी मुश्किल है, सलीम 'रज़ा' रीवा

2122 1122 1122 22 बिन तेरे रात गुज़र जाए बड़ी मुश्किल है और फिर याद भी न आए बड़ी मुश्किल है खोल कर बैठे हैं छत पर वो हसीं ज़ुल्फ़ों को ऐसे में धूप निकल आए बड़ी मुश्किल है मेरे महबूब का हो ज़िक्र अगर महफ़िल में और फिर आँख न भर आए बड़ी मुश्किल है वो हसीं वक़्त जो मिल करके गुज़ारा था कभी फिर वही लौट के आ जाए बड़ी मुश्किल है वो सदाक़त वो सख़ावत वो मोहब्बत लेकर फिर कोई आप सा आ जाए बड़ी मुश्किल है --- मौलिक अप्रकाशितSee More
Oct 8
SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post जान ले लेगा किसी रोज़ बहाना तेरा - सलीम 'रज़ा' रीवा
"बहुत अच्छा मशविरा है मोहतरम समर साहब बहुत बहुत शुक्रिया, नवाज़िश "
Oct 8
SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post जान ले लेगा किसी रोज़ बहाना तेरा - सलीम 'रज़ा' रीवा
"बहुत अच्छा मशविरा है मोहतरम तस्दीक साहब, शुक्रिया "
Oct 8
प्रदीप देवीशरण भट्ट commented on SALIM RAZA REWA's blog post सुख उसका दुख उसका है - सलीम 'रज़ा' रीवा
"बेहतरीन रज़ा जी"
Oct 7
TEJ VEER SINGH commented on SALIM RAZA REWA's blog post सुख उसका दुख उसका है - सलीम 'रज़ा' रीवा
"हार्दिक बधाई आदरणीय सलीम "रज़ा" रीवा साहब जी। बेहतरीन गज़ल। इक रस्ता जो बंद किया तो दस रस्ते वो खोलेगा उसपे भरोसा रख तू प्यारे जो लिक्खा वो होना है //गॉड ख़ुदा भगवान कहो या ईश्वर अल्लाह उसे कहोवो  ख़ालिक है वो मालिक है उसका…"
Oct 7
Tasdiq Ahmed Khan commented on SALIM RAZA REWA's blog post जान ले लेगा किसी रोज़ बहाना तेरा - सलीम 'रज़ा' रीवा
"जनाब सलीम रज़ा साहिब आ दाब, अच्छी गज़ल हुई है मुबारकबाद कुबूल फरमाएं l शेर 3 के सानी को यूँ भी कर सकते हैं  "हर घड़ी मेरे ख़्यालों में यूँ आना तेरा" "
Oct 7

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सुख उसका दुख उसका है - सलीम 'रज़ा' रीवा

22 22 22 22 22 22 22 2

सुख उसका दुख उसका है तो फिर काहे का रोना है

दौलत उसकी शोहरत उसकी क्या पाना क्या खोना है //



चाँद-सितारे उससे रोशन फूल में उससे खुशबू है 

ज़र्रे-ज़र्रे में वो शामिल वो चांदी वो सोना है //



खुशिओं के वो मोती भर दे या ग़म की बरसात करे

उसकी हुकूमत है हर सू वो जो चाहे सो होना है //



सारी दुनिया का वो मालिक हर शय उसके क़ब्ज़े में 

उसके आगे सब कुछ फीका क्या जादू क्या टोना है…

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Posted on October 6, 2019 at 8:30pm — 10 Comments

जान ले लेगा किसी रोज़ बहाना तेरा - सलीम 'रज़ा' रीवा

2122 1122 1122 22 

मेरी आँखों में हुआ जब से ठिकाना तेरा 

लोग कहते हैं सरे आम दिवाना तेरा



रोज़ मिलने की तसल्ली न दिया कर मुझको 

जान ले लेगा किसी रोज़ बहाना तेरा



छीन लेगा ये मेरा होश यकीनन इक दिन …

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Posted on October 1, 2019 at 8:00am — 10 Comments

उदास बैठे हैं - सलीम रज़ा रीवा

1212 1122 1212 22

जो मेरी छत पे कबूतर उदास बैठे हैं

वो तेरी याद में दिलबर उदास बैठे हैं



तुम्हारी याद के लश्कर उदास बैठे हैं

हसीन ख़्वाब के मंज़र उदास बैठे हैं



तमाम गालियाँ हैं ख़ामोश तेरे जाने से

तमाम राह के पत्थर उदास बैठे हैं



बिना पिए तो सुना है उदास रिंदों को

मियाँ जी आप तो पी कर उदास बैठे हैं 



ज़रा सी बात पे वो छोड़ कर गया मुझको…

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Posted on September 20, 2019 at 11:00pm — 4 Comments

ज़मी ये हमारी वतन ये हमारा  - सलीम 'रज़ा' रीवा

ज़मी ये हमारी वतन ये हमारा 

उजड़ने न देंगे चमन ये हमारा 

वतन के लिए जो मेरी जान जाए

ख़ुदारा यहीं  फिर जनम लें दुबारा 

 …

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Posted on August 15, 2019 at 11:30am — 3 Comments

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